Aavedan-Praroop
About the book
सरकारी कार्यालयों के कार्य-व्यवहार का एक आवश्यक पहलू है फ़ाइलों पर की जानेवाली टिप्पणियाँ, विभागीय पत्राचार और विषयानुरूप मसौदे। परम्परागत रूप से इन्हें अंग्रेज़ी में किया जाता है, परन्तु अब कुछ वर्षों से इन्हें हिन्दी में भी किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से विभिन्न पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं, लेकिन डॉ. शिवनारायण चतुर्वेदी की यह पुस्तक ऐसी तमाम पुस्तकों से अलग हटकर लिखी गई है। सरकारी फ़ाइलों से जुड़े टिप्पण-आवेदन-प्रारूप के महत्त्व को स्वीकारते हुए भी डॉ. चतुर्वेदी का मानना है कि उक्त विषय सरकारी कार्यविधि का केवल एक पक्ष है। दूसरा पक्ष है—छुट्टी, स्थानान्तरण, स्थायीकरण, पदोन्नति, वरिष्ठता-वेतन, अग्रिम वेतन, आवास आदि से जुड़े आवेदन-प्रारूप। यह पुस्तक ऐसे प्रारूपों के कई-कई नमूने प्रस्तुत करती है। इसके अलावा पुस्तक के तीसरे खंड में विभिन्न सरकारी अधिकारियों से पत्र-व्यवहार के प्रारूप दिए गए हैं। सम्पादकों के नाम पत्र, विभिन्न अवसरों से सम्बद्ध निमंत्रण-पत्र आदि भी इसी खंड में शामिल हैं। पुस्तक के तीन-तीन परिशिष्टों में भी कुछ उपयोगी जानकारियाँ निहित हैं। इसी प्रकार प्रस्तुत पुस्तक आवेदन-पत्रों के प्रायः सभी आवश्यक हिन्दी रूपों को समाहित किए हुए है, जिनकी ज़रूरत एक कर्मचारी को अपने जीवन में पड़ती है। कहने की आवश्यकता नहीं कि डॉ. चतुर्वेदी की यह पुस्तक उन तमाम सरकारी कर्मचारियों के दैनंदिन उपयोग से जुड़ी हुई है, जो विभागीय और विभागेतर पत्राचार हिन्दी में करना चाहते हैं। यही नहीं, जैसा कि लेखक ने कहा है, यह पुस्तक हिन्दी-शिक्षण-योजना के अन्तर्गत ‘प्रवीण’ और ‘प्राज्ञ’ परीक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी होगी, क्योंकि पिछले अनेक वर्षों में इन परीक्षाओं में प्रारम्भिक आलेखन के अन्तर्गत आवेदन-पत्रों से सम्बन्धित जितने भी प्रश्न आए हैं, उन्हें भी इसमें शामिल कर लिया गया है।
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About the Book
सरकारी कार्यालयों के कार्य-व्यवहार का एक आवश्यक पहलू है फ़ाइलों पर की जानेवाली टिप्पणियाँ, विभागीय पत्राचार और विषयानुरूप मसौदे। परम्परागत रूप से इन्हें अंग्रेज़ी में किया जाता है, परन्तु अब कुछ वर्षों से इन्हें हिन्दी में भी किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से विभिन्न पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं, लेकिन डॉ. शिवनारायण चतुर्वेदी की यह पुस्तक ऐसी तमाम पुस्तकों से अलग हटकर लिखी गई है।
सरकारी फ़ाइलों से जुड़े टिप्पण-आवेदन-प्रारूप के महत्त्व को स्वीकारते हुए भी डॉ. चतुर्वेदी का मानना है कि उक्त विषय सरकारी कार्यविधि का केवल एक पक्ष है। दूसरा पक्ष है—छुट्टी, स्थानान्तरण, स्थायीकरण, पदोन्नति, वरिष्ठता-वेतन, अग्रिम वेतन, आवास आदि से जुड़े आवेदन-प्रारूप। यह पुस्तक ऐसे प्रारूपों के कई-कई नमूने प्रस्तुत करती है। इसके अलावा पुस्तक के तीसरे खंड में विभिन्न सरकारी अधिकारियों से पत्र-व्यवहार के प्रारूप दिए गए हैं।
सम्पादकों के नाम पत्र, विभिन्न अवसरों से सम्बद्ध निमंत्रण-पत्र आदि भी इसी खंड में शामिल हैं। पुस्तक के तीन-तीन परिशिष्टों में भी कुछ उपयोगी जानकारियाँ निहित हैं। इसी प्रकार प्रस्तुत पुस्तक आवेदन-पत्रों के प्रायः सभी आवश्यक हिन्दी रूपों को समाहित किए हुए है, जिनकी ज़रूरत एक कर्मचारी को अपने जीवन में पड़ती है।
कहने की आवश्यकता नहीं कि डॉ. चतुर्वेदी की यह पुस्तक उन तमाम सरकारी कर्मचारियों के दैनंदिन उपयोग से जुड़ी हुई है, जो विभागीय और विभागेतर पत्राचार हिन्दी में करना चाहते हैं। यही नहीं, जैसा कि लेखक ने कहा है, यह पुस्तक हिन्दी-शिक्षण-योजना के अन्तर्गत ‘प्रवीण’ और ‘प्राज्ञ’ परीक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी होगी, क्योंकि पिछले अनेक वर्षों में इन परीक्षाओं में प्रारम्भिक आलेखन के अन्तर्गत आवेदन-पत्रों से सम्बन्धित जितने भी प्रश्न आए हैं, उन्हें भी इसमें शामिल कर लिया गया है।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 3rd
- Publication year
- 1994
- Weight
- 466 grams
- ISBN-13
- 9788171190386
- Pages
- 264
- Reading time
- ~9 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 22 cm
- Language
- Hindi
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