🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Satrein Aur Satrein

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

यह पुस्तक कथाकार मोहन राकेश के बारे में है जिसे लिखा है—अनीता राकेश ने। यह अनीता जी के अपने बारे में भी है; राकेश जी से उनके रिश्ते के बारे में भी। और इसकी विशेषता है, एक ऐसी क़लम से लिखा जाना जिसने लिखा बहुत कम, और जिया बहुत ज़्यादा। यही वजह है कि आप इसे एक ही बैठक में पढ़ने को बाध्य हो जाते हैं। मोहन राकेश का अपना जीवन अनेक विडम्बनाओं, दु:खों और परेशानियों में बीता, उनका वैवाहिक जीवन कभी उस तरह सन्तोषजनक नहीं रहा, जैसे सामान्यत: लोगों का होता है। अनीता जी ने जब उनके जीवन में क़दम रखा, तब वे उनसे बहुत छोटी थीं, बहुत लम्बे समय उनके साथ रह भी नहीं पाईं। इससे पहले कि उनके रिश्ते एक स्थिर जीवन में बदलते, राकेश दुनिया छोड़ गए। इस किताब में उन पेचीदगियों का वर्णन है जिससे कुछ समय के साथ के दौरान, ख़ासकर अनीता जी गुज़रीं, और राकेश भी। इसके बाद उस समय की कथा है जब वे अचानक अकेली रह गईं। एक तरफ़ भावनात्मक अकेलापन और दूसरी तरफ़ जीवन की व्यावहारिक चुनौतियाँ। इस किताब के पन्नों पर इस सबको बिना किसी आलंकारिकता के प्रस्तुत कर दिया गया है। यह इस संस्मरण शृंखला की दूसरी पुस्तक है। इसमें हम मोहन राकेश के बारे में जितना जान पाते हैं, उतनी ही उस दौर के साहित्यिक माहौल के बारे में भी, और उतना ही मनुष्य जीवन की विकट सच्चाइयों के बारे में भी।

Read more

₹ 195

156 20% off

Unavailable

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

This Book is out of stock
Frequently bought together
Satrein Aur Satrein This book ₹156
Atirikta Sataren Anita Rakesh ₹250
3 books selected ₹740 ₹701
This Book is out of stock

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

यह पुस्तक कथाकार मोहन राकेश के बारे में है जिसे लिखा है—अनीता राकेश ने। यह अनीता जी के अपने बारे में भी है; राकेश जी से उनके रिश्ते के बारे में भी। और इसकी विशेषता है, एक ऐसी क़लम से लिखा जाना जिसने लिखा बहुत कम, और जिया बहुत ज़्यादा। यही वजह है कि आप इसे एक ही बैठक में पढ़ने को बाध्य हो जाते हैं।

मोहन राकेश का अपना जीवन अनेक विडम्बनाओं, दु:खों और परेशानियों में बीता, उनका वैवाहिक जीवन कभी उस तरह सन्तोषजनक नहीं रहा, जैसे सामान्यत: लोगों का होता है। अनीता जी ने जब उनके जीवन में क़दम रखा, तब वे उनसे बहुत छोटी थीं, बहुत लम्बे समय उनके साथ रह भी नहीं पाईं। इससे पहले कि उनके रिश्ते एक स्थिर जीवन में बदलते, राकेश दुनिया छोड़ गए।

इस किताब में उन पेचीदगियों का वर्णन है जिससे कुछ समय के साथ के दौरान, ख़ासकर अनीता जी गुज़रीं, और राकेश भी। इसके बाद उस समय की कथा है जब वे अचानक अकेली रह गईं। एक तरफ़ भावनात्मक अकेलापन और दूसरी तरफ़ जीवन की व्यावहारिक चुनौतियाँ। इस किताब के पन्नों पर इस सबको बिना किसी आलंकारिकता के प्रस्तुत कर दिया गया है।

यह इस संस्मरण शृंखला की दूसरी पुस्तक है। इसमें हम मोहन राकेश के बारे में जितना जान पाते हैं, उतनी ही उस दौर के साहित्यिक माहौल के बारे में भी, और उतना ही मनुष्य जीवन की विकट सच्चाइयों के बारे में भी।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2002
Weight
320 grams
ISBN-13
9788171197620
Pages
164
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp