Aap Bhi IAS Ban Sakte Hain
(0)
₹
300
₹ 240 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789351868682
-
Pages176
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Jal Sankat Aur Jal Sangrah
- Author Name:
Mukesh Kumar
- Book Type:

- Description:
पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। कहा जाने लगा है कि तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो बहुत ही सम्भव है कि वह पानी को लेकर ही हो। शहरी इलाक़ों में पानी की कमी और उसके लिए रोज़-रोज़ होनेवाले स्थानीय झगड़े शायद इसी की बानगी हैं। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में जल-स्तर न सिर्फ़ नीचे जा रहा है, पेयजल के रूप में उसका उपयोग भी ख़तरनाक होता जा रहा है। जनसंख्या के साथ-साथ जहाँ पानी की आवश्यकता बड़े पैमाने पर बढ़ी है, वहीं जल-संग्रहण की पारम्परिक पद्धतियों को भी हमने भुला दिया है, जितना जल उपलब्ध है, वह बढ़ते शहरीकरण के परिणामस्वरूप प्रदूषण का शिकार है। आँकड़े बताते हैं कि इस समय देश में रोज़ छह हज़ार से ज़्यादा लोग दूषित जल से पैदा होनेवाली बीमारियों से मर जा रहे हैं। यह पुस्तक इस विकराल संकट से निबटने के लिए एक आरम्भिक ढाँचा सुझाती है जिसका उपयोग हम जल-संरक्षण, और सामान्यत: पानी के प्रति अपना आधारभूत दृष्टिकोण बदलने में कर सकते हैं। वर्षा जल के संग्रहण की पुरानी और नई प्रविधियों, इसके साथ भू-जल स्रोतों की सम्यक् सार-सँभाल, जल-अपव्यय को रोकने की ज़रूरत तथा तरकीबें, सूखे इलाक़ों में जल-संचयन की वैज्ञानिक पद्धति, विभिन्न क़िस्म के बाँधों, कुँओं, तालाबों के निर्माण सम्बन्धी जानकारी, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, आपूर्ति और वितरण की समस्या और कृषि-उपयोग के लिहाज़ से जल-प्रबन्ध, इन तमाम विषयों पर यह पुस्तक अद्यतन और वैज्ञानिक सामग्री उपलब्ध कराती है।
Fake Encounter
- Author Name:
Mukesh Kumar
- Book Type:

- Description:
This book has no description
Television Ki Kahani : Part-1
- Author Name:
Shyam Kashyap +1
- Book Type:

- Description:
टेलीविज़न की कहानी वर्तमान समय सूचना-समाचारों के विस्फोट का है। हर घर-आँगन में चौबीस घंटे की टेलीविज़न-उपस्थिति है। चकमक करती रौशनियाँ हैं, दमक-हुमक-भरे चेहरे हैं। हर्ष, विषाद, रुदन की आक्रामकता है। कहीं समाचार, कहीं फ़िल्म और घर-घर की कहानी बयान करते रंग-बिरंगे धारावाहिक। लेकिन क्या आप जानते हैं, इस चमक-दमक के आविष्कारक कौन थे? टेलीविज़न का कब और कैसे आविष्कार हुआ? टेलीविज़न के अतीत-वर्तमान को ही जानने-समझने का सार्थक प्रयत्न करती है यह पुस्तक। वरिष्ठ लेखक-पत्रकार डॉ. श्याम कश्यप और चर्चित युवा टीवी पत्रकार मुकेश कुमार की क़लम-जुगलबन्दी ने टेलीविज़न की कहानी को आप तक पहुँचाने का सफल प्रयास किया है।
टेलीविज़न के विभिन्न आयामों का समावेश करती इस पुस्तक में कुल बारह अध्याय हैं, जिनमें टेलीविज़न की ईजाद और उसके क्रमिक विकास की कहानी के साथ उनके विशिष्ट आन्तरिक संरचना, चरित्र और सामाजिक प्रभावों की भी प्रभावी पड़ताल की गई है। इसमें प्रसंगवश उन तमाम समकालीन प्रश्नों से भी मुठभेड़ करने का प्रयास किया गया है, जिनका सामना टीवी पत्रकार को अक्सर करना पड़ता है।
पुस्तक में टीवी पत्रकारिता से जुड़ी उन तमाम बातों का ज़िक्र है, जिसकी ज़रूरत इस क्षेत्र के छात्रों और पत्रकारों को पड़ती है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए मददगार साबित होगी। न सिर्फ़ छात्रों और पत्रकारों के लिए बल्कि आम पाठक, जो टेलीविज़न के इतिहास और उसके संसार को जानना और समझना चाहते हैं, उनके लिए भी उपयोगी और रुचिकर पुस्तक।
TRP : Media Mandi Ka Mahamantra
- Author Name:
Mukesh Kumar
- Book Type:

- Description:
पिछले ढाई दशकों में टेलीविज़न की सामग्री बड़े पैमाने पर बदली है। ख़ासतौर पर न्यूज़ चैनलों का चरित्र बुनियादी रूप से बदल गया है। मीडिया संस्थानों के स्वामित्व में आया बदलाव, बड़े कार्पोरेट घरानों का बढ़ता नियंत्रण और हस्तक्षेप, बाज़ार का प्रभाव इसके प्रमुख कारण हैं। आर्थिक उदारवाद के दौर में सत्ता के चरित्र में आए परिवर्तनों का भी इसमें योगदान रहा है। सत्ता के निरंकुशतावादी स्वरूप ने एक आतंक भी पैदा किया है, जिसके सामने मीडिया को नतमस्तक होना पड़ा है।
कार्पोरेट तथा सत्ता के अपने गणित भी हैं और मीडिया को उनसे तालमेल बैठाने के लिए भी बाध्य होना पड़ा है। मगर जहाँ तक बाज़ार का सवाल है तो उसका सबसे बड़ा हथियार है विज्ञापन। वह विज्ञापनों पर भारतीय मीडिया की निर्भरता का लाभ उठाता है। इसके लिए उसके पास एक बहुत ही कारगर हथियार है–टीआरपी यानी टेलीविज़न रेटिंग पॉइंट।
टीआरपी दरअसल क्या है, वह क्यों है और न्यूज़ चैनलों की सामग्री को कैसे नियंत्रित और संचालित करती है, इस बारे में ठोस जानकारियाँ कम ही उपलब्ध हैं। यही नहीं, अत्यधिक चर्चाओं में रहने के बावजूद टीआरपी मापने की प्रणाली में क्या ख़ामियाँ हैं, उसमें कैसे धाँधली की जाती है और वह कितनी विश्वसनीय है, है भी या नहीं, इस बारे में सामग्री का अभाव रहता है, जबकि इन सब पहलुओं के बारे में जाने बगैर न टीआरपी को समझा जा सकता है और न ही बाज़ार के ऑपरेट करने के तरीक़े को। यह किताब टीआरपी के इन तमाम रहस्यों से परदा उठाती है।
यह सवाल भी बड़ी अहमियत रखता है कि टीवी न्यूज़ या न्यूज़ चैनल टीआरपी के दुष्चक्र से निकल सकते हैं या नहीं? इस पुस्तक में इन प्रश्नों पर विचार करके कुछ रास्ते सुझाने की कोशिश भी की गई है।
शैक्षणिक, अकादमिक और पत्रकारिता तीनों ही क्षेत्रों में सक्रिय लोगों के लिए तो पुस्तक उपयोगी है ही, वे पाठक भी इससे लाभ उठा सकेंगे जिनकी दिलचस्पी मीडिया में आई विसंगतियों या नई प्रवृत्तियों को जानने-समझने में रहती है।
Kasauti Par Media
- Author Name:
Mukesh Kumar
- Book Type:

- Description:
पूँजी के भूमंडलीकरण और आर्थिक उदारवाद के आगमन के साथ शुरू हुए विस्मयकारी विस्तार ने मीडिया को यदि शक्तिशाली बनाया है तो उसका चरित्र भी बदल डाला है। वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के ‘हंस’ में लिखे स्तम्भ लेखों का संकलन है—यह पुस्तक। जिसके माध्यम बताया है कि मीडिया में आए इस परिवर्तन की वजहें क्या हैं, कौन से दबाव और प्रभाव इसके पीछे काम कर रहे हैं और इनके उद्देश्य क्या हैं? यह एक बहुत ही ज़रूरी काम था जो हिन्दी में बहुत देर से शुरू हुआ और बहुत कम हुआ। ‘हंस’ और मुकेश कुमार को इसका श्रेय जाता है कि उन्होंने इस ज़िम्मेदारी को पूरी गम्भीरता के साथ निभाया।
मुकेश कुमार पिछले लगभग चालीस साल से ज़्यादा समय से पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं। ‘हंस’ में प्रकाशित उनके लेखों से ज़ाहिर हो जाता है कि इस दौरान पत्रकारिता के सामने आनेवाली चुनौतियों को वे देखते-समझते रहे हैं। साथ ही उन्होंने इन समस्याओं के भीतर झाँककर उनके कारणों को भी जानने की कोशिश की है। मीडिया के सामने खड़ी चुनौतियों का सामना करने के रास्तों पर भी उनकी नज़र रही है। उन्होंने मीडिया उद्योग के हर आयाम को क़रीब से देखा-समझा है, इसलिए वे मीडिया में आए परिवर्तनों को ज़्यादा विश्वसनीय तरीक़े से लिख सके। ऐसा करते हुए उन्होंने अतिरिक्त साहस का परिचय भी दिया, क्योंकि अपने ही पेशे की ख़ामियों को बेबाकी से लिखना सबके लिए आसान नहीं।
मुझे लगता है कि मुकेश कुमार ने इस पूरे दौर में पैदा हुई मीडिया की हर आहट, उसकी हर करवट और हर दिन बदलते उसके पैतरों को अपनी नज़रों से ओझल नहीं होने दिया है। फिर चाहे वह स्टिंग ऑपरेशन की सच्चाई हो, साम्राज्यवाद और बाज़ारवाद का दबदबा हो, फ़िल्मी चकाचौंध हो या क्रिकेट का कारवाँ हो, दंगा-फसाद हो या चमत्कारियों का संसार हो। हर चीज़ को उन्होंने ईमानदारी से परखा है और अपनी साफ़ राय दी है। मीडिया के बदलते रंग-ढंग की परीक्षा करते हुए उनका नज़रिया बहुत ही स्पष्ट रहता है और वे यह काम पूरी जनपक्षधरता के साथ करते हैं। टीआरपी की होड़ से पैदा हुई दुष्प्रवृत्तियों के ख़िलाफ़ सख़्त रुख़ अपनाने से वे कभी पीछे नहीं हटे। उनकी क़लम ने मीडिया के उन्मादी स्वरूप की जमकर चीर-फाड़ की और उसके जातीय तथा साम्प्रदायिक चरित्र को बेनकाब करने में अगुआ रहे।
इन लेखों में एक चिन्ता साफ़ दिखाई देती है कि ख़बर जो भी हो मीडिया अक्सर असल मुद्दे से हटकर, उसे भावुकता की चाशनी में डुबाकर उन्माद पैदा करने की कोशिश करता है। मुकेश कुमार ने इस बात को प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया है कि रामजन्मभूमि विवाद के ज़माने में भी हालात ऐसे ही थे, और गुजरात के दंगे को लेकर विवाद हो या भारत पाक के बीच संकट की स्थिति, मीडिया में उन्माद के सिवा कुछ दिखाई नहीं देता।
Chainalon Ke Chehre
- Author Name:
Shyam Kashyap +1
- Book Type:

- Description:
न्यूज़ चैनलों की जब भी बात होती है तो उनके एंकर की चर्चा ज़रूर की जाती है। और कैसे न हो। एंकर किसी भी चैनल की पहचान होते हैं। वे चैनलों के चेहरे होते हैं। किसी भी चैनल के एंकर जिस तरह के होते हैं, उसके आधार पर ही यह राय बनाई जाती है कि वह चैनल कैसा है। अगर एंकर ख़ूबसूरत, समझदार, चौकन्ने हैं तो उस चैनल को भी लोग उसी नज़र से देखेंगे। इसलिए कोई भी चैनल एंकर के चयन को सबसे ज़्यादा महत्त्व देता है। वह ऐसे चेहरों की तलाश में रहता है जो दर्शकों को बाँध सकें। ज़ाहिर है कि टेलीविज़न एंकरिंग एक आकर्षक एवं प्रभावशाली विधा है, पेशा है और यह बहुत स्वाभाविक है कि छात्र ही नहीं, टेलीविज़न में वर्षों से काम कर रहे पत्रकार भी यह सपना पाले रहते हैं कि उन्हें भी स्क्रीन पर आने का मौक़ा मिले। इसलिए सबसे ज़्यादा प्रतिस्पर्धा भी एंकरिंग के लिए होती है। चैनल चलानेवाले भी एंकर के चयन के मामले में बेहद कठोर होते हैं। कोई भी चैनल एंकर को लेकर समझौता नहीं करना चाहता। इसलिए एंकर बनने के इच्छुक लोगों को यह ज़रूर पता होना चाहिए कि उनकी राह बहुत आसान नहीं है और यह सपना कैसे पूरा हो सकता है या उसे पूरा करने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए, इस पर सोचना ज़रूरी है। आजकल सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि एंकरिंग के बारे में विस्तार से जानने और फिर उसे सीखने का कोई इन्तज़ाम नहीं है। दिल्ली, मुम्बई जैसे कुछ बड़े शहरों को छोड़ दें तो कहीं ढंग के प्रशिक्षण संस्थान नहीं हैं। जहाँ हैं, वहाँ सिखानेवाले ख़ुद ही प्रशिक्षित नहीं हैं। बड़े शहरों में भी अधिकांश प्रशिक्षण संस्थान मोटी रक़म वसूलने के लिए ज़्यादा कुख्यात हैं। ऐसे में कमज़ोर हैसियत और छोटे तथा मझोले शहरों में रहनेवाले लोग क्या करें, कहाँ जाएँ? उन्हें तो किताबों की ही मदद से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना होगा। लेकिन मुश्किल यह है कि टेलीविज़न एंकरिंग पर ढंग की किताबें भी नहीं हैं। जो हैं वे दशकों पुरानी एंकरिंग को ध्यान में रखकर लिखी गई हैं जबकि अब उसमें आमूलचूल परिवर्तन आ चुका है। टेलीविज़न पत्रकरिता माला के तहत ‘चैनलों के चेहरे’ शीर्षक से एंकरिंग पर किताब लिखने का मक़सद इस कमी को पूरा करना ही है। कोशिश रही है कि यह किताब एंकरिंग की एक परिपक्व गाइड की भूमिका अदा करे। इसलिए टेलीविज़न के मौजूदा दौर को ध्यान में रखकर और एंकरिंग के बारे में विस्तार से जानकारी जुटाकर इसे तैयार किया गया है। यह पुस्तक एंकरिंग के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराती है, जिससे वे ख़ुद अपनी तैयारी को आगे बढ़ा सकें।
Khabrein Vistar Se
- Author Name:
Shyam Kashyap +1
- Book Type:

- Description:
भारतीय भाषाओं में टीवी पत्रकारिता के बारे में पढ़ने-पढ़ाने के लिए किताबें या तो लिखी ही नहीं गईं या फिर वे ऐसी नहीं हैं जो इस कमी को पूरी तरह भर सकें। हिन्दी में तो एक भी ढंग की किताब नहीं है। ‘ख़बरें विस्तार से’ का प्रकाशन इस दिशा में सार्थक प्रयास है।
टेलीविज़न के समाचारों का संकलन, सम्पादन, प्रस्तुतीकरण, वाचन और प्रसारण कैसे और किस तरह से होता है—यानी वे कौन लोग हैं जो ख़बरें लाते, बनाते और दिखाते हैं? एंकर, रिपोर्टर, प्रोड्यूसर, कैमरामैन, वीडियो एडिटर आदि बनने के लिए कहाँ जाएँ, क्या करें? या फिर समाचार चैनलों में कैसे काम होता है? ख़बरों की शूटिंग से लेकर प्रसारित होने तक में किस तरह की तकनीक का प्रयोग होता है? इन सारे सवालों का जवाब पाठक को ‘ख़बरें विस्तार से’ में मिल सकता है। इसे ठेठ भारतीय सन्दर्भ को ध्यान में रखकर लिखा गया है। यह किताब टीवी और ख़बरों की दुनिया को पूरी तरह समझने में मदद करती है। पुस्तक की रूपरेखा इस ढंग से तैयार की गई है कि पाठकों का परिचय टीवी न्यूज़ की बदलती दुनिया से भी हो और ख़बरें बनने की प्रक्रिया को समझने में भी उन्हें सुविधा हो। पुस्तक में न्यूज़ चैनलों की सम्पादकीय और तकनीकी कार्यप्रणाली की विस्तारपूर्वक चर्चा की गई है। ‘ख़बरें विस्तार से’ टेलीविज़न पत्रकारिता के छात्रों व शिक्षकों के साथ सामान्य पाठकों के लिए भी उपयोगी होगी, ऐसा हमारा विश्वास है।
Ethics For Civil Services With 100 Case Studies
- Author Name:
Alok Ranjan
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Main J. Krishnamurti Bol Raha Hoon
- Author Name:
Ed. Rajasvi
- Book Type:

- Description:
"जिद्दू कृष्णमूर्ति का नाम आध्यात्मिक जगत् में विशेष रूप से उल्लेखनीय है। जब वे मात्र तेरह वर्ष के थे, तभी उनमें एक आध्यात्मिक गुरु होने की विशिष्टताएँ दृष्टिगोचर होने लगी थीं। उन्होंने न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी आध्यात्मिकता का परचम लहराया। जे. कृष्णमूर्ति के विचार केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि भौतिक दृष्टि से अत्यंत महवपूर्ण हैं, जो जाति, धर्म और संप्रदाय में उलझे, असमंजस में फँसे और दिग्भ्रमित हुए लोगों का यथोचित मार्गदर्शन करते प्रतीत होते हैं। उन्होंने मानव-जीवन के लगभग सभी पहलुओं को अपनी विचारशीलता के दायरे में लाने का सफल प्रयास किया है। किंचित् मात्र भी ऐसा नहीं लगता कि जीवन की कोई भी जटिल वीथि उनकी दृष्टि से ओझल हो गई हो। उनके जीवन का परम लक्ष्य विश्व को शांति, संतुष्टि और संपूर्णता प्रदान करना था, ताकि ईर्ष्या, द्वेष और स्वार्थ का समूल नाश किया जा सके। वे अपने जीवन-लक्ष्य में काफी हद तक सफल रहे। जो भी उनके संपर्क में आया, मानो उनका ही होकर रह गया। उनकी प्रेरक वाणी के कुछ रत्न इस पुस्तक में संकलित हैं।
Hanuman Gatha (Shri Hanuman Ji Ka Sampuran Jeevan Gatha) Devotional & Spiritual Hanuman Katha Book in Hindi
- Author Name:
Ashok Narayan
- Book Type:

- Description:
ज्ञानिनामाग्रगण्य सकल गुणनिधान कपिप्रवर हनुमान के बारे में कौन नहीं जानता? अद्वितीय प्रतिभा और अतुलित बल के कुबेर होते हुए भी उन्होंने स्वार्थ के लिए उसका उपयोग कभी नहीं किया। साधारण मनुष्य में यदि विद्या, गुण या कौशल आदि थोड़े से गुण भी आ जाएँ, तो वह दर्प से चूर हो जाता है, परंतु हनुमान सर्वगुण-संपन्न होकर भी सेवक ही बने रहे। प्रस्तुत पुस्तक ‘हनुमानगाथा’ में संकट-मोचक हनुमान के संपूर्ण जीवन को रामायण, रामचरितमानस आदि ग्रंथों के परिप्रेक्ष्य में आत्मकथात्मक शैली में पवनपुत्र के श्रीमुख से विवेचन हुआ है। हनुमान का चरित्र अलौकिक गुणों से संपन्न असंभव को संभव बनानेवाला है। आज के भौतिकवादी संसार में हनुमान के पावनचरित को अपनाए जाने की महती आवश्यकता है। वर्तमान में संसार को सेवा और भक्ति की पहले से कहीं ज्यादा आवश्यकता है। इसके लिए सबसे बड़े आदर्श और प्रेरणास्रोत हनुमान ही हो सकते हैं। इस नाते परोपकारी हनुमान का चरित अनुकरणीय है। सुधी पाठक हनुमान के पावन गुणों को आत्मसात् कर घोर कष्टों और अशांति से निजात पाएँ, इसी में इस पुस्तक के लेखन की सफलता है।
Vetal Pachchisi
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description:
"वेताल पच्चीसी 25 कहानियों का एक अनूठा संग्रह है, जो जगत्-प्रसिद्ध राजा विक्रमादित्य के न्याय-प्रेम के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है | प्रत्येक कहानी के अंत में वेताल विक्रमादित्य से गुदगुदाने वाला एक प्रश्न पूछता है, जिसका उत्तर राजा को देना होता है | जैसे ही विक्रमादित्य उत्तर देते हैं, पहले से तय शर्त के अनुसार, वेताल फिर से अपने पसंदीदा पेड़ पर लटकने के लिए उड़ जाता है। ये कहानियाँ राजा विक्रमादित्य के ज्ञान, न्यायप्रियता, प्रजाप्रेम, शौर्य और मूल्ययरक शासन से परिचय करवाती हैं। इन्हें पढ़कर पाठकों को तत्कालीन शासन व्यवस्था का बोध हो सकेगा।"
21 ANMOL KAHANIYAN
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
हिदी के कालजयी रचनाकार मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ जनसाधारण की समस्याओं, आकांक्षाओं, उलझनों, पारिवारिक विघटन, दहेज-प्रथा, बाल विवाह, राष्ट्रद्रोह, घूसखोरी, अंधविश्वास, ग्रामीण शोषण, आर्थिक वैषम्य इत्यादि विषयों को समेटे हुए अपने पाठकों से एक आत्मीय एवं भावनात्मक नाता जोड़ती हैं। उनकी कहानियों में समस्याओं की जितनी चर्चा है, समाधान की उससे ज्यादा। उनके पात्र अर्थगत दबावों से बेशक पीडि़त हैं, पर वे बाहरी संघर्षों द्वारा समस्याओं पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने अपनी कथाओं में नग्न यथार्थ नहीं, वरन् यथार्थ का भरसक चित्रण किया है, क्योंकि नग्न यथार्थ वितृष्णा उपजाता है। पात्र कभी सुख की अनुभूति करते हैं तो कभी दुःख की। इसी को रचनाओं के साथ साहित्यिक न्याय कहा जाता है, जिस पर मुंशी प्रेमचंद खरे उतरे हैं। ‘21 अनमोल कहानियाँ’ उनके ऐसे ही नगीने हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं और समाज की विद्रूपताओं पर गहरी चोट करते हैं।
Leo Tolstoy Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Leo Tolstoy
- Book Type:

- Description:
"‘‘क्या वे लोग खेत जोत रहे हैं? क्या उन लोगों ने अपना काम खत्म कर लिया?’’ ‘‘उन लोगों ने आधे से अधिक खेत जोत लिये हैं।’’ ‘‘क्या कुछ भी काम बचा नहीं है?’’ ‘‘मुझे तो नहीं दिखा; पर उन्होंने जुताई अच्छी तरह से की है। वे सभी डरे हुए हैं।’’ ‘‘ठीक है। अब तो जमीन ठीक हो गई है न?’’ ‘‘हाँ, अब खेत तैयार हैं और उनमें अफीम के पौधों के बीज डाले जा सकते हैं।’’ मैनेजर थोड़ी देर चुप रहने के बाद बोला, ‘‘वे लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं? क्या वे मुझे गाली देते हैं?’’ बूढ़ा कुछ हकलाने लगा, पर माइकल ने उसे सच बोलने के लिए कहा, ‘‘तुम मुझे सच बताओ। तुम अपने शब्द नहीं, बल्कि किसी और के शब्द बोल रहे हो। यदि तुम मुझे सच-सच बताओगे, तब मैं तुमको इनाम दूँगा; और अगर तुम मुझे धोखा दोगे तो ध्यान रखना, मैं तुम्हें बहुत मारूँगा। कर्तुशा! इसे एक गिलास वोदका दो, ताकि इसमें साहस पैदा हो।’’ —इसी संग्रह से • सुप्रसिद्ध रूसी कथाकार लियो टॉलस्टॉय ने जीवन के सभी पक्षों पर प्रभावी रचनाएँ की हैं। उन्होंने धर्म में व्याप्त पाखंड तथा तत्कालीन कुरीतियों को अनावृत किया। मनोरंजन के साथ-साथ मन को उद्वेलित करनेवाली सरस टॉलस्टॉय की लोकप्रिय कहानियों का संग्रह।"
The Little Book of Rumi
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Mera Daur "मेरा दौर: एक आत्मकथा" Book in Hindi- J.B. Kriplani
- Author Name:
J.B. Kriplani
- Book Type:

- Description:
अनेक दूसरे लोगों की तरह मैं भी विदेशी साम्राज्यवाद के जुए से मातृभूमि को आजाद कराने के लिए क्रांतिकारी आंदोलन से करीब से जुड़ा था। गांधीजी जब सन् 1915 के शुरू में दक्षिण अफ्रीका से आए तो उनके निकट संपर्क में आने वाला मैं पहला राजनीतिक कार्यकर्ता था। मैं उनके पहले सत्याग्रह आंदोलन के साथ भी करीब से जुड़ा था, जो चंपारण (बिहार) में गोरे निलहों के अत्याचार के खलाफ हुआ। हमारी आजादी की लड़ाई के सबसे महत्वपूर्ण और बेचैनी वाले दौर में मैं कांग्रेस का बारह वर्ष तक महामंत्री रहा। जिस साल देश को आजादी मिली, उस वक़्त मैं कांग्रेस अध्यक्ष था। मेरे दोस्तों को लगता है कि हमारे राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाओं और व्यक्तियों के बारे में मेरी जानकारी काफी अंतरंग और नई चीजें सामने लाने वाली होगी। इस कारण मेरे संस्मरणों का कुछ ऐतिहासिक महत्व होगा। इसलिए मैंने जो कुछ लिखा है, उसमें अपने बारे में कम लिखकर हमारी आजादी की लड़ाई पर ज्यादा लिखा है। इस पुस्तक को मैंने ‘माई टाइम्स : मेरा दौर’ नाम दिया है, पर इसमें ‘मैं’ का जिक्र उतना ही भर है, जितना जरूरी है। मेरे जीवन की कथा में भी कांग्रेस और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का बड़ा हिस्सा समाया हुआ है। इसलिए यह कोई आत्मकथा न होकर, इन बड़ी और महत्वपूर्ण घटनाओं का रिकॉर्ड भी है और इनका वर्णन करते हुए मैंने यह जिक्र कम किया है कि मैंने क्या-क्या किया, बल्कि यह बताने की कोशिश की है कि मैंने तब क्या देखा और समझा।
Mera Daur "मेरा दौर: एक आत्मकथा" Book in Hindi- J.B. Kriplani
J.B. Kriplani
20% off₹ 900
₹ 720
Available
Ikigai
- Author Name:
Dr. Rashmi
- Book Type:

- Description:
क्या है इकिगाई इकिगाई के बारे में कोई भी चर्चा मिएको कामिया के उल्लेख के बिना पूरी नहीं होगी, जिन्हें प्राय: ‘इकिगाई मनोविज्ञान की माँ’ कहा जाता है। वह इकिगाई के अध्ययन में अग्रणी लोगों में शामिल थीं और अपनी पुस्तक ‘इकिगाईनी- सुइत’ (क्या हमारे जीवन को जीने योग्य बनाता है) में उन्होंने अपने विचारों और शोध कार्य को प्रस्तुत किया है। पुस्तक को इकिगाई साहित्य में श्रेष्ठ ग्रंथों में माना जाता है, इस तथ्य के बावजूद कि यह सन 1966 में प्रकाशित हुई थी। —इसी पुस्तक से इकिगाई में जीवन में खुशियाँ समाई हैं। यह हमारे होने का कारण है। इकिगाई की मदद से आप जीवन में हर दिन संतुलन, प्रसन्नता और तृप्ति ढूँढ़ पाते हैं। इकिगाई मात्र एक जीवन-दर्शन या विचारधारा नहीं बल्कि एक परिवर्तनकारी मानव-अनुभव है। इकिगाई किसी कंपास की तरह कॅरियर और जीवन के फैसलों में राह दिखा सकता है।
Over The Top "ओवर द टॉप" : OTT ka Mayajaal Book in Hindi - Anant Vijay
- Author Name:
Anant Vijay
- Book Type:

- Description:
ओवर द टॉप (ओ.टी.टी.) प्लेटफॉर्म हमारे देश के लिए मनोरंजन का अपेक्षाकृत नया माध्यम है। इस माध्यम को हमारे देश में आरंभ हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है। देश में इंटरनेट का बढ़ता घनत्व और डाटा सस्ता होने के कारण इस प्लेटफॉर्म की व्याप्ति बढ़ी है। कोरोना महामारी के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन ने भी इस माध्यम को लोकप्रिय बनाया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों और ओ.टी.टी. प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों के बीच ओ.टी.टी. के कंटेंट को लेकर विचारों का आदान-प्रदान होता रहा है। ओवर द टॉप प्लेटफॉर्म्स पर दिखाई जानेवाली सामग्री के विनियमन को लेकर जो त्रिस्तरीय व्यवस्था बनाई गई थी, उसके परिणाम संतोषजनक नहीं दिखाई दे रहे हैं। न तो अश्लीलता रुक रही है और न ही विवादित प्रसंग। ओ.टी.टी. प्लेटफॉर्म्स पर दिखाई जानेवाली सामग्री में गालियों की भरमार, यौनिकता और नग्नता का प्रदर्शन, जबरदस्त हिंसा और खून- खराबा, अल्पसंख्यकों की स्तिथि को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ, कई बार सैनिकों की छवि खराब करने जैसे प्रसंग भी सामने आते रहे हैं। अभिव्यक्त की रचनात्मक स्वतंत्रता और यथार्थ की आड़ में नग्नता एवं गाली-गलौज दिखाने का चलन कम नहीं हुआ। संसदीय समिति ने ओ.टी.टी. प्लेटफॉर्म पर दिखाई जानेवाली अश्लीलता पर चिंता प्रकट की थी। समिति के अधिकांश सदस्यों का मानना था कि इनमें दिखाई जानेवाली सामग्री भारतीय संस्कृति के विरुद्ध है। ओ.टी.टी. के सभी पक्षों पर विश्लेषणात्मक विवरण देती विचारप्रधान पुस्तक।
Hamara Panchayati Raj
- Author Name:
Pratapmal Devpura
- Book Type:

- Description:
भारत की आत्मा गाँवों में बसती है। ग्राम-व्यवस्था वस्तुतः राष्ट्र-व्यवस्था की बुनियाद है। यही कारण है कि हमारे राष्ट्रनायकों ने सामाजिक उन्नयन, आर्थिक विकास, सांस्कृतिक प्रगति और राजनीतिक चेतना की दृष्टि से गाँवों को पर्याप्त महत्त्व दिया है। सबका मानना है कि भारत के विकास का रास्ता गाँवों से होकर गुज़रता है। महात्मा गांधी के श्रम, स्वदेशी और स्वावलम्बन की कर्मभूमि अधिकांश अर्थ में गाँव ही है। प्रतापमल देवपुरा द्वारा लिखित ‘हमारा पंचायती राज’ पुस्तक पंचायती राज के प्रति जानकारी व जागरूकता उत्पन्न करने हेतु लिखी गई है। पुस्तक जनप्रतिनिधियों से लेकर सामान्य नागरिकों के लिए सामाजिक रूप से उपयोगी है। 50 छोटे-छोटे अध्यायों में पंचायती राज से जुड़ी विभिन्न जिज्ञासाओं व जानकारियों की सूत्र-शैली में प्रस्तुति सकारण है। इस पद्धति से सूचनाएँ सरलता से प्राप्त हो जाती हैं। जैसे ‘सूचना का अधिकार’ के अन्तर्गत पहला सूत्र है, ‘सूचना के अधिकार का अर्थ है—नागरिकों द्वारा सूचना माँगने पर सूचना मिले जिससे उसका जीवन बेहतर एवं सुरक्षित बने; इसके साथ ही सरकारी विभागों द्वारा सूचना देने का कर्तव्य।’ सरल व सुबोध भाषा में लिखित ‘हमारा पंचायती राज’ अत्यन्त जनोपयोगी पुस्तक है।
Sundarakanda
- Author Name:
Tulsidas
- Book Type:

- Description:
संवत् 1631 में तुलसीदासजी ने श्रीरामचरितमानस की रचना प्रारंभ की। दो वर्ष, सात महीने और छब्बीस दिन में यह अद्भुत ग्रंथ संपन्न हुआ। सुंदरकांड मूलतः गोस्वामी तुलसीदास कृत इसी श्रीरामचरित मानस का एक भाग है। सुंदरकांड में हनुमानजी द्वारा किए गए महान् कार्यों का वर्णन है। मानस पाठ में सुंदरकांड के पाठ का विशेष महत्त्व माना जाता है। सुंदरकांड में हनुमान का लंका प्रस्थान, लंका दहन कर लंका से वापसी तक के घटनाक्रम आते हैं। साथ ही उनकी असीम शक्ति, बुद्धि-कौशल और अनन्य भक्ति का पता चलता है। सुंदरकांड का पारायण वाले साधक को असीम ऊर्जा और प्रेरणा प्राप्त होती है।
Katha Ek Kans Ki "कथा एक कंस की" | A Classic Play of Theatre Book in Hindi
- Author Name:
Daya Prakash Sinha
- Book Type:

- Description:
"नाटक साहित्य है और कला भी। नाटक का यह द्विआयामी चरित्र ही उसकी विशेषता है। कुछ नाटकों का साहित्य में बड़ा सम्मान होता है, किंतु रंगमंच पर उनकी प्रस्तुति सफल नहीं होती । इसी प्रकार कुछ नाटक रंगमंच पर बड़े सफल होते हैं, किंतु उनके आलेख में साहित्यगत मूल्यों का अभाव होता है। श्रेष्ठ नाटक वे होते हैं, जो साहित्यगत मूल्यों से भरपूर हों और जिनकी प्रस्तुतियाँ रंगमंच पर भी उतनी ही सफल सिद्ध हों; जैसे शेक्सपियर के नाटक। यह नाटक के मूल्यांकन की कसौटी हैं। नाटक “कथा एक कंस की' इस कसौटी पर खरा उतरता है। “कथा एक कंस की' नाटक देश के प्राय: सभी बड़े नगरों दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, लखनऊ, जयपुर, भोपाल, चंडीगढ़, भुवनेश्वर, गोरखपुर, कानपुर, देहरादून, प्रयागगाज, उदयपुर आदि की नाट्य संस्थाओं द्वारा मंचित हो चुका है। पंजाबी तथा ओडिया भाषाओं में भी इसका अनुवाद हो चुका है। तमिल, कनन्नड, तेलुगु, मलयालम और बांग्ला भाषाओं में अनुवाद प्रकाशनाधीन हैं। “कथा एक कंस की"" नाटक दिल्ली विश्वविद्यालय सहित अनेक विश्वविद्यालयों तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता रहा है। साहित्य-जगत तथा कला-जगत दोनों द्वारा स्वीकृत और सम्मानित “कथा एक कंस की ' हिंदी नाटक विधा की एक कालजयी कृति है।"
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book