Grameen Swachchhata
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मुअनजोदड़ो सभ्यता से लेकर आज तक मल-मूत्र विसर्जन के सुरक्षित तथा स्वास्थ्य के लिए कम हानिकारक उपायों की खोज होती आ रही है। जनसंख्या-वृद्धि के साथ यह समस्या और गम्भीर हुई है, साथ ही ग्रामीण इलाक़ों में पर्याप्त जागरूकता के अभाव के चलते जन-स्वास्थ्य के लिए इसने कई चुनौतियाँ खड़ी की हैं। यह पुस्तक आज़ादी के बाद से भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में होनेवाले स्वच्छता-प्रयासों पर बात करते हुए उन तमाम प्रविधियों पर बात करती है जिनका प्रयोग देश के विशाल ग्रामीण भू-भाग में स्वच्छता को सम्भव बनाने के लिए किया जा सकता है। स्वच्छता क्यों ज़रूरी है? मल-मूत्र निपटान के आधुनिक और प्रौद्योगिकीय विकल्प क्या हैं? गोबर गैस संयंत्र की इसमें क्या भूमिका रही और क्या हो सकती है, विभिन्न सांस्कृतिक और विविध जीवन-शैलियों के हमारे समाज में स्वच्छता के प्रति सजगता के लिए कैसा अभियान चाहिए, उसके लिए काम करनेवाले लोगों का प्रशिक्षण कैसे हो, एक-एक व्यक्ति को स्वच्छता और स्वास्थ्य के विषय में कैसे समझाया-बताया जाए, यह पुस्तक इन विषयों पर आँकड़ों, तथ्यों और विस्तार के साथ बात करती है। स्वच्छता के प्रति इधर सरकार का आग्रह भी और बढ़ा है, इस सन्दर्भ में यह पुस्तक विशेष रूप से पठनीय और अनुकरणीय है।
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मुअनजोदड़ो सभ्यता से लेकर आज तक मल-मूत्र विसर्जन के सुरक्षित तथा स्वास्थ्य के लिए कम हानिकारक उपायों की खोज होती आ रही है। जनसंख्या-वृद्धि के साथ यह समस्या और गम्भीर हुई है, साथ ही ग्रामीण इलाक़ों में पर्याप्त जागरूकता के अभाव के चलते जन-स्वास्थ्य के लिए इसने कई चुनौतियाँ खड़ी की हैं।
यह पुस्तक आज़ादी के बाद से भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में होनेवाले स्वच्छता-प्रयासों पर बात करते हुए उन तमाम प्रविधियों पर बात करती है जिनका प्रयोग देश के विशाल ग्रामीण भू-भाग में स्वच्छता को सम्भव बनाने के लिए किया जा सकता है।
स्वच्छता क्यों ज़रूरी है? मल-मूत्र निपटान के आधुनिक और प्रौद्योगिकीय विकल्प क्या हैं? गोबर गैस संयंत्र की इसमें क्या भूमिका रही और क्या हो सकती है, विभिन्न सांस्कृतिक और विविध जीवन-शैलियों के हमारे समाज में स्वच्छता के प्रति सजगता के लिए कैसा अभियान चाहिए, उसके लिए काम करनेवाले लोगों का प्रशिक्षण कैसे हो, एक-एक व्यक्ति को स्वच्छता और स्वास्थ्य के विषय में कैसे समझाया-बताया जाए, यह पुस्तक इन विषयों पर आँकड़ों, तथ्यों और विस्तार के साथ बात करती है।
स्वच्छता के प्रति इधर सरकार का आग्रह भी और बढ़ा है, इस सन्दर्भ में यह पुस्तक विशेष रूप से पठनीय और अनुकरणीय है।
Book Details
-
ISBN9789382193098
-
Pages96
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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प्रतिष्ठित कथाकार असगर वजाहत की उपन्यास-त्रयी का अन्तिम भाग 'धरा अँकुराई' एक बहुआयामी कथानक को जीवन की सच्चाइयों तक पहुँचाता है। ‘कैसी आगी लगाई’ और ‘बरखा रचाई’ शीर्षक से त्रयी के दो भाग पूर्व में प्रकाशित होकर पर्याप्त प्रशंसा प्राप्त कर चुके हैं। अनेक विवरणों, वृत्तान्तों, परिस्थितियों और अन्त:संघर्षों से गुज़रती यह कथा-यात्रा ‘जीवन के अर्थ’ का आईना बन जाती है। एक दीगर प्रसंग में आया वाक्य है, ‘...यह यात्रा संसार के हर आदमी को जीवन में एक बार तो करनी ही चाहिए।’ यह अन्त:यात्रा है। इससे व्यक्ति जहाँ पहुँचता है, वहाँ एक प्रश्न गूँज रहा है कि आख़िर इस जीवन की सार्थकता व प्रासंगिकता क्या है? उपन्यास-त्रयी के तीन प्रमुख पात्रों में से एक सैयद साजिद अली, जिन्होंने पत्रकारिता की कामयाब ज़िन्दगी जी है, महसूस करते हैं कि उनके भीतर एक ख़ालीपन फैलता जा रहा है। लगता है कि अब तक जिया सब बेमक़सद रहा। सैयद साजिद अली ‘ज़िन्दगी का अर्थ’ समझने के लिए उसी छोटी-सी जगह लौटते हैं, जहाँ से निकलकर वे जाने कहाँ-कहाँ गए थे। उपन्यासकार ने छोटी-छोटी घटनाओं के ज़रिए व्यक्ति और समाज की कशमकश को शब्द दिए हैं। प्रवाहपूर्ण भाषा ने पठनीयता में इज़ाफ़ा किया है। मौक़े-ब-मौक़े उपन्यास में वर्तमान की समीक्षा भी है, ‘‘जनता का पैसा किसी का पैसा नहीं है। यह माले-मुफ़्त है जो हमारे देश में बेदर्दी से बहाया जाता है और इसकी बारिश में अफ़सर, नेता और ठेकेदार नहाते हैं। हमने लोकतंत्र के साथ-साथ ‘विकास’ का भी एक विरला स्वरूप विकसित किया है जो कम ही देशों में देखने को मिलेगा। एक पठनीय व संग्रहणीय उपन्यास।
Prithvi Manthan : Vaishvik Bharat Banane Ki Kahani
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Aseem Shrivastava +2
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यह एक बेहतरीन किताब है...कक्षा में मैं इसका प्रयोग किसी और पुस्तक से ज़्यादा करता हूँ। —पी. साईनाथ; पत्रकार व लेखक प्रचार-हमला को चीरती हुई यह किताब बताती है कि आज क्या हो रहा है। —अमिताव घोष; लेखक यह आज के विरोधी-धाराओं का एक महत्त्वपूर्ण वृत्तान्त है...इस पक्ष को सुनना और समझना ज़रूरी है। —अरुणा रॉय; समाजकर्मी वैश्वीकरण के विशाल पुस्तक-संग्रह में यह किताब बौद्धिक साहस और ईमान का एक कीर्तिमान है जो बेहतर दुनिया के लिए रास्ता दिखाती है। —अमित भादुड़ी; अर्थशास्त्री आज अगर गाँधी जी ज़िन्दा होते और 'हिन्द स्वराज' की रचना करते, तो उन्हें लगभग उन्हीं सवालों से जूझना पड़ता जो इस किताब में हैं। —गणेश देवी; लेखक और भाषाविद् यह किताब दर्शाती है कि इस वैश्विक युग में हमारी तथाकथित स्वेच्छा वस्तुत: कितनी पराधीन है...आज की दुनिया से चिन्तित किसी भी इनसान के लिए यह पुस्तक अनिवार्य है। —मल्लिका साराभाई; नृत्यांगना और संस्कृतिकर्मी आज के वैश्विक युग की तमाम तब्दीलियों के परिप्रेक्ष्य में यह पुस्तक एक महत्त्वपूर्ण संश्लेषण है...साथ ही इस किताब में एक वैकल्पिक दुनिया की कल्पना की गई है जिस पर गम्भीरता से सोचने और बहस करने की ज़रूरत है। —माधव गाडगिल; पर्यावरणशास्त्री यह एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण और असरदार किताब है...लेखक जो व्यापक प्रमाण पेश करता है उसका हमें सामना करना होगा। —हर्ष मंदर; समाजकर्मी
Prithvi Manthan : Vaishvik Bharat Banane Ki Kahani
Aseem Shrivastava
20% off₹ 199
₹ 159.2
Available
Katha Satisar
- Author Name:
Chandrakanta
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शैव, बौद्ध और इस्लाम की साँझी विरासतों से रची कश्मीर वादी में पहले भी कई कठिन दौर आ चुके हैं। कभी औरंगजेब के समय, तो कभी अफ़ग़ान-काल में। लेकिन वे दौर आकर गुज़र गए। कभी धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेगबहादुर मसीहा बनकर आए, कभी कोई और। तभी ललद्यद और नुन्दऋषि की धरती पर लोग भिन्न धर्मों के बावजूद, आपसी सौहार्द और समन्वय की लोक-संस्कृति में रचे-बसे जीते रहे। आज वही आतंक, हत्या और निष्कासन का कठिन सिकन्दरी दौर फिर आ गया है, तब सिकन्दर के आतंक से वादी में पंडितों के कुल ग्यारह घर बचे रह गए थे। गो कि नई शक्ल में नए कारणों के साथ, पर व्यथा-कथा वही है—मानवीय यंत्रणा और त्रास की चिरन्तन दु:ख-गाथा। लोकतंत्र के इस गरिमामय समय में, स्वर्ग को नरक बनाने के लिए कौन ज़िम्मेदार हैं? छोटे-बड़े नेताओं, शासकों, बिचौलियों की कौन-सी महत्त्वाकांक्षाओं, कैसी भूलों, असावधानियों और ढुलमुल नीतियों का परिणाम है—आज का रक्त-रँगा कश्मीर? पाकिस्तान तो आतंकवाद के लिए ज़िम्मेदार है ही, पर हमारे नेतागण समय रहते चेत क्यों न गए? ऐसा क्यों हुआ कि जो औसत कश्मीरी, ग़ुस्से में, ज़्यादा-से-ज़्यादा, एक-दूसरे पर काँगड़ी उछाल देता था, वही कलिशनिकोव और एके सैंतालीसों से अपने ही हमवतनों के ख़ून से हाथ रँगने लगा? ‘ऐलान गली ज़िन्दा है’ तथा ‘यहाँ वितस्ता बहती है’ के बाद कश्मीर की पृष्ठभूमि पर लिखा गया चर्चित लेखिका चन्द्रकान्ता का बृहद् उपन्यास है—‘कथा सतीसर’। लेखिका ने अपने इस उपन्यास में पात्रों के माध्यम से मानवीय अधिकार और अस्मिता से जुड़े प्रश्नों को उठाया है। इस पुस्तक में सन् 1931 से लेकर 2000 के शुरुआती समय के बीच बनते-बिगड़ते कश्मीर की कथा को संवेदना का ऐसा पुट दिया गया है कि सारे पात्र सजीव हो उठते हैं । सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में घटे हादसों से जन-जीवन के आपसी रिश्तों पर पड़े प्रभावों का संवेदनात्मक परीक्षण ही नहीं है यह पुस्तक, वर्तमान के जवाबदेह तथ्यों को साहित्य में दर्ज करने से एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ भी बन गई है।
Aklant Kaurav
- Author Name:
Mahashweta Devi +1
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यह उपन्यास सामयिक वाम राजनीति के परस्पर विरोधी पक्षों के संघर्ष की प्रामाणिक दस्तावेज़ है और इतनी परिपक्व राजनीतिक सूझ-बूझ और प्रखर सामाजिक चेतना से ओतप्रोत कि वाम राजनीति की विचारधाराओं के घटाटोप आकाश के स्पष्ट दिशा-संकेत देता है। संथालों के जागुला गाँव में द्वैपायन सरकार का आगमन एक ऐसी थीसिस लिखने के लिए होता है, जिसका उद्देश्य संथालों की ताक़त और उनकी एकता को छिन्न-भिन्न करना है। वाम राजनीति के दक्षिणी छोर के स्थायी निवासी द्वैपायन सरकार किन्हीं अदृश्य शक्तियों से चालित होकर अक्सर इसी तरह के विषयों के अनुसन्धानकर्ता के रूप में प्रख्यात हैं, किन्तु अब उन्हें पहचान लिया गया है। युवा इन्द्र प्रामाणिक कलकत्ता के यूनियन फ़्रंट पर बड़े नेताओं के बदलते तेवर देखकर ईमानदारी से गाँव में काम करने के लिए आया है, किन्तु नवीन बाबू और मोती बाबू जैसे सजे-धजे काडरों का उसे नक्सल सिद्ध करने में कौन-सा मक़सद है? ईमानदार काडर और बेईमान काडर तथा छुटभैये कॉमरेडों के इस संघर्ष में संथालों को अपना विश्वसनीय पक्ष ढूँढ़ने में कोई कठिनाई नहीं होती। यह उपन्यास पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा खेतिहर भूमि के बँटवारे के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन बर्गा’ के लाभों से वंचित आदिवासी जातियों की संघर्ष-गाथा है। न्याय की लड़ाई का प्रामाणिक दस्तावेज़ है।
Ped-Paudhe Aur Jeev-Jantu
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Varen Nocks +1
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छोटे स्कूली बच्चों के लिए तैयार की गई यह पुस्तक उन्हें प्रकृति,पेड़-पौधों जीव-जन्तुओं और वर्षा आँधी जैसी घटनाओं के बारे में आरम्भिक जानकारी देती है। चित्रों की सहायता से कहीं कहानी की तरह तो कहीं घर में किए जा सकनेवाले प्रयोगों के माध्यम से यह बच्चों को उनके आसपास के परिवेश का वैज्ञानिक बोध कराती है। दिशाएँ क्या हैं, उन्हें कैसे पहचानें, आकाश में ध्रुवतारे, सूरज, चाँद आदि के बारे में सरल शब्दों में बताया गया है जिससे बालक अपनी आरम्भिक जिज्ञासाओं को भविष्य के लिए वैज्ञानिक सोच की तरफ़ मोड़ सकें। आभास के लिए सरल प्रश्नोत्तरी के माध्यम से बच्चे अकेले या अपने साथियों के साथ दिलचस्प खेल भी खेल सकते हैं।
Janwar Aur Unka Bhojan
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Varen Nocks +1
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पेड़-पौधों को खाकर जीनेवाले जानवर कौन-से होते हैं कीड़े-मकोड़े हमारे लिए क्या करते हैं अलग-अलग जानवरों के दाँत पैर आदि किस तरह अलग-अलग होते हैं। मौसमों के अनुसार हमें कौन से पक्षी कीड़े आदि दिखाई देते हैं और इसी तरह के ढेरों प्रश्नों के जवाब बच्चे चित्रों की सहायता से इस पुस्तक में पाएँगे। पानी के प्राणियों के साथ पानी और उसके विभिन्न रूपों पर भी एक अध्याय है और पृथ्वी के विषय में जानकारी देनेवाली कुछ सामग्री भी इस पुस्तक में रखी गई है। इस पुस्तक का उद्देश्य स्कूली छात्रों को अपने आसपास के परिवेश के विषय में वैज्ञानिक जानकारी देना है। सरल प्रयोगों प्रश्न-अभ्यासों और ‘स्वयं करके देखो’ जैसी प्रविधियों से प्रयास किया गया है कि यह ज्ञान बच्चों की सोच का हिस्सा बन जाए और वे आगे चलकर विज्ञान सम्मत सोच को अपने जीवन का हिस्सा बना सकें।
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