Charlie Chaplin
(0)
Author:
Mamta JhaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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"चार्ली चैप्लिन—ममता झा निर्विवाद रूप से चार्ली चैप्लिन सार्वकालिक सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता माने जाते हैं। छोटी मूँछें, तंग कोट, काली ऊँची टोपी, बड़े जूते, ढीली पैंट और छड़ी के साथ ‘ट्रैंप’ के किरदार के रूप में विश्व भर के सिनेदर्शकों के मन में उन्होंने अमिट पहचान बनाई। चार्ली चैप्लिन एक सितारे की तरह फिल्म जगत् के फलक पर चमके। उनकी फिल्मों ने आम दर्शकों को हँसाया भी, रुलाया भी। ‘द किड’, ‘द सर्कस’, ‘द गोल्ड रश’, ‘सिटी लाइट’, ‘मॉडर्न टाइम्ज’, ‘द ग्रेट डिक्टेटर’ आदि वे फिल्में हैं, जिनके लिए आज भी विश्व सिनेमा चार्ली का ऋणी है। सात वर्ष की उम्र में रंगमंच पर अभिनय के साथ चार्ली का कैरियर शुरू हुआ। खूब दौलत और शोहरत पाने के बावजूद चार्ली एक तन्हा और बेचैन कलाकार थे। एक दर्जन से अधिक स्त्रियाँ उनके जीवन में आईं। कई विवाह और तलाक हुए। खुद दुःखी होते हुए भी उन्होंने हमेशा अपनी कला से अपने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। चार्ली चैप्लिन के बारे में अधिकाधिक जानने की उत्कंठा रहती है। प्रस्तुत पुस्तक में उनके जीवन के विविध पहलुओं पर रोशनी डाली गई है और उनकी संघर्ष-गाथा को प्रस्तुत किया गया है। सुख-दुःख, हर्ष-विषाद, शोक-आनंद के रंगों में रँगी एक महान् कलाकार की प्रामाणिक जीवनी।
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"चार्ली चैप्लिन—ममता झा
निर्विवाद रूप से चार्ली चैप्लिन सार्वकालिक सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता माने जाते हैं। छोटी मूँछें, तंग कोट, काली ऊँची टोपी, बड़े जूते, ढीली पैंट और छड़ी के साथ ‘ट्रैंप’ के किरदार के रूप में विश्व भर के सिनेदर्शकों के मन में उन्होंने अमिट पहचान बनाई।
चार्ली चैप्लिन एक सितारे की तरह फिल्म जगत् के फलक पर चमके। उनकी फिल्मों ने आम दर्शकों को हँसाया भी, रुलाया भी। ‘द किड’, ‘द सर्कस’, ‘द गोल्ड रश’, ‘सिटी लाइट’, ‘मॉडर्न टाइम्ज’, ‘द ग्रेट डिक्टेटर’ आदि वे फिल्में हैं, जिनके लिए आज भी विश्व सिनेमा चार्ली का ऋणी है।
सात वर्ष की उम्र में रंगमंच पर अभिनय के साथ चार्ली का कैरियर शुरू हुआ। खूब दौलत और शोहरत पाने के बावजूद चार्ली एक तन्हा और बेचैन कलाकार थे। एक दर्जन से अधिक स्त्रियाँ उनके जीवन में आईं। कई विवाह और तलाक हुए। खुद दुःखी होते हुए भी उन्होंने हमेशा अपनी कला से अपने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
चार्ली चैप्लिन के बारे में अधिकाधिक जानने की उत्कंठा रहती है। प्रस्तुत पुस्तक में उनके जीवन के विविध पहलुओं पर रोशनी डाली गई है और उनकी संघर्ष-गाथा को प्रस्तुत किया गया है। सुख-दुःख, हर्ष-विषाद, शोक-आनंद के रंगों में रँगी एक महान् कलाकार की प्रामाणिक जीवनी।
Book Details
-
ISBN9789380186375
-
Pages144
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘यादों की रोशनी में’ परसाई के भाषणों, संस्मरणों, रेखाचित्रों और निबन्धों का संकलन है। वर्ष 1989 में पहली बार प्रकाशित इस पुस्तक में लेखक की जीवन-दृष्टि और सामाजिक सरोकारों का परिचय तो मिलता ही है, उस समय के बारे में भी हमें कई सूचनाएँ प्राप्त होती हैं।
पुस्तक के तीन खंड हैं जिनमें भिन्न-भिन्न प्रकृति की रचनाओं को विभाजित किया गया है। पहले हिस्से में ‘मतवाला और उसकी भूमिका’ जैसा आलेख जहाँ बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध की साहित्यिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि से परिचित कराता है, वहीं ‘लेखकों का सचेत और सतर्क दायित्व’ शीर्षक उनका अभिभाषण प्रगतिशील लेखकों और संगठनों की सामाजिक भूमिका को रेखांकित करता है। दहेज की समस्या को लेकर लिखे गए दो व्यंग्यात्मक आलेख बताते हैं कि परसाई अपने लेखकीय दायित्व को लेकर कितने सजग थे।
इनके अलावा श्रीकांत वर्मा, ताज भोपाली और बाबा नागार्जुन पर उनके दिलचस्प संस्मरण भी इस पुस्तक का हिस्सा हैं। कुछ और रचनाओं के अलावा ग़ालिब को लेकर चुटीले अन्दाज में लिखा गया एक व्यंग्य भी इस संकलन में शामिल है जिसमें वे अपने प्रिय शायर को अपने ही ढंग से याद करते हैं।
Sham' A Har Rang Mein
- Author Name:
Krishna Baldev Vaid
- Book Type:

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Description:
‘ख़्वाब है दीवाने का’ से आरम्भ हुई कृष्ण बलदेव वैद की डायरी-यात्रा ‘शम’अ हर रंग में’ तक पहुँचकर विराम लेती है। अर्थ स्पष्ट है कि ‘शम’अ हर रंग में’ एक लेखक की डायरी है। एक ऐसे शख़्स की दैनिक आपबीती जिसके लिए लेखक होना कोई बाहरी चुनाव नहीं, आन्तरिक मजबूरी है।
‘शम’अ हर रंग में’ एक ऐसी पुस्तक है जो रेखांकित करती है कि लेखक समाज से उतना नहीं लड़ता जितना कि अपने आपसे। उसका हर दिन, हर लम्हा कल की नोक पर अटका रहता है। उसकी उदासियाँ, ख़ुशियाँ, शक, यक़ीन, ज़िद्द—यानी अपने होने का हर रंग, उसके तख़लीक़ी इरादों और अन्देशों के इर्द-गिर्द बचा हुआ है। बारीक अहसासों से भाषा की हदों को पार कर जाता है और पाठकों का अन्तरंग हो जाता
है।
यह पुस्तक डायरी-लेखन की विशिष्टता की कसौटी बनकर उभरी है और मनुष्य के मानसिक जीवन के उतार-चढ़ावों का रूपायण करती है। बीती सदी के आधे समय और समाज की कुछ बारीक कतरनें और रंगतें भी इसमें मौजूद हैं। हिन्दी रचना-संसार की दुर्लभ झलकियाँ भी इस पुस्तक को महत्त्वपूर्ण बनाती हैं।
Joothan-1
- Author Name:
Omprakash Valmiki
- Book Type:

- Description: आज़ादी के पाँच दशक पूरे होने और आधुनिकता के तमाम आयातित अथवा मौलिक रूपों को भीतर तक आत्मसात् कर चुकने के बावजूद आज भी हम कहीं-न-कहीं सवर्ण और अवर्ण के दायरों में बँटे हुए हैं। सिद्धान्तों और किताबी बहसों से बाहर, जीवन में हमें आज भी अनेक उदाहरण मिल जाएँगे, जिनमें हमारी जाति और वर्णगत असहिष्णुता स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है। ‘जूठन' ऐसे ही उदाहरणों की श्रृंखला है जिन्हें एक दलित व्यक्ति ने अपनी पूरी संवेदनशीलता के साथ ख़ुद भोगा है। इस आत्मकथा में लेखक ने स्वाभाविक ही अपने उस 'आत्म' की तलाश करने की कोशिश की है जिसे भारत का वर्ण-तंत्र सदियों से कुचलने का प्रयास करता रहा है, कभी परोक्ष रूप में, कभी प्रत्यक्षत:। इसलिए इस पुस्तक की पंक्तियों में पीड़ा भी है, असहायता भी है, आक्रोश और क्रोध भी और अपने आपको आदमी का दर्जा दिए जाने की सहज मानवीय इच्छा भी।
Premchand Smriti
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
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