Shayad Yahi Hai Pyar
(0)
Author:
Devanshi SharmaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
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जो रिश्ता आइस स्केटिंग रिंक में बना और जिसे काम के बीच चाय और कॉफी के न जाने कितने ब्रेक ने मजबूती दी, वो प्यार के परवान चढ़ते ही पागलपन की हद तक जा पहुँचा। अल्हड़ और कामयाब फैशन ब्लॉगर मीरा को अपने सबसे अच्छे खडूस दोस्त, इशान से प्यार हो जाता है। साथ चलते, गिरते, साथ ही सँभलते, जब उन्हें अपनी मंजिल मिलती है, तो लगता है कि इससे बेहतर तो सफर ही था। ‘शायद यही है प्यार’ दोस्ती की तलाश, प्यार के पीछे भागने, सपनों को उड़ान देने, और उन सबके बीच संतुलन कायम करने की कहानी है। एक सच्ची प्रेम कहानी जो दिल से निकली और अपनी राह ढूँढ रही है।
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जो रिश्ता आइस स्केटिंग रिंक में बना और जिसे काम के बीच चाय और कॉफी के न जाने कितने ब्रेक ने मजबूती दी, वो प्यार के परवान चढ़ते ही पागलपन की हद तक जा पहुँचा।
अल्हड़ और कामयाब फैशन ब्लॉगर मीरा को अपने सबसे अच्छे खडूस दोस्त, इशान से प्यार हो जाता है। साथ चलते, गिरते, साथ ही सँभलते, जब उन्हें अपनी मंजिल मिलती है, तो लगता है कि इससे बेहतर तो सफर ही था।
‘शायद यही है प्यार’ दोस्ती की तलाश, प्यार के पीछे भागने, सपनों को उड़ान देने, और उन सबके बीच संतुलन कायम करने की कहानी है। एक सच्ची प्रेम कहानी जो दिल से निकली और अपनी राह ढूँढ रही है।
Book Details
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ISBN9789390900251
-
Pages224
-
Avg Reading Time7 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: प्राचीन काल से ही भारत में शिक्षा के साथ संस्कार निर्माण को महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त था। कहानियों की विधा का भी हमारे सामाजिक जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। वेदों, उपनिषदों, पुराणों, रामायण, महाभारत, जातक कथाओं एवं जैन कथाओं के द्वारा अनेक कहानियों को रोचक ढंग से सुनाकर विद्यार्थियों को सुसंस्कारित किया जाता था। प्रस्तुत पुस्तक में एक तिहाई कहानियों को भारत की संस्कृति और परंपरा के आधार पर संग्रहीत किया गया है। एक तिहाई कहानियों को मानवीय जीवनमूल्यों यथा अहिंसा, करुणा, निस्स्वार्थ प्रेम, मैत्रीभाव और सेवा के आधार पर संकलित किया गया है। एक तिहाई भाग में रोचक जैन कथाओं का संकलन है। प्रत्येक कहानी में एक संदेश है, जो हमारे जीवन पर अमिट प्रभाव डालता है। अधिकांश कहानियाँ सरल और रोचक भाषा में हैं। अच्छा कर्म, अच्छा ज्ञान, अच्छा चरित्र, इंद्रिय-विजय, मन पर नियंत्रण, भावना, एकाग्रता एवं स्मरण-शक्ति जैसे सद्गुणों को जब कहानियों में गुंफित किया जाता है तो वे बहुत रोचक हो जाते हैं। मानव-मूल्यों को सर्वसुलभ बनाने के लिए प्रेरक बोधकथाओं का उत्कृष्ट संकलन। —दुलीचंद जैन
Ramana Vesod
- Author Name:
Hiralal Shukla
- Book Type:

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Description:
‘रामना वेसोड़’ माड़िया बोली में रामकथा है। यह पुस्तक दण्डामी माड़िया जनजातियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में उनके स्वतंत्र अस्तित्व और संस्कृति को रामकथा के साथ-साथ एक खोजी भूमिका से भी जोड़ती है।
गोस्वामी तुलसीदास रचित 'रामचरितमानस' एक ऐसी कृति है, जिसका दो-तिहाई से अधिक अंश वनभूमि और वनजनों से सम्बद्ध है और आदिवासियों के जीवन-जगत् में आज भी शामिल है, जिससे ये अपना सम्बन्ध पुरातन मानते हैं, इसलिए अभिन्न जुड़ाव रखते हैं। ग़ौरतलब है कि दण्डामी माड़िया अपने गोत्र और देवतावर्ग के अनुसार अपने को वानरवंश से सम्बद्ध करते हैं। इनमें प्रचलित प्रबन्धगीत मूंजपाटा (वानरगीत) से यह ध्वनित होता है कि ये कभी रामकथा से जुड़े हुए थे।
इस तरह यह पुस्तक रामकथा के माध्यम से हाशिए का जीवन जी रही जनजातियों की एक पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि भी रचती है।
‘रामना वेसोड़’ के माध्यम से दण्डामी अपने विगत वैभव से पुन: जुड़ सकें, इस पुस्तक के ज़रिए बस यही विनम्र प्रयास है।
Yayavar Shabdashilpi Pt. Banarsidas Chaturvedi
- Author Name:
Shri Ashutosh Chaturvedi
- Book Type:

- Description: This book has no description
32000 Saal Pahale
- Author Name:
Ratneshwar Kumar Singh
- Book Type:

- Description: हाल के दिनों में गल्फ ऑफ खंभात (गुजरात) की गहराइयों में बत्तीस हजार साल पुराने हिमयुग में नगर होने के साक्ष्य मिले हैं। संसार में अबतक मिली नगरीय सभ्यताओं में यह सबसे पुराना नगर होने का अनुमान है। वैज्ञानिकों-पुरातत्त्ववेत्ताओं के नवीन शोध और खोज को केंद्र में रखकर महायुग उपन्यास-त्रयी लिखा गया है। '32000 साल पहले तीन उपन्यासों की शृंखला का पहला उपन्यास है। उन दिनों संसार में सांस्कृतिक विकास के साथ कई नवीन प्रयोग हुए। संसार में पहली बार देह ढकने से लेकर, तेल का दीया जलाने, दूध का सेवन करने, बाँसुरी बजाने, नृत्य करने, गीत गाने, कथा वाचन आदि शुरू हुए। इन्हीं लोगों ने पहली बार नौका, हिमवाहन और चक्के के साथ विविध अस्त्रों का निर्माण किया। पहली बार मनुष्य के ओठों ने खाने और बोलने के आलावा प्रेम करना सीखा। खुले सेक्स की अवधारणा के साथ पहले परिवार की परिकल्पना भी शुरू हुई। कुछ अज्ञात-प्राकृतिक संघर्ष के कारण वहाँ प्रार्थना की शुरुआत हुई। परग्रहियों ने होमो सेपियंस के डी.एन.ए. का पुनर्लेखन किया। कुछ वैज्ञानिकों और पुरातत्त्ववेत्ताओं ने समुद्र की गहराइयों से जीरो पॉइंट फील्ड में संरक्षित ध्वनियों को संगृहीत कर उसे फिल्टर किया। कड़ी मेहनत के बाद उनकी भाषा को डिकोड किया गया और उसे इंडस अल्ट्रा कंप्यूटर पर चित्रित किया गया। उनकी आवाजों से ही बत्तीस हजार साल पहले की पूरी कहानी सामने आई।
Ramnagari
- Author Name:
Ram Nagarkar
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- Description: ‘रामनगरी’ मराठी के सुपरिचित लेखक और लोकनाट्यकर्मी राम नगरकर का आत्मकथात्मक उपन्यास है। उपन्यास इन अर्थों में कि इसकी शैली उपन्यासधर्मी है और ‘आत्मकथात्मक’ इन अर्थों में कि इसके स्थान–काल–पात्र, सब वास्तविक हैं और ‘मैं’ अर्थात् ‘रामचन्द्र्या’ (बकौल बाप के ‘भड़वे’!) अर्थात् लेखक राम नगरकर के आसपास घूमते हैं। चूँकि इस उपन्यास के लेखक जाति से नाई हैं, और चूँकि यह ‘आत्मकथात्मक’ रचना है, इसलिए इसके पहले पृष्ठ से अन्तिम पृष्ठ तक एक ऐसे ‘हज्जाम’ की उपस्थिति पंक्ति–दर–पंक्ति महसूस होती रहती है, जो एक ओर तो सवर्ण समाज द्वारा पग–पग पर अपमानित–प्रताड़ित होता रहता है, और दूसरी ओर अपनी ‘कूढ़मग़ज़ी’ में क़ैद रहने को भी विवश है। लेकिन इस विरोधाभास के प्रति ‘रामनगरी’ के लेखक का रुख़ आत्मदया–प्रधान नहीं, बल्कि व्यंग्य–प्रधान है, और व्यंग्य भी इतना तीखा कि तेज़ चाकू की तरह चीरता चला जाए। बेबाकी इस हद तक कि जहाँ सारी हदें टूट जाएँ; मतलब, जहाँ मौक़ा मिला, ख़ुद को भी गिरफ़्त में लेने से बाज़ नहीं आए। इसके बावजूद, चूँकि इसके लेखक की मुख्य हिस्सेदारी लोक–नाटकों के क्षेत्र में रही है, इसलिए लोकरंजन की बात वे एक क्षण के लिए भी नहीं भूलते यानी चुटकी तो तिलमिला देनेवाली काटते हैं, लेकिन ‘उफ़’ नहीं करने देते और माहौल में ठहाके–ही–ठहाके गूँजते रहते हैं।
Bhasha Ki Khadi
- Author Name:
Om Nishchal
- Book Type:

- Description: भाषा अभिव्यक्ति का आयुध है, जिसके बिना हम न तो सार्थक बातचीत कर सकते हैं, न लिख-पढ़ सकते हैं। हिंदी-हिंदुस्तानी जिसकी नींव कभी महात्मा गांधी ने रखी, जिसे देश भर में प्रचारित-प्रसारित किया, स्वराज पाने का अचूक हथियार बनाया, वह भारत की राजभाषा बनने के बावजूद अपने हक से वंचित रही है। अरसे तक औपनिवेशिक गुलामी ने हमारे मनोविज्ञान को ऐसी भाषाई ग्र्रंथियों से भर दिया है, जिसमें हमने आजादी के बाद धीरे-धीरे अंग्रेजियत ओढ़ ली और भारतीय भाषाओं समेत हिंदी-हिंदुस्तानी से एक दूरी बनानी शुरू कर दी। किंतु जब-जब हम में राष्ट्रप्रेम जागता है, हम स्वराज्य, हिंदी-हिंदुस्तानी व भारतीय संस्कृति के पन्ने उलटने लगते हैं। कहना न होगा कि भारतीय भाषाओं के बीच पुल बनाने वाली हिंदी आज देश में ही नहीं, पूरे विश्व में किसी-न-किसी रूप में बोली व समझी जाती है। एक बड़ा भौगोलिक क्षेत्रफल हिंदीभाषियों का है, जो देश-देशांतर में फैला है। प्रवासी भारतवंशियों का समुदाय भी हिंदी का हितैषी रहा है तथा इस समुदाय ने विभिन्न देशों में न केवल भाषा का वाचिक स्वरूप बचाकर रखा है, भारतीय संस्कृति के ताने-बाने को भी सुरक्षित व संवर्धित किया है। ‘भाषा की खादी’ जहाँ हिंदी-हिंदुस्तानी के सहज स्वरूप की बात करती है, वहीं संस्कृति के उन धागों के बारे में भी बतियाती है, जिनसे हमारे पर्वों, त्योहारों, बसंत, फागुन व प्रणय के मौसमी अहसासों के ताने-बाने जुड़े हैं। नए बौर की गंध से मह-मह करता फागुन कभी-कभी शब्दों की पालकी पर आरूढ़ होकर आता है। ‘भाषा की खादी’ में यह मह-मह और मंद-मंद बहती पुरवैया के झकोरों की गूँज सुनाई देगी, इसमें संदेह नहीं।
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