Bharat Ka Raag, America Ke Rang
(0)
₹
400
₹ 320 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789386870292
-
Pages192
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Autobiography of An IAS "एक IAS की आत्मकथा" Inspirational Story of An IAS on The Path of Truth, Honesty and Justice by Pramod Kumar Agrawal, IAS (Retd.) in Hindi
- Author Name:
Pramod Kumar Agrawal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vishwa Ke Pracheen Vaigyanik
- Author Name:
Vinod Kumar Mishra
- Book Type:

- Description: आप कल्पना कीजिए कि यदि पहिए का आविष्कार न हुआ होता तो क्या मानव विकास कर पाता! कंप्यूटर के बिना क्या आज के मानव जीवन की कल्पना की जा सकती है। अस्तु, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि जिस एक विधा ने मानव जीवन को एक नई दिशा और एक नया मार्ग दिखाया है, वह है विज्ञान। चिकित्सा, खगोल विज्ञान, कंप्यूटर, भू-विज्ञान आदि क्षेत्रों में विज्ञान की नई-नई खोजों, आविष्कारों और नवाचार ने पृथ्वी का स्वरूप ही बदल दिया। इन आविष्कारों और खोजों को करनेवाले महान् वैज्ञानिकों ने अप्रतिम योग्यता और प्रतिभा का परिचय देकर गहन अध्ययन, अनुसंधान और शोध करके नाना प्रकार की वस्तुएँ, तकनीक, सूत्र और प्रमेय ईजाद किए, जो कालांतर में मानव सभ्यता के विकास की नींव का पत्थर साबित हुए। प्रस्तुत पुस्तक में ऐसे ही विश्व विख्यात वैज्ञानिकों के व्यक्तित्व व कृतित्व का संक्षिप्त लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जा रहा है, जिन्होंने इस संसार को नए मापदंड दिए। इसमें उस समय की राजनीतिक परिस्थितियाँ, नई-नई खोजों के लिए उत्सुकता तथा उन वैज्ञानिकों के समक्ष आई कठिनाइयों का दिग्दर्शन है। अत्यंत पठनीय एवं प्रेरक वैज्ञानिक जीवनियों का संकलन।
Raghuvir Sahay Rachanawali : Vols. 1-6
- Author Name:
Raghuvir Sahay
- Book Type:

-
Description:
रघुवीर सहाय की रचनाएँ आधुनिक समय की धड़कनों का जीवन्त दस्तावेज़ हैं। इसीलिए छह खंडों में प्रकाशित उनकी रचनावली में आज का समय सम्पूर्णता में परिभाषित हुआ है। अपनी अद्वितीय सर्जनशीलता के कारण रघुवीर सहाय ऐसे कालजयी रचनाकारों में हैं जिनकी प्रासंगिकता समय बीतने के साथ बढ़ती ही जाती है।
‘फिर उन्हीं लोगों से’ शीर्षक रचनावली के इस पहले खंड में रघुवीर सहाय की 1946 से 1990 तक की प्रकाशित-अप्रकाशित सम्पूर्ण कविताएँ संकलित हैं। इस खंड में शामिल कविता-संग्रहों के नाम हैं : ‘सीढ़ियों पर धूप में’ (1960), ‘आत्महत्या के विरुद्ध’ (1967), ‘हँसो, हँसो जल्दी हँसो’ (1975 ), ‘लोग भूल गए हैं’ (1982), ‘कुछ पते कुछ चिट्ठियाँ ' (1989) तथा ‘एक समय था’ (1995)। इन संग्रहों के अलावा बाद में मिली कुछ नई अप्रकाशित कविताएँ भी इस खंड में हैं। संग्रह के परिशिष्ट में ‘यह दुनिया बहुत बड़ी है, जीवन लम्बा है', शीर्षक से रघुवीर सहाय की सैकड़ों आरम्भिक कविताएँ संकलित हैं। रघुवीर सहाय ने अपने जीवनकाल में ही अपनी आरम्भिक कविताओं का संग्रह तैयार किया था, लेकिन अब तक यह अप्रकाशित था। कवि के काव्य-विकास को समझने की दृष्टि से यह सामग्री अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। परिशिष्ट में ही रघुवीर सहाय की बरस-दर-बरस ज़िन्दगी का ख़ाक़ा और सैकड़ों वर्षों का उनका वंश-वृक्ष भी दिया गया है। अपने नए कथ्य और शिल्प के कारण रघुवीर सहाय ने हिन्दी कविता को नया रूप दिया है। इस खंड की कविताओं में आप उस नए रूप को आसानी से पहचान सकते हैं।
Hindi Tukant Kosh
- Author Name:
Ramanath Sahai
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Yugpurush Dr. Rajendra Prasad
- Author Name:
Tara Sinha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hindi Dalit Sahitya Sanchayita
- Author Name:
Preeti Sagar
- Book Type:

- Description: सवर्णवाद के सामाजिक-सांस्कृतिक वर्चस्व को चुनौती देनेवाले दलित साहित्य का आधार आधुनिक संवैधानिक मूल्य, मानव की सार्वभौमिक समानता और प्रजातंत्र में विश्वास है, और प्रेरणा का स्रोत उस अनन्त पीड़ा में है जो इस देश की दलित जातियों ने सदियों-सदियों अकारण और बिना कोई प्रतिरोध किए सही है। सन् 1914 में ‘सरस्वती’ में प्रकाशित हीरा डोम की कविता ‘अछूत की शिकायत’ से आरम्भ मानी जानेवाली दलित साहित्य की यात्रा अठारहवीं-उन्नीसवीं सदी के सामाजिक-राजनीतिक अदालतों और आज़ादी के बाद संविधान से मिले नए स्पेस से होती हुई आज एक स्थापित धारा का रूप ले चुकी है। मात्र प्रतिरोध और आक्रोश की कलाहीन अभिव्यक्ति के आरोपों को झुठलाते हुए अपनी रचनात्मकता को उसने एक भिन्न सौन्दर्यशास्त्रीय ज़मीन भी दी है। प्रस्तुत संचयिता पिछली पूरी शताब्दी की दलित मनीषा के प्रमुख पड़ावों को संकलित करने का हिन्दी में सम्भवतः पहला सर्वांगीण प्रयास है। विद्रोह की तीव्र आकांक्षा को बेलाग स्वर में वाणी देनेवाली कविता, दलित जन के संघर्ष को गहराई से रेखांकित करनेवाली कहानी, दलित जीवन के अन्तर्बाह्य रेशों की व्याख्या करनेवाले उपन्यासों की स्वानुभूत पीड़ा की प्रामाणिक अभिव्यक्ति, आत्मकथा और अपनी पहचान के लिए लड़ रही रचना को ठोस वैचारिक आधार प्रदान करनेवाली आलोचना, सभी विधाओं का सम्यक् प्रतिनिधित्व इसमें हुआ है। उद्देश्य यही है कि दलित साहित्य के पाठकों, अध्येताओं और छात्रों को पीड़ा और प्रतिकार से उपजी सन्दर्भमूलक रचनाएँ एक जिल्द में उपलब्ध हो सकें; और दलित साहित्य का मूल स्वर कुछ प्रमुख रचनाओं के माध्यम से सामने लाया जाए। संचयिता में उनतीस कवियों की कविताएँ, तेरह कहानियाँ, सात महत्त्वपूर्ण उपन्यास-अंश, छह आत्मकथा-अंश और आठ आलोचनात्मक आलेख शामिल हैं।
Bridging Global Indian Diaspora
- Author Name:
Dr. Bhishma Agnihotri
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Khushiyon Ka Desh Bhutan
- Author Name:
Dr. Ramesh Pokhariyal ‘Nishank’
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Azim Premji A Complete Biography
- Author Name:
A.K. Gandhi
- Book Type:

- Description: Helming Wipro for nearly four decades, Azim Premji is recognized as the stalwart of the Indian IT industry. He has been included twice in the list of 100 most influential people by TIME Magazine. An alumnus of Standford University, he navigated a successful shift of Wipro from the consumer health industry to the hightechnology sector in the 1960s.Premji is well known for his philanthropy, having signed up for the Giving Pledge. Premji has donated USD 2.2 billion to the Azim Premji foundation.
Pandey Bechan Sharma ‘Ugra’ Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Pandey Bechan Sharma 'Ugra'
- Book Type:

- Description: पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ असाधारण रचनाकार और सृजक थे। सारा हिंदी जगत् एक अरसे तक ‘उग्र’ की उग्रता से काँपता रहा, उनसे लोहा लेने में डरता रहा; मगर ‘उग्र’ जी का बाह्य व्यक्तित्व देख हिंदी जगत् ने उन्हें जीते जी उपेक्षा के गर्त में और विरोध की खाइयों में ढकेल दिया। यह उनके जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी व विडंबना थी। उनके अंतरंग कोमल पक्ष को, जो नारियल की तरह बाहर से कठोर और अंदर से मृदु व कोमल था, कोई नहीं जान पाया। ‘उग्र’ के संपूर्ण व्यक्तित्व पर विगत 44 वर्षों से अनथक अनवरत परिश्रम करते हुए उनके कृतित्व के अनछुए पहलुओं पर कार्य किया है। अब तक ‘उग्र’ पर, उनके साहित्य पर मेरी 24 से अधिक कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनका हिंदी जगत् ने सम्यक् स्वागत किया है। हाँ, समीक्षकों से अवश्य हमेशा की तरह जैसा ‘उग्र’ के साथ हुआ, ‘उग्र’ के साहित्य को भी उपेक्षा और अवमूल्यन मिला है। खैर— मेरे लबों पे दुआ उसके लबों पे गाली, जिसके अंदर जो था वही तो बाहर निकला। इस क्रम में निवेदित है ‘उग्र’ की कलम से निःसृत मार्मिक और हृदयस्पर्शी लोकप्रिय कहानियों का संग्रह।
Rameshchandra Shah Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Rameshchandra Shah
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
COVID RAMAYAN
- Author Name:
Madhav Joshi
- Book Type:

- Description: "‘कोविड रामायण’ माधव जोशी का अभिनव प्रयोग है। यह एक फ्यूजन है अतीत का वर्तमान के साथ, कलम का ब्रश के साथ और रेखाओं का शब्दों के साथ। आप चमत्कृत होंगे; चौंक जाएँगे कि कोविड का रामायण से क्या संबंध? कोविड मानवीय इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी रही है। जब किसी को इस समस्या से निपटने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था तब माधव जोशी ने सोचा वर्तमान को सुधारने के लिए अतीत से ही सबक लेना होगा क्योंकि अतीत के अनुभव पर वर्तमान जिन सपनों को गढ़ता है, वही हमारा भविष्य होता है। इस बिंबविधान के साथ माधव जोशी ने यह नई रामकथा गढ़ी है। इस कथा के जरिए माधव भूत और वर्तमान के समन्वय से ही भविष्य के खतरे का रास्ता ढूँढ़ते हैं। माधव रेखाओं के जादूगर हैं और शब्दों के अद्भुत शिल्पी। कार्टूनिस्ट थोड़े शब्दों में बड़ी बात कहता है। इस लिहाज से यह कोविड रामायण ‘देखन में छोटन लगे, घाव करे गंभीर’ है। इसमें अनेक रंगों की परिकल्पना, ब्रश का संयोजन और शब्दों का शिल्प साथ-साथ चले और प्रसूत हुए हैं। ऐसी है यह बेजोड़ रचना ‘कोविड रामायण’। माधव जोशी ने रामकथा के जरिए कोविड त्रासदी के मर्म को समझाया है। कोरोना धूर्त है, बहुरूपिया है, रावण की तरह अपना रूप बदलता है। इनसे निपटने के लिए माधव जोशी के पास कोदंड राम हैं, जो कोविड के खिलाफ जंग के प्रतीक हैं। राम एक हैं, पर हमारी दृष्टि अलग-अलग। गांधी के राम अलग हैं, लोहिया के राम अलग। वाल्मीकि और तुलसी के राम में भी फर्क है।कंबन के राम अलग और कृतिवास के अलग। भवभूति के राम दोनों से अलग हैं। कबीर ने राम को जाना था तो तुलसी ने माना। भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यवत्ता और संयम का नाम है राम। माधव जोशी रामायण को महज एक ग्रंथ नहीं आचरण संहिता मानते हैं। उस आचरण संहिता से ही लेखक कोविड से लड़ने की न सिर्फ ताकत पाता है बल्कि आम लोगों के आत्मबल का औजार भी बनता है। कथा, चित्र और प्रस्तुतीकरण मनोहर है। आप भी आनंद लें। —हेमंत शर्मा"
Nirala Sanchayan
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

- Description: निराला का कवि-विकास एकरैखिक या सपाट नहीं है, उसमें कई घुमाव हैं, उसके कई स्तर हैं। एक ही समय में भिन्न प्रकार की कविताओं के साथ कवि अपने पाठकों और आलोचकों के समक्ष चुनौती देता खड़ा हो जाता है। निराला इसीलिए महाकवि हैं क्योंकि एक तरफ़ तो उनमें क्लैसिकी परम्परा के दर्शन होते हैं, वहीं दूसरी ओर एकदम अपने आसपास के परिवेश के और जनधर्मिता की कविता के। निराला में मुक्ति की एकल याचना नहीं है, बल्कि सामूहिक चेतना है। निराला का साहित्य न साहित्यिक कट्टरता या धार्मिक कट्टरता के समक्ष घुटने टेकता है और न साम्राज्यवाद के। उनके चिन्तन में भौतिकवाद के तत्त्व भी उपस्थित हैं और वे किसी ईश्वर द्वारा संसार के सृजन का मज़ाक़ उड़ाते हैं। उनके धार्मिक दृष्टिकोण के केन्द्र में मनुष्य है, इसीलिए विज्ञान की सत्ता व उसकी सामाजिक भूमिका को तथा आधुनिक सभ्यता के मूल्यों को भी वे सहज स्वीकार करते थे। निराला की कविता मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन-व्यापार की कविता भी है जिसमें जीवन का सम्पूर्ण संगीत है। निराला रचना को ‘युद्ध कौशल’ कहते थे और गद्य को ‘जीवन-संग्राम की भाषा’। अपने कथा-साहित्य में वे जीवन-संग्राम को अंकित करते चलते हैं। निराला ने अपनी मुक्ति-चेतना के साथ जैसे कविता को मुक्त किया वैसे ही कथा को भी। निराला की कहानियाँ भी हिन्दी की परम्परागत कहानियों के रूप और संगठन को अतिक्रमित करती हैं। हर पीढ़ी अपने महाकवि को ‘डिस्कवर’ करती है, इसलिए हर पीढ़ी का अपना चयन होता है। सम्पादन की चौथी पीढ़ी में यह संचयन है। हमारी पीढ़ी का चयन और हमारे अपने निराला की खोज!
Fijeedvip Mein Mere 21 Varsh
- Author Name:
Totaram Sanadhya
- Book Type:

- Description: ब्रिटिशकालीन भारतीय पराधीनता का एक त्रासद अध्याय है गिरमिटिया। गिरमिटिया यानी एग्रीमेंट के तहत देश के बाहर कुलीगीरी करने के लिए जबरन भेजा जाना। भूख, बेरोजगारी, उत्पीड़न या गृह कलह के चलते घर-परिवार छोड़नेवाले स्त्री-पुरुषों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें झाँसा देकर अज्ञात देश में भेज देना। सन् 1879 से लेकर सन् 1916 तक 60553 भारतीय ‘गिरमिटिया’ बनाकर फिजीद्वीप भेजे जा चुके थे। इन अभिशप्त भारतीयों के शापमोचन के लिए जो लोग आगे आये उनमें एक नाम था पण्डित तोताराम सनाढ्य का। कौन थे ये तोतारामजी? क्या रिश्ता बनता था उनका फिजी से और गिरमिटिया भारतीयों से? परदुखकातर एक सामान्य भारतीय जिन्होंने खुद इक्कीस वर्षों तक गिरमिटिया की यातना-भरी जिन्दगी जी; मुक्ति संघर्ष का आगाज किया। यूँ तो ‘गिरमिटिया’ प्रथा पर प्रेमचन्द और प्रसाद समेत कई दिग्गजों ने लिखा है पर स्वयं का भोगा हुआ सच सिर्फ और सिर्फ तोताराम सनाढ्य का ही है। इतिहास के अध्येताओं से लेकर आम पाठकों तक के लिए जानकारियों से भरी एक रोचक और जरूरी किताब!
Madhya Pradesh Uchch Madhyamik Shikshak Patrata Pariksha Vanijya Practice MCQs (MPTET Higher Secondary Teacher Commerce Practice Sets in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Karyalayeeya Hindi
- Author Name:
Kailash Nath Pandey
- Book Type:

- Description: "कार्यालयीय हिंदी ’70 के दशक के बाद की नवउदारवादी नीतियों, वृहद् नव-पूँजीवाद और बदलते बाजारूपन ने हिंदी को कई तरह की ‘करणत्रयी’ का शिकार बना दिया। एक ओर हिंदी भूमंडलीकरण, वैश्वीकरण तथा बाजारीकरण की गिरफ्त में आई तो दूसरी तरफ सत्ता और स्वार्थ के खेल ने इसे अंग्रेजीकरण, अरबीकरण तथा फारसीकरण में जकड़ दिया। परिणाम हुआ—हिंदी में कई तरह की विकृतियाँ व विकार पैदा हो गए। इस नए डिजिटल युग में ये सारे संकट हिंदी के सामने गैर-जमानती वारंट की तरह खड़े हो गए। भूमंडलीकरण अर्थात् पश्चिमीकरण एवं औपनिवेशिक प्रभाव के चलते हिंदी में ढेरों खामियाँ पसर गईं। इसके वाक्य-विन्यास, मुहावरे, हिज्जे, अंदाज और आवाज ने हिंदी को भ्रष्ट बना दिया। कुल मिलाकर हिंदी का पारंपरिक अनुशासन टूट रहा है। मोबाइल फोन और फेसबुक आदि यांत्रिक संचार साधनों पर भेजे जाने वाले संदेशों ने हिंदी व्याकरण और वाक्य-संरचना आदि को फिलहाल छिन्न-भिन्न कर ही दिया है, कार्यालयों में भी हिंदी-प्रयोग के प्रति अन्यमनस्कता-उदासीनता देखी जा रही है। अतः इन सब समस्याओं को दृष्टि में रखते हुए विशिष्ट भाषा और शिल्प-शैली में लिखी गई इस पुस्तक में कार्यालयों में हिंदी प्रयोग एवं राजभाषा के उपयोग को विश्वस्त, समृद्ध तथा सुगम-सरल बनाया गया है। विश्वास है, हिंदी जगत् इससे लाभान्वित होगा। "
Lok Seva Mein Naitikta : 100 Case Studies Sahit
- Author Name:
Alok Ranjan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Grandfather’s Mystery
- Author Name:
Chandrashekar Nagawaram
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Uttar Pradesh Police (UP) Arakshi Bharti Pareeksha 3000+ MCQs | 21 Practice Sets
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ek Mulakat Tatha Anya Kahaniyan
- Author Name:
Shubha Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book