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Dum Ki Darkar

Published by

Prabhat Prakashan

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Hindi

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About the book

दुम की दरकार—डॉ. शिव शर्मादुमदार प्राणियों को देखकर लगता है कि काश, हमारे पास भी एक दुम होती। जिन प्राणियों के पास होती है, वे शिखर तक पहुँच जाते हैं और दुम-विहीन सड़कों पर ही रेंगते रहते हैं। आज भर्तृहरि एवं तुलसीदास होते तो यह कदापि नहीं लिखते कि साहित्य, संस्कृति, कला-विहीन प्राणी, पुच्छ-विहीन पशु के समान होते हैं। आपके पास दुम नहीं है तो आपको किसी भी राजप्रासाद में प्रवेश नहीं मिलेगा। दुम आपकी निष्‍ठा की पहचान है, अन्यथा आप अपने कैरियर में सड़ते रहेंगे। यदि आप किसी दल में हैं और नेता के समक्ष अपनी दुम नहीं हिलाई तो मंत्री-विधायक क्या, जीवन भर कार्यकर्ता या स्वयंसेवक बने जाजम बिछाते रहेंगे। अभी तक विचारधारा एवं पार्टी के प्रति निष्‍ठा व्यक्‍त करनी पड़ती थी, अब नेता के प्रति भी करनी लाजिमी है। —इसी संग्रह से सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. शिव शर्मा के व्यंग्य अपने परिवेश के समसामयिक विषयों एवं समाज की विसंगतियों, विद्रूपताओं एवं अन्यमनस्कता पर करारी चोट करते हैं। मनोरंजन से भरपूर ये व्यंग्य एक ओर पाठक को गुदगुदाते हैं तो दूसरी ओर उसके मानस को उद्वेलित किए बिना नहीं रहते।

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दुम की दरकार—डॉ. शिव शर्मादुमदार प्राणियों को देखकर लगता है कि काश, हमारे पास भी एक दुम होती। जिन प्राणियों के पास होती है, वे शिखर तक पहुँच जाते हैं और दुम-विहीन सड़कों पर ही रेंगते रहते हैं। आज भर्तृहरि एवं तुलसीदास होते तो यह कदापि नहीं लिखते कि साहित्य, संस्कृति, कला-विहीन प्राणी, पुच्छ-विहीन पशु के समान होते हैं। आपके पास दुम नहीं है तो आपको किसी भी राजप्रासाद में प्रवेश नहीं मिलेगा। दुम आपकी निष्‍ठा की पहचान है, अन्यथा आप अपने कैरियर में सड़ते रहेंगे। यदि आप किसी दल में हैं और नेता के समक्ष अपनी दुम नहीं हिलाई तो मंत्री-विधायक क्या, जीवन भर कार्यकर्ता या स्वयंसेवक बने जाजम बिछाते रहेंगे। अभी तक विचारधारा एवं पार्टी के प्रति निष्‍ठा व्यक्‍त करनी पड़ती थी, अब नेता के प्रति भी करनी लाजिमी है।
—इसी संग्रह से
सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. शिव शर्मा के व्यंग्य अपने परिवेश के समसामयिक विषयों एवं समाज की विसंगतियों, विद्रूपताओं एवं अन्यमनस्कता पर करारी चोट करते हैं। मनोरंजन से भरपूर ये व्यंग्य एक ओर पाठक को गुदगुदाते हैं तो दूसरी ओर उसके मानस को उद्वेलित किए बिना नहीं रहते।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Hardbound
Publisher
Prabhat Prakashan
Publication year
2018
Weight
200 grams
ISBN-13
9789380183497
Pages
160
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
10 × 10 cm
Language
Hindi

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