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Achchhi Hindi Kaise Likhen

Published by

Prabhat Prakashan

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Other

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Hindi

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About the book

आप विद्यार्थी हैं, अध्यापक हैं, लेखक हैं, पत्रकार हैं या आम पाठक—यदि हिंदी पढ़ने-लिखने में आपकी थोड़ी भी रुचि है तो आपके काम की कुछ-न-कुछ मानसिक खुराक इस पुस्तक में जरूर मिलेगी। यों यह पुस्तक छात्र समुदाय को विशेष रूप से संबोधित है, पर अपने पूरे कलेवर में प्रायः हर वर्ग के हिंदी-प्रेमियों के लिए उपयोगी है। हिंदी की लिखत-पढ़त में लगे लोग इसे पढ़कर अपनी भाषा को प्रवाहमयी बना सकते हैं तथा रोजमर्रा के व्यवहार में होनेवाली अनेकानेक गलतियों को सुधार सकते हैं। विद्यार्थी वर्ग को विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी में इससे भरपूर मदद मिलेगी। इस पुस्तक की एक विशिष्‍टता यह भी है कि इसमें सृजनात्मक लेखन पर भी उपयोगी जानकारी दी गई है। ऐसे में लेखक-पत्रकार बनने की राह पर चल रहे लोगों को भी यह जरूर लुभाएगी। भाषा-विमर्श प्रायः उबाऊ विषय माना जाता रहा है; पर यह पुस्तक अपने तमाम अध्यायों में एकरसता को तोड़ती है। अलग-अलग चित्तवृत्तियों में लिखी होने के चलते, पुरानी हिंदी से लेकर नई हिंदी तक, कई तरह की भाषा की छटाएँ इस पुस्तक के पन्ने-दर-पन्ने पर दिखाई देंगी। इसका भी एक अलग आस्वाद होगा। आशा है, हिंदी भाषा के विमर्श में यह पुस्तक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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आप विद्यार्थी हैं, अध्यापक हैं, लेखक हैं, पत्रकार हैं या आम पाठक—यदि हिंदी पढ़ने-लिखने में आपकी थोड़ी भी रुचि है तो आपके काम की कुछ-न-कुछ मानसिक खुराक इस पुस्तक में जरूर मिलेगी। यों यह पुस्तक छात्र समुदाय को विशेष रूप से संबोधित है, पर अपने पूरे कलेवर में प्रायः हर वर्ग के हिंदी-प्रेमियों के लिए उपयोगी है। हिंदी की लिखत-पढ़त में लगे लोग इसे पढ़कर अपनी भाषा को प्रवाहमयी बना सकते हैं तथा रोजमर्रा के व्यवहार में होनेवाली अनेकानेक गलतियों को सुधार सकते हैं। विद्यार्थी वर्ग को विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी में इससे भरपूर मदद मिलेगी। इस पुस्तक की एक विशिष्‍टता यह भी है कि इसमें सृजनात्मक लेखन पर भी उपयोगी जानकारी दी गई है। ऐसे में लेखक-पत्रकार बनने की राह पर चल रहे लोगों को भी यह जरूर लुभाएगी।
भाषा-विमर्श प्रायः उबाऊ विषय माना जाता रहा है; पर यह पुस्तक अपने तमाम अध्यायों में एकरसता को तोड़ती है। अलग-अलग चित्तवृत्तियों में लिखी होने के चलते, पुरानी हिंदी से लेकर नई हिंदी तक, कई तरह की भाषा की छटाएँ इस पुस्तक के पन्ने-दर-पन्ने पर दिखाई देंगी। इसका भी एक अलग आस्वाद होगा।
आशा है, हिंदी भाषा के विमर्श में यह पुस्तक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Hardbound
Publisher
Prabhat Prakashan
Weight
250 grams
ISBN-13
9789350484050
Pages
368
Reading time
~12 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

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