Naulakhi Kothi

(0)

Author:

Ali Akbar Natiq

Language:

Hindi

699

₹ 559.2 (20% off)

Available

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


प्रस्तुत उपन्यास "नौलखी कोठी" हिन्दुस्तान में अग्रेज़ी सरकार के शासन और उसके बाद के दौर में बदलते सामाजिक हालात की कहानी है। इंग्लैंड में आठ लम्बे साल गुज़ारने के बाद विलियम विभाजन-पूर्व पंजाब में जलालाबाद के नवनियुक्त सहायक आयुक्त के रूप में हिंदुस्तान लौट आता है। वो अपने दादा द्वारा बनवाए गए आलीशान बंगले नौलखी कोठी में अपने 'घर' में लौटने का सपना देखता है, लेकिन घटनाओं का एक अपरिवर्तनीय मोड़ उसका इंतजार कर रहा है, जो न केवल उसकी क़िस्मत बदल देता है, बल्कि ज़मीन की क़िस्मत भी हमेशा के लिए बदल देता है। अली अकबर नातिक़ का ये उपन्यास "नौलखी कोठी" उस समय की युगचेतना का व्यावहारिक चित्रण है। ये कहानी विभाजन से पहले के वर्षों में शुरू होती है और अस्सी के दशक तक चलती है।

Read more

ISBN
9789394494350
Pages
584
Avg Reading Time
19 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

प्रस्तुत उपन्यास "नौलखी कोठी" हिन्दुस्तान में अग्रेज़ी सरकार के शासन और उसके बाद के दौर में बदलते सामाजिक हालात की कहानी है। इंग्लैंड में आठ लम्बे साल गुज़ारने के बाद विलियम विभाजन-पूर्व पंजाब में जलालाबाद के नवनियुक्त सहायक आयुक्त के रूप में हिंदुस्तान लौट आता है। वो अपने दादा द्वारा बनवाए गए आलीशान बंगले नौलखी कोठी में अपने 'घर' में लौटने का सपना देखता है, लेकिन घटनाओं का एक अपरिवर्तनीय मोड़ उसका इंतजार कर रहा है, जो न केवल उसकी क़िस्मत बदल देता है, बल्कि ज़मीन की क़िस्मत भी हमेशा के लिए बदल देता है। अली अकबर नातिक़ का ये उपन्यास "नौलखी कोठी" उस समय की युगचेतना का व्यावहारिक चित्रण है। ये कहानी विभाजन से पहले के वर्षों में शुरू होती है और अस्सी के दशक तक चलती है।

Book Details

  • ISBN
    9789394494350
  • Pages
    584
  • Avg Reading Time
    19 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

(0)

0 out of 5

Book

Naulakhi Kothi inhabits the psychological fault line of pre-Partition Punjab, where personal inheritance collides with the collapse of empire. William, the new Assistant Commissioner of Jalalabad, returns after eight years in England expecting to reclaim his grandfather's grand bungalow—the titular mansion that represents both colonial prestige and familial legacy. Instead, he encounters an "irreversible turn of events" that rewrites not only his own trajectory but the fate of the land itself. The novel's power lies in its dual focus: the intimate drama of a man caught between two worlds, and the seismic social transformations sweeping through late British India. Published by Rekhta Publications, this work captures the twilight of the Raj through the lens of architecture, ambition, and the fragility of belonging. It asks what happens when the symbols of power—grand bungalows, official titles, inherited privilege—become relics overnight, and how individuals navigate the wreckage of certainties they once took for granted.

यह उपन्यास पढ़ते समय मुझे किस तरह का अनुभव मिलेगा?

यह उपन्यास एक धीमी, विचारशील यात्रा है जो औपनिवेशिक भारत के अंतिम दिनों की मनोवैज्ञानिक उथल-पुथल को महसूस कराती है। नौलखी कोठी में विलियम का व्यक्तिगत संकट और विभाजन-पूर्व पंजाब के सामाजिक बदलाव एक साथ चलते हैं। यह उन पाठकों को संतुष्ट करेगा जो ऐतिहासिक विवरण, चरित्र की आंतरिक दुविधा, और उस समय की सराहना करते हैं जब पुरानी दुनिया नई दुनिया को रास्ता दे रही थी।

यह किताब किस तरह के पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त है?

  • जो पाठक ब्रिटिश राज के अंतिम चरण और विभाजन के सामाजिक प्रभावों में रुचि रखते हैं
  • जो औपनिवेशिक विरासत, पहचान के द्वंद्व, और ऐतिहासिक परिवर्तन के व्यक्तिगत आयामों को समझना चाहते हैं
  • जिन्हें धैर्यपूर्वक विकसित होने वाली कथाएँ और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद पसंद है

इस उपन्यास की विषयवस्तु का आज के भारतीय पाठकों के लिए क्या सांस्कृतिक या ऐतिहासिक महत्व है?

विभाजन-पूर्व पंजाब की यह कहानी आज भी प्रासंगिक है क्योंकि यह दिखाती है कि कैसे राजनीतिक उथल-पुथल व्यक्तिगत भाग्य को बदल देती है। नौलखी कोठी उस समय को पकड़ती है जब सत्ता के प्रतीक—भव्य बंगले, आधिकारिक उपाधियाँ—रातोंरात अप्रासंगिक हो गए। यह समकालीन भारत में पहचान, विरासत, और सामाजिक परिवर्तन के सवालों से जुड़ती है।

इस विषय पर इस लेखक का दृष्टिकोण क्या विशिष्ट बनाता है?

यह उपन्यास विभाजन की कहानी को एक ब्रिटिश-भारतीय अधिकारी विलियम की आंखों से देखता है, जो दो दुनियाओं के बीच फंसा है। जलालाबाद में नवनियुक्त सहायक आयुक्त के रूप में उसका संघर्ष—अपने दादा की विरासत को पुनः प्राप्त करने की इच्छा और साम्राज्य के पतन की वास्तविकता—एक अनोखा कोण प्रदान करता है। यह व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और ऐतिहासिक अपरिहार्यता के बीच की खाई को उजागर करता है।

यह उपन्यास पाठक के साथ भावनात्मक, बौद्धिक या सांस्कृतिक रूप से क्या छोड़ जाता है?

यह उपन्यास पाठक को विरासत की नाजुकता और इतिहास की अपरिवर्तनीय शक्ति की गहरी समझ देता है। नौलखी कोठी यह सवाल छोड़ जाती है कि जब हमारी निश्चितताएं ध्वस्त हो जाती हैं तो हम कौन होते हैं। यह औपनिवेशिक अतीत के दीर्घकालिक प्रभाव और उस व्यक्तिगत कीमत पर विचार करने को प्रेरित करती है जो सामूहिक परिवर्तन की मांग करती है।

View on Rachnaye →

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp