Dadu Takes Me To Gurudwara By Tanvi Nishchal
(0)
₹
149
₹ 123.67 (17% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Tag along with Mahi as she visits Gurudwara for the first time with her best buddy, Dadu and how he answers her whats and whys
Read moreAbout the Book
Tag along with Mahi as she visits Gurudwara for the first time with her best buddy, Dadu and how he answers her whats and whys
Book Details
-
ISBN9788119745234
-
Pages16
-
Avg Reading Time1 hrs
-
Age0-11 yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Sarthak Vyagya Ka Yatri : Prem Janmejai
- Author Name:
Sudha Om Dhingra +1
- Book Type:

- Description: Book
Tenduye Ke Nishaan
- Author Name:
Rudyard Kipling
- Book Type:

- Description: Awaiting description
Vyangyaya Ke Rang
- Author Name:
Ashok Gujarati
- Book Type:

- Description: व्यंग्य के रंग—अशोक गुजराती मोबाइल पर धुन बजी—‘हैलो!’ उधर से तीर चला—‘मोहन है क्या?’ मैं चौंका—‘मोहन... यहाँ कोई मोहन नहीं है!’ उन पर कोई असर नहीं—‘आपका फोन नंबर क्या है?’ मुझे गुस्सा आ गया—‘राँग नंबर!’ लेकिन वे पीछा छोड़ने को तैयार नहीं—‘आप कौन बोल रहे हैं?’ मन हुआ, कहूँ—‘तेरा बाप!’ परंतु सभ्यता का तकाजा था, फोन बंद कर दिया। अब मैंने प्रिंटिंग प्रेस को लगाया। घंटी बजती रही तो घर पर मिलाया। पूछा, ‘प्रकाशजी हैं क्या?’ स्वर उभरा—‘कहिए क्या काम है, मैं उनका भाई बोल रहा हूँ।’ मेरी जिज्ञासा—‘मेरे कार्ड छप गए क्या?’ उनकी प्रतिजिज्ञासा—‘आपको कौन सी तारीख बताई थी?’ मैंने खुलासा किया—‘तारीख तो कल हो गई।’ उन्होंने आश्चर्य जताया—‘ऐसा क्या! फिर छप गए होंगे।’ मुझे खुशी हुई—‘तो मैं लेने आ जाऊँ?’ उन्होंने पानी फेर दिया—‘भई, यह तो आपको प्रकाश से ही पूछना पड़ेगा। वह मुंबई गया है। मेरी अलग दुकान है कपड़ों की।’—इसी संग्रह से सात्त्विक, जीवंत एवं रोचक शैली में लिखे अशोक गुजराती के ये व्यंग्य लेख बड़ी-से-बड़ी बात को सहज एवं मारक रूप में कह देने की क्षमता रखते हैं। ये व्यंग्य पाठक को गुदगुदाते ही नहीं, भरपूर मनोरंजन भी करते हैं।
Kaliyug Sarvashreshtha Hai
- Author Name:
Mahayogi Swami Buddha Puri
- Book Type:

- Description: "सृष्टि के विकास क्रम में चार युगों का चक्र चलता है—सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग। प्रत्येक युग में धर्म का कुछ हृस होते-होते कलियुग में अधर्म अपने चरम पर पहुँच जाता है। कलियुग के बाद सतयुग का प्रादुर्भाव होता है, पर कैसे? क्या रहस्य है? अधर्म की वृद्धि से एकदम धर्मयुक्त सतयुग का कैसे प्रादुर्भाव होता है? इसमें क्या रहस्य है? कौन सा ईश्वरीय विधान छुपा हुआ है और उसका कलियुग में रहते हुए ही किन साधनाओं द्वारा प्रकट होना संभव है? शास्त्र कहते हैं कि कलियुग के बाद पुनः धर्मयुग अर्थात् सतयुग आएगा ही। इतना ही नहीं, महाभारत तथा अनेक पुराणों में लिखा है कि कलियुग सर्वश्रेष्ठ है। यह पुस्तक एक ओर शास्त्रों के इन गंभीर रहस्यों को अत्यंत सरल भाषा में और उपयुक्त प्रमाणों तथा युक्तियों के माध्यम से स्पष्ट करती है तो दूसरी ओर बताती है कि कलियुग के अवगुणों से कैसे बचना है और गुणों को कैसे धारण करना है? ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र—इन वर्णों का क्या महत्त्व है? जीवन का लक्ष्य क्या है और उसकी प्राप्ति हेतु किन स्तरों को पार करना होता है? धर्म का वास्तविक स्वरूप क्या है? उत्तरोत्तर धर्म की व्यापकता में साधक की चेतना का प्रवेश कैसे संभव है? "
Fake Encounter
- Author Name:
Mukesh Kumar
- Book Type:

- Description: This book has no description
Gulistan
- Author Name:
Shiekh Saadi
- Book Type:

- Description: बहार का मौसम था। ख़ूबसूरत बाग़ से मेरा दोस्त गुले-लाला, रेहान, सुम्बुल, ज़मीरान जैसे तरह-तरह के फूलों से दामन भर रहा था। मैंने उससे कहा- ‘‘बाग़ के फूल हमेशा बाक़ी नहीं रहते और बहार का ज़माना वफ़ादार नहीं होता। जो चीज़ फ़ानी हो, वह दिल लगाने के क़ाबिल नहीं।’’ दोस्त ने पूछा- ‘‘फिर क्या तरीक़ा है?’’ मैंने कहा- ‘‘मैं लोगों की कुशादगी और सहूलत के लिए ‘गुलिस्ताँ’ की किताब लिख सकता हूँ। खि़ज़ा (पतझड़) की हवाओं को इसके पन्नों पर ग़ल्बा हासिल नहीं होगा और ज़माने की गर्दिश इसकी बहार को कभी पतझड़ में न बदल सकेगी। फूलों से भरी थाली तेरे किस काम आएगी? मेरे ‘गुलिस्ताँ’ से एक वरक़ (पन्ना) ले जा। फूल तो कुछ दिनों में मुरझा जाएंगे लेकिन यह ‘गुलिस्ताँ’ हमेशा तरो-ताज़ा रहेगी।’’ वादे के मुताबिक़ मैंने उसी दिन इस किताब के दो बाब (अध्याय) लिख दिये ताकि अच्छी ज़िंदगी बसर करने और बोलचाल के आदाब में लोगों के काम आ सके। हासिले-क़लाम यह कि अभी मौसमे-बहार बाक़ी ही था कि किताब ‘गुलिस्ताँ’ वक़्त पर पूरी हो गई।’’ - शेख़ सादी
Common Man Watches Cricket
- Author Name:
R K Laxman
- Book Type:

- Description: From financial crises to the woes of householders, from political instability to rampant corruption, Laxman's cartoons capture the entire gamut of contemporary Indian experience. Hilarious and thought-provoking at the same time, this is a treasure house of humour from one of the most striking voices commenting on Indian socio-political life today. This is a revised edition of the original published in 1998.
Adbhut Upanyas (Version-2)
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: Dr.Sanjay Rout is an internationally renowned author of bestselling novel Wonderful Novel series. His book is written in a light, entertaining and fun manner with a touch of humour that makes it a very easy read. The main characters in his story have been portrayed with utmost care and emotions have been portrayed through their interactions.
Maya Maha Thagni Ham Jaani
- Author Name:
Ashwini Kumar Dubey
- Book Type:

- Description: Book
Gudgudate Sawal-Jawab
- Author Name:
J.P.S. Jolly
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Teddy Evam Anya Kahaniyan
- Author Name:
Pragya Mishra
- Book Type:

- Description: यह पांच कहानियों का संकलन है। इस किताब में अच्छी सीख और कहानियाँ हैं। हर कहानी आपको हँसाएगी, सिखाएगी और ऐसे रास्ते दिखाएगी, जिन्हें सिर्फ़ लिटरेचर ही दिखा सकता है। ये कहानियाँ बच्चों में साहस, समझदारी, प्रकृति-प्रेम और कल्पनाशीलता की कलात्मक खेती हैं। जब बैग में रसदार फल की ख़ुशबू पाकर भालू माशा की ओर बढ़ने लगा तो उसने बचने के लिए क्या किया? और राजू ने अपने दोस्त खच्चर के लिए क्या किया जब उसे किसी व्यापारी को बेंच दिया गया? क्या दोनों आज़ाद हो पाये? डूबती हुयी चींटी को बचाने के लिए नीलकंठ ने महुए का एक पत्ता गिरा दिया। यह नीलकंठ और चींटी की दोस्ती की शुरुआत थी। लेकिन यह मिसाल कैसे बनी? निश्चय ही आप इनका जवाब चाहते होंगे पर जवाब तो ये कहानियाँ ही देंगी!
Chiya Ki Cycle Hindi By Yash Malviya
- Author Name:
Yash Malviya
- Book Type:

- Description: संता क्लाज़ से थोड़ी कम ही इनकी झक-झक दाढ़ी है संता के तो रेनडियर हैं इनकी धक्का गाड़ी है इक काँधे पर झोला है दिल बच्चों सा भीला है झोले में कविताएँ हैं खुशियाँ दाएँ बाएँ हैं यश अंकल तो संता जैसे हो - ही कर के हंसते हैं इनके पास तो गीतों वाले नन्हें-नन्हे बस्ते हैं
Do Vyangya Natak
- Author Name:
Dr. Prem Janmejai
- Book Type:

- Description: सुप्रसिद्ध व्यंगकार डॉ. प्रेम जनमेजय के दो व्यंग्य नाटक इस पुस्तक में संकलित किए गए हैं।
Hathi Ka Baccha
- Author Name:
Rudyard Kipling
- Book Type:

- Description: Awaiting description
Dummy Book - Autobiography (MK Gandhi)
- Author Name:
Dummy User For Test
- Rating:
- Book Type:



- Description: PLEASE DO NOT PURCHASE THIS BOOK. THIS IS DUMMY BOOK FOR APP STORE TESTS
Family Buisness Ki Sachchaiyan
- Author Name:
Rajendra Jain
- Book Type:

- Description: This book has no description
Udne Wala Phool
- Author Name:
Upasana
- Book Type:

- Description: उपासना की यहाँ प्रस्तुत रचानाएँ विधाओं के बीच आवाजाही का सुन्दर उदाहरण हैं। ये फ़्लैश फिक्शन के नज़दीक नज़र आती हैं लेकिन इनमें कविता, संस्मरण और स्केच की छायाएँ भी आती जाती दिखती हैं। इनमें ऐसे क्षणों को कोमलता से दर्ज किया गया है जो अन्यथा देखने से छूट जाते हैं। अछूती बिम्बात्मकता के बावजूद ये सरल भी हैं, बहुलार्थक भी। इनसे गुज़रकर पाठक के देखने और सोचने का तरीक़ा वह नहीं रह जाता, जो इससे पहले था। उसमें स्मृति के प्रति थोड़ी रागात्मकता बढ़ जाती है, दृष्टिकोण में कुछ अपरिचित आयाम जुड़ जाते हैं।
Dhapu Panala
- Author Name:
Kailsh Mandlekar
- Book Type:

- Description: This book has no description
The Elephant's Child
- Author Name:
Rudyard Kipling
- Book Type:

- Description: Awaiting description
Gillu
- Author Name:
Mahadevi Verma
- Book Type:

- Description: अपने परिवेश से, मनुष्य का रिश्ता केवल लोभ-लाभ का नहीं हो सकता। यह संसार के साथ मनुष्य के अंतर्लोक के लिए भी घातक है। नन्ही गिलहरी 'गिल्लू' से महादेवी जी का जुड़ाव, पूरे परिवेश से उनकी आत्मीयता में बदल जाता है। गिल्लू संग धीरे-धीरे हमारे भीतर एक भावलोक निर्मित होता है, जो उसके साथ ही डूब जाता है- जैसे वीणा के तारों से उठी सरगम । इसे पढ़ने के बाद, अपने आसपास के पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं को देखने का हमारा तरीक़ा वही नहीं रह जाता। कलात्मक चित्रांकन, इस रेखाचित्र में शब्दों की निहित संवेदना को मूर्त कर देता है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book