Miss Endogully and other Tail Tales
(0)
Author:
Shanu LahiriPublisher:
The Antonym CollectionsLanguage:
EnglishCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
1499
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Stalwart artist Shanu Lahiri fostered a lifelong affection for all beings, human or animal. This book holds a collage of recollections, family-stories and vignettes of all the dogs, cats, kites, kittens, tigers, ducks, pigs, chicks, otters, bears, squirrels, rabbits, monkeys and people who lived or crossed paths with her. These tail-tales have been spun so effortlessly by a seasoned storyteller whose voice is candid and fun yet steeped in empathy and wonder for even the smallest miracles surrounding us.
Read moreAbout the Book
Stalwart artist Shanu Lahiri fostered a lifelong affection for all beings, human or animal. This book holds a collage of recollections, family-stories and vignettes of all the dogs, cats, kites, kittens, tigers, ducks, pigs, chicks, otters, bears, squirrels, rabbits, monkeys and people who lived or crossed paths with her. These tail-tales have been spun so effortlessly by a seasoned storyteller whose voice is candid and fun yet steeped in empathy and wonder for even the smallest miracles surrounding us.
Book Details
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ISBN9788197840128
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Pages124
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Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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When 16-year-old Manas complains of back pain, his parents assume it to be a result of his back-to-back cricket matches. Little do they know that this is going to turn out to be a malignant tumour which leads to partial paralysis. The Covid pandemic also sets in, adding its own complications to the mix. What kind of battle are this life-loving, strong-willed teenager and his family compelled to face? This boy's journey full of determination and courage provokes a question: How rock solid does one need to be to go through a tunnel this deep and walk out to be able to say, 'It's not that hard'?
Main Barbad Hona Chahti Hoon
- Author Name:
Malika Amar Shaikh
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मलिका अमर शेख उस समय मात्र उन्नीस बरस की थीं जब वे मराठी के युग-प्रवर्तक कवि नामदेव ढसाल के साथ विवाह-बन्धन में बँध गईं। लेकिन जल्द ही यह शादी टूट गई। दलित पैंथर्स के सह-संस्थापक नामदेव न तो एक पति के रूप में, न पिता के रूप में, और न ही एक पुरुष के रूप में वैसे निकले जैसी उम्मीद मलिका ने की थी। यह मुख्यतः उस विवाह की कहानी है, जिसमें हम उस स्त्री से मिलते हैं जो एक पुरुष-संसार में अपनी जगह ढूँढ़ने की कोशिश में है। लेकिन यह कहानी मराठी दलित आन्दोलन के अन्तर्विरोधों, मुम्बई शहर, उसके कवियों और एक्टिविस्टों की कहानी भी है। मूल रूप से मराठी में प्रकाशित यह आत्मकथा छपते ही एक सनसनी बन गई थी। व्यक्तिगत बनाम राजनीतिक, वाम विचारधारा बनाम दलित आन्दोलन और अपने पति के प्रति प्रेम और घृणा के बीच फँसी एक स्त्री की यह आत्मकथा कई मायनों में एक दस्तावेज़ की हैसियत रखती है।
Nitish Kumar : Antrang Doston Ki Nazar Se
- Author Name:
Uday Kant
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यह कहानी किसी भी उस आम आदमी की हो सकती है जिसके अन्दर कुछ अच्छा करने और करते रहने का जज़्बा हो !
‘नीतीश कुमार : अंतरंग दोस्तों की नज़र से’ महज़ नीतीश कुमार की जीवनी नहीं है, बल्कि यह मुन्ना बाबू की, ‘नेताजी’ की और नीतीश जी से माननीय नीतीश कुमार बनने की भी कहानी है जो उनके पचास वर्षों से अधिक समय से उनसे जुड़े अभिन्न मित्रों ने लिखी है। इसमें उनके माता-पिता, भाई-बहनों, पत्नी, पुत्र और हित-मित्र समेत कई ऐसे लोगों का ज़िक्र है जिससे नीतीश कुमार की वह व्यक्तिगत-पारिवारिक छवि पहली बार सामने आती है जो उनके जगज़ाहिर सियासी जीवन के पीछे प्रायः ओझल रही है।
नीतीश कुमार के पिता रामलखन सिंह को अधिकतर लोग वैद्य और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जानते हैं। लेकिन कांग्रेस के बड़े नेता के रूप में उनकी सक्रियता और राजनीति के छल-कपट से कुपित होकर उनके चुनाव लड़ने के हवाले से यह किताब नीतीश कुमार की पृष्ठभूमि के एक अहम मगर अल्पज्ञात पक्ष पर रोशनी डालती है।
यह जीवनी आज़ादी के बाद के बिहार की राजनीति का सटीक लेखा-जोखा भी है। नीतीश कुमार के बनने की प्रक्रिया बहुत ही जटिल व विकट रही है। वायु सेना अधिकारी की परीक्षा में असफल होने के बाद, जीविकोपार्जन के लिए सामने आए कई विकल्पों को निर्ममता से ठुकरा कर, मात्र जनसेवा के लिए चुनावी राजनीति की लहरों में डूबते-उतराते, जूझते, गिरते और फिर दूनी ऊर्जा से खड़े होकर अपने आदर्शों की रक्षा करने वाले संघर्षरत नीतीश कुमार की कहानी है यह।
अपनी सकारात्मक सोच के कारण हमेशा आशान्वित रहने वाले, एक छोटे से क़स्बे के मध्यवर्गीय परिवार से निकलकर सिर्फ़ अपनी लगन, जिजीविषा और ईमानदार नीयत की वजह से एक ‘असफल’ नेता से देश के गिने-चुने बेहतरीन मंत्रियों में से एक और डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के बाद मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लम्बे समय से बिहार की बागडोर कुशलतापूर्वक सँभाल रहे नीतीश कुमार की यह प्रामाणिक और अनौपचारिक जीवनी इतनी रोचक ढंग से लिखी गई है कि आप इसे एक बैठक में ही पढ़कर ख़त्म कर लेना चाहेंगे!
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