Behatar Bharat, Behatar Duniya
Author:
Nr Narayana MurthyPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Other0 Ratings
Price: ₹ 400
₹
500
Available
Awating description for this book
ISBN: 9789350484685
Pages: 288
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Dr Sarvapalli Radhakrishnan
- Author Name:
Brij Kishore
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hindi Ka Janpakshdhar Rangmanch
- Author Name:
Editor : Aalok Mishra
- Book Type:

- Description: हमारी भारतीय नाट्य परंपरा में आरंभ से ही लोक की अवधारणा विद्यमान रही है। भरत ने अपने नाट्य शास्त्र में पहली बार लोक और शास्त्रीय के रूप में दो अलग-अलग धाराओं को परिभाषित किया। कालांतर में और विशेष रूप से बीसवीं शती में साहित्य की प्रगतिशील विचारधारा, भारत छोड़ो आंदोलन के बीच से उभर कर आई इप्टा के जन्म ने इस लोक को क्रमश: जनवादी, जननाट्य और जनपक्षधर जैसी संज्ञाओं को विकसित किया। आलोक मिश्र द्वारा सम्पादित 'हिंदी का जनपक्षधर रंगमंच’ पुस्तक अपने-अपने विषय के विशेषज्ञ विद्वानों द्वारा लिखित सत्रह आलेखों के माध्यम से उपर्युक्त परंपरा का गहन लेखा-जोखा प्रस्तुत करती है। रंगमंच की जनपक्षधरता से जुड़ा कोई भी ऐसा विषय नहीं है जिसका यहाँ गहन विवेचन और विश्लेषण न किया गया हो, चाहे वह पारंपरिक रंगमंच का स्वायत्व स्वरूप और उसकी लोक पक्षधरता हो अथवा दलित आंदोलन या हिंदी नुक्कड़ नाटक हो। हमें पूरा विश्वास है कि रंगकर्मियों शोधकर्ताओं और अध्येताओं को इस पुस्तक के बहाने से हिंदी रंगमंच में जनपक्षधरता के बहुआयामों को जाँचने-परखने का अवसर मिलेगा। —देवेन्द्र राज अंकुर
Major Shaitan Singh
- Author Name:
Major Rajpal Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Keshav, Kahi Na Jai ka Kahiye
- Author Name:
Sanjeev Buxy
- Book Type:

- Description: Hindi memoirs
JPSC Jharkhand Preliminary Exam-2024 Paper-I & 2 General Studies "सामान्य अध्ययन" | 20 Practice Sets (Hindi)
- Author Name:
Sanjay Singh, IPS
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
D.H. Lawrence Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
D.H. Lawrence
- Book Type:

- Description: ‘डी. एच. लॉरेंस की लोकप्रिय कहानियाँ’ साहित्य के विविध रस समेटे हुए हैं। इस कहानी-संकलन में उनके इस वैशिष्ट्य को परखा जा सकता है। भाग्य और वैभव की लोलुपता मनुष्य को किस त्रासदी तक ले जाती है, इसका साक्ष्य ‘काठ का अनाम घोड़ा’ कहानी है। उनकी चर्चित कहानी ‘अंतर्ध्वनि’ स्त्री-पुरुष के मानवीय संबंध के संदर्भ में धार्मिक अवधारणा के सापेक्ष सहज स्वातंत्र्य को वरीयता देती है। ‘वन मानुष’ कहानी आज भी पुरुष के आदिमानव जैसी पाशविकता वाले स्वभाव की ओर संकेत करती है। लॉरेंस की कहानियाँ मनोविज्ञान और दार्शनिकता का कलेवर लिये जिस तरह पाठक तक सहजता से पहुँचती हैं, वह विरल है। पैंतालीस वर्ष से भी छोटे जीवन में उन्होंने साहित्य-जगत् को जो दिया, वह विपुल तो है ही, गुणात्मक स्तर पर भी अद्भुत कहा जाता है।
NTA (National Testing Agency) Cuet (UG) Common University Entrance Test (Under-Graduate)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
BPSC TRE 3.0 Bihar Teacher Recruitment Class 11-12 "Itihas" History | 20 Practice Sets (Hindi)
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Samrasta Ke Unnayak
- Author Name:
Dr. Rahul
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Roohani Mohabbat
- Author Name:
Naazrin Ansari ‘Raafi’
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Diabetes Quiz Book
- Author Name:
Ashok Jhingan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sita Puni Boli
- Author Name:
Smt. Mridula Sinha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Gita of Option Trading : Trading Options with Purpose
- Author Name:
Rajiv L B Roy
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Great Oceans Within Us
- Author Name:
Killada Satyanarayana, IPS
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Barhavi Sadi Ki Kannad Kavayitriyan Aur Stree-Vimarsh
- Author Name:
Kashinath Ambalge
- Book Type:

- Description: सम्पूर्ण भारतीय साहित्य में, विशेषकर बारहवीं शताब्दी के दौर में, स्त्री-विमर्श की अनुगूँज केवल कन्नड़ साहित्य में उपलब्ध होती है। जाति-प्रथा का निषेध, वर्ण और वर्ग की विषमता का प्रतिरोध बारहवीं शताब्दी में केवल कन्नड़ भाषा-साहित्य में प्राप्त होता है। 5वीं शताब्दी में तमिल भाषा-साहित्य में निम्न वर्ग और दलित वर्ग के रचनाकारों को महत्त्व प्राप्त होता है, नायनार और आलवार सम्प्रदाय में मनुष्य की वेदना और अस्मिता को सामाजिक स्वीकृति मिलती है पर स्त्री-समुदाय को, वह भी लगभग पैंतीस महिला रचनाकारों को, सामाजिक, आध्यात्मिक और वर्ग चेतना के स्तर पर स्वीकृति केवल कन्नड़ भाषा-साहित्य में बारहवीं शताब्दी में उपलब्ध होती है। अपभ्रंश और प्राकृत भाषा-साहित्य में चेरी गाथाओं के बाद सम्पूर्ण भारतीय स्तर पर स्त्री-विमर्श का यह श्रेय कन्नड़ की अक्कमहादेवी और अन्यान्य शिवशरणियों को जाता है। मुक्तायक्का और अल्लमप्रभु ने भी कला, साहित्य, संस्कृति और दर्शन के स्तर पर अप्रतिम योगदान दिया है। राहुल सांकृत्यायन, भगवतीशरण उपाध्याय, रामविलास शर्मा और डी.डी. कोसम्बी की परम्परा में डॉ. काशीनाथ अंबलगे ने एक प्रतिबद्ध समीक्षक और तत्त्ववेत्ता के रूप में इस अभूतपूर्व कृति की रचना की है। विश्वास है, इसका आकलन सुधी पाठक और समर्थ आलोचक सम्यक् रूप से करेंगे। —रोहिताश्व
THE STORY OF MY LIFE (CLASS X)
- Author Name:
Helen Keller
- Book Type:

- Description: The name of Helen Keller is known around the world as a symbol of courage in the face of overwhelming odds, yet she was much more than a symbol. She was a woman of luminous intelligence, high ambition and great accomplishment who devoted her life to helping others. Although Helen Keller was blind and deaf, she knew several languages. Helen Keller learned to read and communicate by touch. She used these skills to study English, French, German, Greek, and Latin. Late in her life, she said she wanted to learn even more languages. During her lifetime, Helen Keller was consistently ranked near the top of ‘most admired’ lists. She died in 1968, leaving a legacy that Helen Keller International is proud to carry on in her name and memory. This book is a authorized autobiography of ‘Helen Keller’.
Nuclear Bomb In Ganga
- Author Name:
R.K. Yadav
- Book Type:

- Description: This book doesn’t have any description
Leo Tolstoy Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Leo Tolstoy
- Rating:
- Book Type:

- Description: "‘‘क्या वे लोग खेत जोत रहे हैं? क्या उन लोगों ने अपना काम खत्म कर लिया?’’ ‘‘उन लोगों ने आधे से अधिक खेत जोत लिये हैं।’’ ‘‘क्या कुछ भी काम बचा नहीं है?’’ ‘‘मुझे तो नहीं दिखा; पर उन्होंने जुताई अच्छी तरह से की है। वे सभी डरे हुए हैं।’’ ‘‘ठीक है। अब तो जमीन ठीक हो गई है न?’’ ‘‘हाँ, अब खेत तैयार हैं और उनमें अफीम के पौधों के बीज डाले जा सकते हैं।’’ मैनेजर थोड़ी देर चुप रहने के बाद बोला, ‘‘वे लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं? क्या वे मुझे गाली देते हैं?’’ बूढ़ा कुछ हकलाने लगा, पर माइकल ने उसे सच बोलने के लिए कहा, ‘‘तुम मुझे सच बताओ। तुम अपने शब्द नहीं, बल्कि किसी और के शब्द बोल रहे हो। यदि तुम मुझे सच-सच बताओगे, तब मैं तुमको इनाम दूँगा; और अगर तुम मुझे धोखा दोगे तो ध्यान रखना, मैं तुम्हें बहुत मारूँगा। कर्तुशा! इसे एक गिलास वोदका दो, ताकि इसमें साहस पैदा हो।’’ —इसी संग्रह से • सुप्रसिद्ध रूसी कथाकार लियो टॉलस्टॉय ने जीवन के सभी पक्षों पर प्रभावी रचनाएँ की हैं। उन्होंने धर्म में व्याप्त पाखंड तथा तत्कालीन कुरीतियों को अनावृत किया। मनोरंजन के साथ-साथ मन को उद्वेलित करनेवाली सरस टॉलस्टॉय की लोकप्रिय कहानियों का संग्रह।"
Main Lohiya Bol Raha Hoon
- Author Name:
Ed. Rajasvi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hazari Prasad Dwivedi Granthawali : Vols. 1-12
- Author Name:
Hazariprasad Dwivedi
- Book Type:

- Description: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी उन विरल रचनाकारों में हैं जिनकी कृतियाँ उनके जीवन–काल में ही क्लासिक बन जाती हैं । अपनी जन्मजात प्रतिभा के साथ उन्होंने शास्त्रों का अनुशीलन और जीवन को सम्पूर्ण भाव से जीने की साधना करके वह पारदर्शी दृष्टि प्राप्त की थी, जो किसी कथा को आर्ष–वाणी की प्रतिष्ठा देने में समर्थ होती है । जिस मनीषी ने हजारों साल से कायरता का पाठ दोहराती हुई जाति को ललकारकर कहा था । ‘‘सत्य के लिए किसी से भी न डरना, गुरु से भी नहीं, मंत्र से भी नहीं, लोक से भी नहीं, वेद से भी नहीं ।’’ वह कोई सामान्य कथाकार नहीं है । ऐसा उद्घोष कोई आर्षवक्ता ही कर सकता है । ग्रन्थावली के इस पहले खंड में द्विवेदीजी के दो उपन्यास बाणभट्ट की आत्मकथा और चारु चन्द्रलेख प्रस्तुत हैं । बाणभट्ट की आत्मकथा का कथानायक कोरा भावुक कवि नहीं, वरन् कर्मनिरत और संघर्षशील जीवन–योद्धा है । उसके लिए ‘शरीर केवल भार नहीं, मिट्टी का ढेला नहीं’, बल्कि उससे बड़ा है और उसके मन में ‘आर्यावर्त के उद्धार का निमित्त बनने’ की तीव्र बेचैनी है । चारु चन्द्रलेख में बारहवीं–तेरहवीं शताब्दी के उस काल का सर्जनात्मक पुनर्निर्माण करने का प्रयत्न है, जब सारा देश आन्तरिक कलह से जर्जर और तांत्रिक साधना के मोह में पथभ्रष्ट होकर समस्याओं का समाधान पारे और अभ्रक के खरल–संयोगों में खोज रहा था । द्विवेदीजी ने इसके विरुद्ध ज्ञान, इच्छा एवं क्रिया के त्रिकोणात्मक सामंजस्य तथा जनसाधारण की हिस्सेदारी पर बल दिया है, और उनकी इस स्थापना में अनायास ही आधुनिक युग मुखर हो उठता है ।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book