Bharat Bhagya Vidhata
(0)
₹
300
₹ 240 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789350489987
-
Pages152
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Sanatan Utsav Ka Desh
- Author Name:
Dr. Mayank Murari
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Real Estate Planning How To Buy A House
- Author Name:
Dr. Yogesh Sharma
- Book Type:

- Description: These days, there are numerous books available on real estate and estate planning. Amongst the lot, this book has a different approach as the author has presented easy solutions to the multi-faceted problems that arise in all banking aspects of real estate and other problems related to real estate investment. Approaches related to the real estate market, different home loans, buying process of a house, different precautions related to buying and selling of the property have been comprehensively explained with examples. The book additionally covers topics like Capital gains scheme, Pradhan Mantri Awas Yojna (PMAY), Reverse Mortgage loans, Senior Citizen Housing, RERA and Estate Planning in detail. We hope that this book will help all those readers who wish to invest in real estate or are into estate planning and are looking for guidance and solutions.
Dadi Janki A Century of Service
- Author Name:
Liz Hodgkinson
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Gandhivadi Kaka Kalelkar
- Author Name:
Prakhar Kundan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dr Bhimrao Ambedkar
- Author Name:
Pankaj Kishor
- Book Type:

- Description: "डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारत में दलितों के मसीहा के रूप में देखा जाता है । सन् 1947 में उन्हें संविधान सभा द्वारा स्वतंत्र भारत के लिए संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए गठित प्रारूपण समिति का अध्यक्ष बनाया गया । संविधान के निर्माण में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही । उनका जन्म वर्तमान मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे महू (इंदौर के निकट) में 14 अप्रैल, 1891 को हुआ था । वे पिता सूबेदार रामजी एवं माँ भीमाबाई शकपाल की चौदहवीं संतान थे । महार जाति का होने के कारण उन्हें ' अछूत ' समझा जाता था । उनके पिता और दादा ने ब्रिटिश सेना में नौकरी की थी । तत्कालीन सरकार द्वारा सभी सैन्य-कर्मियों के बच्चों की शिक्षा हेतु अच्छे स्कूलों का प्रबंध किया गया था । इसलिए निम्न जाति के होने के बावजूद उन्हें अच्छी शिक्षा प्राप्त हुई । सन् 1937 में डॉ अंबेडकर ने कोंकण क्षेत्र में महारों के सरकारी गुलाम के रूप में काम करने की ' खोती प्रथा ' को समाप्त करने के लिए एक विधेयक पेश किया । 1947 में भारत के स्वतंत्र होने पर उन्होंने कानून मंत्री के पद को सुशोभित किया । उन्होंने आह्वान किया, ' छीने हुए अधिकार भीख में नहीं मिलते, अधिकार वसूल करना होता है । ' उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए वर्ष 1990 में मरणोपरांत उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ' भारत रत्न ' से सम्मानित किया गया । प्रस्तुत है गरीब, असहाय तथा दबे- कुचलों को ऊपर उठानेवाले एक सच्चे मसीहा की प्रेरणास्पद एवं पठनीय रोचक जीवनी । "
Agaria
- Author Name:
Veriar Elwin
- Book Type:

- Description: 'अगरिया' शब्द का अभिप्राय सम्भवत: आग पर काम करने वाले लोगों से है अथवा आदिवासियों के देवता, अघासुर से जिनका जन्म लौ से हुआ माना जाता है। अगरिया मध्य भारत के लोहा पिघलानेवाले और लोहारी करनेवाले लोग हैं जो अधिकतर मैकाल पहाड़ी क्षेत्र में पाए जाते हैं लेकिन 'अगरिया क्षेत्र' को डिंडोरी से लेकर नेतरहाट तक रेखांकित किया जा सकता है। गोंड, बैगा और अन्य आदिवासियों से मिलते-जुलते रिवाजों और आदतों के कारण अगरिया की जीवन-शैली पर बहुत कम अध्ययन किया गया है। हालाँकि उनके पास अपनी एक विकसित टोटमी सभ्यता है और मिथकों का अकूत भंडार भी, जो उन्हें भौतिक सभ्यता से बचाकर रखता है और उन्हें जीवनी-शक्ति देता है। इस पुस्तक के बहाने यह श्रेय प्रमुख नृतत्त्वशास्त्री वेरियर एलविन को जाता है कि उन्होंने अगरिया जीवन और संस्कृति को इसमें अध्ययन का विषय बनाया है। एलविन के ही शब्दों में, ‘मिथक और शिल्प का संगम ही इस अध्ययन का केन्द्रीय विषय है जो अगरिया को विशेष महत्त्व प्रदान करता है।‘ इसके विभिन्न अध्यायों में अगरिया इतिहास, संख्या और विस्तार, मिथक, टोना-टोटका, शिल्प, आर्थिक स्थिति और पतन की चर्चा एवं विश्लेषण के माध्यम से एक वैविध्यपूर्ण संस्कृति, जिसका अब पतन हो चुका है, की आश्चर्यजनक आन्तरिक झाँकी प्रदान की गई है।
"आइए, जानते हैं अपने मन को" Aayie, Janate Hain Apane Mann Ko | Book in Hindi by Dr. Shrirang Bakhle
- Author Name:
Dr. Shrirang Bakhle
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Igniting Conscious Leadership (Is it Lying Dormant Within You?)
- Author Name:
Sundeep Pandit
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Nazarband Loktantra
- Author Name:
L.K. Advani
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Patanjali Yog Sutra
- Author Name:
B.K.S. Iyengar
- Book Type:

- Description: "व्यवहारिक ज्ञान से संपन्न पतंजलि का ‘योगसूत्र’ उन लोगों के लिए मार्गदर्शक पुस्तक का कार्य करता है, जो शाश्वत सत्य की खोज में जुटे हैं। खोज करनेवाला साधक इसका अनुसरण और अभ्यास कर वास्तविक महात्मा बन सकता है। योगसूत्र एक दर्शन है, जो खोज करनेवालों को (आत्मा) पुरुष का रूप प्रत्यक्ष तौर पर दिखा देता है। जिस प्रकार एक दर्पण किसी के रूप को दिखाता है, उसी प्रकार योगसूत्रों के अनुसार पतंजलि की बताई योग-साधना करने से व्यक्ति को अपने अंदर एक महान् ऋषि जैसे गुण दिखाई पड़ते हैं। योग एक विषय के रूप में किसी महासागर जितना विशाल है। व्यक्ति इसमें जितनी गहराई तक उतरता है, उसे गूढ़ रहस्यों का उतना ही ज्ञान होता जाता है, जो किसी के व्यक्तिगत ज्ञान से परे (अकल्पित ज्ञान) होता है। यह किसी भी व्यक्ति के मस्तिष्क की बुद्धि को और आध्यात्मिक हृदय के ज्ञान को धारदार बनाता है। इसका अभ्यास करनेवाले अपने अंदर सृजनात्मकता का विकास कर पाते हैं। आप अपने दैनिक जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए दृढ विश्वास के साथ योग का अभ्यास करें और सच्चे योगी तथा सच्चा मनुष्य बनने का सुफल प्राप्त करें। जीवन को सार्थक दिशा देनेवाले सूत्रों का संकलन, जो आपके लिए स्वास्थ्य और सफलता के द्वार खोलेंगे।"
Stree Chintan Ki Chunautiya
- Author Name:
Rekha Kastwar
- Book Type:

- Description: रेखा कास्तवार ने इस पुस्तक में स्त्री को केन्द्र में रखकर लिखी गई महिला और पुरुष रचनाकारों के उपन्यासों का तुलनात्मक अध्ययन किया है और इस क्रम में वे स्त्री चिन्तन से सम्बन्धित कुछ ऐसी चुनौतियों से रू-ब-रू हुई हैं, जिन्हें अध्ययन की इस पद्धति से ही समझा जा सकता है। लेखिका ने स्त्री से जुड़े कुछ मूलभूत सवालों को उठाया है और उसके आलोक में पुरुष तथा महिला लेखकों के नज़रिए के फ़र्क़ को रेखांकित किया है। गहरे विवेचन और विश्लेषण के बाद ही वह इस निष्कर्ष तक पहुँचती हैं—स्त्री-विमर्श का प्रमुख सरोकार स्त्री का अपने पक्ष में ख़ुद लड़ना और ख़ुद खड़े होना रहा है, जब तक यह लड़ाई अपनी ओर से नहीं लड़ी जाएगी, स्त्री के पक्ष में नहीं जाएगी। ‘स्त्री-चिन्तन की चुनौतियाँ’ निश्चित रूप से हिन्दी के स्त्री-विमर्श में कतिपय अवधारणात्मक परिवर्तन लाने में सफल होगी।
Shiv Ki Mahima
- Author Name:
Nisha Verma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Behatar Bharat, Behatar Duniya
- Author Name:
Nr Narayana Murthy
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jharkhand Ke Mele
- Author Name:
Sanjay Krishna
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Power Is 'You'
- Author Name:
Rajesh Yadav
- Rating:
- Book Type:

- Description: This book is a step-by-step process so as to teach the readers about how to uncover the real potential in you and how to be a successful person. This book is an opus of the author's hard earned intellect and how he navigated his life through various unexpected twists and turns that life has thrown at him. This is a sweet book of beautifully woven sets of experiences that by reading this, one can take charge of their life and make a 360 degree turn. It teaches the art of communication and time management in the simplest language, in order to create a better, kinder and more beautiful world. In "The Power is YOU", you will learn about:- > How your mind is the actual powerhouse and how to face various challenges of life? > What are the essential habits for success in life? > The key to have a better communication skill. > How'can YOU direct your life story and get in charge?
BPSC Bihar Secondary School (Special) Teacher Eligibility Test Sakshamta Pariksha | Class 6-8 "सामाजिक विज्ञान" Samajik Vigyan 15 Practice Sets (Hindi)
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
VISWANATHNAN ANAND
- Author Name:
Shailesh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Astonishing extrateriterial facts
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: The world of extraterrestrial life is a fascinating and mysterious one. Astonishing Extra-terrestrial Facts by renowned author Dr.Sanjay Rout takes readers on an incredible journey through the unknown, uncovering hidden secrets about our universe and its inhabitants. With engaging stories, vivid illustrations, and captivating facts that will leave you spellbound, this book offers up-close insight into the lives of aliens from across galaxies far away. From their diets to their customs to even how they communicate with each other – no stone is left unturned in this thrilling exploration into the unknown! So if you're looking for answers to some of your most burning questions about outer space creatures – then look no further than Astonishing Extraterrestrial Facts!
Tap Aur Tapasya
- Author Name:
Shobha Tripathi
- Book Type:

- Description: मैं एक घर छोड़ा, लाखों घर मेरे हो गए, मैं लाखों परिवार का हिस्सा बन गया, शायद एक गृहस्थ इतने घर नहीं देख सकता। संन्यासी जीवन में सभी कुछ त्यागना पड़ता है। आज मैं धन्य हो गया कि मेरे बेटे ने धर्म का, सेवा का, जग के कल्याण कार्य हेतु जो कार्य किया, वह विलक्षण व्यक्ति ही करते हैं। जब गृह त्याग कर गए थे तो घर में सभी दुःखी व परेशान थे, परंतु आज सभी अपने को धन्य मान रहे हैं। तभी एक स्वर स्वामीजी के कानों में पड़ा, जब से आपने गृह त्यागा है, तब से माँ ने मिष्टान्न को हाथ भी नहीं लगाया है। जब भी खाने को कहो तो वह कहती है कि मिष्टान्न तो वह अपने बेटे (स्वामीजी) के हाथ से ही खाएँगी। --इसी उपन्यास से आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरिजी महाराज एक चुंबकीय व्यक्तित्व के स्वामी हैं। ऊँचा कद, गौर वर्ण, उन्नत भाल, आभायुक्त देव सदृश्य मुखमंडल, देवत्वयुक्त प्रभावशाली महान् व्यक्तित्व, उस पर गेरुए वस्त्र, जैसे उनके गौर वर्ण में घुलकर स्वयं गेरुआमय हो गए हों! वह मात्र संन्यासी ही नहीं, जैसे संन्यास उनके लिए हो उनके चेहरे पर सदा छाई रहनेवाली पवित्र व सौम्य मुसकान लोगों को स्वयं ही नत- मस्तक कर देती है; मन में श्रद्धा सी उमड़ पड़ती है। बच्चों में बच्चों की निश्च्छल मुसकान, महिलाओं में कभी वह भाई बनकर, माताओं के बेटा बनकर, युवतियों के पितृ सदृश्य बन वह सभी के सम्मान का केंद्र बन जाते हैं | ऐसे तपोनिष्ठ, समाज के पथ-प्रदर्शक और मानवता के अग्रदूत पूज्य स्वामीजी के प्रेरणामय व त्यागपूर्ण जीवन पर अत्यंत भावप्रवण, मार्मिक, पठनीय औपन्यासिक कृति है “तप और तपस्या |
Drishya Aur Dhwaniyan : Khand 2
- Author Name:
Sitanshu Yashashchandra
- Book Type:

- Description: गुजराती आदि भारतीय भाषाएँ एक विस्तृत सेमिओटिक नेटवर्क अर्थात् संकेतन-अनुबन्ध-व्यवस्था का अन्य-समतुल्य हिस्सा हैं। मूल बात ये है कि विशेष को मिटाए बिना सामान्य अथवा साधारण की रचना करने की, और तुल्य-मूल्य संकेतकों से बुनी हुई एक संकेतन-व्यवस्था रचने की जो भारतीय क्षमता है, उसका जतन होता रहे। राष्ट्रीय या अन्तरराष्ट्रीय राज्यसत्ता, उपभोक्तावाद को बढ़ावा देनेवाली, सम्मोहक वाग्मिता के छल पर टिकी हुई धनसत्ता एवं आत्ममुग्ध, असहिष्णु विविध विचारसरणियाँ/आइडियोलॉजीज़ की तंत्रात्मक सत्ता, आदि परिबलों से शासित होने से भारतीय क्षमता को बचाते हुए, उस का संवर्धन होता रहे। गुजराती में से मेरे लेखों के हिन्दी अनुवाद करने का काम सरल तो था नहीं। गुजराती साहित्य की अपनी निरीक्षण परम्परा तथा सृजनात्मक लेखन की धारा बड़ी लम्बी है और उसी में से मेरी साहित्य तत्त्व-मीमांसा एवं कृतिनिष्ठ तथा तुलनात्मक आलोचना की परिभाषा निपजी है। उसी में मेरी सोच प्रतिष्ठित (एम्बेडेड) है। भारतीय साहित्य के गुजराती विवर्तों को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में जाने बिना मेरे लेखन का सही अनुवाद करना सम्भव नहीं है, मैं जानता हूँ। इसीलिए इन लेखों का हिन्दी अनुवाद टिकाऊ स्नेह और बड़े कौशल्य से जिन्होंने किया है, उन अनुवादक सहृदयों का मैं गहरा ऋणी हूँ। ये पुस्तक पढ़नेवाले हिन्दीभाषी सहृदय पाठकों का सविनय धन्यवाद, जिनकी दृष्टि का जल मिलने से ही तो यह पन्ने पल्लवित होंगे। —सितांशु यशश्चन्द्र (प्रस्तावना से) 'हमारी परम्परा में गद्य को कवियों का निकष माना गया है। रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत हम इधर सक्रिय भारतीय कवियों के गद्य के अनुवाद की एक सीरीज़ प्रस्तुत कर रहे हैं। इस सीरीज़ में बाङ्ला के मूर्धन्य कवि शंख घोष के गद्य का संचयन दो खण्डों में प्रकाशित हो चुका है। अब गुजराती कवि सितांशु यशश्चन्द्र के गद्य का हिन्दी अनुवाद दो जि़ल्दों में पेश है। पाठक पाएँगे कि सितांशु के कवि-चिन्तन का वितान गद्य में कितना व्यापक है—उसमें परम्परा, आधुनिकता, साहित्य के कई पक्षों से लेकर कुछ स्थानीयताओं पर कुशाग्रता और ताज़ेपन से सोचा गया है। हमें भरोसा है कि यह गद्य हिन्दी की अपनी आलोचना में कुछ नया जोड़ेगा।" —अशोक वाजपेयी
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book