Uttara Karnataka Janapada Kathegalu
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ಜನಪದ ಸಾಹಿತ್ಯ ಸಂಕಲನಕಾರ್ಯದಲ್ಲಿ ಪಳಗಿದ ಶ್ರೀ ಸಿಂಪಿ ಲಿಂಗಣ್ಣನವರು ಸಂಗ್ರಹಿಸಿದ ಈ “ಉತ್ತರ ಕರ್ನಾಟಕದ ಜನಪದ ಕಥೆಗಳು" ಎಂಬ ಪುಸ್ತಕವನ್ನು ಕನ್ನಡ ವಾಚಕರ ಕೈಗೊಪ್ಪಿಸುವುದಕ್ಕೆ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾದೆಮಿಗೆ ಸಂತೋಷವೆನಿಸುತ್ತದೆ. ಈ ಕಥಾಸಂಕಲನದಲ್ಲಿ ಎಂಟು ವಿಭಾಗಗಳನ್ನು ಮಾಡಲಾಗಿದೆ. ಹೇಗೆಂದರೆ ರಮ್ಯಕಥೆಗಳು, ಅತಿ ಮಾನುಷ ಕಥೆಗಳು, ವಾಸ್ತವಿಕ ಕಥೆಗಳು, ಬುದ್ದಿ ವಂತಿಕೆಯ ಕಥೆಗಳು, ವಿವರಾಣಾತ್ಮಕ ಕಥೆಗಳು, ನೀತಿ ಕಥೆಗಳು, ಪ್ರಾಣಿ ಕಥೆಗಳು ಮತ್ತು ವಿನೋದ ಕಥೆಗಳು. ಇದು ಜನಮೆಚ್ಚಿಗೆಯನ್ನು ಪಡೆಯುವುದೆಂದು ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾದೆಮಿಯು ಆಶಿಸುತ್ತದೆ.
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ಜನಪದ ಸಾಹಿತ್ಯ ಸಂಕಲನಕಾರ್ಯದಲ್ಲಿ ಪಳಗಿದ ಶ್ರೀ ಸಿಂಪಿ ಲಿಂಗಣ್ಣನವರು ಸಂಗ್ರಹಿಸಿದ ಈ “ಉತ್ತರ ಕರ್ನಾಟಕದ ಜನಪದ ಕಥೆಗಳು" ಎಂಬ ಪುಸ್ತಕವನ್ನು ಕನ್ನಡ ವಾಚಕರ ಕೈಗೊಪ್ಪಿಸುವುದಕ್ಕೆ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾದೆಮಿಗೆ ಸಂತೋಷವೆನಿಸುತ್ತದೆ.
ಈ ಕಥಾಸಂಕಲನದಲ್ಲಿ ಎಂಟು ವಿಭಾಗಗಳನ್ನು ಮಾಡಲಾಗಿದೆ. ಹೇಗೆಂದರೆ ರಮ್ಯಕಥೆಗಳು, ಅತಿ ಮಾನುಷ ಕಥೆಗಳು, ವಾಸ್ತವಿಕ ಕಥೆಗಳು, ಬುದ್ದಿ ವಂತಿಕೆಯ ಕಥೆಗಳು, ವಿವರಾಣಾತ್ಮಕ ಕಥೆಗಳು, ನೀತಿ ಕಥೆಗಳು, ಪ್ರಾಣಿ ಕಥೆಗಳು ಮತ್ತು ವಿನೋದ ಕಥೆಗಳು.
ಇದು ಜನಮೆಚ್ಚಿಗೆಯನ್ನು ಪಡೆಯುವುದೆಂದು ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾದೆಮಿಯು ಆಶಿಸುತ್ತದೆ.
Book Details
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ISBN9788126000258
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Pages224
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Avg Reading Time7 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIN
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Kalahandi, a land steeped in ancestral lore, breathes through its oral epics-sung, not written; lived, not read. These heroic and sacred traditions echo through tribal hamlets, carried by bardic lineages like the Parghania (Gond), Maral and Bogua (Kondh), Ghogia (Gaud), and Bhat (Banjara). Each community sings its own identity into being through rhythmic chants and evocative performances. Among the Bhunjia and Paharia, elders become memory-keepers, while Debgunia singers invoke the divine feminine in praise of Goddess Lakshmi. These epics are cultural scriptures, recounting forest spirits, deities, and struggles for justice. They embody ecological wisdom, social harmony, and interethnic unity. These are not mere stories-they are the soul-song of Kalahandi. Let us listen, honour, and uplift them before the echoes fade forever.
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