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भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आपातकाल के जख्म बड़े गहरे हैं। ‘आपातनामा’ उस काली रात की दास्तान है, जिसने उन्नीस महीने तक प्रजातंत्र के सूर्य को उगने ही नहीं दिया। सत्ता का नशा कैसे भ्रष्ट व्यक्तियों को जन्म देता है, यह ‘आपातनामा’ उपन्यास के कथानक से झलकता है। कैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नौकरशाहों और नेताओं के पास बंदी बना ली गई थी। कैसे न्यायपालिका को कार्यपालिका के हाथों की कठपुतली बनाकर नचाया जा रहा था। देश में किस प्रकार से अराजक तत्त्व मनमानी करने लगे थे और किस प्रकार से तानाशाही को खुलकर खेलने का अवसर मिल रहा था, यह सब इस कथानक के मूल मुद्दे हैं। ‘आपातनामा’ में आपातकाल की हकीकत को बड़ी ही संजीदगी से मर्मस्पर्शी शैली में अभिव्यक्त किया गया है। सरकार के मौखिक आदेश लोगों पर इस कदर कहर बरसा रहे थे कि कुछ लोग अंग्रेजों के दमनचक्र से भी अधिक खौफनाक दौर से गुजरने लगे थे। सरकार की अमानुषिक एवं आतंकित कर देनेवाली गतिविधियों से बेबस, समझौतापरस्त, उदासीन जनता को लेखक ने विद्रोह-चेतना का हथौड़ा मारकर जगाया है, जिसे वह क्रांति का लघुदर्शन मानता है, ताकि संसदीय प्रजातंत्र का मजाक न बन सके, अभिव्यक्ति की आजादी कुंठित न हो और व्यक्ति के मौलिक अधिकार सुरक्षित रहें।
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भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आपातकाल के जख्म बड़े गहरे हैं। ‘आपातनामा’ उस काली रात की दास्तान है, जिसने उन्नीस महीने तक प्रजातंत्र के सूर्य को उगने ही नहीं दिया। सत्ता का नशा कैसे भ्रष्ट व्यक्तियों को जन्म देता है, यह ‘आपातनामा’ उपन्यास के कथानक से झलकता है। कैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नौकरशाहों और नेताओं के पास बंदी बना ली गई थी। कैसे न्यायपालिका को कार्यपालिका के हाथों की कठपुतली बनाकर नचाया जा रहा था। देश में किस प्रकार से अराजक तत्त्व मनमानी करने लगे थे और किस प्रकार से तानाशाही को खुलकर खेलने का अवसर मिल रहा था, यह सब इस कथानक के मूल मुद्दे हैं।
‘आपातनामा’ में आपातकाल की हकीकत को बड़ी ही संजीदगी से मर्मस्पर्शी शैली में अभिव्यक्त किया गया है।
सरकार के मौखिक आदेश लोगों पर इस कदर कहर बरसा रहे थे कि कुछ लोग अंग्रेजों के दमनचक्र से भी अधिक खौफनाक दौर से गुजरने लगे थे।
सरकार की अमानुषिक एवं आतंकित कर देनेवाली गतिविधियों से बेबस, समझौतापरस्त, उदासीन जनता को लेखक ने विद्रोह-चेतना का हथौड़ा मारकर जगाया है, जिसे वह क्रांति का लघुदर्शन मानता है, ताकि संसदीय प्रजातंत्र का मजाक न बन सके, अभिव्यक्ति की आजादी कुंठित न हो और व्यक्ति के मौलिक अधिकार सुरक्षित रहें।
Book Details
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ISBN9789382901495
-
Pages184
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Avg Reading Time6 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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मैं पागलों की तरह उसे देख रही थी। उसके लब्ज़ कानों में गूँज रहे थे और जबान सच में मुँह में चिपक गई थी। शादी को एक दिन भी पूरा नहीं हुआ था और झुबेर से ऐसा कुछ सुनने को मिलेगा, मैं सोच भी नहीं सकती थी। मुझे तो यकीन था कि झुबेर कभी भी मेरा दिल नहीं दुखाएगा। मुझे जैसे उसने झिंझोड़कर रख दिया। उसकी बातें बरदाश्त के बाहर थीं। मैं चुपचाप सिर झुकाकर आँसू बहाती रही। शराफत का नकाब पहने हुए झुबेर का असली चेहरा मेरे सामने आ रहा था। वह मेरे घरवालों को, धर्म को, समाज को गालियाँ दे रहा था, रुक ही नहीं रहा था। वह ऐसा क्यों कर रहा था? उस वत की उसकी नजर एकदम सूखी और ठंडी थी। होंठों के एक कोने से उसका हँसना, गुस्से से जलने वाली आँखें मेरे दिल में खंजर की तरह चुभ रही थीं। सुबह पाँच बजे वह चुप हो गया और पेट के बल गहरी नींद में सो गया। शादी के पहले का झुबेर, मेरी आँखों के आँसू देखना भी जिसे पसंद नहीं था, मुझे हमेशा हँसते देखना चाहता था, उम्र भर मुझे फूलों जैसा सँभालकर रखने का दावा करनेवाला या यह वही झुबेर है? —इसी उपन्यास से ——1—— झूठ, फरेब, धोखा, ढकोसला, झूठी संवेदना—यही है ‘लव जिहाद’। भोली-भाली लड़कियों को नाना युतियों से अपने झूठे प्रेमजाल में फाँसकर उनका भावनात्मक और शारीरिक शोषण ही है ‘लव जिहाद’। एक भूतभोगी की यथकथा है यह उपन्यास ‘लव जिहाद’।
Ameeri Rekha Ki Khoj Mein
- Author Name:
Vijay Kumar
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काफी सिर खपाने के बाद पिछले दिनों मुझे इस बारे में अंतिम सत्य पता लग ही गया। वह यह है कि अमीरी की रेखा मकान, गाड़ी, घड़ी, कपड़े या कलम से नहीं, शौचालय से तय होती है। हमारे देश के महान् ‘योजना आयोग’ के कार्यालय में दो शौचालयों की मरम्मत में 35 लाख रुपए खर्च कर दिए गए। जरा सोचिए, मरम्मत में इतने खर्च हुए, तो नए बनने में कितने होते होंगे? जब कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति की, तो योजना आयोग के मुखिया श्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने इसे बिल्कुल ठीक बताया। मैं उनकी बात से सौ प्रतिशत सहमत हूँ। बहुत से विचारकों का अनुभव है कि यही एकमात्र ऐसी जगह है, जहाँ व्यक्ति बिल्कुल एकांत में कुछ देर बैठकर, शांत भाव से मौलिक चिंतन कर सकता है। कई लेखकों को कालजयी उपन्यासों के विचार यहीं बैठकर आए हैं। श्री अहलूवालिया और उनके परम मित्र मनमोहन सिंह की जिन योजनाओं से रुपया रसातल में जा रहा है, उसके बारे में चिंतन और मनन इतने आलीशान शौचालय में ही हो सकता है। —इसी संग्रह से ——1—— समाज की विषमताओं और विद्रूपताओं पर मारक प्रहार करके अंतरावलोकन करने का भाव जागृत करने वाले व्यंग्य। ये न केवल आपको हँसाएँगे-गुदगुदाएँगे, बल्कि आपके अंतर्मन को उद्वेलित कर मानवीय संवेदना को उभारेंगे।
Ajanta Ki Rajkumari
- Author Name:
Sourabh Sharma
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अजंता की गुफाओं ने भारत के क्लासिकल समाज को ज्यों का त्यों अपने भीतर सहेज लिया है। अजंता अपने भीतर आश्चर्य लोक है। अपने सुंदर समय की स्मृतियों को सहेजने का विचार जब राजपुरुषों के मन में आया होगा तो इस अद्भुत गैलरी का निर्माण हुआ होगा। इसका निर्माण भी उतना ही रहस्यमयी और रोचक होगा जितनी ये गुफाएं हैं। संभवतः राजा ने इसके निर्माण के लिए एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट बुलवाया होगा। चित्रकारों का चुनाव किया होगा और चित्रों का भी। इतने गहरे भावों को सृजित कराने वाले आश्रयदाताओं की भावभूमि भी गहन होगी। इनकी कहानियों पर एक कथा रचने का प्रयास है अजंता की राजकुमारी।
Gaon Wala Angrezi School
- Author Name:
Pranjal Saxena
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गाँव वाला अंग्रेजी स्कूल एक ऐसी पुस्तक है जिसमें बच्चों से लेकर बड़ों सबके लिए कुछ न कुछ है। एक ऐसी किताब जिसमें कोई बकवास न हो, जिसमें कठिन वाला इतिहास न हो और जिसे पढ़कर कोई उदास न हो। कोई ऐसी किताब जिसे पढ़कर शिक्षा मिले और पता भी न चले कि कुछ सिखाया गया है। जिसे पढ़कर हँसी छूटे और कोई न रूठे। यह पुस्तक गाँव और शहर के बच्चों की सोच को एक पुल प्रदान करती है। हम लोग पिज्जा, बर्गर, टॉयज के लिए अपने पैरेंट्स से डिमांड पर डिमांड किए जाते हैं और न पूरी होने पर मुँह फुलाकर बैठ जाते हैं। लेकिन विलेज के बच्चों को तो कई बार लंच ही नहीं मिल पाता, लंच मिल जाए तो डिनर मिलेगा कि नहीं ये उन्हें नहीं पता। हमारे पेंसिल बॉक्स की जितनी कॉस्ट होती है उतनी कॉस्ट में यहाँ के बच्चे साल भर की स्कूल कॉपीज खरीद लेते हैं। हम ब्रांडेड नोट बुक्स की डिमांड करते हैं और प्रमोद जैसे बच्चों के पास तो स्लीपर्स तक नहीं हैं। जब हम दीपावली पर क्रैकर्स के लिए जिद कर रहे होते हैं उस समय हमसे भी छोटे बच्चे मिट्टी के दिये बना रहे होते हैं ताकि उन्हें बेचकर त्योहार पर तो एक ही दिन में लंच और डिनर दोनों कर सकें। प्रांजल सक्सेना
Secrets
- Author Name:
Sanjana Anand
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इंतकाम का फ़साना बयान करने, मौत के उस पार से वो लौट आया... आर्किड विला की लेखिका संजना आनंद की कलम से पैरानॉर्मल मर्डर मिस्ट्री पर आधारित रोंगटे खड़े कर देने वाला उपन्यास "सिक्रेट्स : पैरानॉर्मल मर्डर मिस्ट्री"
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