A Window Lived in a Wall
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Author:
Vinod Kumar Shukla, Satti KhannaPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
EnglishCategory:
Contemporary-fiction₹
125
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Raghuvar Prasad teaches Mathematics at a local college. He lives in a one-room rental eight miles away from his place of work. He travels to work by jitney, cramming into whatever space is left by other passengers, milk cans, winter blankets and vegetable baskets. The mode of transportation is unreliable; jitneys won't stop for him when they are full. A sadhu atop an elephant befriends him, offering him a ride to the college on his elephant. The Head of the Mathematics Department suggests that Raghuvar Prasad borrow the bicycle which seems to have been abandoned on the college verandah. Raghuvar Prasad tries these variations and wonders whether he shouldn't move closer to the college to save on travel costs. He has just been married. The day his wife Sonsi, arrives in town to begin their domestic life together, Raghuvar Prasad happens to come home mounted on an elephant. She imagines elephants are part of Raghuvar Prasad's usual lifestyle. Vinod Kumar Shukla's apparently slight novel reaches into the depths of feeling Raghuvar Prasad and Sonsi have for one another and for the world of lower-middle-class neighbours among whom they belong. Their possessions are meagre: the single room barely accommodates their bed, the water pot, the kitchen utensils and the tin box in which Sonsi keeps her precious things. But there is a magical place beyond the window that sustains Raghuvar Prasad's and Sonsi's spirit. This window lived in a wall.
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Raghuvar Prasad teaches Mathematics at a local college. He lives in a one-room rental eight miles away from his place of work. He travels to work by jitney, cramming into whatever space is left by other passengers, milk cans, winter blankets and vegetable baskets. The mode of transportation is unreliable; jitneys won't stop for him when they are full. A sadhu atop an elephant befriends him, offering him a ride to the college on his elephant. The Head of the Mathematics Department suggests that Raghuvar Prasad borrow the bicycle which seems to have been abandoned on the college verandah. Raghuvar Prasad tries these variations and wonders whether he shouldn't move closer to the college to save on travel costs.
He has just been married. The day his wife Sonsi, arrives in town to begin their domestic life together, Raghuvar Prasad happens to come home mounted on an elephant. She imagines elephants are part of Raghuvar Prasad's usual lifestyle.
Vinod Kumar Shukla's apparently slight novel reaches into the depths of feeling Raghuvar Prasad and Sonsi have for one another and for the world of lower-middle-class neighbours among whom they belong. Their possessions are meagre: the single room barely accommodates their bed, the water pot, the kitchen utensils and the tin box in which Sonsi keeps her precious things. But there is a magical place beyond the window that sustains Raghuvar Prasad's and Sonsi's spirit. This window lived in a wall.
Book Details
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ISBN9788126021727
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Pages232
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Avg Reading Time8 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIN
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‘रेत’ ऐसे दुर्दम्य समाज की कथा है जिसकी परम्पराओं पर हम सहजता से विश्वास नहीं कर सकते। यह उपन्यास कंजर जनजाति की आस्था, धार्मिक विश्वास, समाज, संस्कृति का आईना है। उपन्यास ‘रेत’ के केन्द्र में कमला सदन है जहाँ एक ही घर की चौहद्दी में एक साथ दो अन्तर्विरोधी परम्पराएँ आमने-सामने टकरा रही हैं। खेलावड़ी (वेश्यावृत्ति) के पेशे के साथ कमला बुआ, सुशीला, माया, रुकमणि, वंदना और पूनम एक ही घर में सन्तो और अनीता भाभी, यानी विधिवत् विवाह के बाद भाभी कही जानेवाली पतिव्रताओं के साथ रहती हैं। कमला बुआ उपन्यास में मातृसत्तात्मक वर्चस्व की प्रतीक है और ‘भाभी’ ब्याहता होते हुए भी बाहर से लाई गई दोयम दर्जे की सदस्या। मोरवाल का यह उपन्यास अद्भुत क़िस्सागोई के साथ ही हिन्दी में नारी-विमर्श का सूत्रपात करता है। प्रकाशन के बाद से ही विवादों के केन्द्र में रहे ‘रेत’ उपन्यास में कंजर जनजाति (काननचर जनजाति) के लोक विश्वासों, प्रथाओं, जीवन-शैली और परम्पराओं का सटीक और दिलचस्पप विवरण है। जरायम पेशा और कथित सभ्य समाज के मध्य गड़ी यौन-शुचिताओं का अतिक्रमण करता यह उपन्यास आज भी अपनी विलक्षण छवि बनाए हुए है।
Barho Mas
- Author Name:
Bhalchandra Jha +1
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बारहो मास उपन्यास साहित्य अकादेमी द्वारा पुरस्कृत मराठी उपन्यास बारोमास मैथिली अनुवाद अछी। एही उपन्यास भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था रीढ़ - हमरा सभक किसानक ओही सभ समस्या पर व्यापक दृष्टि देल गेल अछी जे ओ लोकनि खुजल व्यापार नीति आ भूमण्डलीकरण कारणे भोगी रहलाह अछी। बारह महीनामे समेटल किसानक वेदना-कथाके एहि उपन्यासमे महाराष्ट्रक किसान सुभाराव आ हुनक परिवार इर्द-गिर्द बुनल गेल अछी उपन्यास अन्तमे सुभाराव निपत्ता होयब प्रतीकात्मक रूपसै किसानक मुख्यधारासै “निपत्ता” होयबाक एकटा दुखद परिदृश्य प्रस्तुत करैत अछी।
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