🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Tulsi : Aadhunik Vatayan Se

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

आपके हाथों में; यह पुनर्नवा कृति! तुलसी की बिलकुल नए परिदृश्य में पुनर्प्रस्तुति!! तुलसी के युग, समाज, जीवन, व्यक्तित्व, कृतित्व का आधुनिक समुद्र-मन्थन। बेहद चौंकानेवाले नतीजे निकले क्योंकि सुदीर्घ मध्यकाल की सर्वांगीणता का अधिग्रहण करनेवाला यह एकल कृति सन्तभक्त के रूप में पूजित तथा वर्णाश्रम-प्रतिपादक और नारी-शूद्र-निन्दक के रूपों में लांछित भी है। तथापि दर्पण के साथ दीपकवाली अन्तीक्षा से ‘तुलसी-कोड’ का विचित्र उद्घाटन बेहद चकित करता है क्योंकि वे समन्वय तथा कलिकाल-संग्राम, दोनों में साथ-साथ जूझे और आत्मोत्तीर्ण हुए। अन्ततोगत्वा लांछनों को धोकर वे इहलौकिक, यथार्थोन्मुख, त्रासदकरुण एवं सहज होते जाते हैं। सुदीर्घ मध्यकाल के सुपरिगठन के द्वन्द्वात्मक शुक्ल-श्याम आयामों में उन्होंने मध्ययुग का मिथकीयकरण, पौराणिक चेतना का मध्यकालीनीकरण, सामन्तीय ऐश्वर्य का कृषकीयकरण, तथा धर्म-दर्शन-साहित्य का तुलसीयकरण करके इन चतुरंग दिशाओं में एक नए संसार को ही प्रकाशित कर डाला। हमने भी आधुनिकताबोध एवं समाजविज्ञानों के समकालीन औज़ारों से इसकी पुनर्निमिति की है। इससे इस महासत्य का भी विस्फोट होता है कि पाँच-छह शताब्दियों से वे अविराम आगे ही बढ़ते जा रहे हैं—अपने सभी अन्तर्विरोधों एवं विरोधाभासों के साथ-साथ। भला क्यों? क्योंकि उत्तर यह है कि दिव्य सौन्दर्यबोध (लीला), कृषक-सौन्दर्यबोधशास्त्र (प्रीति), विविध काव्य-धर्मसूत्र (भक्ति), मिथक-आलेखकारी (चरितपावन) के शास्त्रेतर मार्ग भी बनाते हुए तुलसी बाबा ने विरासत में उथल-पुथल मचाकर यश-अपयश कमा डाला। तुलसी पर ऐसी अनुसन्धानपरक और आलोचिन्तनात्मक कृतियाँ सचमुच नगण्य हैं जो कालिदास के बाद के इस महत्-महान कृती का निरपेक्ष, निर्भीक तथा बिन्दास और बहुविध प्रस्तुतीकरण करें। तो आइए! आधुनिक वातायन से इस किताब का दिग्दर्शन किया जाए। तुलसी के हरेक गम्भीर अध्येता-अनुरागी और सभी पुस्तकालयों के लिए सर्वथा अनिवार्य।

Read more

₹ 995

796 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Tulsi : Aadhunik Vatayan Se This book ₹796
Manavdeh Aur Hamari Deh Bhashayen Ramesh Kuntal Megh ₹2,500
Mithak Aur Swapna Ramesh Kuntal Megh ₹895
3 books selected ₹4,390 ₹4,191

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

आपके हाथों में; यह पुनर्नवा कृति! तुलसी की बिलकुल नए परिदृश्य में पुनर्प्रस्तुति!!

तुलसी के युग, समाज, जीवन, व्यक्तित्व, कृतित्व का आधुनिक समुद्र-मन्थन। बेहद चौंकानेवाले नतीजे निकले क्योंकि सुदीर्घ मध्यकाल की सर्वांगीणता का अधिग्रहण करनेवाला यह एकल कृति सन्तभक्त के रूप में पूजित तथा वर्णाश्रम-प्रतिपादक और नारी-शूद्र-निन्दक के रूपों में लांछित भी है। तथापि दर्पण के साथ दीपकवाली अन्तीक्षा से ‘तुलसी-कोड’ का विचित्र उद्घाटन बेहद चकित करता है क्योंकि वे समन्वय तथा कलिकाल-संग्राम, दोनों में साथ-साथ जूझे और आत्मोत्तीर्ण हुए। अन्ततोगत्वा लांछनों को धोकर वे इहलौकिक, यथार्थोन्मुख, त्रासदकरुण एवं सहज होते जाते हैं।

सुदीर्घ मध्यकाल के सुपरिगठन के द्वन्द्वात्मक शुक्ल-श्याम आयामों में उन्होंने मध्ययुग का मिथकीयकरण, पौराणिक चेतना का मध्यकालीनीकरण, सामन्तीय ऐश्वर्य का कृषकीयकरण, तथा धर्म-दर्शन-साहित्य का तुलसीयकरण करके इन चतुरंग दिशाओं में एक नए संसार को ही प्रकाशित कर डाला। हमने भी आधुनिकताबोध एवं समाजविज्ञानों के समकालीन औज़ारों से इसकी पुनर्निमिति की है। इससे इस महासत्य का भी विस्फोट होता है कि पाँच-छह शताब्दियों से वे अविराम आगे ही बढ़ते जा रहे हैं—अपने सभी अन्तर्विरोधों एवं विरोधाभासों के साथ-साथ। भला क्यों?

क्योंकि उत्तर यह है कि दिव्य सौन्दर्यबोध (लीला), कृषक-सौन्दर्यबोधशास्त्र (प्रीति), विविध काव्य-धर्मसूत्र (भक्ति), मिथक-आलेखकारी (चरितपावन) के शास्त्रेतर मार्ग भी बनाते हुए तुलसी बाबा ने विरासत में उथल-पुथल मचाकर यश-अपयश कमा डाला।

तुलसी पर ऐसी अनुसन्धानपरक और आलोचिन्तनात्मक कृतियाँ सचमुच नगण्य हैं जो कालिदास के बाद के इस महत्-महान कृती का निरपेक्ष, निर्भीक तथा बिन्दास और बहुविध प्रस्तुतीकरण करें।

तो आइए! आधुनिक वातायन से इस किताब का दिग्दर्शन किया जाए। तुलसी के हरेक गम्भीर अध्येता-अनुरागी और सभी पुस्तकालयों के लिए सर्वथा अनिवार्य।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
5th
Publication year
2007
Weight
530 grams
ISBN-13
9788183610834
Pages
344
Reading time
~11 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp