Gaharaiyan Aur Oonchaiyan : Sahitya, Sanskriti Aur Sabhyata Ka Chintan
(0)
Author:
Shyam ManoharPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
199
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"रजा पुस्तक माला की यह कोशिश है कि हिन्दीतर भारतीय भाषाओँ के लेखक क्या लिख-सोच रहे हैं, उसका महत्त्वपूर्ण और प्रासंगिक हिस्सा हिन्दी में प्रकाशित किया जाए। इसी प्रयत्न के अन्तर्गत मराठी लेखक-नाटककार के आलोचनात्मक लेखन के एक संचयन का हिन्दी-मराठी विद्वान निशिकान्त ठकार द्वारा किया गया अनुवाद यहाँ प्रस्तुत है। हमें उम्मीद है कि ऐसी सामग्री से हिन्दी के विचार और आलोचनात्मक चिन्तन का परिसर विस्तृत और समृद्ध होगा।" </p> <p>–अशोक वाजपेयी
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"रजा पुस्तक माला की यह कोशिश है कि हिन्दीतर भारतीय भाषाओँ के लेखक क्या लिख-सोच रहे हैं, उसका महत्त्वपूर्ण और प्रासंगिक हिस्सा हिन्दी में प्रकाशित किया जाए। इसी प्रयत्न के अन्तर्गत मराठी लेखक-नाटककार के आलोचनात्मक लेखन के एक संचयन का हिन्दी-मराठी विद्वान निशिकान्त ठकार द्वारा किया गया अनुवाद यहाँ प्रस्तुत है। हमें उम्मीद है कि ऐसी सामग्री से हिन्दी के विचार और आलोचनात्मक चिन्तन का परिसर विस्तृत और समृद्ध होगा।" </p>
<p>–अशोक वाजपेयी
Book Details
-
ISBN9789388183680
-
Pages201
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: This book provides a confluence in which heterogeneous themes create an Azure sky with different fragrances. It combines young, innovative and creative minds with intellectual and hermeneutic maturities—winds blowing from all directions trying to soothe all types of appetite. The creativity enshrined in poems, short stories and plays represent the different aspects of life that prompt a reader to dive into reality and, at the same time, search out gems which give spiritual solace to the terrestrial grossness. The creativity of the writers telescopes the emerging complexities of worldly life, which try to bind them in a circle and mirror the starkest facts- hypocrisy, duality, brutality, lust, greed, love etc. Dr Shubhanku Kochar is teaching as an Assistant Professor at lady Irwin College (University of Delhi). His area of interest is African American literature. He has published several research papers in National and international journals and books. He is the author of well acknowledge novel everything will be all right. Dr Santosh Bahadur Singh teaches at lady Irwin College (University of Delhi). His name is recognised with several research papers published in National and international journals and a book, modalities of self in the poetry of Allen Ginsberg. His field of interest is poetry.
Sudha Murty Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Smt. Sudha Murty
- Book Type:

- Description: परोपकारी, उद्यमी, कंप्यूटर वैज्ञानिक, इंजीनियर, टीचर—सिर पर ऐसे कई ताज सजाए सुधा मूर्ति इन सबसे कहीं अधिक एक असाधारण कहानीकार हैं। साहित्य के लिए ‘आर.के. नारायण अवार्ड’, ‘पद्मश्री’, कन्नड़ साहित्य में उत्कृष्टता के लिए कर्नाटक सरकार का ‘अत्तिमब्बे पुरस्कार’ और ‘रेमंड क्रॉसवर्ड लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ के साथ उनके खजाने में बड़ों के लिए काल्पनिक, अकाल्पनिक उपन्यास, बच्चों की पुस्तकें, यात्रा-वृत्तांत और तकनीकी पुस्तकें शामिल हैं। यह पुस्तक उनके साहित्यिक सफर का मंगलगान है। विभिन्न संग्रहों से उनकी सर्वप्रिय कहानियों को चुनने के साथ ही कुछ नई कहानियों को एक विचारशील परिचय के साथ समेटे यह एक ऐसी पुस्तक है, जो अपनी लेखिका के समान ही, सभी अर्थों में बहुआयामी है।
Idannamam
- Author Name:
Maitreyi Pushpa
- Book Type:

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Description:
बऊ (दादी), प्रेम (माँ) और मन्दा...तीन पीढ़ियों की यह बेहद सहज कहानी तीनों को समानान्तर भी रखती है और एक-दूसरे के विरुद्ध भी। बिना किसी बड़बोले वक्तव्य के मैत्रेयी ने गहमागहमी से भरपूर इस कहानी को जिस आयासहीन ढंग से कहा है, उसमें नारी-सुलभ चित्रात्मकता भी है और मुहावरेदार आत्मीयता भी। हिन्दी कथा-रचनाओं की सुसंस्कृत, सटीक और बेरंगी भाषा के बीच गाँव की इस कहानी को मैत्रेयी ने लोक-कथाओं के स्वाभाविक ढंग से लिख दिया है, मानो मन्दा और उसके आसपास के लोग खुद अपनी बात कह रहे हों—अपनी भाषा और अपने लहजे में, बुंदेलखंडी लयात्मकता के साथ...अपने आसपास घरघराते क्रेशरों और ट्रैक्टरों के बीच।
मिट्टी-पत्थर के ढोकों या उलझी डालियों और खुरदुरी छाल के आसपास की सावधान छँटाई करके सजीव आकृतियाँ उकेर लेने की अद्भुत निगाह है मैत्रेयी के पास—लगभग ‘रेणु’ की याद दिलाती हुई। गहरी संवेदना और भावनात्मक लगाव से लिखी गई यह कहानी बदलते, उभरते ‘अंचल’ की यातनाओं, हार-जीतों की एक निर्व्याज गवाही है...पठनीय और रोचक।
—राजेन्द्र यादव
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