Ek Romanchak Kahani Coronakaal Ki
(0)
₹
200
₹ 160 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
"“एक रोमांचक कहानी कोरोनाकाल की” अत्यंत रोमांचकारी कथा है। ...हम आशा करते हैं कि प्रत्येक पाठक इस कहानी से संबंध स्थापित करने में सक्षम होगा एवं इसे एक रोचक एवं ग्राह्य पाठ्य के रूप में याद रखेगा। —अभय करंदीकर, डायरेक्टर IIT कानपुर कैंब्रिज शोधकर्ता जेम्स वर्तमान महामारी के बारे में काफी चिंतित है जब एक साथी शोधकर्ता रमेश उसे यह कहते हुए आशन्वित करता है कि मानव इतिहास में पहली बार ऐसी घटना नहीं हो रही है। अपनी बात पर प्रकाश डालते हुए, रमेश सुदूर अतीत की, लगभग 4500 वर्ष पहले की एक कहानी सुनाता है कि कैसे मानव जाति अतीत में सारी विपदाओं को पार करके बची रही है और आगे बढ़ती रही है। आगे रमेश जेम्स को वर्तमान काल की दास्तान बताकर ढाढस बढ़ाता है कि कैसे मानव जाति कोरोना महामारी के कठिन दौर में उससे दो-चार करते हुए, अपने को नई परिस्थितियों में ढाल कर आगे बढ़ती जा रही है। वास्तविक मीटिंगों के बजाय वर्चुअल गेट-टूगेदर करने लगी है।...रमेश जेम्स को विश्वास दिलाता है कि हम अवश्य कामयाब होंगे और आगे बढ़ते रहेंगे। लचीलापन, आशावाद और मानव जाति की अदम्य इच्छाशक्ति एवं अद्भुत जिजीविषा की कहानी, यह आज के समय के लिए एकदम खरी उतरती है जिसमें हम जी रहे हैं। आज के कोरोनाकाल की परिस्थितियों की सिंधु घाटी सभ्यता के समय की आपदाओं से तुलना करता हुआ मानव जाति की अदम्य भावना को दरशाता यह रोचक, प्रेरणादायक लघु उपन्यास।"
Read moreAbout the Book
"“एक रोमांचक कहानी कोरोनाकाल की” अत्यंत रोमांचकारी कथा है। ...हम आशा करते हैं कि प्रत्येक पाठक इस कहानी से संबंध स्थापित करने में सक्षम होगा एवं इसे एक रोचक एवं ग्राह्य पाठ्य के रूप में याद रखेगा। —अभय करंदीकर, डायरेक्टर IIT कानपुर
कैंब्रिज शोधकर्ता जेम्स वर्तमान महामारी के बारे में काफी चिंतित है जब एक साथी शोधकर्ता रमेश उसे यह कहते हुए आशन्वित करता है कि मानव इतिहास में पहली बार ऐसी घटना नहीं हो रही है। अपनी बात पर प्रकाश डालते हुए, रमेश सुदूर अतीत की, लगभग 4500 वर्ष पहले की एक कहानी सुनाता है कि कैसे मानव जाति अतीत में सारी विपदाओं को पार करके बची रही है और आगे बढ़ती रही है। आगे रमेश जेम्स को वर्तमान काल की दास्तान बताकर ढाढस बढ़ाता है कि कैसे मानव जाति कोरोना महामारी के कठिन दौर में उससे दो-चार करते हुए, अपने को नई परिस्थितियों में ढाल कर आगे बढ़ती जा रही है। वास्तविक मीटिंगों के बजाय वर्चुअल गेट-टूगेदर करने लगी है।...रमेश जेम्स को विश्वास दिलाता है कि हम अवश्य कामयाब होंगे और आगे बढ़ते रहेंगे। लचीलापन, आशावाद और मानव जाति की अदम्य इच्छाशक्ति एवं अद्भुत जिजीविषा की कहानी, यह आज के समय के लिए एकदम खरी उतरती है जिसमें हम जी रहे हैं।
आज के कोरोनाकाल की परिस्थितियों की सिंधु घाटी सभ्यता के समय की आपदाओं से तुलना करता हुआ मानव जाति की अदम्य भावना को दरशाता यह रोचक, प्रेरणादायक लघु उपन्यास।"
Book Details
-
ISBN9789390378302
-
Pages112
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Dukhiyare
- Author Name:
Anis Ashfaq
- Book Type:

- Description: वे ख़ुशियाँ, वे खिलखिलाहटें, वे रौनक़ें जिनसे लखनऊ कभी आबाद होता था, मुरझाती हुई धीरे-धीरे उदासियों में बदल गईं। कुछ हवेलियाँ बिक गईं, कुछ नीलाम और कुर्क हो गईं। खानदान जिनकी उपमा सितारों से दी जाती थी, वक़्त और अपनी लापरवाहियों से पिटते-पिटते सड़कों पर आ गए, सड़कों पर भी जगह न रही, तो पब्लिक मैदानों में जा टिके...कर्बलाओं, इमामबाड़ों और मस्जिदों में सिर छुपाते घूमने लगे। ये कहानी इसी दुखियारे वक़्त की है। एक भाई हैं जो छोटे भाइयों के मुक़ाबले अपनी माँ के बहुत लाडले हैं लेकिन उनके दिमाग़ में ख़लल है, बेचैनी कहीं टिकने नहीं देती...वक़्तन-फ़-वक़्तन कुछ औल-फौल बोलने लगते हैं, अपने ख़्वाबों की हवेलियों के नक्शे खींचने लगते हैं और कभी भी किधर भी निकल जाते हैं, छोटे भाई उनको ढूँढ़ते रहते हैं, जब मिलते हैं तो घर भी ले आते हैं, लेकिन बड़े फिर किसी दिन कोई पर्चा छोड़कर ग़ायब हो जाते हैं... शुरू से आख़िर तक यही सिलसिला चलता रहता है, खो जाने और मिल जाने का, और इस लामहदूद–से लगने वाले सफ़र में पुराने लखनऊ का इतिहास और भूगोल हमारी आँखों के सामने से गुज़रता जाता है, उस दुख को दर्ज करता हुआ जिन्हें वक़्त अपने उतरते दिनों की झोली में डालकर कभी न लौटने के लिए चला जाता है...
Digant Ki Oar
- Author Name:
Bipin Bihari Mishra
- Book Type:

-
Description:
उम्र की ढलती साँझ में अपने गाँव में, अपने लोगों के बीच, अपने घर में रहने की इच्छा हरेक मनुष्य की होती है। ‘अपना घर’! कितना प्यारा शब्द है यह। लेकिन क्या सबको नसीब होता है। घर बनाने और बसाने में कितनी मुश्किलें आती हैं, यह किसी भी मध्यवित्त व्यक्ति का सबसे तल्ख़ और संजीदा अनुभव होता है।
‘दिगन्त की ओर’ इन्हीं अनुभवों का प्रवाहपूर्ण भाषा में औपन्यासिक विस्तार है। यह जीवन और समाज की विडम्बनाओं और विद्रूपताओं पर तो प्रकाश डालता ही है, जीवन–संध्या में बुजुर्गों की उपेक्षाओं और उम्मीदों को भी रेखांकित करता है। ओड़िया भाषा के इस महत्त्वपूर्ण उपन्यास का सुजाता शिवेन द्वारा किया सर्जनात्मक अनुवाद निश्चय ही हिन्दी पाठकों को रुचिकर और पठनीय लगेगा, ऐसा हमारा विश्वास है।
Parva
- Author Name:
S.L. Bhyrappa
- Rating:
- Book Type:

- Description: The novel narrates the story of the Hindu epic Mahabharata, primarily using monologue as a literary technique. Several principal characters from the original Mahabharata reminisce about their entire lives. Both the setting and the context for the reminiscence are the onset of the Kurukshetra War. Parva is acknowledged as S.L. Bhyrappa's greatest work. Non-Kannadigas who have read it in its Hindi and Marathi translations consider it one of the masterpieces of modern Indian literature. It transforms an ancient legend into a modern novel. In this process, it has gained rational credibility and a human perspective. The main incident, the Bharata war, symbolic of the birth pangs of a new world order, depicts a heroic but vain effort to arrest the disintegration and continue the prevailing order. It is viewed from the standpoints of the partisan participants and judged with reference to the objective understanding of Krishna. Narration, dialogue, monologue, and commentary are all employed for its presentation. Shot through with irony, pity, and objective understanding, the novel ends with the true tragic vision of faith in life and hope for mankind. Parva has been translated into several major Indian languages: Bengali, Hindi, Marathi, Tamil, and Telugu, apart from English. The novel narrates the story of the Hindu epic Mahabharata, primarily using monologue as a literary technique. Several principal characters from the original Mahabharata reminisce about their entire lives. Both the setting and the context for the reminiscence are the onset of the Kurukshetra War.
Main Ladi Aur Udi
- Author Name:
Ruchira Gupta
- Book Type:

- Description: बिहार में रेड-लाइट एरिया के बाहरी इलाक़े में, हीरा एक उधार की ज़िन्दगी जी रही है, तभी तक जब तक कि उसके पिता अपना कर्ज़ चुकाने के लिए उसे सेक्स ट्रेड में बेचने का फ़ैसला नहीं कर लेते। जैसा कि उसे बताया गया है, उस बाज़ार की सभी लड़कियों का यही हश्र होता है। लेकिन क्या हो अगर वह "क़िस्मत" के ख़िलाफ़ लड़ना सीख ले? एक लोकल हॉस्टल मालिक उसे कुंग फू सीखने का मौक़ा देता है, तो हीरा यह जानना शुरू करती है कि उसका शरीर कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिस पर कोई भी हमला करे, बल्कि यह एक ऐसा ज़रिया है जिससे वह खुद की रक्षा कर सकती है। उसे अकल्पनीय मुश्किलों का सामना करना पड़ता है—स्कूल से निकाली जाती है, प्रकृति की बेरहम ताक़तों, और एक लोकल तस्कर से निबटना पड़ता है जो उस पर से अपनी नज़र नहीं हटाता। लेकिन किस्मत बदल भी सकती है, बहादुरी संक्रामक होती है, एक से दूसरे तक जाने वाली। जैसे ही हीरा यूनाइटेड स्टेट्स में एक पेन पाल के ज़रिए अपनी लापता दोस्त का पता लगाने की कोशिश करती है, और एक प्रतियोगिता उसे न्यूयॉर्क ले जाती है, अपनी दोस्त की जान बचाने की चाहत उसे सबसे बड़ा जोखिम उठाने पर मजबूर कर देती है। ‘मैं लड़ी और उड़ी’ में एक्टिविस्ट और एमी अवॉर्ड विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर रुचिरा गुप्ता साहस, आज़ादी और बदलाव लाने की हमारी क्षमता की एक एक्शन-पैक, चौंकाने वाली और विजयी कहानी बुनाती हैं जो महाद्वीपों को पार कर जाती है।
Imperfect Maa
- Author Name:
Ankita Jain
- Book Type:

- Description: एक माँ के रूप में ख़ुद को और अपने बच्चे को बेहतर समझने का अवसर देती है यह किताब । पैरेंट्स बनने से पहले मन में अनगिनत संशय, उत्सुकताएँ और भय होते हैं और पैरेंट्स बन जाने के बाद तो हर क्षण कुछ-न-कुछ बदलता रहता है- पल-प्रतिपल नयी चुनौतियाँ सामने आती हैं और सलाह की ज़रूरत महसूस होती है। पहले हम यह सलाह दादी-ताई से लेते थे, आज इंटरनेट से लेते हैं । पर हम सब जानते हैं कि ऐसी सलाहें अक्सर उतनी मददगार नहीं होतीं, कई बार तो उलझन और बढ़ा देती हैं। यह किताब किसी भी तरह के निर्देश देने का दावा नहीं करती। इसके विपरीत, यह स्वीकार करती है कि हर माँ, हर बच्चा और हर परिस्थिति अलग होती है। इसलिए यह केवल अपने अनुभवों को साझा करती है - ताकि आप पढ़ते हुए कभी अपने अनुभवों से जुड़ सकें, और कभी उनसे अलग होकर अपनी स्थितियों को नये नज़रिये से समझ सकें ।
Infinity
- Author Name:
Minal Arora
- Book Type:

- Description: INFiNITY is a thorough account of all aspects of life that a soul must traverse to learn through a human incarnation. It demystifies mind, body, emotions, money, relationships, past lives, karma, ego, diseases and nirvana. It is a discernment worth every revelation, for it unfolds profound concepts that hold the power to transform and heal the reader as they indulge in the riveting examples. The author has used her experience in client therapy to untangle complex relationship scenarios and other life situations, getting to the root cause of the issue. The ease with which the book unfolds the pristine path to self-recognition leaves the reader empowered with a new perception of life.
Nagpash Mein Stree
- Author Name:
Gitashree
- Book Type:

- Description: आज बाज़ार के दबाव और सूचना-संचार माध्यमों के फैलाव ने राजनीति, समाज और परिवार का चरित्र पूरी तरह बदल डाला है, मगर पितृसत्ता का पूर्वग्रह और स्त्री को देखने का उसका नज़रिया नहीं बदला है, जो एक तरफ़ स्त्री की देह को ललचाई नज़रों से घूरता है, तो दूसरी तरफ़ उससे कठोर यौन-शुचिता की अपेक्षा भी रखता है। पितृसत्ता का चरित्र वही है। हाँ, समाज में बड़े पैमाने पर सक्रिय और आत्मनिर्भर होती स्त्री की स्वतंत्र चेतना पर अंकुश लगाने के उसके हथकंडे ज़रूर बदले हैं। मगर ख़ुशी की बात यह है कि इसके बरक्स बड़े पैमाने पर आत्मनिर्भर होती स्त्रियों ने अब इस व्यवस्था से निबटने की रणनीति अपने-अपने स्तर पर तय करनी शुरू कर दी है। आख़िर कब तक स्त्रियाँ ऐसे समय और नैतिकता की बाट जोहती रहेंगी जब उन्हें स्वतंत्र और सम्मानित इकाई के रूप में स्वीकार किया जाएगा? क्या यह वाकई ज़रूरी है कि स्त्रियाँ पुरुषों के साहचर्य को तलाशती रहें? क्यों स्त्री की प्राथमिकताओं में नई नैतिकता को जगह नहीं मिलनी चाहिए? इस पुस्तक में साहित्य, पत्रकारिता, थिएटर, समाज-सेवा और कला-जगत की ऐसी ही कुछ प्रबुद्ध स्त्रियों ने पितृसत्ता द्वारा रची गई छद्म नैतिकता पर गहराई और गम्भीरता से चिन्तन किया है और स्त्री-मुक्ति के रास्तों की तलाश की है। प्रभा खेतान कहती हैं, ‘नारीवाद, राजनीति से सम्बन्धित नैतिक सिद्धान्तों को पहचानना होगा, ताकि सेवा जैसा नैतिक गुण राजनीतिक रूपान्तरण का आधार बन सके।’
Krishnakali
- Author Name:
Shivani
- Rating:
- Book Type:

- Description: पाठक किसी पात्र से एकत्व स्थापित कर लेता है; जब उसका अपमान उसकी वेदना बन जाता है, तब ही लेखनी की सार्थकता को हम मान्यता दे पाते हैं। जब ‘कृष्णकली’ लिख रही थी तब लेखनी को विशेष परिश्रम नहीं करना पड़ा, सब कुछ स्वयं ही सहज बनता चला गया था। जहाँ क़लम हाथ में लेती, उस विस्तृत मोहक व्यक्तित्व को, स्मृति बड़े अधिकारपूर्ण लाड़-दुलार से खींच, सम्मुख लाकर खड़ा कर देती, जिसके विचित्र जीवन के रॉ-मैटीरियल से मैंने वह भव्य प्रतिमा गढ़ी थी। ओरछा की मुनीरजान के ही ठसकेदार व्यक्तित्व को सामान्य उलट-पुलटकर मैंने पन्ना की काया गढ़ी थी। जब लिख रही थी तो बार-बार उनके मांसल मधुर कंठ की गूँज कानों में गूँज उठती। वही विस्तृत मधुर गूँज, उनके नवीन व्यक्तित्व के साथ, ‘कृष्णकली’ में उतर आई। —शिवा
Gayab Hota Desh
- Author Name:
Ranendra
- Book Type:

- Description: जादुई यथार्थवाद...यह उपन्यास हिन्दी को समृद्ध करता है। संजीव आधुनिक विकास की तमीज़ के हिसाब से रातोंरात गुम हो जाती बस्तियों के बाशिन्दों की दर्दनाक दास्तान...जिन पर काग़ज़ी ख़ज़ाना तो बरसाया गया लेकिन पाँव तले की धरती छीन ली...यह उपन्यास साहित्य में अपनी मुकम्मल जगह बनाएगा, ऐसी मुझे उम्मीद है। —मैत्रेयी पुष्पा यह एक प्रेम-कथा भी है और थ्रिलर भी... लगभग कोई पात्र एकआयामी नहीं है, सभी पात्रों के अपने-अपने ग्रे-शेड्स हैं। —प्रसन्न कुमार चौधरी
Anamika
- Author Name:
Gajendra Singh Verdhman
- Book Type:

- Description: Books
Rang Zindagi Ke
- Author Name:
Mukesh Dubey
- Book Type:

- Description: Book
Meghdoot Ki Raah Ke Pathik
- Author Name:
Manisha Kulshreshtha
- Book Type:

- Description: ‘मेघदूत की राह के पथिक’ कालिदास की अमर कृति मेघदूत के साथ एक सघन रचनात्मक सम्वाद है—प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक जैकब एल मोरेनो की उस स्थापना के संदर्भ में जो रचनात्मकता को शारीरिक-मानसिक सक्रियता और सामुदायिक पारस्परिकता के साथ जोड़ती है। यानी रचनात्मकता वह जो हर तरह की जड़ता का भंजन करे। इस दृष्टिकोण से देखें तो यह कृति बन्द कमरे का विशुद्ध मानसिक और किताबी सम्वाद नहीं, जीवन और प्रकृति के प्रकट और प्रच्छन्न के रमता योगी कालिदास के साथ एक जीवन्त यात्रात्मक जुगलबन्दी है। जिन मार्गों पर चलकर कालिदास ने मेघदूत का भौगोलिक आधार पाया होगा और कथा और जीवन के जिन धुँधलकों में बिखरे उच्छ्वासों को अन्तर्भूत कर ‘कविताया’ होगा, मनीषा रामगिरि और अलकापुरी के बीच उच्छ्वसित धुँधलके में बिखरे उन सारे सम्भावित मार्गों पर चलीं और आज के कण्ठ में अवशिष्ट धुनें और लोककथाएँ सुनते-चुनते लौटीं; तब कहीं जाकर इस सम्वाद को सम्भव किया। जब आप प्रकाशित पृष्ठों से गुज़रेंगे तो पाएँगे कि यहाँ भौगोलिक ही नहीं ज्ञानमार्ग की यात्रा से हासिल निधियाँ भी हैं। कालिदास की ही तरह यहाँ भी मिथक और यथार्थ के बीच विश्वसनीय आवाजाही की गई है और पार्थिव और प्राकृतिक पता वाला साहित्य और इतिहास का एक सुन्दर साझा लोक भी रचा गया है। भौगोलिक मेघ-मार्ग और सांस्कृतिक मेघदृष्टि को समझने के लिए यह एक पुस्तक एक रम्य और रोचक शाहकार है। —डॉ. विनय कुमार
Our City That Year
- Author Name:
Geetanjali Shree +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: A city teeters on the edge of chaos. A society lies fractured along fault lines of faith and ideology. A playground becomes a battleground. A looming silence grips the public. Against this backdrop, Shruti, a writer paralyzed by the weight of events, tries to find her words, while Sharad and Hanif, academics whose voices are drowned out by extremism, find themselves caught between clichés and government slogans. And there’s Daddu, Sharad’s father, a beacon of hope in the growing darkness. As they each grapple with thoughts of speaking the unspeakable, an unnamed narrator takes on the urgent task of bearing witness. First published in Hindi in 1998, Our City That Year is a novel that defies easy categorization—it’s a time capsule, a warning siren and a desperate plea. Geetanjali Shree’s shimmering prose, in Daisy Rockwell’s nuanced and consummate translation, takes us into a fever dream of fragmented thoughts and half-finished sentences, mirroring the disjointed reality of a city under siege. Readers will find themselves haunted long after the final page, grappling with questions that echo far beyond India’s borders.
Rudade Safar
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Rating:
- Book Type:

- Description: यह उपन्यास जिस भूमि पर लिखा और तराशा गया है, उसकी आधे हिस्से की सूखी और आधे हिस्से की गीली माटी है। दोनों हिस्सों को एकसाथ लेकर चलना, जिससे कोई हिस्सा कमज़ोर न पड़े, लेखन कौशल का कमाल होता है। मज़बूती से पकड़ कर उपन्यास पाठक को जब अन्त तक ले जाता है, पाठक भौंचक्का रह जाता है। अंत में सिहर उठता है। विज्ञान और चिकित्सा जैसे शुष्क विषय और रिश्ते तथा संबंधों जैसे भावुक विषय को लेकर उपन्यास रचा गया है। दो विपरीत विषयों का तानाबाना बुन कर पंकज सुबीर ने पिता और पुत्री के रिश्ते पर एक खूबसूरत उपन्यास लिखा है। माँ पर तो काफी लिखा गया है, पर पिता पर बहुत कम। पंकज ने बखूबी पिता- पुत्री की भावनाओं का चित्रण किया है। चिकित्सा विज्ञान में एनॉटामी पर भी खूब शोध से लिखा है। उपन्यास में लेखक ने एनॉटामी, रिश्तों और भावनाओं के ऐसे पैटर्न डाले हैं, कि सबने मिल कर उपन्यास को विशाल बना दिया है। हिंदी साहित्य को चिकित्सा विज्ञान में एनॉटामी पर लिखा गया यह उपन्यास नायाब तोहफ़ा है।
Diya (Illustrated)
- Author Name:
Yogita Warde
- Book Type:

- Description: दीया अब आपके सामने दूसरे संस्करण में उपलब्ध है। पहले संस्करण में दीया को लिटफेस्ट 2020 ऑथर ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड और टैगोर कमेम्रटिव ऑनरेरी अवॉर्ड 2021 मिल चुका है। दीया की कहानी एक सच्ची घटना से प्रेरित है। यह कहानी समाज के उन सभी रीति-रिवाजों का खुलासा करती है, जिनका हम बिना किसी आपत्ति के आँखें बंदकर पालन करते आ रहे हैं। इस कहानी में दीया ने अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा। वह सब कुछ सहती रही और खुद से नफरत करती रही। वह क्यों चुप थी? क्या समाज के कारण या परिवार के कारण? क्या वह अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों को रोक पाती है? क्या होता है आगे? क्या वह अपने पति और समाज के खिलाफ आवाज उठा पाती है? क्या हुआ होगा दीया की ज़िंदगी में? उसके जीवन में कितने मोड़ आए? सभी सवालों के जवाबों के लिए जुड़िये इस सफर में दीया के साथ।
Gandhari Ki Atmakatha
- Author Name:
Manu Sharma
- Book Type:

- Description: गांधारी, अपने पुत्रों को समझाओ । द्वारकाधीश की माँग बहुत कम है । अब पाँच गाँव से और कम क्या हो सकता है?'' '' अब वे मेरे समझाने की सीमा में नहीं रहे । जब पानी सिर से ऊपर बहने लगा तब आप उसे बाँधने के लिए कहते हैं! आपसे अनेक अवसरों पर ओंर अनेक बार मैंने कहा है कि यह दुर्योधन बिना लगाम का घोड़ा हो गया है, उसपर नियंत्रण करिए; पर उस समय आपने बिलकुल ध्यान ही नहीं दिया । आज वह बात इस हद तक बढ़ गई कि यह घोड़ा जिस रथ में जुता है उसीको उलट देना चाहता है, तब आप मुझसे कहते हैं कि घोड़े की लगाम कसो! '' आपके पुत्रों ने पांडवों पर क्या-क्या विपत्ति नहीं ढाई! हर बार उन्हें समाप्त करने का प्रयत्न करते रहे । मैं हर बार तिलमिलाती रही और हर बार आपका मौन उन्हें प्रोत्साहन देता रहा । किसलिए? इस सिंहासन के लिए, जो न किसीका हुआ है और न किसीका होगा? इस धरती के लिए, जो आज तक न किसीके साथ गई है और न जाएगी? इस राजसी वैभव के लिए, जिसने हमें अहंकार के अतिरिक्त और कुछ नहीं दिया है ?'. .इसे आप अच्छी तरह जान लीजिए कि यदि कोई वस्तु हमारे साथ अंत तक रहेगी और इस संसार को छोड़ देने के बाद भी हमारे साथ जाएगी तो वह होगा हमारा धर्म, हमारा कर्म ।.. '' आपने उसीकी उपेक्षा की । मोह-माया, ममता, पुत्र-प्रेम और लोभ से ही घिरे रहे । इसी लोभ ने आपके पुत्रों को पांडवों के प्रति ईर्ष्यालु बनाया । अब जो कुछ हो रहा है, वह उसी ईर्ष्या का शिशु है । अब आप ही उसे अपने गोद में खिलाइए । मैं उसका जिम्मा नहीं लेती । मैंने कई बार कहा है कि हमारे दुर्भाग्य ने हमें संतति के रूप में नागपुत्र दिए हैं । वे जब भी उगलेंगे, विष ही उगलेंगे । इसलिए नागधर्म के अनुसार समय रहते हुए उनका त्याग कर दीजिए । '' -इसी पुस्तक में
Madar
- Author Name:
Subhash Chandra Yadav
- Book Type:

- Description: A Maithili Novel
Amal
- Author Name:
Himanshu Dewedi
- Book Type:

- Description: दीनदयालजी का व्यक्तित्व जितना सरल था, उनका जीवन उतना ही कठिन था। इसी प्रकार दीनदयालजी के विचारों को पढ़ना जितना सरल है, उन्हें समझना उतना ही कठिन है। जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जिसे उन्होंने अपने चिंतन के दायरे में शामिल न किया हो। सामाजिक विषयों से लेकर आर्थिक विषयों तक उन्होंने जितने आयामों के साथ उन्हें विश्लेषित किया है, वह अद्भुत है। यह उनके विचारों की शाश्वतता ही है कि उनके देहावसान के 48 वर्ष बीतने के बाद भी वे अप्रासंगिक नहीं हुए हैं। उनका ‘एकात्म मानववाद’ भारतीय संस्कृति का वह जयघोष है, जिसकी गूँज कभी समाप्त नहीं होगी। दीनदयालजी का अध्ययन क्षेत्र बहुत विस्तृत और विस्तीर्ण था। समाज-संस्कृति-राजनीति का शायद ही कोई विषय हो, जिस पर उनकी दृष्टि न गई हो। उनकी इसी दूरदृष्टि और चिंतन ने कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं का पथ-प्रशस्त किया है। वर्तमान में केंद्र और कई प्रदेशों में भारतीय जनता पार्टी का शासन है। वे सब दीनदयालजी के चिंतन को व्यवहार रूप देकर राष्ट्र-निर्माण के काम में संलग्न हैं। विगत 13 वर्षों से डॉ. रमन सिंह के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार प्राणपण से विकास-कार्यों में जुटी है। दीनदयालजी के कथनानुसार प्रदेश के आमजन तक शासन की सुविधाओं का लाभ पहुँचे, यह स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। इस पुस्तक में दीनदयालजी के स्वप्न को पूरा करने में छत्तीसगढ़ सरकार कितना प्रभावी काम कर रही है, यही दर्शाया गया है। पं. दीनदयाल उपाध्याय के स्वप्नों को साकार करने की सफलता की कहानी है यह पुस्तक।
Gadiwalon Ka Katra
- Author Name:
Aleksandr Kuprin
- Book Type:

- Description: गाड़ीवालों का कटरा जारकालीन रूस की पृष्ठभूमि में वेश्यावृत्ति की ज्वलन्त समस्या का हृदयविदारक चित्र प्रस्तुत करता है। कुप्रिन सामाजिक बीमारियों को छिपाने में विश्वास नहीं रखते थे और मानते थे कि भयंकर से भयंकर सत्य को उजागर करना मनुष्य के हित में है। इसी कारण उन्होंने इस उपन्यास में वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर स्त्रियों की दारुण कथा के जरिये मानव-समाज के अकल्पनीय पतन का ऐसा हाल बयान किया जिसे वेश्यावृत्ति के विषय पर पहला और अन्तिम ईमानदार काम माना जाता है। इस उपन्यास ने प्रेमचन्द को भी गहरे प्रभावित किया था।
Shesh Kavita
- Author Name:
Ravindranath Thakur
- Book Type:

-
Description:
प्रेम एक विलक्षण सृष्टि-रहस्य! व्यक्ति के आभ्यन्तर में सूक्ष्मातिसूक्ष्म—पोथियों की घ्राण-शक्ति की पकड़ के बाहर। और पोथियों में, स्वयं को अभिव्यक्त करने को आकुल हृदय को सर्वदा आश्रय देता हुआ—त्रासद से सुखद, सुखद से त्रासद के मध्य दोलायमान। रचनाकार की चुनौतियों का अन्त नहीं—जीवन के प्रश्नों में संगति भी कहाँ है, भला! उत्तरों में अन्तर्विरोधों का अन्त भी कहाँ!
रवीन्द्रनाथ ठाकुर को उनके अपने ही वर्तमान में कठिन चुनौतियाँ मिलने लगी थीं। वे, जिस प्रकार परम्परा को आत्मसात करते हुए—विशेष रूप से अपनी काव्य-सृष्टि में—आधुनिक भारत की विचार-सरणी निर्मित कर रहे थे, उसे अति-उत्साही आधुनिक अपने लिए संकट के रूप में देखने लगे थे। सम्भवत: इसीलिए, विश्वकवि ने अपनी इस कथा-कृति में कविताओं के माध्यम से अपना ही मूल्यांकन भी किया है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book