Ameeri Rekha Ki Khoj Mein
(0)
₹
300
240 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
काफी सिर खपाने के बाद पिछले दिनों मुझे इस बारे में अंतिम सत्य पता लग ही गया। वह यह है कि अमीरी की रेखा मकान, गाड़ी, घड़ी, कपड़े या कलम से नहीं, शौचालय से तय होती है। हमारे देश के महान् ‘योजना आयोग’ के कार्यालय में दो शौचालयों की मरम्मत में 35 लाख रुपए खर्च कर दिए गए। जरा सोचिए, मरम्मत में इतने खर्च हुए, तो नए बनने में कितने होते होंगे? जब कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति की, तो योजना आयोग के मुखिया श्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने इसे बिल्कुल ठीक बताया। मैं उनकी बात से सौ प्रतिशत सहमत हूँ। बहुत से विचारकों का अनुभव है कि यही एकमात्र ऐसी जगह है, जहाँ व्यक्ति बिल्कुल एकांत में कुछ देर बैठकर, शांत भाव से मौलिक चिंतन कर सकता है। कई लेखकों को कालजयी उपन्यासों के विचार यहीं बैठकर आए हैं। श्री अहलूवालिया और उनके परम मित्र मनमोहन सिंह की जिन योजनाओं से रुपया रसातल में जा रहा है, उसके बारे में चिंतन और मनन इतने आलीशान शौचालय में ही हो सकता है। —इसी संग्रह से ——1—— समाज की विषमताओं और विद्रूपताओं पर मारक प्रहार करके अंतरावलोकन करने का भाव जागृत करने वाले व्यंग्य। ये न केवल आपको हँसाएँगे-गुदगुदाएँगे, बल्कि आपके अंतर्मन को उद्वेलित कर मानवीय संवेदना को उभारेंगे।
Read moreAbout the Book
काफी सिर खपाने के बाद पिछले दिनों मुझे इस बारे में अंतिम सत्य पता लग ही गया। वह यह है कि अमीरी की रेखा मकान, गाड़ी, घड़ी, कपड़े या कलम से नहीं, शौचालय से तय होती है।
हमारे देश के महान् ‘योजना आयोग’ के कार्यालय में दो शौचालयों की मरम्मत में 35 लाख रुपए खर्च कर दिए गए। जरा सोचिए, मरम्मत में इतने खर्च हुए, तो नए बनने में कितने होते होंगे? जब कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति की, तो योजना आयोग के मुखिया श्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने इसे बिल्कुल ठीक बताया।
मैं उनकी बात से सौ प्रतिशत सहमत हूँ। बहुत से विचारकों का अनुभव है कि यही एकमात्र ऐसी जगह है, जहाँ व्यक्ति बिल्कुल एकांत में कुछ देर बैठकर, शांत भाव से मौलिक चिंतन कर सकता है। कई लेखकों को कालजयी उपन्यासों के विचार यहीं बैठकर आए हैं। श्री अहलूवालिया और उनके परम मित्र मनमोहन सिंह की जिन योजनाओं से रुपया रसातल में जा रहा है, उसके बारे में चिंतन और मनन इतने आलीशान शौचालय में ही हो सकता है।
—इसी संग्रह से
——1——
समाज की विषमताओं और विद्रूपताओं पर मारक प्रहार करके अंतरावलोकन करने का भाव जागृत करने वाले व्यंग्य। ये न केवल आपको हँसाएँगे-गुदगुदाएँगे, बल्कि आपके अंतर्मन को उद्वेलित कर मानवीय संवेदना को उभारेंगे।
Book Details
-
ISBN9789386870162
-
Pages168
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Taarabhaayiya Patra
- Author Name:
M R Dattathri
- Book Type:

- Description: ಲೇಖಕ ಎಂ. ಆರ್ ದತ್ತಾತ್ರಿ ಅವರ ಕಾದಂಬರಿ ’ತಾರಾಬಾಯಿಯ ಪತ್ರ’. ತಾರಾಬಾಯಿಯು ವಿಕ್ರಮನ ಅಪ್ಪನ ಪ್ರೇಯಸಿ. ಅವಳು ಬರೆದ ಎರಡು ಪತ್ರದಲ್ಲಿ, ದೇವತೆ, ದೇವಿ ಎಂದೆಲ್ಲ ಬರೆದು, ಹೊಡೆದು ಹಾಕಿ, ಅಕ್ಕ ಎಂಬ ಸಂಬೋಧನೆಯೇ ಉಳಿಯುತ್ತದೆ. ಇವು ಏನೆಲ್ಲ ಭಾವಗಳನ್ನು ಹೇಳುತ್ತವೆ? ಏಕಾಂತದೊಳಗಿನ ಲೋಕಾಂತ, ಮೌನದೊಳಗಣ ಮಾತು, ಸಂವಾದದೊಳಗಿನ ಮೌನವೇ ಕಥಾನಕವಾಗಿದೆ ಇಲ್ಲಿ. ರಂಜನಿಗೆ ಇವನ ಕರೆ ಕೇಳಿತೆ? ಗಂಗಾ ತನ್ನ ಗಾಂಭೀರ್ಯದಿಂದಾಚೆ ಬಂದು ಮತ್ತೆ ಇವರಿಬ್ಬರೂ ಒಂದೇ ಪರಿಧಿಯಲ್ಲಿ ಬರುವರೆ? ರಂಜನಿಯನ್ನು ಕನವರಿಸುತ್ತಲೇ ಗಂಗೆಗೆ ಹಪಹಪಿಸುವ ವಿಕ್ರಮ ಆಯ್ಕೆ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳುವುದು ಯಾರನ್ನು? ಯಾವ ಅಂತಃಕರುಣೆಯ ಕರೆ ವಿಕ್ರಮನೊಳಗಿನ ಪ್ರೀತಿಯನ್ನು ಮತ್ತೆ ಸೋಕುತ್ತಲೇ ಆವರಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತದೆ? ಈ ಎಲ್ಲ ಪ್ರಶ್ನೆಗಳಿಗೆ ಉತ್ತರ ಕೃತಿಯಲ್ಲಿದೆ.
Those Unsaid Words
- Author Name:
Anshuman Agrahri
- Rating:
- Book Type:


- Description: Tanvi realises how the definition of love keeps changing and emotions were the last parameters she considered while deciding her life. As the destiny could play, her best friend dies on the very day of her marriage, and she starts inculpating herself for the misfortune, which leads to a fractured married life. She defies everyone and goes on a road trip to Leh. In the land of lamas she tries to understand life from the lens of spirituality and starts discerning threads of coincidences. The journey helps her to understand ‘Those Unsaid Words’ which cannot be said, cannot be written, cannot be gesticulated; can only be felt.
Harichitta Satya
- Author Name:
Vasudhendra
- Rating:
- Book Type:

- Description: ಹರಿಚಿತ್ತ ಸತ್ಯ- ವಸುಧೇಂದ್ರ ಅವರ ಮೊದಲ ಕಾದಂಬರಿ. ಅತ್ಯಂತ ಸಂಯಮದಿಂದ ಕಾದಂಬರಿಯನ್ನು ಹೆಣೆದಿದ್ದು ಅವರ ಪ್ರೌಢಿಮೆಗೆ ಕನ್ನಡಿ ಹಿಡಿಯುತ್ತದೆ. ಸನ್ನಿವೇಶಗಳ ಜೋಡಣೆ, ಪಾತ್ರಗಳ ಸಂಭಾಷಣೆ, ನಿರೂಪಣೆ ಶೈಲಿ ಓದುಗರ ಗಮನ ಸೆಳೆಯುತ್ತದೆ. ಕಟ್ಟರ ಸಮಾಜ ಹಾಗೂ ಮುಕ್ತ ಸಮಾಜದ ಮಧ್ಯೆ ಇರುವ ವಿದ್ಯಮಾನಗಳು, ವೈಚಾರಿಕ ಪ್ರವಾಹ ಇಲ್ಲಿಯ ಪ್ರಮುಖ ವಸ್ತು. ಆದರೂ, ವಿಧಿಯ ಪಾತ್ರವನ್ನು ತಳ್ಳಿ ಹಾಕದೇ ಇದ್ದರಿಂದ ಅವರು ಹರಿಚಿತ್ತ ಸತ್ಯ ಎಂದೇ ಕಾದಂಬರಿಗೆ ಹಸರು ಇಟ್ಟಿದ್ದು ಸೂಕ್ತವೆನಿಸಿದೆ.
Diwaswapna
- Author Name:
Gijubhai Bedheka
- Book Type:

- Description: "इसी बीच प्रधानाध्यापक एकाएक आए और मुझे टोका, ‘‘देखिए, यहाँ पास में कोई खेल नहीं खेला जा सकता। चाहो, तो दूर उस मैदान में चले जाइए। यहाँ दूसरों को तकलीफ होती है।’’ मैं लड़कों को लेकर मैदान में पहुँचा। लड़के तो बे-लगाम घोड़ों की तरह उछल-कूद मचा रहे थे। ‘‘खेल! खेल! हाँ, भैया खेल!’’ मैंने कहा, ‘‘कौन सा खेल खेलोगे?’’ एक बोला, ‘‘खो-खो।’’ दूसरा बोला, ‘‘नहीं, कबड्डी।’’ तीसरा कहने लगा, ‘‘नहीं, शेर और पिंजड़े का खेल।’’ चौथा बोला, ‘‘तो हम नहीं खेलते।’’ पाँचवाँ बोला, ‘‘रहने दो इसे, हम तो खेलेंगे।’’ मैंने लड़कों की ये बिगड़ी आदतें देखीं। मैं बोला, ‘‘देखो भई, हम तो खेलने आए हैं। ‘नहीं’ और ‘हाँ ’ और ‘नहीं खेलते,’ और ‘खेलते हैं,’ करना हो तो चलो, वापस कक्षा में चलें।’’ लड़के बोले, ‘‘नहीं जी, हम तो खेलना चाहते हैं।’’ —इसी पुस्तक से बाल-मनोविज्ञान और शैक्षिक विचारों को कथा शैली में प्रस्तुत करनेवाले अप्रतिम लेखक गिजुभाई के अध्यापकीय जीवन के अनुभव का सार है यह—‘दिवास्वप्न’।
Shilakshar Ban Mere Man
- Author Name:
Meena Jha
- Book Type:

- Description: 'शिलाक्षर बन मेरे मन' उपन्यास एक साथ स्त्री-संघर्ष और लड़ते-मरते कृषक समाज की आधुनिक महागाथा है। बिहार के 1967 के विश्व-व्यापी सूखे और अकाल की परिघटनाओं को लेकर मीना झा ने बहुत ही जीवंत और विश्वसनीय ढंग से इस उपन्यास के ताने-बाने को बुना है। अन्नदायिनी धरती की कोख में दरारें पड़ी हैं, खेत में खड़ी फसलें जल गई हैं या उसमें दाने नहीं हैं, नदियों का पानी सूख गया है, मछलियों के जीवन पर भी संकट आ गए हैं और छोटे बच्चों को स्कूलों में मिलने वाली खिचड़ी दुर्लभ पकवान से भी बढ़कर हो गई है और उसी समय सरकारी राशन की कालाबाज़ारी भी चरम पर—ऐसे अमानुषिक अकालबेला के जीवन का चित्रण कथाकार और यात्रा वृत्तांत की सिद्ध लेखिका मीना झा ने इस तरह किया है कि आप उस जीवन के तल में उतरने से खुद को रोक नहीं सकते। यहाँ सूखे और अकाल से जूझते लोगों की भीड़ से मीना झा ने कुछ ऐसे स्त्री-पुरुष, युवक-युवतियों और बच्चों को अपने कैनवस पर उतारा है जो उस समाज के प्रतिनिधि चरित्र के रूप में सामने आते हैं और जिनके दीर्घ काल तक पाठकों के मन-मस्तिष्क में टिके रहने की प्रबल संभावना है। मिथिला समाज के मिट्टी-पानी में लिथड़े ये पात्र महज़ औपन्यासिक पात्र नहीं, उस समाज के प्रतिनिधि चरित्र हैं—नागार्जुन के 'बलचनमा' और 'वरुण के बेटे' के चरित्रों की तरह। मास्टर काका, विजय, बुढिय़ा दादी, शंभू, रागिनी तक को आप विस्मृत नहीं कर पाएँगे; प्रधान नायिका कुसुम की तो बात ही मत कीजिए। बेहद पठनीय यह उपन्यास जितना ही जीवंत और चाक्षुष है, उतना ही विचारोत्तेजक भी। —श्रीधरम
Mahashweta
- Author Name:
Tarashankar Bandyopadhyay
- Book Type:

- Description: सुविख्यात बांग्ला उपन्यासकार ताराशंकर बंद्योपाध्याय की यह पुस्तक कथावस्तु और रचना-शिल्प की दृष्टि से एक अनूठी और मार्मिक कथाकृति है। माता-पिताविहीन नीरजा नामक एक बालिका का जैसा चरित्र-चित्रण यहाँ हुआ है, वह सिर्फ़ तारा बाबू जैसे कथाकार ही कर सकते हैं। पशुवत् मनुष्यों के लोभ, कुत्सा और समाज की कुरूपताओं से अनथक संघर्ष करती हुई नीरजा मानो तेजोद्दीप्त भारतीय नारी का प्रतीक बनकर उभरती है, जिसमें परदुख-कातरता भी है और उसके लिए आत्मोत्सर्ग की भावना भी। एक ओर वह अनाचार से जूझने के लिए जलती हुई मशाल है, तो दूसरी ओर उसके अन्तर में प्रेम की अन्तःसलिला प्रवाहित हो रही है। नारी की आत्मनिर्भरता उसके जीवन का मूलमंत्र है, जिसे वह सम्मानपूर्वक जीने की पहली शर्त मानती है। वस्तुतः तारा बाबू ने इस उपन्यास में स्थितियों और परिवेश को नाटकीयता प्रदान करके विलक्षण प्रभाव उत्पन्न किया है।
Barho Mas
- Author Name:
Bhalchandra Jha +1
- Book Type:

- Description: बारहो मास उपन्यास साहित्य अकादेमी द्वारा पुरस्कृत मराठी उपन्यास बारोमास मैथिली अनुवाद अछी। एही उपन्यास भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था रीढ़ - हमरा सभक किसानक ओही सभ समस्या पर व्यापक दृष्टि देल गेल अछी जे ओ लोकनि खुजल व्यापार नीति आ भूमण्डलीकरण कारणे भोगी रहलाह अछी। बारह महीनामे समेटल किसानक वेदना-कथाके एहि उपन्यासमे महाराष्ट्रक किसान सुभाराव आ हुनक परिवार इर्द-गिर्द बुनल गेल अछी उपन्यास अन्तमे सुभाराव निपत्ता होयब प्रतीकात्मक रूपसै किसानक मुख्यधारासै “निपत्ता” होयबाक एकटा दुखद परिदृश्य प्रस्तुत करैत अछी।
Mati ke Log Sone ki Naiya
- Author Name:
Mayanand Mishra
- Book Type:

- Description: कास और झौआ कोसी के सर्व-सुलभ वरदान हैं, पानी और मछली की तरह। जब घर में अन्न नहीं और जेब में नगदी नहीं, तब भी हीतलाल और रमेसर जैसे लोग कुछ बोझे कास काट-बेचकर मड़ुआ-मक्के और नमक का जुगाड़ कर लेते हैं। ये माटी के लोग हैं जिनके लिये नावें सोने से भी बढ़कर हैं। सस्ते श्रम की तरह इनके जीवन में सहज प्रेम कोसी के कास-झौए की तरह ही सुलभ और जीवन का सहारा है। नाच-गाने में ये अपनी तकलीफ भूल-बिसर कर निरस से जीवन में रस घोलते हुए कठिन संघर्ष में लगे रहते हैं। कोसी के कठिन जीवन-संघर्ष के बीच अनूपी और हीतलाल जैसे चरित्रों का प्रेम इस उपन्यास की अद्भुत विशेषता है। अनूपी जैसी एक स्त्री जो पति हीतलाल का घर छोड़ नथुनी पान वाले के यहाँ रहने चली गई है, उस स्त्री के प्रेम की गहराई और उसके साथ हीतलाल का सम्मानपूर्ण जुड़ाव स्त्री-विमर्श के नये दौर में भी दुर्लभ है। इन सरल हृदयी लोगों के बीच दो सौ मन धान के 'अगों' रूप में दान-दक्षिणा पर नज़र गड़ाए नेता और अफसर का गज़ब सांकेतिक बिम्ब है। रस-सिद्ध प्रवाहमयी भाषा के धनी प्रसिद्ध उपन्यासकार मायानंद मिश्र का चमत्कार इस उपन्यास में अपने चरम पर है। यही कारण है कि प्रथम प्रकाशन के 56 वर्ष बाद भी इस उपन्यास के प्रति पाठकीय आकर्षण बरकरार है।
Unaccustomed Earth
- Author Name:
Jhumpa Lahiri
- Rating:
- Book Type:

- Description: The stories of Unaccustomed Earth focus on second-generation immigrants making and remaking lives, loves and identities in England and America. We follow brothers and sisters, mothers and fathers, friends and lovers, in stories that take us from Boston and London to Bombay and Calcutta. Blending the individual and the generational, the exotic and the strikingly mundane, these haunting, exquisitely detailed and emotionally complex stories are intensely compelling elegies of life, death, love and fate. This is a dazzling work from a masterful writer.
Dharkan
- Author Name:
Singurdur Palsson
- Book Type:

- Description: बीसवीं सदी के आठवें दशक में आइसलैंड के कवियों का एक ऐसा समर्थ और महत्त्वपूर्ण दल उभरकर सामने आया जिसने वहाँ के कविता संसार में भाषा, बिम्ब एवं शिल्प के स्तर पर बहुत कुछ बदला। सिगुरदुर पॉलसन इसी दल के कवियों में से एक थे। इस दल के कवि अपने आप को ‘पोयट्स लॉरिएट विदाउट लॉरेल’ अर्थात् ‘जयपत्र विहीन राजकवि’ कहते थे। अपने पहले काव्य-संग्रह 'पोयम्स प्ले एट सी-सा' से ही सिगुरदुर पॉलसन ने एक ऐसे सम्भावनाशील युवा कवि के रूप में ख्याति अर्जित की, जिसके पास शब्दों की असाधारण सम्पदा थी और उसके साथ ही थी उनसे खेलने की अप्रितम प्रतिभा। जीवन अपने सम्पूर्ण प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ उसके पास था जिसे वह ‘अभी’ में जीता था—अतीत और भविष्य से परे। पॉलसन की कविताओं में ताज़गी है, रचनात्मक ऊर्जा है, जीवन के प्रति अगाध अनुराग है। लेकिन इसके साथ ही है समाज में व्याप्त बुर्जुआ ठहराव के प्रति एक बेचैनी। वे उन लोगों से क़तई सहमत नहीं, जो पाप और दु:ख को, जीवन के सुखों को, जीवन के अस्तित्व का सार मानते हैं और जीवन में सुखों को नकारते हैं। सिगुरदुर पॉलसन की शिक्षा-दीक्षा पेरिस में हुई और कुछ-कुछ अन्तराल पर वे पन्द्रह वर्ष वहाँ रहे और नाटकों का अध्यापन करते रहे। पेरिस के साथ उनके युवा जीवन की विभिन्न स्मृतियाँ बहुत गहराई से जुड़ी हैं। यही वजह है कि उनकी कविताओं में पेरिस में बिताया गया समय बार-बार आकर जीवन्त हो जाता है।
Vishay : Nar Nari
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत उपन्यास में सुशीतल चटर्जी और अल्का नायर का प्रेम है जो सुशीतल के संयमित और प्रतिज्ञाबद्ध विद्यार्थी जीवन से आरम्भ होकर सुशीतल के पक्के जुआरी और शराबी होने तक जाता है, और दूसरी तरफ़ अल्का के एक मान की ऊँची छवि में स्थापित होने तक जो सुशीतल की दूसरी पत्नी से हुए बेटे की पढाई पर अपने जमा पैसे बिना हिचक खर्च कर देती है। दूसरा चरण सरपति राय के ख़ानदान का क़िस्सा है जो पुनः स्त्री-पुरुष सम्बन्ध के झोंकों में ही झूल जाता है। तीसरे उपन्यास में कुसमिया है—एक ईमानदार और सेवा-भाव से सम्पन्न सेविका जिसे अन्त में अपनी मालकिन के बेटे के ख़ून के इल्ज़ाम में फाँसी की सज़ा होती है। ‘विषय नर-नारी’ में बिमल मित्र ने जैसे लेखक होने की अपनी पहचान को भी बार-बार रेखांकित किया और जिया है। स्वतंत्र रूप से लेखन को ही अपना जीवन-ध्येय बनानेवाले उस ज़माने के ऐसे लेखकों की रचनाएँ स्वयं लेखन की प्रतिष्ठा हैं जिससे जनसाधारण पाठक के रूप में एक सजीव उपस्थिति की तरह जुड़ा रहता था। इस लिहाज़ से भी साहित्य की थाती में सुरक्षित ऐसी रचनाओं को पढ़ा जाना चाहिए।
Madar
- Author Name:
Subhash Chandra Yadav
- Book Type:

- Description: A Maithili Novel
Adhure Suryon Ke Satya
- Author Name:
Prakash Kant
- Book Type:

- Description: Novel
Musafir Hoon Yaro
- Author Name:
Partha Sarthi Sen Sharma
- Book Type:

- Description: इस पुस्तक के लेखक सरकार के लिए कार्य करनेवाले एक सैंतीस वर्षीय भारतीय हैं। भारत सरकार ने अपने मध्य क्रम के अधिकारियों के शिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत एम.बी.ए कोर्स हेतु उन्हें चुना और प्रायोजित किया था। इस कोर्स के लिए उन्हें एक अल्पज्ञात यूरोपीय देश स्लोवेनिया की राजधानी ल्युब्ल्याना भेजा गया। बीते हजारों वर्षों से यूरोपीय यात्री भारत की यात्रा करते और अपनी इन यात्राओं के बारे में लिखते रहे हैं। मेगस्थनीज से लेकर मार्को पोलो और निकोलो कॉण्टी से मार्क टली तक बहुत से श्वेत यूरोपियनों ने भारत की यात्रा कर अपने देशवासियों व भावी पीढ़ी के लाभ हेतु अपने अनुभवों को दर्ज किया है। इस अनुपात में, यूरोप की यात्रा करनेवाले भारतीयों की संख्या बहुत कम है और उनमें से भी अपने अनुभवों, दृष्टिकोणों व प्रतिक्रियाओं को दर्ज करनेवालों की संख्या तो और भी कम रही है। लेकिन पिछली शताब्दी में भारत इतना बदल गया है, जितना इतिहास में किसी भी शताब्दी में नहीं बदला था। आज इतिहास में पहली बार यूरोप से आनेवालों के मुकाबले यूरोप जानेवाले भारतीयों की संख्या अधिक हो गई है। इसके बावजूद कुछ अज्ञात कारणों से अपनी यूरोप यात्रा के अनुभवों को दर्ज करनेवाले भारतीयों की संख्या नगण्य ही है। यह पुस्तक इसी असंतुलन को साधने का एक विनीत प्रयास है, जो वहाँ की कला-संस्कृति-समाज का सांगोपांग दर्शन कराती है।
Proud Convicts Of Love
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Book Type:

- Description: Pankaj Subeer is well known for his writings on unique subjects and his mesmerizing extraordinary ways of storytelling. He is a novelist, short story writer and an editor of two magazines. He has written three novels, eight short story books and his writings have appeared in many magazines, daily newspapers and books. In his writings, he depicts social injustice, ugliness and discrimination in the society, and hope through love. His one novel ''Akaal mein utsav'' is on farmer's problems. Another novel 'Yeh woh sehar to nahin' is written on those historical characters which had been forgotten and forbidden by the time. In his short stories, he has succeeded in riveting the reader's attention towards his characters with different, very engrossing, styles of writings in Indian literature. He has won numerous national and international awards for his contribution to literature. ''Proud convicts of love'' is a translation of his very popular Hindi novel ''Jinhe jurm e ishq par naaz tha.'' Rachana Tyagi has translated this novel. The novel was published in 2019 by Shiva publications and was sold out very quickly and its second edition was also published in 2019.Third and fourth editions came out in 2020 and fifth edition in 2021. Although all his books have been very popular, this novel has broken all records and is his best creation to date. ''Proud convicts of love'' is a beautiful journey of five thousand years of civilizations portraying the role religion played in shaping and dividing societies and nation building based on unfounded and selfish interpretations of religious teachings. In this novel Pankaj Subeer has been successful in bringing forward a new ideology of love, faith and belief. I'm confident that this English translation will enthrall the readers as much as the Hindi version continues to do till this day!. -Sudha Om Dhingra, USA
Laalbatti Ki Amritkanyaanyen
- Author Name:
Kusum Khemani
- Book Type:

- Description: कुसुम खेमानी का यह उपन्यास ‘लालबत्ती की अमृतकन्याएँ’ कथावस्तु की दृष्टि से एक साहसिक क़दम माना जा सकता है क्योंकि यह वह इलाक़ा है जिस पर लिखने से हिन्दी लेखकों की क़लम प्राय: गुरेज करती है। फिर भी इस दिशा में कुछ उल्लेखनीय कृतियाँ तो देखने को मिलती ही हैं, यह उपन्यास उसी शृंखला की नवीनतम कड़ी है। यों उपन्यास कोलकाता के ‘सोनागाछी’ पर केन्द्रित है लेकिन यह लालबत्ती गली हर शहर और हर क़स्बे में होती है और अन्त:सलिला की तरह समाज के अन्तर में बहती रहती है। समाज इन स्त्रियों को विषकन्याएँ मानता है पर दरअसल ये समाज के भीतर छिपी गन्दगी को फैलने से रोकने के साथ ही उसका परिष्करण भी करती हैं और इस बिन्दु पर आकर ये ‘विषकन्याएँ’ अमृतकन्याओं में बदल जाती हैं। उपन्यास की कथा विष से अमृत की ओर बढ़ने की संघर्ष-गाथा है क्योंकि उपन्यास की पात्र वे स्त्रियाँ हैं, जिन्हें अमृत से वंचित कर ‘विष’ की ओर ढकेल दिया गया है। उपन्यास में इन स्त्रियों की रोज़-रोज़ की प्रताड़ना, अपमान और हत्या जैसे रोंगटे खड़े कर देनेवाले प्रसंगों का चित्रण कुसुम खेमानी ने जिस भाषाई कौशल और शिल्पगत दक्षता के साथ किया है, वह देखते ही बनता है। पहला पन्ना खोलते ही उपन्यास किसी रोचक फ़िल्म की तरह हमारे सामने खुलता चला जाता है। यह बतरस शैली डॉ. कुसुम खेमानी का अपना निजी और विशिष्ट कौशल है जो पाठकों को अन्त तक बाँधे रखता है। उपन्यास की कथा में सहारा देनेवाले हाथों का सन्दर्भ ही नहीं है बल्कि इन पतिता स्त्रियों द्वारा गिरकर ख़ुद उठने और सँभलने की कोशिशों का कलात्मक मंथन भी है। ‘लावण्यदेवी’, ‘जड़िया बाई’ और ‘गाथा रामभतेरी’ जैसे उपन्यासों से गुज़रने के बाद, निस्सन्देह यहाँ यह कहा जा सकता है कि इतनी ख़ूबियों से भरा-पूरा यह उपन्यास अगर किसी का हो सकता है, तो वह सिर्फ़ कुसुम खेमानी का हो सकता है। —एकान्त श्रीवास्
Mukti -The Salvation
- Author Name:
Sanjay Sharma
- Rating:
- Book Type:

- Description: Can you take the law into your own hands and kill the rapist, extortionist, and murderer who has been hounding you and the entire basti where you lived? Can you—while assassinating the criminal in front of police and law—also castrate the man? Some women got together and did just that. The police never protected them nor did the local MLA help. In fact, these two entities also joined in exploiting these victims. Did they get caught? Were they sentenced? And why did the criminal behave the way he did? Why did he come to hate women? What made a boy turn into a rapist?
Ujla Andhera
- Author Name:
Kailash Wankhede
- Book Type:

-
Description:
उजला अँधेरा उपन्यास को पढ़ना एक ऐसे सच के सामने होना है जिससे पूरी व्यवस्था मुँह चुराती रही है। सामाजिक-व्यवस्था का वह सच जिसने आज़ाद भारत के उस सपने को निरर्थक कर दिया जो इस देश के नागरिकों को समता, स्वतंत्रता और उजाले का आश्वासन देता था।
वह सच है जाति जो हर तरह की सामाजिक-आर्थिक प्रगति को ठेंगा दिखाती हुई हमारे समाज में आज भी जहाँ की तहाँ बनी हुई है। तीन पीढ़ियों के दुःख-दर्द और बदलाव के संघर्षों से रचा हुआ यह पूरा उपन्यास अपने आप में एक तीखा सवाल है जिसे जाति के यथार्थ से आँख मिलाते हुए पूछा गया है। यह उपन्यास पूछता है कि भारत के लोग आज भी एक समान नागरिकता बोध और व्यवहार के अभ्यस्त क्यों नहीं हो पाए हैं; कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी समाज के एक बड़े हिस्से को अपने जन्म, विवाह एवं मृत्यु संस्कारों और उत्सवों को अपने ढंग से मनाने का अधिकार क्यों नहीं मिला; कि यह कैसी व्यवस्था है जिसमें सार्वजनिक सड़क को भी कुछ लोग अपनी निजी सम्पत्ति समझते हैं और चाहते हैं कि कौन उस पर चलेगा, कौन नहीं ये भी वे तय करें? और सबसे बड़ा यह सवाल कि एक लोकतान्त्रिक राष्ट्र की सरकारें भी क्यों जाति की इस लक्ष्मण रेखा को नहीं लाँघ पातीं? ऐसे तमाम सवालों से उपन्यास के पात्र टकराते हैं। बदलाव की बेचैनी हो या बराबरी के सपने, वे यहाँ एक सुलगती हुई आँच में धीरे-धीरे पकते हैं और सघन सामूहिकता के साथ दर्ज होते हैं। हमारे समय और समाज को समझने के लिए एक ज़रूरी उपन्यास.
Karmbhoomi
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description: प्रेमचंद आधुनिक हिंदी साहित्य के कालजयी कथाकार हैं। कथा-कुल की सभी विधाओं—कहानी, उपन्यास, लघुकथा आदि सभी में उन्होंने लिखा और अपनी लगभग पैंतीस वर्ष की साहित्य-साधना तथा लगभग चौदह उपन्यासों एवं तीन सौ कहानियों की रचना करके ‘प्रेमचंद युग’ के रूप में स्वीकृत होकर सदैव के लिए अमर हो गए। प्रेमचंद का ‘सेवासदन’ उपन्यास इतना लोकप्रिय हुआ कि वह हिंदी का बेहतरीन उपन्यास माना गया। ‘सेवासदन’ में वेश्या-समस्या और उसके समाधान का चित्रण है, जो हिंदी मानस के लिए नई विषयवस्तु थी। ‘प्रेमाश्रम’ में जमींदार-किसान के संबंधों तथा पश्चिमी सभ्यता के पड़ते प्रभाव का उद्घाटन है। ‘रंगभूमि’ में सूरदास के माध्यम से गांधी के स्वाधीनता संग्राम का बड़ा व्यापक चित्रण है। ‘कायाकल्प’ में शारीरिक एवं मानसिक कायाकल्प की कथा है। ‘निर्मला’ में दहेज-प्रथा तथा बेमेल-विवाह के दुष्परिणामों की कथा है। ‘प्रतिज्ञा’ उपन्यास में पुनः ‘प्रेमा’ की कथा को कुछ परिवर्तन के साथ प्रस्तुत किया गया है। ‘गबन’ में युवा पीढ़ी की पतन-गाथा है और ‘कर्मभूमि’ में देश के राजनीति संघर्ष को रेखांकित किया गया है। ‘गोदान’ में कृषक और कृषि-जीवन के विध्वंस की त्रासद कहानी है। उपन्यासकार के रूप में प्रेमचंद का महान् योगदान है। उन्होंने हिंदी उपन्यास को भारतीय मुहावरा दिया और उसे समाज और संस्कृति से जोड़ा तथा साधारण व्यक्ति को नायक बनाकर नया आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने हिंदी भाषा को मानक रूप दिया और देश-विदेश में हिंदी उपन्यास को भारतीय रूप देकर सदैव के लिए अमर बना दिया। —डॉ. कमल किशोर गोयनका
Infinity
- Author Name:
Minal Arora
- Book Type:

- Description: INFiNITY is a thorough account of all aspects of life that a soul must traverse to learn through a human incarnation. It demystifies mind, body, emotions, money, relationships, past lives, karma, ego, diseases and nirvana. It is a discernment worth every revelation, for it unfolds profound concepts that hold the power to transform and heal the reader as they indulge in the riveting examples. The author has used her experience in client therapy to untangle complex relationship scenarios and other life situations, getting to the root cause of the issue. The ease with which the book unfolds the pristine path to self-recognition leaves the reader empowered with a new perception of life.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book