Songs of Life (Collection of Poems)
Author:
Dr. A.P.J. Abdul KalamPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
The Songs of Life is presented with selected poems from my books of poem Life Tree, Luminous Sparks and My Journey and also some of my new poems. The purpose of this Songs of Life is to celebrate the human life. In spite of many sufferings all around, God has blessed us with his grace in multiple dimensions of nature smiling at us. Hence, Songs of Life is the Song of every heart and soul in happiness and, in sorrow. The result of the poems should be to cheer our hearts.
ISBN: 9789390366262
Pages: 112
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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परम्परा और आधुनिकता का समन्वय करते हुए लोक-मन और उसमें प्रवाहित करुणा के सामाजिक भाव को अपनी रचनाओं में समेटकर जीवन की गाथाएँ रचने वाले चन्द्रकिशोर जायसवाल का यह उपन्यास पारिवारिक जीवन के सौन्दर्य को इतने विस्तार और बारीकी से सम्भवत: पहली बार अपने कथानक का विषय बनाता है। कथानक के केन्द्र में शशांक, दिव्या और इस दम्पति का पुत्र टीपू हैं। इन्हीं पात्रों और इनके जीवन के बहाने लेखक ने इस उपन्यास में ग्रामीण और कस्बाई जीवन के छोटे-छोटे ब्योरों से यह कथा बुनी है जो दरअसल भारत के समूचे लोक-परिवेश का महाख्यान है।
यह उपन्यास सम्बन्धों के जटिल संजाल के साथ लोक की उस ऊष्मा को भी पुनर्जीवित करता है, जो हमारे आधुनिक समय के हाशिये पर उपेक्षित जा पड़ी है। विवरण-सघनता इस उपन्यास में एक तरफ अगर लेखक की विशाल अनुभव-सम्पदा का प्रमाण है तो दूसरी तरफ उसकी रचनात्मक ऊर्जा का भी साक्ष्य है। यही वह भूमि है जो इस उपन्यास को अनूठा और दुर्लभ बनाती है, और जिससे गुजरते हुए पाठक इसके संसार का हिस्सा हो जाता है।
जिजीविषा के साथ यह उपन्यास मृत्यु को भी अपने कथ्य की परिधि में समेटता है, लेकिन जीवन की तलाश उसके परे भी जारी रहती है। निस्सन्देह इस उपन्यास में वह सब है जिसकी अपेक्षा एक विधा के तौर पर उपन्यास से की जाती है।
Sahsra Netradhari Nayak
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Karma Ura
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Description:
अंग्रेज़ी के इस पहले भूटानी उपन्यास ‘सहस्र नेत्रधारी नायक’ (द हीरो विद ए थाउजैंड आइज़) की कहानी दूसरे भूटान नरेश के राज्यकाल के समय की है, जिसके केन्द्र में लामा से राजदरबारी बने व्यक्ति का जीवन है। साथ ही साथ लुप्तप्राय होती संस्कृति का चित्रण है, जो अब इतिहास है।
उपन्यास में कई घटनाक्रम हूबहू हैं, कहीं-कहीं लेखक कर्मा ऊरा ने कल्पनाशक्ति का इस्तेमाल किया है, जिससे उपन्यास की रोचकता और पठनीयता बढ़ गई है।
उपन्यास के नायक का जन्म भूटान के एक ग्रामीण शिंखार लामा परिवार में हुआ था किन्तु स्थितियाँ ऐसी बदलीं कि यह लामा द्वितीय भूटान नरेश के राजदरबार में परिचर नियुक्त हो गया। राजपरिवार और शासन-व्यवस्था के साथ यह साधारण नायक भूटान के बहुआयामी जीवन से पाठक का परिचय कराता है।
नायक के चालीस वर्षों के जीवनकाल की अवधि भूटान के इतिहास में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। कर-प्रणाली में सुधार, राष्ट्रीय असेम्बली की स्थापना, भूटान के संयुक्त राष्ट्र में प्रवेश के अलावा आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक जीवन में विकास—इस काल की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं। लेखक ने तत्कालीन राजदरबार के एक परिचर की दिनचर्या, दरबारी गतिविधियों, परम्पराओं, मूल्यों, धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ व्यक्तिगत प्रेम-सम्बन्धों और षड्यंत्रों का भी संवेदनशीलता के साथ चित्रण किया है। अत्यन्त महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक उपन्यास।
Aagami Ateet
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Kamleshwar
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आगामी अतीत का कथ्य रोमांटिक ज़रूर लग सकता है, परन्तु इसमें निहित रोमांटिकता के भीतर भी जो गहरी टीस व्याप्त है, उसके सन्दर्भ ख़ास तौर से सामाजिक-आर्थिक निर्भरताओं से जुड़े हुए हैं। यानी रिश्ते भी किस तरह मूर्छित हो जाते हैं या किस तरह का रूप मानसिक मजबूरियों की वजह से ले जाते हैं, इसीलिए इस उपन्यास में रोमांटिकता को रोमांटिकता से ही काटने का प्रयास दिखाई देता है। जब इस उपन्यास का धारावाहिक प्रकाशन हुआ था, तब इसके उद्देश्य को लेकर गहरी बहस भी सामने आई थी और अन्ततः पाठकों ने यह पाया था कि परम्परावादी रोमांटिक कहानियों से अलग यह उपन्यास एक नए कथ्य को सामने लाता है।
पूँजीवादी समाज के स्पर्धामूलक परिवेश की विडम्बना और अन्तर्विरोध ही इस उपन्यास का मुख्य कथ्य है। सन् 1973-74 के आसपास लिखे गए इस उपन्यास की सार्थकता आज के भूमंडलीकरण के दौर में सामने आ चुकी है। आर्थिक आपाधापी के कारण टूट रहे स्त्री-पुरुष सम्बन्धों को इस उपन्यास में पहले ही हमारे सामने रख दिया गया था। और, उस नारी की पीड़ा को भी जो इस दौर की विकृतियों को सह रही है।
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