Mahavrati : Karmayogi Pracharak Sohan Singh
(0)
Author:
Gopal SharmaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
200
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परम पूजनीय सरसंघचालक माननीय मोहनराव भागवतजी का उनके बारे में कथन ही उनके जीवन का निचोड़ है। विश्व-कल्याण, राष्ट्रधर्म, कार्यकर्ता और मनुष्यत्व के लिए समर्पित सोहन सिंहजी महाव्रती के रूप में उभरकर आते हैं। वीरव्रती और कर्मयोगी सोहन सिंहजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उन नींव के प्रस्तर—अभेद्य दीवार बने वरिष्ठ प्रचारकों में शामिल हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय मूल्यों की स्थापना के लिए अपना सारा जीवन तपस्वी की भाँति गला दिया। जब संपूर्ण विश्व में आतंकवाद अट्टहास कर रहा है, भारत में राष्ट्रीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया जा रहा है, वैयक्तिक स्वार्थ समाज-जीवन पर हावी होते जा रहे हैं और इन सबके मुकाबले ईश्वरीय और सकारात्मक शक्ति के रूप में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का संवाहक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही दिखाई देता है। ऐसे में सोहन सिंहजी का स्मरण और उनके द्वारा रखे गए आदर्श का अनुसरण अति सामयिक है, राष्ट्र-निर्माण के संकल्प के लिए प्रेरणा है।
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परम पूजनीय सरसंघचालक माननीय मोहनराव भागवतजी का उनके बारे में कथन ही उनके जीवन का निचोड़ है। विश्व-कल्याण, राष्ट्रधर्म, कार्यकर्ता और मनुष्यत्व के लिए समर्पित सोहन सिंहजी महाव्रती के रूप में उभरकर आते हैं। वीरव्रती और कर्मयोगी सोहन सिंहजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उन नींव के प्रस्तर—अभेद्य दीवार बने वरिष्ठ प्रचारकों में शामिल हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय मूल्यों की स्थापना के लिए अपना सारा जीवन तपस्वी की भाँति गला दिया। जब संपूर्ण विश्व में आतंकवाद अट्टहास कर रहा है, भारत में राष्ट्रीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया जा रहा है, वैयक्तिक स्वार्थ समाज-जीवन पर हावी होते जा रहे हैं और इन सबके मुकाबले ईश्वरीय और सकारात्मक शक्ति के रूप में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का संवाहक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही दिखाई देता है। ऐसे में सोहन सिंहजी का स्मरण और उनके द्वारा रखे गए आदर्श का अनुसरण अति सामयिक है, राष्ट्र-निर्माण के संकल्प के लिए प्रेरणा है।
Book Details
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ISBN9789386231659
-
Pages272
-
Avg Reading Time9 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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कश्मीर पर तीन महत्त्वपूर्ण उपन्यास लिखने के बावजूद चन्द्रकान्ता का लेखन समय के ज्वलन्त प्रश्नों एवं वृहत्तर मानवी सरोकारों से जुड़ा है।
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बकौल लेखिका : “मैंने इन संस्मरणों में स्त्री-समीक्षा नहीं की है, स्त्री-जीवन की भौतिकी, भीतरी कैमिस्ट्री की दख़लन्दाज़ी से बने गुट्ठिल व्यक्तित्व की कुछ गुत्थियों को खोलने की चेष्टा की है। बेटी, माँ, बहन, पत्नी, दादी, नानी के रोल निभाती स्त्री की सोच, आकांक्षाओं और स्वप्नों में सेंध लगाकर जानना चाहा है कि कई दशकों को पीछे ठेलते, प्रगति के तमाम सोपान पार करने के बाद, स्त्री से जुड़ी परिवर्तनकारी रीति-नीतियों और पुरुष वर्चस्व के अहम् पूरित सोच में कितना कुछ सार्थक बदलाव आ पाया है। घर-परिवार की धुरी स्त्री क्यों केन्द्र में क़दम जमाने से पहले ही बार-बार हाशिए पर धकेल दी जाती है? भूमंडलीकरण के इस दौर में भी क्या स्त्री के लिए कसाईघर मौजूद नहीं, जहाँ ख़ामोश, अपढ़ और बोलनेवाली तेज़-तर्रार, दोनों मिज़ाज की स्त्रियाँ, गाहे-बगाहे शहीद की जाती हैं?”
Samarnanjali
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
- Book Type:

- Description:
युगदृष्टा रामधारी सिंह ‘दिनकर’ अपने समकालीनों की चर्चा करना बहुत नाजुक काम मानते थे, लेकिन समकालीनों पर लिखने पर उनको सुखद अनुभूति भी होती थी।
‘स्मरणांजलि’ दिनकर जी के मित्रों और समकालीन महापुरुषों, जिन्होंने उनके हृदय पर अमिट छाप छोड़ी, के विषय में निबन्धों और यात्रा–संस्मरणों की अनूठी कृति है।
इस पुस्तक में देश के प्रख्यात विद्वानों–साहित्यकारों और राजनेताओं के अन्तरंग जीवन की झाँकियाँ हैं तथा उनके अनजाने रूप, देश की राजनीति को प्रभावित करनेवाले प्रसंगों और उन मानवीय गुणों का भी इसमें उद्घाटन हुआ है जिन्होंने इन विभूतियों को सबका श्रद्धास्पद बना दिया।
यह पुस्तक जहाँ एक तरफ़—राजर्षि टंडन, राजेन्द्र प्रसाद, काका साहब कालेलकर, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन्, लालबहादुर शास्त्री, लोहिया साहब, डॉ. जाकिर हुसेन, श्रीकृष्ण सिंह, पुण्यश्लोक जायसवाल, राहुल सांकृत्यायन, पंडित बनारसीदास चतुर्वेदी, आचार्य रघुवीर, पंडित किशोरीदास वाजपेयी, आचार्य शिवपूजन सहाय, रामवृक्ष बेनीपुरी, डॉ. लक्ष्मीनारायण ‘सुधांशु’, पंडित वंशीधर विद्यालंकार, नलिन विलोचन शर्मा, मैथिलीशरण गुप्त, माखनलाल चतुर्वेदी, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानन्दन पंत, महादेवी वर्मा, बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’, हरिवंश राय ‘बच्चन’—इन विभूतियों का परिचय देती है, वहीं राष्ट्रकवि दिनकर की यूरोप, जर्मनी, चीन और मॉरिशस यात्रा का रोचक वर्णन भी करती है।
संस्मरणात्मक निबन्धों और महत्त्वपूर्ण यात्रा–वृत्तान्तों से सुसज्जित, सरस भाषा–शैली में लिखित यह पुस्तक अमूल्य है।
Modi : Comman Man's PM
- Author Name:
Kishor Makwana
- Book Type:

- Description:
This book is a worthwhile, prolific, and insightful life sketch of the torch-bearer of Indians. It is about the common man’s Prime Minister, Narendra Modi, who has become a ray of hope for 125 crore Indians—from a humble farmer to an ambitious industrialist—by taking the path to good governance after being sworn in as India's Prime Minister in May 2014. The game-changer of Indian politics, Modi had taken a mesmerising hold over the Gujarat masses with three consecutive victories in the state assembly elections and was a senior campaign adviser, drawing unprecedented crowds for the 2014 Lok Sabha elections. After being elected PM, Modi is often featured in 24x7 Breaking News on media channels and enjoys a good rapport with top world leaders whom he visited during his six months as Prime Minister. The insightful leader led India at the India-ASEAN Summit and the G-20 Summit, and held bilateral meetings with the leadership of countries such as the US, Japan, China, and other neighbouring countries of India. He has launched new avenues of cooperation with the countries with which India has deep historical and cultural ties over centuries. His initiatives, such as 'Make in India' and 'Swachchha Bharat Abhiyan', have been widely lauded. Modi has called for innovative efforts to make renewable energy, especially solar energy, competitive with conventional energy and pitched for global cooperation on repatriation of black money.
Aamader Shantiniketan
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

- Description:
कथाकार और उपन्यासकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई ज़मीन बनाई थी, जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पाठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे। उन्होंने मानवीय संवेदना और सम्बन्धगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज़्यादा पढ़े जानेवाले लेखकों में एक होकर रहीं। कहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संस्मरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन किया। अपने सम्पर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने क़रीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया। इस पुस्तक में ‘गुरुपल्ली’, ‘गुरुदेव की कर्मभूमि’, ‘शान्तिनिकेतन की गुरुपल्ली’, ‘आश्रम के पर्व’, ‘कुछ महत्त्पूर्ण उत्सव’, ‘आश्रम के विकास में गुरुदेव का योग’, ‘गांधीजी और गुरुदेव’, ‘अनेक विभूतियों का आगमन’, ‘श्रीनिकेतन का मेला’, ‘खेलकूद और मनोरंजन’, ‘आश्रमवासियों के लिए गुरुदेव के गीत’, ‘छात्रों का अतिथि-प्रेम’, ‘गुरुदेव की आत्मीयता’, ‘सादा पर कलापूर्ण रहन-सहन’, ‘गुरुर्ब्रह्मा’, ‘ओ रे गृहवासी’, ‘तुई जे पुरुष मानुष रे!’, ‘आश्रम पर काले बदल’ शीर्षक निबन्ध शामिल हैं, जिनका सम्बन्ध लेखिका के शान्तिनिकेतन प्रवास से है। आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों को उनकी ये रचनाएँ भी पसन्द आएँगी!
Shabdon Ke Aalok Mein
- Author Name:
Krishna Sobti
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‘शब्दों के आलोक में’ एक पुरानी जन्म तारीख़ के नए-पुराने मुखड़ों और कार्यकारी उभरते पाठ के रचनात्मक टुकड़ों की बंदिश है जिसे एक जिल्द में सँजोया गया है। पाठ न नएपन से आक्रान्त है और न पुरानेपन से आतंकित। जीने का एक ऐसा मौसम इसके आर-पार फैला है जो न लेखक की कार्य-क्षमताओं पर हावी है और न साहित्यिक मुखौटों से भयभीत। ट्रैक पर दौड़ते हुए न किसी को पछाड़ने की हसरत और न किसी से पिछड़ने का डर।
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