Bhujia ke Badshah
(0)
Author:
Pavitra KumarPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
250
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यह कहानी है साधारण से शहर बीकानेर के पारिवारिक व्यवसाय हल्दीराम की, जिसने स्वयं को एक अंतरराष्ट्रीय चहेते ब्रांड में बदल दिया। बीसवीं सदी की शुरुआत में, गंगा बिशन अग्रवाल उर्फ हल्दीराम नाम का युवक बीकानेर शहर में सबसे अच्छी भुजिया बनानेवाले के रूप में विख्यात हो गया। समय पंख लगाकर उड़ा और एक सदी के बाद हल्दीराम का साम्राज्य राजस्व के मामले में मैकडॉनल्ड्स और डोमिनोज के साझा राजस्व से भी बहुत आगे पहुँच गया। ‘भुजिया के बादशाह’ में पवित्रा कुमार अग्रवाल परिवार की बाँधकर रखनेवाली कहानी को उसकी समग्रता में सुनाती हैं। यह एक ऐसा असाधारण कार्य है, जिसे पहले किसी ने नहीं किया था। इसकी शुरुआत, धूल-धूसरित, उदारमना बीकानेर से होती है और यह इस स्वदेशी लेबल के उदीयमान होने और निरंतर उदित होने का वर्णन करती है, जो दुनिया भर में आज सबसे जाने-माने भारतीय ब्रांडों में से एक बन गया है। हल्दीराम्स की यह कहानी किसी सामान्य कारोबार की कहानी नहीं है। इसमें भरपूर फैमिली ड्रामा है, कोर्ट के मुकदमे हैं, ईर्ष्या की अग्नि में जलकर किया गया क्षेत्रीय विस्तार है, एक दशक से भी अधिक समय से चली आ रही ट्रेडमार्क की लड़ाई है, और घर-घर में प्रसिद्ध व लोकप्रिय भुजिया बनाने का वह रहस्य है जिसे एक परिवार ने सीने से लगाकर रखा है। तेज रफ्तार और बाँधकर रखनेवाली यह पुस्तक, परिवार के कारोबार के विभिन्न आयामों तथा कारोबार करने के भारतीय तौर-तरीकों पर सुस्वादु और मधुर नजर डालती है।
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यह कहानी है साधारण से शहर बीकानेर के पारिवारिक व्यवसाय हल्दीराम की, जिसने स्वयं को एक अंतरराष्ट्रीय चहेते ब्रांड में बदल दिया। बीसवीं सदी की शुरुआत में, गंगा बिशन अग्रवाल उर्फ हल्दीराम नाम का युवक बीकानेर शहर में सबसे अच्छी भुजिया बनानेवाले के रूप में विख्यात हो गया। समय पंख लगाकर उड़ा और एक सदी के बाद हल्दीराम का साम्राज्य राजस्व के मामले में मैकडॉनल्ड्स और डोमिनोज के साझा राजस्व से भी बहुत आगे पहुँच गया।
‘भुजिया के बादशाह’ में पवित्रा कुमार अग्रवाल परिवार की बाँधकर रखनेवाली कहानी को उसकी समग्रता में सुनाती हैं। यह एक ऐसा असाधारण कार्य है, जिसे पहले किसी ने नहीं किया था। इसकी शुरुआत, धूल-धूसरित, उदारमना बीकानेर से होती है और यह इस स्वदेशी लेबल के उदीयमान होने और निरंतर उदित होने का वर्णन करती है, जो दुनिया भर में आज सबसे जाने-माने भारतीय ब्रांडों में से एक बन गया है।
हल्दीराम्स की यह कहानी किसी सामान्य कारोबार की कहानी नहीं है। इसमें भरपूर फैमिली ड्रामा है, कोर्ट के मुकदमे हैं, ईर्ष्या की अग्नि में जलकर किया गया क्षेत्रीय विस्तार है, एक दशक से भी अधिक समय से चली आ रही ट्रेडमार्क की लड़ाई है, और घर-घर में प्रसिद्ध व लोकप्रिय भुजिया बनाने का वह रहस्य है जिसे एक परिवार ने सीने से लगाकर रखा है। तेज रफ्तार और बाँधकर रखनेवाली यह पुस्तक, परिवार के कारोबार के विभिन्न आयामों तथा कारोबार करने के भारतीय तौर-तरीकों पर सुस्वादु और मधुर नजर डालती है।
Book Details
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ISBN9789352660711
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Pages192
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Avg Reading Time6 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: "सुनीता विलियम्स एक असाधारण महिला की अदम्य इच्छाशक्ति, समर्पण, उत्साह तथा आत्मविश्वास का पर्याय है। इन्हीं गुणों ने एक पशु-चिकित्सक बनने की महत्त्वाकांक्षा रखनेवाली छोटी बालिका सुनीता विलियम्स को एक अंतरिक्ष-विज्ञानी, एक आदर्श प्रतिमान बना दिया। अंतरिक्ष में अपने छह माह के प्रवास के दौरान सुनीता विलियम्स दुनिया भर के लाखों लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। 29 घंटे 17 मिनट में कुल चार स्पेस वॉक (अंतरिक्ष में चलने का कार्य) पूरा करके उन्होंने महिलाओं के लिए ‘असाधारण वाहनीय गतिविधि’ का एक विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। सुनीता के अंतरिक्ष प्रवास ने विश्व में भारत का सम्मान और बढ़ा दिया। सुनीता समुद्रों में तैराकी कर चुकी हैं, महासागरों में गोताखोरी कर चुकी हैं, युद्ध और मानव-कल्याण के कार्य के लिए उड़ानें भर चुकी हैं; अंतरिक्ष तक पहुँच चुकी हैं और अंतरिक्ष से अब वापस धरती पर आ चुकी हैं; सचमुच, एक जीवित किंवदंती हैं वे। पे्ररणादायी सुनीता के जीवन से हर बालक-बालिका प्रेरणा लेकर किसी भी क्षेत्र के आकाश को छुए, यही इस पुस्तक के प्रकाशन का उद्देश्य है।
Stephen Hawking : Anant-Yatri
- Author Name:
Chandramani Singh
- Book Type:

- Description: ‘स्टीफेन हॉकिंग : अनन्त-यात्री’ महान वैज्ञानिक स्टीफेन हॉकिंग का वैज्ञानिक जीवनवृत्त है जिसमें उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ-साथ उनके जीवन के छुए-अनछुए पहलुओं की चर्चा की गयी है। अपने परिजनों एवं समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता एवं सम्पूर्ण मानवता की रक्षा के लिए दिये गये उनके सुझावों की संजीदगी उन्हें अन्य से पृथक कर महानतम बना देती है और ऐसे लोग कभी-कभी इस धरती पर जन्म लेते हैं।
Paalatu Bohemian
- Author Name:
Prabhat Ranjan
- Book Type:

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Description:
हिन्दी में ऐसे लेखक अधिक नहीं हैं जिनकी रचनाएँ आम पाठकों और आलोचकों के बीच सामान रूप से लोकप्रिय हों। ऐसे लेखक और भी कम हैं जिनके पैर किसी विचारधारा की बेड़ी से जकड़े ना हों। मनोहर श्याम जोशी के लेखन, पत्रकारिता को अपने शोध-कार्य का विषय बनाने की ‘रिसर्च स्कॉलर्स’ में होड़ लगी थी। प्रभात रंजन ने न सिर्फ़ जोशी जी के लेखन पर अपना शोध-कार्य बख़ूबी किया, बल्कि उनके साथ बिताए गए समय को इस संस्मरण की शक्ल देकर एक बड़ी ज़िम्मेदारी पूरी की है।
“प्रभात ने आत्मीय वृत्तान्त लिखा है।”
—भगवती जोशी (मनोहर श्याम जोशी की सहधर्मिणी)
—हिन्दी फ़िल्मों और डेली सोप ओपेरा के लीजेंड्री राइटर मनोहर श्याम जोशी के जीवन से जुड़े अनेक वृत्तांत इस पुस्तक में हैं जो न सिर्फ़ दिलचस्प हैं, बल्कि प्रेरक और ज्ञानवर्द्धक भी हैं।
—हिन्दी कथा-साहित्य/पत्रकारिता/फ़िल्म/टेलीविज़न में रूचि रखनेवालों के लिए अनिवार्य पठनीय सामग्री।
—संस्मरण विधा में एक उपलब्धि जैसी किताब।
Diary Of A Young Girl
- Author Name:
Anne Frank
- Book Type:

- Description: A timeless tale of courage,hope and the enuring pursuit of a more compassionate world. This is a heartwarming journey of a young girls life during one of the darkest times in history. -ashish mishra This remarkable retelling captures the spirit of resilience,hope and the enduring power of the human spirit.
Agniparva : Shantiniketan
- Author Name:
Roza Hajnoczy Germanus
- Book Type:

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Description:
यह कृति हंगेरियन गृहवधू रोज़ा हजनोशी गेरमानूस की उनके शान्तिनिकेतन प्रवास-काल अप्रैल 1929 से जनवरी 1932 की एक अनोखी डायरी है। इसमें शान्तिनिकेतन जीवन-काल की सूक्ष्म दैनंदिनी, वहाँ के भवन, छात्रावास, बाग़-बगीचे, पेड़-पौधे, चारों ओर फैले मैदान, संताल गाँवों का परिवेश, छात्रों और अध्यापकों के साथ बस्ती के जीवित चित्र और चरित्र लेखिका की क़लम के जादू से आँखों के सामने जीते-जागते, चलते-फिरते नज़र आते हैं। पाठक एक बार फिर विश्वभारती शान्तिनिकेतन के गौरवपूर्ण दिनों में लौट जाएँगे, जब रवीन्द्रनाथ ठाकुर के महान व्यक्तित्व से प्रभावित कितने ही देशी और विदेशी विद्वान और प्रतिभासम्पन्न लोग वहाँ आते-जाते रहे।
रोज़ा के पति ज्यूला गेरमानूस इस्लामी धर्म और इतिहास के प्रोफ़ेसर के पद पर शान्तिनिकेतन में तीन वर्ष (1929-1931) के अनुबन्ध पर आए थे। तब हिन्दुस्तान में स्वतंत्रता आन्दोलन अपने चरम शिखर पर था। गांधी जी का ‘नमक सत्याग्रह’ उस समय की प्रमुख घटना थी। पुस्तक की विषय-वस्तु प्रथम पृष्ठ से अन्तिम पृष्ठ तक शान्तिनिकेतन की पृष्ठभूमि में स्वतंत्रता-संग्राम के अग्निपर्व का भारत की उपस्थिति है। इस पुस्तक की बदौलत रवीन्द्रनाथ ठाकुर, महात्मा गांधी और शान्तिनिकेतन हंगरी में सर्वमान्य परिचित नाम हैं।
एक वस्तुनिष्ठ रोज़नामचा के अलावा, पुस्तक रोचक यात्रा-विवरण, समकालीन राजनीतिक उथल-पुथल, इतिहास, धर्म-दर्शन, समाज और रूमानी कथाओं का बेजोड़ समन्वय है।
हमारे रीति-रिवाज़ों, अन्धविश्वासों और धार्मिक अनुष्ठानों को इस विदेशी महिला ने इतनी बारीकी से देखा कि हैरानी होती है उनकी समझ-बूझ और पैठ पर। प्रणय-गाथाओं के चलते भी यह डायरी एक धारावाहिक रूमानी उपन्यास-सा लगे तो आश्चर्य नहीं।
इस देश से विदा होने के समय वह इसी अलौकिक हिन्दुस्तान के लिए जहाज़ की रेलिंग पकड़कर फूट-फूटकर रो रही थी—‘‘मेरा मन मेरे हिन्दुस्तान के लिए तरसने लगा, हिन्दुस्तान जो चमत्कारों का देश है।’’
Maqbool Fida Husain : Jivani Aur Vichar
- Author Name:
Akhilesh
- Book Type:

- Description: मक़बूल फ़िदा हुसेन समकालीन भारतीय चित्रकला के अकेले ऐसे उदाहरण हैं जिन्होंने समकालीनता को अन्तरराष्ट्रीय पहचान दिलवाई और जीवन-भर इस दिशा में काम किया। प्रस्तुत पुस्तक में संगृहीत लेख उनकी इसी जीवटता, समर्पण, दूरदृष्टि और अथक परिश्रम को रेखांकित करते हैं। वे न सिर्फ़ सक्रिय रहे, बल्कि उन्होंने अनेक चित्रकारों को प्रेरित भी किया। युवा चित्रकारों के लिए आज भी वे प्रेरणा-स्रोत बने हुए हैं। उनकी चुम्बकीय उपस्थिति, उनका बेफ़िक्राना अन्दाज़, उनके सरोकार आदि सभी इतने व्यापक और पारम्परिक रहे कि उनमें आधुनिकता अपने उच्चतम रूप में प्रकट होती है। हुसेन के चित्रों को यदि एक वाक्य में परिभाषित किया जाए तो वह कुछ इस तरह का हो सकता है— “परम्परा अपनी आधुनिकता को हुसेन के चित्रों में सहजता से प्रकट करती है।” हुसेन पर लिखे गए इन लेखों को एक जगह एकत्र करने के पीछे मेरी मंशा यह भी रही है कि अलग-अलग समय पर अन्यान्य कारणों से लिखे गए इन निबन्धों में हुसेन की बहुमुखी प्रतिभा का स्वाद पाठकगण ले सकें। हुसेन निश्चित ही देश-काल, धर्म-विधर्म से परे अपनी रचनात्मकता में डूबे एक सच्चे कलाकार थे जिन्होंने जीवन-भर अपने को कसौटी पर कसे रखा। वे सक्रियता के पर्याय थे।
Haadse
- Author Name:
Ramanika Gupta
- Book Type:

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Description:
इस आत्मकथा को स्त्री के अपने चुनाव की कहानी भी कहा जा सकता है। पटियाला के बड़े मिलिटरी अफ़सर की ज़िद्दी और अपने मन का करनेवाली लड़की जो अपनी हरकतों से बार-बार बाप और उनके परिवार को असुविधाओं में डालती है, खुली मीटिंगों में उनके सामन्ती दोमुँहेपन पर प्रहार करती है, विभाजन की त्रासदी झेलती मुस्लिम महिलाओं की आवाज़ बनकर जवाब माँगती है और फिर अपने मन से क्षत्रिय (राजपूत) परिवार छोड़कर अन्य जाति के लड़के (गुप्ता) से शादी करके बिहार (झारखंड समेत) चली आती है। यहाँ आकर पति से विद्रोह करके मज़दूरों-कामगारों के बीच उनके संघर्ष का जीवन चुनती है।
इस आत्मकथा को सामन्तवाद और लोकतन्त्र के खुले द्वन्द्व की तरह भी पढ़ा जा सकता है।
इन्हीं तूफ़ानी झंझावातों से गुज़रकर आई है रमणिका गुप्ता। आर्य समाज, कांग्रेस, समाजवादी और कम्युनिस्ट होने की उनकी यह यात्रा भारतीय राजनीति के नाटकीय मोड़ों का इतिहास भी है और विकास भी।
Ateet Rag
- Author Name:
Nand Chaturvedi
- Book Type:

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Description:
ये वृत्तान्त किसी भी व्यक्ति के जीवन का विशद ब्योरा नहीं है; आदि से अन्त तक उसे जानने का या उसके जीवन-आवेगों में रहस्यों को किसी मनोचिकित्सक की तरह देखने का। यह सिर्फ़ ज़िन्दगी के उस हिस्से को देखने की कोशिश है जो समाज से जुड़ी है और ‘सामाजिकता’ का बहुमूल्य हिस्सा है।
‘अतीत राग’ समान विचार वाले पड़ोसियों का इलाक़ा है। इसके ज़्यादातर पड़ोसी लेखक के समाजवादी साथी और साहित्यकार मित्र हैं जो शोषणमुक्त समाज-रचना के लिए प्रतिबद्ध
हैं।‘भारतीय समाजवाद’ आज़ादी के बाद वाले दिनों में अपनी थोड़ी-सी क्रान्तिकारी पहचान बनाकर विलुप्त हुआ काल-खंड है। बदलाव के इस काल-खंड में कोई विरल सिद्धान्तकार नहीं मिला; जो थे वे जयप्रकाश नारायण, डॉ. राममनोहर लोहिया, आचार्य नरेन्द्र देव, अशोक मेहता आदि थे। वे कांग्रेस की ‘ढीली चाल’ और पूँजीपतियों के प्रति अनुकूल आचरण से सैद्धान्तिक मतभेद रखते थे। लेकिन पार्टी के लिए जैसे संगठित नेतृत्व और बदलाव की दिशा चाहिए थी, उसका विश्वसनीय घोषणा-पत्र तैयार करने में वे कामयाब नहीं हुए।
एक अर्थ में समाजवादी पार्टी समाप्त हो गई थी लेकिन एक अदृश्य समाजवादी पार्टी मन में बनी थी, वह बनी रही। वे जो सिर्फ़ पार्टी के उसूलों के लिए नहीं, ज़िन्दगी के गम्भीर उसूलों के लिए समर्पित थे, अडिग रहे, सब जैसे रिश्तेदार हो गए। वे बड़े लोग नहीं थे। कोई स्टेशन का कुली था, कोई सड़क के किनारे चाय बनाता था या शहर में पार्टी चलाता था, हीरालाल जैन थे या राजेन्द्र जी, नरेन्द्र जी थे या जयप्रकाश नारायण या फिर राममनोहर लोहिया थे; सब स्मृतियों में बस गए और उनकी ‘करनी की चारुता’ समृद्धि-सम्पदा की ललक को दोनों हाथों से उलीचकर फेंकने के साहस को मैंने देखा।
जो देखा, उसमें से वही चुना, जो ‘लोकार्पित’ था और जो लोक-रचना का भविष्य हो सकता था। वह विशेष, जो उन्होंने जीवन से मृत्यु तक चुना। मैंने भी उनकी स्मृति में उसे ही रेखांकित किया है।
—इसी पुस्तक से
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