Bharat-China Seema Mudde
(0)
Author:
Ranjit Singh KalhaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
800
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सीमा समझौता मात्र नक्शे में कुछ रेखाओं का खींचा जाना अथवा जमीन पर कुछ निशान चिह्नित कर देना नहीं है। यह मात्र तकनीकी व्यवस्था भी नहीं है। हालाँकि कोई सीमा-रेखा किसी देश के संप्रभुता के दायरे को बताती है, लेकिन ऐसी रेखा खींच देने भर से देश को सुरक्षा और विदेशी दखल से मुक्ति नहीं मिल जाती। भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहे श्री कल्हा ने इस पुस्तक में भारत और चीन के बीच सीमा-निर्धारण से जुड़ी वार्ताओं और प्रयासों का विस्तृत विवरण दिया है; साथ ही इस मुद्दे से जुड़ी राष्ट्रीय रणनीतिक आवश्यकताओं, क्षेत्रीय राजनीति तथा तत्कालीन महाशक्तियों के प्रभाव एवं भूमिका की भी जानकारी जुटाई है। वे भारत-चीन संबंधों और सीमा-वार्ताओं से लंबे समय तक जुड़े रहे, इसलिए उनका विवरण बहुत दिलचस्प, प्रामाणिक और महत्त्वपूर्ण है।
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सीमा समझौता मात्र नक्शे में कुछ रेखाओं का खींचा जाना अथवा जमीन पर कुछ निशान चिह्नित कर देना नहीं है। यह मात्र तकनीकी व्यवस्था भी नहीं है। हालाँकि कोई सीमा-रेखा किसी देश के संप्रभुता के दायरे को बताती है, लेकिन ऐसी रेखा खींच देने भर से देश को सुरक्षा और विदेशी दखल से मुक्ति नहीं मिल जाती। भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहे श्री कल्हा ने इस पुस्तक में भारत और चीन के बीच सीमा-निर्धारण से जुड़ी वार्ताओं और प्रयासों का विस्तृत विवरण दिया है; साथ ही इस मुद्दे से जुड़ी राष्ट्रीय रणनीतिक आवश्यकताओं, क्षेत्रीय राजनीति तथा तत्कालीन महाशक्तियों के प्रभाव एवं भूमिका की भी जानकारी जुटाई है। वे भारत-चीन संबंधों और सीमा-वार्ताओं से लंबे समय तक जुड़े रहे, इसलिए उनका विवरण बहुत दिलचस्प, प्रामाणिक और महत्त्वपूर्ण है।
Book Details
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ISBN9789394534483
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Pages336
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: सहस्राब्दियों के भारतीय इतिहास, भारतीय संस्कृति के विस्तार, और देश के सार को आकर्षक और पाठकों के लिए बोधगम्य स्वरूप में प्रस्तुत करना कोई मामूली काम नहीं है। इन्टैक ने इस पुस्तक को रचनात्मक और सुंदर स्वरूप में तैयार किया है, और इन्टैक उम्मीद करता है कि भारतीय विरासत पर आशुजानकारी पाने के इच्छुक लोग इसे बहुत पसंद करेंगे। इस पुस्तक में उल्लेखित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएँ, जिन्होंने उपमहाद्वीप के वर्तमान स्वरूप को आकार दिया है; कलात्मक परंपराओं और धर्मों के अभिन्न पहलुओं की स्पष्ट व्याख्याएँ, जो इस विविध रूपी और आकर्षक भूमि का निर्माण करती हैं, भारत के अध्ययन, समझ और सराहना में रुचि रखने वालों के लिए इसे एक आवश्यक संदर्भ पुस्तक बनाती हैं।
Davanal : Maovad Se Jang
- Author Name:
Nandini Sundar
- Book Type:

- Description: पिछले दो दशकों के दौरान, मध्य भारत में व्यापक रूप से वनों से आच्छादित और खनिज के मामले में समृद्ध बस्तर का इलाका देश में सबसे अधिक सैन्यीकृत स्थलों में से एक के रूप में उभरा है। सरकार माओवादी उग्रवाद को भारत की ‘सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा’ बताती है। वर्ष 2005 में राज्य-प्रायोजित एक हथियारबन्द आन्दोलन, सलवा जुडुम, ने सैकड़ों गाँवों को जला दिया और मलेशिया, वियतनाम एवं अन्य जगहों पर विकसित आतंकवाद-विरोधी रवैये का अनुसरण करते हुए उन गाँवों के निवासियों को राज्य-नियंत्रित शिविरों में हाँक दिया। बलात्कार और हत्याओं के अलावा, ‘आत्मसमर्पण’ कर चुके सैकड़ों माओवादी समर्थकों को जबरन सहायक के रूप में भरती किया गया। संघर्ष आज भी जारी है, जो आम नागरिकों, सुरक्षा बलों और माओवादी कैडरों के जीवन पर भारी पड़ रहा है। वर्ष 2007 में, नन्दिनी सुन्दर एवं अन्य लोगों ने इस संघर्ष से उत्पन्न मानवाधिकार-हनन के मुद्दे पर भारत सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में घसीटा। वर्ष 2011 में दिए गए एक ऐतिहासिक फ़ैसले में, न्यायालय ने हथियारबन्द गिरोह के लिए राज्य के समर्थन पर प्रतिबन्ध लगा दिया। हालाँकि, सरकार ने इस फैसले को लागू नहीं किया है। ‘दावानल : माओवाद से जंग’ पुस्तक भारत के हृदयस्थल में चल रहे इस क्रूर युद्ध का वर्णन करती है और देश की अदालतों, मीडिया, राजनीति और अन्त में भारतीय लोकतंत्र की हकीकत बयान करती है। यह इलाके की व्यापक यात्राओं, अदालती साक्ष्यों, सरकारी दस्तावेजों और उन घटनाओं में एक सक्रिय भागीदार की भूमिका पर आधारित है।
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