BPSC TRE 3.0 Bihar Primary School Teacher Recruitment Class 1 to 5 General Studies - 2024 (English)
(0)
₹
595
₹ 476 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
BPSC: Bihar Teacher Recruitment General Studies (Teacher Exam Cracker Series) Class 1-5 is all in one exam book which would help the aspirants to understand the basics and also help them to revise and evaluate their learning. The book contains complete coverage of syllabus and is divided into 8 topics: Elementary Mathematics, Mental Ability Test, General Awareness, General Science, Social Science, Indian National Movement, Geography and Environment.
Read moreAbout the Book
BPSC: Bihar Teacher Recruitment General Studies (Teacher Exam Cracker Series) Class 1-5 is all in one exam book which would help the aspirants to understand the basics and also help them to revise and evaluate their learning.
The book contains complete coverage of syllabus and is divided into 8 topics: Elementary Mathematics, Mental Ability Test, General Awareness, General Science, Social Science, Indian National Movement, Geography and Environment.
Book Details
-
ISBN9789354888144
-
Pages512
-
Avg Reading Time17 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Choose Your Beliefs : Mastering Beliefs Blueprint for Infinite Success | Sanjay Kumar Agarwal
- Author Name:
Sanjay Kumar Agarwal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Gitashastram
- Author Name:
C. Radhakrishan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
YATAYAT KE SADHAN
- Author Name:
Deepika
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Modi Hai To Mumkin Hai
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Itihas-Purush Subhash
- Author Name:
Shrikrishna 'Saral'
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Lekhak Ka Cinema
- Author Name:
Kunwar Narain
- Book Type:

-
Description:
कुँवर नारायण अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित कवि हैं। वह विश्व सिनेमा के गहरे जानकारों में हैं। उन्होंने आधी सदी तक सिनेमा पर गम्भीर, विवेचनापूर्ण लेखन किया है, व्याख्यान दिए हैं। ‘लेखक का सिनेमा’ उन्हीं में से कुछ प्रमुख लेखों, टिप्पणियों, व्याख्यानों और संस्मरणों से बनी पुस्तक है। इसमें अनेक अन्तरराष्ट्रीय फ़िल्मोत्सवों की विशेष रपटें हैं, जो लेखकीय दृष्टिकोण से लिखी गई हैं और बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। इस किताब में वे कला, जीवन, समाज और सिनेमा, इन सबके बीच के सम्बन्धों को परिभाषित, विश्लेषित करते हुए चलते हैं। इसमें सिनेमा के व्याकरण की आत्मीय मीमांसा है। यहाँ देख डालने, सोच डालने की जल्दीबाज़ी नहीं है, बल्कि विचार एक लम्बी, निरन्तरता से भरी प्रक्रिया है, जो उतनी ही गझिन है, जितनी फ़िल्म बनाने की प्रक्रिया।
प्रसिद्ध फ़िल्मों व निर्देशकों के अलावा उन निर्देशकों व फ़िल्मों के बारे में पढ़ना एक धनात्मक अनुभव होगा, जिनका नाम इक्कीसवीं सदी के इस दूसरे दशक तक कम आ पाया। हिन्दी किताबों से जुड़ी नई पीढ़ी, जो विश्व सिनेमा में दिलचस्पी रखती है, के लिए इस किताब का दस्तावेज़ी महत्त्व भी है।
अर्जेंटीना के लेखक बोर्हेस की प्रसिद्ध पंक्तियाँ हैं—‘‘मैं वे सारे लेखक हूँ जिन्हें मैंने पढ़ा है, वे सारे लोग हूँ जिनसे मैं मिला हूँ, वे सारी स्त्रियाँ हूँ, जिनसे मैंने प्यार किया है, वे सारे शहर हूँ जहाँ मैं रहा हूँ।’’ कुँवर नारायण के सन्दर्भ में इसमें जोड़ा जा सकता है कि मैं वे सारी फ़िल्में हूँ जिन्हें मैंने देखा है।
Stree : Samaj Aur Dharm
- Author Name:
Taslima Nasrin
- Book Type:

-
Description:
तसलीमा नसरीन कहती हैं कि इस पृथ्वी पर लड़कियों के ख़िलाफ़ एक यौन-युद्ध चल रहा है; उन स्त्रियों के ख़िलाफ़ जिन्हें इस मानव-प्रजाति को जीवित रखने का श्रेय जाता है; उन महिलाओं के ख़िलाफ़ जिन्होंने सिद्ध कर दिया है कि वे हर उस काम को और ज़्यादा अच्छे ढंग से कर सकती है, जिसे पुरुष अपना काम कहता आया है।
‘स्त्री : समाज और धर्म’ में तसलीमा नसरीन के वे आलेख संकलित हैं जो उन्होंने समय-समय पर उन घटनाओं, ख़बरों और अपने अनुभवों की रोशनी में लिखे हैं जिनके केन्द्र में स्त्री और उसके दुख हैं। मुख्यतः बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान की पृष्ठभूमि में की गई ये टिप्पणियाँ बताती हैं कि सभ्यता चाहे जितना आगे बढ़ी हो, स्त्री को लेकर पुरुष की सोच नाममात्र को ही बदली है। धर्म और समाज के अनेक नियमों, परम्पराओं, आग्रहों और मान्यताओं में उनकी यह सोच झलकती है। पुरुष हिन्दू हो या मुस्लिम या फिर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प, स्त्री सभी के लिए वस्तु है।
तसलीमा नसरीन हमेशा ही असाधारण साहस और साफ़गोई के साथ तीखी भाषा में पुरुष सत्ता को ललकारती रही हैं; इसके लिए वे एकदम सहज और सजीव गद्य की रचना करती हैं, जो हर बार उतना ही प्रभावशाली सिद्ध होता है।
VISWANATHNAN ANAND
- Author Name:
Shailesh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kya Likhoon? Kya Likhoon?
- Author Name:
Dr. Babita "Kiran"
- Book Type:

- Description: "‘क्या लिखूँ, क्या लिखूँ’ मेरी द्वितीय पुस्तक है। इस पुस्तक को लिखने की यात्रा बहुत रोचक रही है। सर्वप्रथम तो लिखने से पहले मन में कई प्रश्न उठ रहे थे, जैसे कि किस विधा में लिखूँ, किस विषय पर लिखूँ? पर्यावरण पर लिखूँ, भ्रूण हत्या पर लिखूँ या जल की समस्या पर लिखूँ। दिल कह रहा था, सब विषयों पर लिख दो, परंतु दिमाग सहमत नहीं था। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ? मन मस्तिष्क के इस द्वंद्व में समय गुजरता जा रहा था। इसी बीच मैं बिटिया खुशी, जो मेरी प्रथम श्रोता है, से भी निरंतर पूछ रही थी कि क्या लिखूँ? आखिरकार एक दिन वह कह उठी, अरे मम्मी, क्या लिखूँ पर ही लिखो आप। तत्पश्चात् एक निरंतर कविता का जन्म हुआ, जो क्या लिखूँ के रूप में आपके समक्ष है। एक लेखक की जिम्मेदारी को निभाते हुए मैंने प्रयास किया है कि अपनी पुस्तक ‘क्या लिखूँ’ के माध्यम से मैं समाज में व्याप्त समस्याओं, मनुष्य के कर्तव्य, इतिहास, भूगोल, संस्कृति, आतंक सभी विषयों पर आप सभी का ध्यान आकर्षित कर सकूँ। कुछ पंक्तियाँ देखिए— शहर शहर कूड़े का पहाड़ लिखूँ संक्रमण, बदबू की दहाड लिखूँ फेफड़ों को मिलती हवा दूषित लिखूँ या पशु-पक्षी भी कुपोषित लिखूँ पर्यावरण की व्यथा लिखूँ या गाडिय़ाँ दौड़ाने की प्रथा लिखूँ सोचती हूँ मैं क्या लिखूँ? इसमें कहाँ तक सफल हो पाई हूँ, यह पाठक वर्ग ही बता सकता है। आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है मुझे कि आपको मेरी यह पुस्तक पसंद आएगी।"
Nalin Rachanawali : Vols. 1-5
- Author Name:
Vinod Tiwari
- Book Type:

-
Description:
1. आलोचक, लेखक, अध्यापक, सम्पादक नलिन विलोचन शर्मा का हिन्दी साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान है। आलोचना, कविता, कहानी, निबन्ध, अनुवाद, पुस्तक समीक्षा आदि सभी विधाओं में उनकी लेखनी अबाध गति से चली है। वे आधुनिकता के प्रबल प्रवक्ता थे तो परम्परा के भी उतने ही गहरे जानकार थे। प्रगतिवाद बनाम आधुनिकता के विवाद से अलग वे आलोचना के एक तीसरे धरातल की खोज में रत रहे। शिविरबद्धता के विरुद्ध उनका तीक्ष्ण आलोचनात्मक संघर्ष रहा।
उन्होंने संस्कृत की शास्त्रीय आलोचना और पश्चिम की आलोचना-पद्धति का गहरा अध्ययन किया लेकिन उनमें से किसी का अनुसरण करने के बजाय अपने लिए नई आलोचना-पद्धति की तलाश की। उन्हें हिन्दी का पहला आधुनिक आलोचक माना जाता है। परम्परा और आधुनिकता-सम्बन्धी उनकी विद्वत्ता, चिन्तन-मनन और दृष्टिकोण के चलते उचित ही उन्हें ‘हिन्दी का इलियट’ कहा गया है।
उन्होंने बहुत ज्यादा नहीं लिखा। लेकिन जो कुछ लिखा उसका महत्व असन्दिग्ध है। उनके आलोचनात्मक लेखों, टिप्पणियों, डायरी-अंशों, नोटबुक की टीपों, आदि से पता चलता है कि हर तरह की ज्ञान-सरणी से उनका बहुत ही अच्छा संवाद था। यह रचनावली एक प्रयास है नलिन जी के चिन्तन और उनकी साहित्य-दृष्टि के साक्ष्य, उनके लेखन को एक स्थान पर उपलब्ध कराने का।
रचनावली के इस पहले खंड में उनकी सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मानी जानेवाली कृति साहित्य का इतिहास-दर्शन को प्रस्तुत किया गया है। नलिन जी मानते थे कि साहित्येतिहास भी बाकी इतिहासों की तरह, कुछ विशिष्ट लेखकों और उनकी कृतियों का इतिहास नहीं होता, बल्कि युग-विशेष के लेखक-समूह की कृति-समष्टि का इतिहास होता है। उन्होंने गौण लेखकों को भी इतिहास में समुचित स्थान देने की बात की और कहा कि इतिहास का विषय यदि विस्तार है तो महान लेखकों से ज्यादा अहमियत उन गौणों को दी जानी चाहिए जो उस विस्तार को सम्भव करते हैं।
आलोचक, लेखक, अध्यापक, सम्पादक नलिन विलोचन शर्मा का हिन्दी साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान है। आलोचना, कविता, कहानी, निबन्ध, अनुवाद, पुस्तक समीक्षा आदि सभी विधाओं में उनकी लेखनी अबाध गति से चली है। वे आधुनिकता के प्रबल प्रवक्ता थे तो परम्परा के भी उतने ही गहरे जानकार थे। प्रगतिवाद बनाम आधुनिकता के विवाद से अलग वे आलोचना के एक तीसरे धरातल की खोज में रत रहे। शिविरबद्धता के विरुद्ध उनका तीक्ष्ण आलोचनात्मक संघर्ष रहा।
जिन कार्यों को आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और उनकी धारा के आलोचकों ने अनावश्यक जानकर छोड़ दिया था, उसकी क्षतिपूर्ति नलिन जी ने अपनी आलोचना में की। यही एक आलोचक के रूप में उनकी उपलब्धि है। मसलन गौण कवियों के महत्त्व का रेखांकन, तात्त्विक शोध, उपन्यास की सैद्धान्तिक और व्यावहारिक आलोचना का विकास, प्रेमचन्द का कलात्मक दृष्टि से और परम्परा का आधुनिकता की दृष्टि से मूल्यांकन और तत्पश्चात् एक निष्कर्ष देना।
‘नकेन’ के कवि केसरी कुमार के शब्दों में, ‘नलिन जी वर्तमान पीढ़ी के सर्वतोमुखी लेखक थे। विज्ञान और दर्शन के मिलन-बिन्दु के विरल कवि...प्रत्येक रचना के भीतर से उसके मूल्यांकन का निष्कर्ष निकालने वाले और इस प्रकार अपनी उद्भावनाओं से रचनात्मक सम्भावनाओं के विकसित स्तर को उपजीव्य बनाते हुए आलोचना को सर्जनात्मक स्थापत्य देने वाले समीक्षा-शिल्पी।’
रचनावली के इस दूसरे खंड में उनके आलोचनात्मक लेख संकलित हैं। आलोचना के विषय में नलिन जी का मानना था कि यह उतनी ही सृजनात्मक है जितना किसी रचनात्मक कृति का निर्माण : ‘आलोचना और साहित्य-सृजन में अन्तर शायद इसलिए मान लिया गया है कि आलोचना मात्र कला ही नहीं, वह विज्ञान भी है। साहित्यालोचन जहाँ तक विज्ञान है, वह कृति-विशेष का परीक्षण करता है। उसका गुण-दोष निरूपण करता है और आवश्यकतानुसार नवीन सिद्धान्तों की उद्भावना भी करता है।’
आलोचक, लेखक, अध्यापक, सम्पादक नलिन विलोचन शर्मा का हिन्दी साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान है। आलोचना, कविता, कहानी, निबन्ध, अनुवाद, पुस्तक समीक्षा आदि सभी विधाओं में उनकी लेखनी अबाध गति से चली है। वे आधुनिकता के प्रबल प्रवक्ता थे तो परम्परा के भी उतने ही गहरे जानकार थे। प्रगतिवाद बनाम आधुनिकता के विवाद से अलग वे आलोचना के एक तीसरे धरातल की खोज में रत रहे। शिविरबद्धता के विरुद्ध उनका तीक्ष्ण आलोचनात्मक संघर्ष रहा।
नलिन जी ने समीक्षा को अत्यन्त उत्तरदायित्वपूर्ण काम मानते हुए न सिर्फ प्रेमचन्द, शुक्ल, निराला आदि रचनाकारों पर बहुत प्रभावशाली आलोचना लिखी बल्कि अपने समकालीन रचनाकारों की रचनाओं पर भी लिखा और उनके माध्यम से आलोचना के कुछ प्रतिमान गढ़ने का प्रयास किया। आधुनिक उपन्यास के विषय में उनका कहना था कि इसे सुबन्धु, दंडी, बाणभट्ट की लुप्त परम्परा के तहत पुनर्जीवित नहीं किया गया बल्कि यह साहित्य का वह पौधा था जिसे अगर सीधे पश्चिम से नहीं लिया गया तो भी उसका बांग्ला कलम तो जरूर लिया गया था। वे कहते थे, समृद्धि और ऐश्वर्य की सभ्यता महाकाव्य में अभिव्यक्ति पाती है तो जटिलता, वैषम्य और संघर्ष की सभ्यता उपन्यास में।
इस तीसरे खंड में उनके द्वारा लिखे गए सम्पादकीय, फुटकर आलेख, नोट्स, समीक्षाएँ और कुछ पुस्तकों की उनके द्वारा लिखी गई भूमिकाएँ संकलित हैं। ये सम्पादकीय 'दृष्टिकोण' और 'साहित्य' त्रैमासिक के 1950-60 की अवधि में लिखे गए। इन सम्पादकीयों में उन्होंने हिन्दी के शोध, भाषा, लिपि, हिन्दी-टंकण, आवरण-सज्जा और लेखकों के सरोकारों पर लिखा है। वे हिन्दी को सिर्फ साहित्य की नहीं, बल्कि तमाम ज्ञान-विज्ञान की भाषा बनाना चाहते थे।
इस खंड में संकलित सामग्री का महत्त्व यह है कि इनके मार्फत हम नलिन जी के अध्यवसाय के साथ-साथ उनके रूप में एक आलोचक और शिक्षक की तैयारी से रूबरू होते हैं।
4 आलोचक, लेखक, अध्यापक, सम्पादक नलिन विलोचन शर्मा का हिन्दी साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान है। आलोचना, कविता, कहानी, निबन्ध, अनुवाद, पुस्तक समीक्षा आदि सभी विधाओं में उनकी लेखनी अबाध गति से चली है। वे आधुनिकता के प्रबल प्रवक्ता थे तो परम्परा के भी उतने ही गहरे जानकार थे। प्रगतिवाद बनाम आधुनिकता के विवाद से अलग वे आलोचना के एक तीसरे धरातल की खोज में रत रहे। शिविरबद्धता के विरुद्ध उनका तीक्ष्ण आलोचनात्मक संघर्ष रहा।
नलिन जी कहानी को ‘शोधना’ समझते थे। उनके मुताबिक ‘कहानीकार बिन्दु में केन्द्रित विराट और पूर्ण सत्य का उद्घाटन करता है। कहानीकारों के दो काम होते हैं—बिन्दु फैले नहीं और बिन्दु पर से निगाह विचले नहीं। पिंड में ब्रह्मांड का सत्य देख लेना कृच्छ्र-साधना है, यह संत ही नहीं कहानीकार भी जानते हैं।’ यही उनके कहानीकार की आधार-भूमि थी। जितने समय में कुछ लोगों ने उपन्यास पूरे कर लिए उतना समय उन्होंने एक-एक कहानी को दिया। उनका कहानी-लेखन ढाई दशकों में फैला है। इस दौरान कई कहानी आन्दोलन चले लेकिन उन्होंने खुद को उनसे अलग रखा। उनकी कहानियों में सामाजिक समस्याएँ, मनुष्य की मनोग्रन्थियाँ, यौन-मनोविज्ञान और प्रेम जैसे विषय प्रमुख हैं।
कविता में प्रयोगवाद के बरक्स ‘नकेनवाद’ जैसी अवधारणा का सूत्रीकरण नलिन जी ने ही अपने सहयोगी कवियों केसरीकुमार और नरेश के साथ मिलकर किया जिसका उद्देश्य, उनके अनुसार, प्रयोगवाद की आत्मा की रक्षा था। वे अनुवाद में भी दखल रखते थे। मुख्यतः अंग्रेजी से हिन्दी में किए गए उनके अनुवादों को मानक के तौर पर देखा गया। उनका आत्मपरक लेखन उनके व्यक्तिगत और रचनात्मक जीवन का महत्त्वपूर्ण संकेतक है।
रचनावली के इस चौथे खंड में नलिन जी की सभी उपलब्ध कहानियाँ, कविताएँ, संस्मरण, निबन्ध, डायरी, अनुवाद और साक्षात्कार सम्मिलित किए गए हैं।
5. आलोचक, लेखक, अध्यापक, सम्पादक नलिन विलोचन शर्मा का हिन्दी साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान है। आलोचना, कविता, कहानी, निबन्ध, अनुवाद, पुस्तक समीक्षा आदि सभी विधाओं में उनकी लेखनी अबाध गति से चली है। वे आधुनिकता के प्रबल प्रवक्ता थे तो परम्परा के भी उतने ही गहरे जानकार थे। प्रगतिवाद बनाम आधुनिकता के विवाद से अलग वे आलोचना के एक तीसरे धरातल की खोज में रत रहे। शिविरबद्धता के विरुद्ध उनका तीक्ष्ण आलोचनात्मक संघर्ष रहा।
उन्होंने भाषा और साहित्य को अलग-अलग करके नहीं देखा। इस दृष्टि से हम नलिन जी के अंग्रेजी में लिखे साहित्य को देखते हैं तो पाते हैं कि उनमें औपनिवेशिक दौर की भाषाई हीनता या श्रेष्ठता की ग्रन्थि नहीं है।
रचनावली के इस पाँचवें और अन्तिम खंड में नलिन जी की अंग्रेजी में लिखी रचनाएँ रखी गई हैं जिनमें तीन कहानियाँ, दो साहित्य और संस्कृति पर लिखे गए वैचारिक निबन्ध और किसी रचनाकार या शख्सियत पर लिखी एकमात्र प्रबन्ध पुस्तक जगजीवन राम शामिल हैं। यह बाबू जगजीवन राम की जीवनी है जो जगजीवन राम अभिनन्दन समिति, पटना के लिए 1954 में लिखी गई। यह जीवनी और इस खंड की अन्य रचनाओं को देखने-पढ़ने के बाद ‘क्लासिक’ अंग्रेजी का जो एक सहज प्रवाह मिलता है, कहीं-कहीं ‘सबलाइम्स’ की जो बानगी मिलती है, उससे नलिन जी की अंग्रेजी का पता चलता है।
नलिन जी द्वारा लिखित इस जीवनी पर गांधीवाद का प्रभाव है। इसलिए बाबू जगजीवन राम को एक 'हरिजन' नेता के रूप में ही इस जीवनी में चित्रित किया गया है। आज कुछ लोग इस किताब को बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के विरोध में भी रेखांकित कर सकते हैं लेकिन देशकाल में जाकर देखेंगे तो पाएँगे कि यह जीवनी उनके विरोध में नहीं बल्कि उनके मूल्यों और प्रतिमानों के सहयोग में ही है।
Hu Tu Tu
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

- Description: साहित्य में मंज़रनामा एक मुकम्मिल फ़ॉर्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयान अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इन्टरप्रेटेशन हो जाता है। मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फ़ॉर्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इज़ाफ़ा हो गया है। कथाकार, शायर, गीतकार, पटकथाकार गुलज़ार ने लीक से हटकर शरत्चन्द्र की-सी संवेदनात्मक मार्मिकता, सहानुभूति और करुणा से ओत-प्रोत कई उम्दा फ़िल्मों का निर्देशन किया जिनमें ‘मेरे अपने’, ‘अचानक’, ‘परिचय’, ‘आँधी’, ‘मौसम’, ‘ख़ुशबू’, ‘मीरा’, ‘किनारा’, ‘नमकीन’, ‘लेकिन’, ‘लिबास’, और ‘माचिस’ जैसी फ़िल्में शामिल हैं। ‘हू तू तू’ इसी नाम से मशहूर एक फ़िल्म का मंज़रनामा है जिसमें गुलज़ार ने संजीदगी से इस बात को रेखांकित किया है कि आज़ादी के पचास सालों में देश की रहनुमाई करनेवाले नेताओं पर कैसे ताक़त का नशा चढ़ा है और नई पीढ़ी किस प्रकार प्रभुत्वशाली वर्ग के भ्रष्टाचार और पक्षपात का शिकार हो रही है। इस नई जेनरेशन में जो बालिग हैं वो ‘भाऊ’ की तरह लड़ रहे हैं तथा जो नाबालिग हैं वो आदि और पन्ना की तरह जानें गँवा रहे हैं। लेकिन यह कृति पूरी तरह फ़िल्मी नहीं है। फ़िल्म में जो अंश हटा दिए गए थे, वे इस कृति में महफ़ूज़ हैं। निश्चय ही यह कृति पाठकों को एक औपन्यासिक रचना का आस्वाद प्रदान करेगी।
Fire in the Belly
- Author Name:
Sumer Sethi, Md
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mahatma Gandhi - Pratham Darshan : Pratham Anubhuti
- Author Name:
Shanker Dayal Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharat Ke Warren Buffett Rakesh Jhunjhunwala
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description: भारत के वॉरेन बफे' और 'बुल मार्केट के राजा' के रूप में विख्यात प्रसिद्ध निवेशक एवं बिजनेस मैग्नेट राकेश झुनझुनवाला शेयर और स्टॉक बाजार का सुपरिचित नाम हैं। उनकी संपत्ति लगभग 5.8 अरब डॉलर, लगभग 45 हजार करोड़ रुपए है। यह उन्हें पुश्तैनी नहीं मिली, बल्कि अपनी कर्मठता, सोच, परिश्रम और बुद्धिमत्ता से उन्होंने अर्जित की है। उनका मानना है कि शेयर बाजार में निवेश बहुत सूझ-बूझ और तसल्ली से करनेवाला काम है। बिना जाँचे-परखे अपनी मेहनत की कमाई को कभी भी स्टॉक में न डालें तथा तरह-तरह के फालतू स्टॉक टिप्स के अनुसार निवेश न करें। वे कहते हैं कि निवेश करते समय स्वयं पर भरोसा और विश्वास होना बहुत आवश्यक हे। यह पुस्तक आपको बिग बुल राकेश झुनझुनवाला के सफल जीवन से तो परिचित करवाएगी ही, साथ ही अत्यंत रहस्यमय एवं अनिश्चित स्टॉक मार्केट में सही निवेश करने, कम नुकसान करने और टिके रहने के व्यावहारिक टिप्स भी देगी। शेयर बाजार, निवेश और पूँजी के विषय में बहुत सटीक जानकारी देनेवाली एक पठनीय पुस्तक।
Lord Krishna Vis-A-Vis Mahatma Gandhi
- Author Name:
Dinkar Joshi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dictionary of Computer & Information Technology
- Author Name:
Mrinal Talukdar
- Book Type:

- Description: Dictionary of Computer & Information Technology covers nearly every aspect of computers. The aim of this book is to present various terms and definitions of the subject in a simple and easily understandable language. The book is designed to be a comprehensive and authoritative source of definitions for computer-related terms and abbreviations. This dictionary of computer terminologies includes terms drawn from a wide variety of topics relevant to computer users, including software, hardware, networking, data storage, graphics, games, information processing, organizations, programming and standards, the Internet and the World Wide Web. This dictionary emphasizes terminology that the average computer user will encounter in documentation, online help, computer manuals, marketing and sales materials, etc. Because most computer users operate personal computers and desktop systems at home, work, or both, the majority of the entries in this dictionary cover the terminology used in describing and working with these systems.
UPSC Sookti Kosh - Key to Success in IAS Mains and Interview (UPSC Quotes Handbook Hindi Edition)
- Author Name:
Piyush Rohankar +1
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक 'UPSC सूक्ति कोश' विशेष रूप से सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए तैयार की गई है। सिविल सेवा अभ्यर्थी द्वारा किसी प्रश्न का उत्तर देते समय किसी सूक्ति को उद्धृत करना और प्रश्न के परिप्रेक्ष्य में उसकी व्याख्या करना उसके उत्तर को नया आयाम देता है तथा भाषा पर उसके अधिकार और विषय की समझ को प्रकट करता है। सूक्तियाँ विद्वानों, महापुरुषों और नीतिज्ञों के अनुभव और विचारों का सार हैं। आज के समय में UPSC, अभ्यर्थियों से यही अपेक्षा करता है कि वे सही समय पर सही निर्णय या सही विचार जनता तक पहुँचा सकें। विषय का उचित विश्लेषण और तार्किक क्षमता UPSC के अभ्यर्थियों के लिए सर्वोपरि है। ऐसे में सूक्तियाँ उनके लिए सफलता पाने का सशक्त माध्यम बन सकती हैं। प्रस्तुत पुस्तक में धार्मिक, सामाजिक, समकालिक सभी प्रकार की सूक्तियों का समावेश किया गया है ताकि अभ्यर्थी कम समय में अधिक विद्वानों के गूढ़ विचारों से अवगत हो सकें। आशा है यह पुस्तक न केवल UPSC की परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के लिए अपितु आम पाठक के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी।
EK SATH MILKAR KAAM KAREN
- Author Name:
MANISH VERMA
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mahila Patrakarita
- Author Name:
Sudha Shukla
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Power of Positive Action
- Author Name:
Napoleon Hill
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book