Jhooth ki jindagi
(0)
Author:
Raj Rishi SharmaPublisher:
Rachnaye FulfilledLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
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अपने प्रति उसके निश्चल प्रेम और अद्भुत उत्साह को देखकर, मेरा मन बेकाबू हो उठा था। एक पल को लगा, जैसे सारी दुनिया थम गई हो और मैं बस उठकर उसे अपनी बाहों में भर लूँ, उसे अपने हृदय से लगा लूँ। लेकिन आसपास रेस्तरां में उमड़ रही लोगों की भीड़, उनकी फुसफुसाहट और उनकी चंचल निगाहें... इन सबने मेरे दिल की उस तीव्र भावना को वहीं, मेरे सीने में ही दबा दिया। मैंने अपनी भावनाओं को संयमित किया और अपने चेहरे पर एक गहरी, सच्ची मुस्कान सजा ली। मेरी आँखों में उसके प्रति असीम प्रेम और कृतज्ञता का भाव भर आया, जो उसके अनमोल प्यार के लिए मेरा मौन आभार व्यक्त कर रहा था। (इसी उपन्यास में से………….) सच की ज़िंदगी जीना कठिन हो सकता है, लेकिन झूठ की ज़िंदगी जीना सबसे कठिन है। सच और झूठ के बीच झूलती हुई एक अविश्वसनीय और मार्मिक कहानी।
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अपने प्रति उसके निश्चल प्रेम और अद्भुत उत्साह को देखकर, मेरा मन बेकाबू हो उठा था। एक पल को लगा, जैसे सारी दुनिया थम गई हो और मैं बस उठकर उसे अपनी बाहों में भर लूँ, उसे अपने हृदय से लगा लूँ। लेकिन आसपास रेस्तरां में उमड़ रही लोगों की भीड़, उनकी फुसफुसाहट और उनकी चंचल निगाहें... इन सबने मेरे दिल की उस तीव्र भावना को वहीं, मेरे सीने में ही दबा दिया। मैंने अपनी भावनाओं को संयमित किया और अपने चेहरे पर एक गहरी, सच्ची मुस्कान सजा ली। मेरी आँखों में उसके प्रति असीम प्रेम और कृतज्ञता का भाव भर आया, जो उसके अनमोल प्यार के लिए मेरा मौन आभार व्यक्त कर रहा था। (इसी उपन्यास में से………….)
सच की ज़िंदगी जीना कठिन हो सकता है, लेकिन झूठ की ज़िंदगी जीना सबसे कठिन है। सच और झूठ के बीच झूलती हुई एक अविश्वसनीय और मार्मिक कहानी।
Book Details
-
ISBN9368527091
-
Pages88
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIN
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