Hindi Ke Paryaya Purushottam Das Tandon
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Author:
Smt. Rani Tandon, Sant Prasad TandonPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
600
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‘‘जो भी व्यक्ति टंडनजी के संपर्क में आए, सबने उनसे कुछ-न-कुछ सीखा। यह महापुरुषों की निशानी है, जो उनसे मिले, लेकर गए। हमने भी उनसे लिया, जिससे दिल और दिमाग की दौलत बढ़ी। वे ऐसे व्यक्ति हैं, जो अपने सिद्धांतों पर अटल स्तंभ की तरह डटे रहते हैं।’’ —जवाहरलाल नेहरू ‘‘उनका जीवन भारतीय संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है। वह अनेक प्रकार से राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक कामों में हमारा नेतृत्व करते आए है।’’ —गोविंदवल्लभ पंत ‘‘टंडनजी का व्यक्तित्व प्राचीन भारतीय संस्कृति की उस ओजस्विता का प्रतीक है, जिसने हर नए को अपनी अजस्र ज्ञान-धारा में समा लेने और उनके परस्पर समन्वय का प्रयास किया है।’’ —अनंतशयनम अय्यंगार ‘‘यह पुस्तक केवल एक महापुरुष की उल्लेखनीय जीवनी ही नहीं है, अपितु राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं भाषायी कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए ‘कर्मगीता’ भी है।’’ —गोपाल प्रसाद व्यास
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‘‘जो भी व्यक्ति टंडनजी के संपर्क में आए, सबने उनसे कुछ-न-कुछ सीखा। यह महापुरुषों की निशानी है, जो उनसे मिले, लेकर गए। हमने भी उनसे लिया, जिससे दिल और दिमाग की दौलत बढ़ी। वे ऐसे व्यक्ति हैं, जो अपने सिद्धांतों पर अटल स्तंभ की तरह डटे रहते हैं।’’
—जवाहरलाल नेहरू
‘‘उनका जीवन भारतीय संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है। वह अनेक प्रकार से राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक कामों में हमारा नेतृत्व करते आए है।’’
—गोविंदवल्लभ पंत
‘‘टंडनजी का व्यक्तित्व प्राचीन भारतीय संस्कृति की उस ओजस्विता का प्रतीक है, जिसने हर नए को अपनी अजस्र ज्ञान-धारा में समा लेने और उनके परस्पर समन्वय का प्रयास किया है।’’
—अनंतशयनम अय्यंगार
‘‘यह पुस्तक केवल एक महापुरुष की उल्लेखनीय जीवनी ही नहीं है, अपितु राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं भाषायी कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए ‘कर्मगीता’ भी है।’’
—गोपाल प्रसाद व्यास
Book Details
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ISBN9789390923632
-
Pages280
-
Avg Reading Time9 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Anne Frank
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- Description: Discovered in the attic in which she spent the last years of her life, Anne Frank's remarkable diary has since become a world classic—a powerful reminder of the horrors of war and an eloquent testament to the human spirit. The Diary is a lot of things all at once. It is an amusing, enlightening, and often moving account of the process of adolescence, as Anne describes her thoughts and feelings about herself and the people around her, the world at large, and life in general. It is an accurate record of the way a young girl grows up and matures, in the very special circumstances in which Anne found herself throughout the two years during which she was in hiding. And it is also a vividly terrifying description of what it was like to be a Jew — and in hiding— at a time when the Nazis sought to kill all the Jews of Europe.
Batukeshwar Dutt Aur Krantikari Andolan
- Author Name:
Bhairab Lal Das
- Book Type:

- Description: शहीद-ए-आजम भगत सिंह के अनन्य सहयोगी, विप्लवी बटुकेश्वर दत्त का जन्म पश्चिम बंगाल के ओआड़ी नामक गाँव में हुआ था। सन् 1928 में गठित ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी’ के वे सक्रिय सदस्य थे। 8 अप्रैल, 1929 को दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में बम विस्फोट के बाद भगत सिंह एवं बटुकेश्वर दत्त जन-जन के नायक बन गए। यह बम विस्फोट औपनिवेशिक शासन व्यवस्था की नींव पर चोट करने वाला साबित हुआ। कारावास में की गई लंबी भूख-हड़ताल भारत के इतिहास में नजीर बनकर सामने आई। अंडमान जेल में ‘कालापानी’ की सजा के बाद भी बटुकेश्वर दत्त ने किसान आंदोलन, 1942 क्रांति और उसके बाद के स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न आंदोलनों में भाग लिया और जेल की यातनाएँ सहीं। 3 अक्तूबर, 1963 से 6 मई, 1964 तक वे बिहार विधान परिषद के सदस्य भी रहे। उनकी अंतिम इच्छा यही थी कि मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार वहीं हो, जहाँ ‘सरदार’ (भगत सिंह) की समाधि है। 20 जुलाई, 1965 को दिल्ली में उनकी मृत्यु होने के बाद फिरोजपुर के हुसैनीवाला में सरदार भगत सिंह की समाधि के निकट ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। जीवनभर भगत सिंह के साथ रहने वाले बटुकेश्वर दत्त मृत्यु के बाद भी भगत सिंह के साथ ही रहे।
Nainitala Nainitala
- Author Name:
Pushpesh Pant
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- Description: आदमी ही शहर में नहीं बसता, शहर भी आदमियों में बसते हैं। दरअसल, हरेक आदमी की अपनी ज़मीन और जड़ें होती हैं, जिनसे वह ताउम्र आज़ाद नहीं होना चाहता; भले ही ज़िन्दगी की भागमभाग—उसकी मर्ज़ी से या उसके चाहे बिना—उसे उनसे कितना भी दूर कर दे। बेदख़ली के बावजूद वह अपनी ज़मीन को दिल में आबाद कर लेता है और इस तरह अपनी जड़ों को ज़िन्दा रखता है। ‘नैनीताला नैनीताला’ किताब इस सचाई का शिद्दत से अहसास कराती है, जिसमें पुष्पेश पन्त ने नैनीताल का ऐसा रससिक्त बखान किया है जो इस पहाड़ी शहर से उनके अपने रिश्ते का बयान तो है ही; अनगिनत लोगों, इमारतों, दुकानों, सड़कों, ढलानों, चढ़ाइयों, गाड़ियों, सूर्योदय, सूर्यास्त समेत तमाम तरह के नज़ारों के हवाले से उतना ही पुख़्ता शहरनामा भी है। उनका निजी भी इस किताब में जाने-देखे-सुने लोगों के क़िस्सों के साथ मिलकर एकमेक हो गया है। गागर में सागर की मानिन्द नैनीताल का भूगोल, इतिहास, संस्कृति, समाज, आर्थिकी सब कुछ अपने भीतर समेटे हुए; जितना संस्मरण उतनी ही शहरगाथा! ग़ौर से देखें तो इसमें एक झलक उस हिन्दुस्तान की भी दिख जाएगी जिसकी बुनियाद बेशक सुदूर अतीत में पड़ गई थी लेकिन जो आज़ादी के आसपास शक्ल ले रहा था और उसके बाद के एक-दो दशक में मुकम्मल हुआ। यादों का सफ़रनामा!
Anasakt Aastik : Jainendra Kumar Ki Jeewani
- Author Name:
Jyotish Joshi
- Book Type:

- Description: जैनेन्द्र कुमार हिन्दी के केवल मूर्धन्य कथाकार ही नहीं है अपितु प्रखर राष्ट्रवादी चिन्तक-विचारक भी है। वे हिन्दी भाषा में सोचने-विचारने वाले अन्यतम व्यावहारिक भारतीय दार्शनिक भी हैं तो भारत सहित वैश्विक राजनीति पर गहरी दृष्टि रखनेवाले प्रबुद्ध राजनैतिक विशेषज्ञ भी। वे स्वाधीनता आन्दोलन के तपोनिष्ठ सत्याग्रही भी रहे जिन्होंने स्वाधीनता मिलने के बाद भी अपने समग्र जीवन और लेखन क्रो सत्याग्रह बनाया। उन्होंने जो लिखा और जिया वह हमेशा एक नई राह की खोज का करण बना। कहानी और उपन्यास को नई भाषा, शिल्प तथा अधुनातन प्रविधियों में ढालकर जैनेन्द्र ने उन विषयों को प्रमुखता दी, जिन पर विचार करने का साहस पहले न किया जा सका। इसमें प्रमुखता से वह स्त्री उभरी, जिसे सदियों से उत्पीड़ित किया जाता रहा है। अपने दर्शन में आत्म को प्रतिष्ठित करनेवाले, विचारों में भारतीय-राष्ट्र-राज्य को अधिकाधिक सर्वोदय में देखनेवाले तथा जीवन में एक गृहस्थ संन्यासी का आदर्श प्रस्तुत करनेवाले जैनेन्द्र कुमार का महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू, राजेन्द्र प्रसाद, विनोबा भावे, राधाकृष्णन, जयप्रकाश नारायण, इन्दिरा गाँधी आदि राष्ट्रीय नेताओं से सीधा संवाद था। पर यह संवाद राष्ट्रीय हितों के लिए था, निजी स्वार्थों के लिए नहीं। ऐसे जैनेन्द्र कुमार के विराट व्यक्तित्व को उनकी जीवनी ‘अनासक्त आस्तिक' में देखने और उनके क्रमिक विकास को परखने का एक बड़ा प्रयत्न है, जो निश्चय ही उन्हें नए सिरे से समझने में सहायक होगा। कहना न होगा कि जैनेन्द्र साहित्य के मर्मज्ञ आलोचक ज्योतिष जोशी द्वारा मनोयोग से लिखी गई यह जीवनी पठनीय तो है ही, संग्रहणीय भी है।
The Life and Times of Leonardo Da Vinci
- Author Name:
Vinod Kumar Mishra
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- Description: Leonardo da Vinci was a prominent artist and a scholar of the Italian Renaissance, famous for his immortal works: ‘The Last Supper’ and ‘Mona Lisa’. Leonardo was a genius. He was diversely talented as a painter, sculptor, architect, scientist, musician, mathematician, engineer, inventor, anatomist, geologist, astronomer, cartographer, botanist, historian and writer. Leonardo was very talented. He attained such proficiency as an artist that his teacher left painting after seeing one of his finished works. This book illuminates the artistry of Leonardo da Vinci, who remains an inspiration to aspiring artists.
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