urdu Dictionary for Beginners
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Timsal MasudPublisher:
Rekhta PublicationsLanguage:
EnglishCategory:
Language-linguistics₹
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This comprehensive Urdu-English cum English-urdudictionary is crafted specifically for beginners, designed to aid in language learning and understanding. With clear definitions, contextual examples, and phonetic transcriptions, this dictionary simplifies the process of navigating between English and Urdu. Whether you're a student, traveler, or language enthusiast, this user-friendly guide will assist you in expanding your vocabulary and enhancing your language skills. Unlock the world of urduand English communication effortlessly with this essential reference tool.
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This comprehensive Urdu-English cum English-urdudictionary is crafted specifically for beginners, designed to aid in language learning and understanding. With clear definitions, contextual examples, and phonetic transcriptions, this dictionary simplifies the process of navigating between English and Urdu. Whether you're a student, traveler, or language enthusiast, this user-friendly guide will assist you in expanding your vocabulary and enhancing your language skills. Unlock the world of urduand English communication effortlessly with this essential reference tool.
Book Details
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ISBN9789394494442
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Pages221
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Avg Reading Time7 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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हिन्दी कविता की शीर्षक लेखनी—मुक्तिबोध। आत्मसमीक्षा और जगत-विवेचन के निष्ठुर प्रस्तावक।
उन्होंने एक दुर्गम पथ की ओर संकेत किया, जिससे होकर हमें अनुभव और अभिव्यक्ति की सम्पूर्णता तक जाना था; क्या हम जा सके?
हिन्दी की वरिष्ठतम उपस्थिति कृष्णा सोबती, जिनकी आँखों ने लगभग एक सदी का इतिहास साक्षात् देखा; और जो आज इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में आसपास फैले समय से उतनी ही व्यथित हैं, जितनी अपने समय और समाज में निपट अकेली, मुक्तिबोध की रूह रही होगी—मानवता विराट और सर्वसमावेशी उज्ज्वल स्वप्न के लगातार दूर होते जाने से कातर और क्रुद्ध।
यह मुक्तिबोध का एक अनौपचारिक पाठ है जिसे कृष्णा जी ने अपने गहरे संवेदित मन से किया है। भारतीय इतिहास के दो समय यहाँ रूबरू हैं।
Main Aur Mera Parivesh
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

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यशपाल की मूल पहचान भले ही एक कथाकार की हो, लेकिन कथा-साहित्य के बाहर भी उन्होंने बहुत-कुछ लिखा था। उनका यह लेखन उनके पर्याप्त लम्बे और व्यवस्थित रचनाकाल में समय की अपनी ज़रूरतों एवं दबावों के हिसाब से हुआ। ‘विप्लव’ के सम्पादकीय, क्रान्तिकारी जीवन के अपने संस्मरणों, यात्रावृत्त, प्रगतिशील लेखक संघ की गतिविधियों के सम्बन्ध में अभिभूत टिप्पणियों के अतिरिक्त बड़ी संख्या में उन्होंने राजनीतिक निबन्ध भी लिखे। यशपाल के बारे में एक आम धारणा यह है कि अपने वैचारिक आग्रहों के प्रति वे बहुत अनन्य और दृढ़ थे। इसी कारण अपने समय के साहित्यिक-राजनीतिक विवादों और बहसों में भी उनकी सक्रिय हिस्सेदारी रही। मार्क्सवादी और ग़ैर-मार्क्सवादी दोनों तरह के आलोचकों के विरोध के बीच उनका लेखन हुआ। जब-तब उन्हें अपने इन आलोचकों से भी उलझना होता था, भरसक सैद्धान्तिक रूप में वे अपना पक्ष रखते थे। अनुशासन, व्यवस्था और निरन्तरता सम्भवत: यशपाल के लेखन के केन्द्रीय सूत्र हैं। उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर तो लिखा ही, व्यक्तिगत सन्दर्भों पर उनका आत्मगत लेखन भी काफ़ी मात्रा में है। यशपाल के असंकलित इन लेखों में बहुत-सी ऐसी सामग्री है जो आत्मगत प्रकृति की है। इस सामग्री को एक जगह देख और पढ़कर किसी को भी आश्चर्य हो सकता है। यहाँ अपने लेखकीय जीवन के वैविध्यपूर्ण अनुभवों का खुलासा उन्होंने किया है—कभी अपनी इच्छा से और कभी दूसरों के अनुरोध पर। इस संकलन में उनके अनेक विवादास्पद लेख भी हैं जो इधर वर्षों से अप्राप्य थे। इस ढेर सारी सामग्री के एक जगह उपलब्ध हो जाने से यशपाल जैसे बड़े क़द-बुत के लेखक की रचना-प्रक्रिया और रचनात्मक सरोकारों की दृष्टि से भी इस सामग्री का अपना महत्त्व है।
Urdu Sahitya Ka Alochnatmak Ithas
- Author Name:
Ahtesham Hussain
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इस ग्रन्थ के विद्वान लेखक प्रोफ़ेसर एहतेशाम हुसैन उर्दू के मान्य आलोचक हैं। यह पुस्तक मूल रूप से हिन्दी में ही लिखी गई थी और अब यह एक सर्वमान्य तथ्य है कि इससे अच्छा उर्दू साहित्य का कोई दूसरा इतिहास न तो हिन्दी में उपलब्ध है और न ही उर्दू में। उर्दू साहित्य के अब तक जो इतिहास लिखे गए हैं, उनमें यह कमी रही है कि लेखकों ने सामाजिक चेतना और ऐतिहासिक समग्रता को अपनी दृष्टि में नहीं रखा है; कुछ भाषा सम्बन्धी विभिन्नताओं और शैलियों के भेदोपभेदों को सामने रखकर काल-विभाजन कर दिया है। इससे उर्दू साहित्य से सम्पूर्ण इतिहास के विकास और उसकी विभिन्न विधाओं की प्रगति का ठीक-ठीक ज्ञान नहीं हो पाता है। प्रस्तुत पुस्तक में चेष्टा की गई है कि उर्दू-साहित्य की जो रूपरेखा दी जाए, वह इस बात का सही-साफ़ परिचय दे सके कि कौन-सी ऐसी ऐतिहासिक परिस्थितियाँ थीं, जिनमें साहित्यिक विकास तथा परिवर्तन का क्रम निरन्तर गतिशील रहा और उसने भारतीय भाषाओं के साहित्य में उर्दू-साहित्य की महान् परम्परा को विकसित और समृद्ध किया।
चूँकि उर्दू-साहित्य के इतिहास का हिन्दी साहित्य के इतिहास से अविच्छिन्न सम्बन्ध है, इसलिए यह निश्चित ही है कि यह पुस्तक हिन्दी के उच्च कक्षा के विद्यार्थियों, जिज्ञासु पाठकों, सुधी आलोचकों तथा शोधकर्ताओं के लिए अत्यन्त उपयोगी है।
Ve Pandrah Din
- Author Name:
Prashant Pole
- Book Type:

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उन पंद्रह दिनों के प्रत्येक चरित्र का, प्रत्येक पात्र का भविष्य भिन्न था! उन पंद्रह दिनों ने हमें बहुत कुछ सिखाया। माउंटबेटन के कहने पर स्वतंत्र भारत में यूनियन जैक फहराने के लिए तैयार नेहरू हमने देखे। लाहौर अगर मर रहा है, तो आप भी उसके साथ मौत का सामना करो'' ऐसा जब गांधीजी लाहौर में कह रहे थे, तब राजा दाहिर की प्रेरणा जगाकर, हिम्मत के साथ, संगठित होकर जीने का सूत्र' उनसे मात्र 800 मील की दूरी पर, उसी दिन, उसी समय, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख श्रीगुरुजी' हैदराबाद (सिंध) में बता रहे थे। कांग्रेस अध्यक्ष की पत्नी सुचेता कृपलानी कराची में सिंधी महिलाओं को बता रही थी कि ‘आपके मैकअप के कारण, लो कट ब्लाउज के कारण मुसलिम गुंडे आपको छेड़ते हैं। तब कराची में ही राष्ट्र सेविका समिति की मौसीजी हिंदू महिलाओं को संस्कारित रहकर बलशाली, सामर्थ्यशाली बनने का सूत्र बता रही थीं ! जहाँ कांग्रेस के हिंदू कार्यकर्ता, पंजाब, सिंध छोड़कर हिंदुस्थान भागने में लगे थे और मुसलिम कार्यकर्ता मुसलिम लीग के साथ मिल गए थे, वहीं संघ के स्वयंसेवक डटकर, जान की बाजी लगाकर, हिंदू सिखों की रक्षा कर रहे थे। उन्हें सुरक्षित हिंदुस्थान में पहुँचाने का प्रयास कर रहे थे। फर्क था, बहुत फर्क था-कार्यशैली में, सोच में, विचारों में सभी में। स्वतंत्रता प्राप्ति 15 अगस्त, 1947 से पहले के पंद्रह दिनों के घटनाक्रम और अनजाने तथ्यों से परिचित करानेवाली पठनीय पुस्तक।
Sher-E-Garhwal : Azadi Ke Aandolan Ke Ek Gumnaam Nayak Ki Kahani
- Author Name:
Kranti Nautiyal
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Awating description for this book
Sher-E-Garhwal : Azadi Ke Aandolan Ke Ek Gumnaam Nayak Ki Kahani
Kranti Nautiyal
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