Jeevanaleele
(0)
Author:
Kakasaheb Kalelkar, Sali Ramachandra RayaPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
KannadaCategory:
Travelogues₹
400
₹ 332 (17% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
ಶ್ರೀ ಕಾಕಾಸಾಹೇಬ ಕಾಲೇಲಕರರು ಗುಜರಾತಿ, ಮರಾಠಿ ಮತ್ತು ಹಿಂದೀ- ಹಿಂದುಸ್ತಾನಿಗಳಲ್ಲಿ ಖ್ಯಾತಿವೆತ್ತ ಲೇಖಕರು. ಅವರು ಮಹಾತ್ಮಾಗಾಂಧಿಯವರ ಸಹಚರರು ಮತ್ತು ಅತ್ಯಂತ ಪ್ರವಾಸ-ಪ್ರಿಯರು. ಅವರ ವ್ಯಕ್ತಿತ್ವವನ್ನು ಪ್ರತಿನಿಧಿಸುವ ಲಲಿತ ಪ್ರಬಂಧಗಳ ಈ ಸಂಗ್ರಹದಲ್ಲಿ ಅವರು ಭಾರತದ ಪ್ರಮುಖ ನದಿಗಳ, ಜಲಪ್ರಪಾತಗಳ ಮತ್ತು ಸಮುದ್ರತೀರಗಳ ಸುಂದರ ಶಬ್ದ-ಚಿತ್ರಗಳನ್ನು ಮೂಡಿಸಿದ್ದಾರೆ. ತಾವು ಪ್ರಕೃತಿಯಲ್ಲಿ ಕಾಣುವ ಸಂಗತಿಗಳ, ವಿಶೇಷತಃ ಜಲಾಶಯಗಳ ಸೌಂದರ್ಯವನ್ನು ಕಾಲೇಲಕರರು ಬಹು ಸೂಕ್ಷ್ಮವಾಗಿ ಚಿತ್ರಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಭೂತಕಾಲೀನ ಸಂಸ್ಮರಣಗಳಿಂದ ಬಣ್ಣಗೊಳಿಸಿ ಪೌರಾಣಿಕ ಕಥೆಗಳಿಂದ ಮೆರುಗು ಕೊಟ್ಟು ಅವನ್ನು ಸಾಹಿತ್ತಿಕ ಉದಾಹರಣೆಗಳಿಂದ ಬೆಳಗಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಮಹಾಭಾರತದಲ್ಲಿ ನದಿಗಳು ವಿಶ್ವದ ಮಾತೆಯರೆಂದು ಕರೆಯಲ್ಪಟ್ಟಿವೆ. ಕಾವ್ಯಾತ್ಮಕವಾದ ಗದ್ಯದಲ್ಲಿ ಅವುಗಳಿಗೆ ಲೇಖಕರು ಅರ್ಪಿಸಿದ ಶದ್ಧಾಂಜಲಿಯನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ಕಾಣಬಹುದು. ಮೂಲತಃ ಗುಜರಾತಿಯಲ್ಲಿದ್ದ ಈ ಪುಸ್ತಕವನ್ನು ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾದೆಮಿಯು ಇತರ ಭಾರತೀಯ ಭಾಷೆಗಳಲ್ಲಿ ಅನುವಾದಕ್ಕೆ ಉತ್ಕೃಷ್ಟ ಕೃತಿಯೆಂದು ಆರಿಸಿತು. ಹಿಂದೀ, ಬಂಗಾಲಿ, ತೆಲುಗು ಮತ್ತು ಮಲಯಾಳಂ ಭಾಷೆಗಳಲ್ಲಿ ಇದು ಈಗಾಗಲೇ ಅನುವಾದಿತವಾಗಿದೆ. ನಗೀನದಾಸ ಪರೇಖ ಅವರು ಈ ಗ್ರಂಥಕ್ಕೆ ಮಹತ್ತ್ವಪೂರ್ಣವಾದ ವಿವರಣಾತ್ಮಕ ಅನುಬಂಧಗಳನ್ನು ಸಿದ್ಧಪಡಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಶ್ರೀ ಸಾಲಿ ರಾಮಚಂದ್ರರಾಯರು ಇದನ್ನು ಕನ್ನಡಕ್ಕೆ ಪರಿವರ್ತಿಸಿದ್ದಾರೆ.
Read moreAbout the Book
ಶ್ರೀ ಕಾಕಾಸಾಹೇಬ ಕಾಲೇಲಕರರು ಗುಜರಾತಿ, ಮರಾಠಿ ಮತ್ತು ಹಿಂದೀ- ಹಿಂದುಸ್ತಾನಿಗಳಲ್ಲಿ ಖ್ಯಾತಿವೆತ್ತ ಲೇಖಕರು. ಅವರು ಮಹಾತ್ಮಾಗಾಂಧಿಯವರ ಸಹಚರರು ಮತ್ತು ಅತ್ಯಂತ ಪ್ರವಾಸ-ಪ್ರಿಯರು. ಅವರ ವ್ಯಕ್ತಿತ್ವವನ್ನು ಪ್ರತಿನಿಧಿಸುವ ಲಲಿತ ಪ್ರಬಂಧಗಳ ಈ ಸಂಗ್ರಹದಲ್ಲಿ ಅವರು ಭಾರತದ ಪ್ರಮುಖ ನದಿಗಳ, ಜಲಪ್ರಪಾತಗಳ ಮತ್ತು ಸಮುದ್ರತೀರಗಳ ಸುಂದರ ಶಬ್ದ-ಚಿತ್ರಗಳನ್ನು ಮೂಡಿಸಿದ್ದಾರೆ. ತಾವು ಪ್ರಕೃತಿಯಲ್ಲಿ ಕಾಣುವ ಸಂಗತಿಗಳ, ವಿಶೇಷತಃ ಜಲಾಶಯಗಳ ಸೌಂದರ್ಯವನ್ನು ಕಾಲೇಲಕರರು ಬಹು ಸೂಕ್ಷ್ಮವಾಗಿ ಚಿತ್ರಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಭೂತಕಾಲೀನ ಸಂಸ್ಮರಣಗಳಿಂದ ಬಣ್ಣಗೊಳಿಸಿ ಪೌರಾಣಿಕ ಕಥೆಗಳಿಂದ ಮೆರುಗು ಕೊಟ್ಟು ಅವನ್ನು ಸಾಹಿತ್ತಿಕ ಉದಾಹರಣೆಗಳಿಂದ ಬೆಳಗಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಮಹಾಭಾರತದಲ್ಲಿ ನದಿಗಳು ವಿಶ್ವದ ಮಾತೆಯರೆಂದು ಕರೆಯಲ್ಪಟ್ಟಿವೆ. ಕಾವ್ಯಾತ್ಮಕವಾದ ಗದ್ಯದಲ್ಲಿ ಅವುಗಳಿಗೆ ಲೇಖಕರು ಅರ್ಪಿಸಿದ ಶದ್ಧಾಂಜಲಿಯನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ಕಾಣಬಹುದು.
ಮೂಲತಃ ಗುಜರಾತಿಯಲ್ಲಿದ್ದ ಈ ಪುಸ್ತಕವನ್ನು ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾದೆಮಿಯು ಇತರ ಭಾರತೀಯ ಭಾಷೆಗಳಲ್ಲಿ ಅನುವಾದಕ್ಕೆ ಉತ್ಕೃಷ್ಟ ಕೃತಿಯೆಂದು ಆರಿಸಿತು. ಹಿಂದೀ, ಬಂಗಾಲಿ, ತೆಲುಗು ಮತ್ತು ಮಲಯಾಳಂ ಭಾಷೆಗಳಲ್ಲಿ ಇದು ಈಗಾಗಲೇ ಅನುವಾದಿತವಾಗಿದೆ. ನಗೀನದಾಸ ಪರೇಖ ಅವರು ಈ ಗ್ರಂಥಕ್ಕೆ ಮಹತ್ತ್ವಪೂರ್ಣವಾದ ವಿವರಣಾತ್ಮಕ ಅನುಬಂಧಗಳನ್ನು ಸಿದ್ಧಪಡಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಶ್ರೀ ಸಾಲಿ ರಾಮಚಂದ್ರರಾಯರು ಇದನ್ನು ಕನ್ನಡಕ್ಕೆ ಪರಿವರ್ತಿಸಿದ್ದಾರೆ.
Book Details
-
ISBN9789391494384
-
Pages488
-
Avg Reading Time16 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIN
Recommended For You
Ek Naav Ke Yatri
- Author Name:
Vishwanath Prasad Tiwari
- Book Type:

- Description:
हजारीप्रसाद द्विवेदी, अज्ञेय, अमृतलाल नागर, रामविलास शर्मा, नामवर सिंह, विद्यानिवास मिश्र, श्रीकान्त वर्मा आदि प्रसिद्ध लेखकों के बारे में लिखे गए संस्मरणों की इस पुस्तक में पूरा समकालीन साहित्यिक परिदृश्य रूपायित है। अत्यन्त सहानुभूति और तटस्थता के साथ लिखे गए ये संस्मरण निश्चय ही अपनी विश्वसनीयता और पठनीयता के लिए उल्लेखनीय होंगे। इनमें किसी मूर्तिनिर्माण या मूर्तिभंजन की नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विश्लेषण की प्रखर, ईमानदार कोशिश है जो लेखकों के मन:लोक को बड़ी गहराई से उद्घाटित करती है। प्रसिद्ध कवि, आलोचक और दस्तावेज़ पत्रिका के सम्पादक डॉ. विश्वनाथप्रसाद तिवारी की क़लम से लिखे गए ये अनूठे संस्मरण स्वयं उनके भी रचनात्मक गद्य का एक विशिष्ट उदाहरण पेश करते हैं।
पुस्तक में हजारीप्रसाद द्विवेदी, अज्ञेय, अमृतलाल नागर और रामविलास शर्मा के साक्षात्कार भी संकलित हैं। इनमें हमारे समय के अनेक महत्त्वपूर्ण साहित्यिक प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे और साथ ही अनेक विवादास्पद प्रश्नों पर उन लेखकों की अपनी बेबाक प्रतिक्रिया भी। आधुनिक साहित्य की भीतरी जानकारी की इच्छा रखनेवाला पाठक इस पुस्तक से एक बार गुज़र कर निश्चय ही अपने साहित्यानुभव को समृद्ध कर सकेगा।
Mahatirth Ke Antim Yatri (Lhasa—Kaliashnath—Mansarovar)
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

- Description:
सन् 1956 में तिब्बत का दरवाज़ा विदेशियों के लिए लगभग बन्द हो चुका था और राजनैतिक कारणों से भारत के साथ तिब्बत का सम्पर्क भी लगभग टूट चुका था। उन्हीं दिनों, बिना किसी तैयारी के, बिमल दे घर से भागे और नेपाली तीर्थयात्रियों के एक दल में सम्मिलित हो ल्हासा तक जा पहुँचे। उस समय उनकी उम्र मात्र पन्द्रह वर्ष थी। यात्रियों में वह नवीन मौनी बाबा। ल्हासा में उन्होंने तीर्थयात्रियों का दल छोड़ा, और वहाँ से अकेले ही कैलास खंड की ओर कूच कर गए। 'महातीर्थ के अन्तिम यात्री' में उसी रोमांचक यात्रा-अनुभाव का वर्णन है। बिमल दे ने स्वयं इसे ‘एक भिखमंगे की डायरी’ कहा है। किन्तु इस पुस्तक में मिलेगा तिब्बत का दैनंदिन जीवन तथा महातीर्थ का पूर्ण विवरण।
Ek Bharatiya Ki Japan Yatra
- Author Name:
Rishi Raj
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Vilayat ke Ajoobe
- Author Name:
Mirza Sheikh Etesamuddin
- Book Type:

- Description:
18वीं शताब्दी मुग़ल साम्राज्य के पतन के साथ-साथ यूरोपीय शक्तियों विशेष रूप से अंग्रेज़ों के उत्थान की शताब्दी है। पतन और उत्थान की यह सदी हिन्दुस्तान के सामंती ढाँचे के टूटने और उपनिवेश विस्तार की भी सदी मानी जाती है। उपनिवेशवादी षड्यंत्र और विस्तारवादी नीति से पहली बार इस महाद्वीप का सामना हो रहा था। हिन्दुस्तान के इतिहास में पहली बार सामाजिक ढाँचा छिन्न-भिन्न होने की प्रक्रिया आरम्भ हो गई थी। यह वही समय था जब मिर्ज़ा शेख़ एतेसामुद्दीन ने अपना सफ़रनामा ‘शिगुर्फ़नामा-ए-विलायत’ फारसी में लिखा था। यह यात्रा संस्मरण संभवतः किसी पहले हिन्दुस्तानी द्वारा लिखा गया यूरोप का पहला यात्रा संस्मरण है। इस सफ़रनामे का अध्ययन कई दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है।
सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि मिर्ज़ा शेख़ एतेसामुद्दीन ने यूरोप की यात्रा 1766 यानी राजा राममोहन राय से लगभग 65 साल पहले की थी। जबकि अब तक यही माना जाता था कि राजा राममोहन राय पहले पढ़े-लिखे व्यक्ति थे जिन्होंने यूरोप की यात्रा की थी।
मिर्ज़ा प्रसिद्ध शायर मीर तकी मीर के समकक्ष हैं। 18वीं शताब्दी में जिस प्रकार मीर ने दिल्ली के उजड़ने का दर्द बयान किया है उसी प्रकार के अक्स इस सफ़रनामे में भी देखे जा सकते हैं। अपने धर्म और संस्कृति के प्रति दृढ़ विश्वास होने के बावजूद मिर्ज़ा साहब का अंग्रेज़ी संस्कृति से प्रभावित होने वाला प्रसंग हैरत पैदा करता है। इसके अतिरिक्त धर्म को लेकर वाद-विवाद प्रसंग भी बहुत रोचक और मज़ेदार है । दोनों संस्कृतियों में श्रेष्ठता का भाव भी देखने को मिलता है। इस यात्रा संस्मरण को पढ़ते हुए आप 18 वीं शताब्दी की समुद्री यात्रा का हैरतअंगेज़ और अद्भुत अनुभव कर सकते हैं। इस सफ़र से गुज़रने का अनुभव बहुत आह्लादकारी और रोमांचक है।
Sarthwah Himalaya
- Author Name:
Ajoy Sodani
- Book Type:

- Description:
अजय सोडानी जानते हैं कि देखे हुए को दिखाया कैसे जाए। जैसे कि सफ़र के दौरान अगर एक कैमरा उनके हाथ में है तो एक भीतर भी है जो बाहर के चित्रों को शब्दों की शक्ल में कहीं अंकित करता चलता है। यही कारण है कि उनके यात्रा-वृत्तान्त, ख़ासकर जब वे हिमालय के बारे में लिखते हैं, सिर्फ़ हमारा ज्ञान नहीं बढ़ाते, अनुभूति की सतह पर हमें एक गहरा अनुभव देते हैं। एक समग्र यात्रा-अनुभव जिसमें भूगोल, इतिहास, परम्परा, लोक, समकालीन समाज, साहित्य, आत्मचिंतन, प्रकृति-चिन्ता, भविष्य-दृष्टि तथा रोमांच, सब एकसाथ शामिल होता है।
हिमालय को वे सागर, नदी, देवता, पशु आदि चराचर की तरह अपना और हम सबका सहोदर कहते हैं। उसकी विराटता के सम्मुख हमारे अस्तित्व की गौणता का एक विचित्र, सजीव लेकिन लोमहर्षक समीकरण बनता है जब उनके जैसा कोई हिमालय प्रेमी हमें गिरिराज के रहस्यों के सफ़र पर लेकर निकलता है।
‘दर्रा दर्रा हिमालय’ और ‘दरकते हिमालय पर दर-ब-दर’ के बाद हिमालय पर यह उनकी तीसरी किताब है। हिमालय जो बकौल उनके, पहली ही निगाह में देखने वाले के रक्त में घुलने लगता है, उसके अस्तित्व-बोध का अंश हो जाता है। उनके इन सफ़रनामों को पढ़कर भी हमारे साथ कुछ ऐसा ही घटित होता है।
Meri Roos Yatra
- Author Name:
Anna Bhau Sathe
- Book Type:

- Description:
अण्णा भाऊ साठे एक सक्रिय कॉमरेड थे, इसलिए उनकी दिली इच्छा थी कि कुछ भी करके जीवन में एक बार सोवियत संघराज्य देखा जाए। उनके रूस पहुँचने से पहले ही उनका साहित्य रूस की जनता तक पहुँच चुका था। एक प्रखर कॉमरेड के रूप में उनके विचारों और साहित्य का रूसी जनता, चिन्तकों एवं राजनेताओं से गहरा परिचय हो चुका था। अण्णा भाऊ ने बड़ी ईमानदारी से स्वीकार किया है कि उन्हें रूस-यात्रा का अवसर उनके साहित्य सृजन के कारण प्राप्त हुआ।
अण्णा भाऊ ने मनुष्य को मनुष्य के रूप में देखा, समझा और प्रस्तुत किया है। यह दृष्टि उन्हें मार्क्सवादी दर्शन से प्राप्त हुई है।
मेरी रूस यात्रा शीर्षक यात्रा वर्णन में उन्होंने अपने साहचर्य में आए पात्रों का बहुत ही सुन्दर एवं संवेदनापूर्ण चित्रण किया है। इस चित्रण में उनके भीतर बसा हुआ साहित्य-सर्जक बहुत ही उच्चकोटि का दिखता है। अण्णा भाऊ को महाराष्ट्र की मिट्टी के प्रति बहुत लगाव था, आत्मीयता का भाव था। इसका भी परिचय इस यात्रा-वर्णन में प्राप्त होता है। उन्होंने मॉस्को में पहला भाषण मराठी में दिया। अण्णा भाऊ की भाषा व्यंग्यपूर्ण है। सहज, सरल भाषा में वे गहरा व्यंग्य-प्रहार करने में कुशल हैं।
यात्रा वर्णन के अन्त में अण्णा भाऊ ने पूर्वदीप्ति शैली का सुन्दर प्रयोग किया है। ताशकन्द से दिल्ली विमान यात्रा के दौरान वे पूर्वदीप्ति शैली में भूत और वर्तमान को अभिव्यक्ति देते हैं, जो इस यात्रा-वर्णन को अत्यन्त प्रभावी एवं रसमय बनाता है, चरमोत्कर्ष पर ले जाता है।
अण्णा भाऊ की कलम में स्वानुभूति की धार है, भाषा में लोक जीवन की महक है, वे शब्दों के जादूगर हैं, सहज-सरल, प्रवाही भाषा द्वारा चरित्र-चित्रण को मनोवैज्ञानिक आधार पर प्रस्तुत करने में माहिर और सजग लेखक हैं। उनमें निरीक्षण की अद्भुत क्षमता है, जो उनके जीवनानुभवों से सिद्ध हुई है। कहीं पर भी वर्णन में अतिशयोक्ति एवं अस्वाभाविकता नहीं है। मनुष्य को सार्वकालिक दृष्टि से देखने का उनका नजरिया विशेष है।
Da Nang : The City Of Wonders
- Author Name:
Geetesh Sharma
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Swarg Yatra : Ek Lok Se Doosare Lok
- Author Name:
Manoj Singh
- Book Type:

- Description:
प्रकृति में पर्वत मुझे विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। और सौभाग्य से हिमालय हमारे पास है! फिर और क्या चाहिए। यह कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक न जाने किस-किस नाम और रूप में फैला हुआ है। मध्य में स्थित हिमाचल प्रदेश में कुछ एक साल रहने का अवसर मिला था तो उस दौरान किन्नौर से लेकर लाहौल स्पीती, रोहतांग पास की यात्रा कर चुका हूँ। यहाँ लद्दाख़ के बारे में बहुत कुछ सुनने को मिला था। कुछ ऐसे तथ्यों की जानकारी हुई कि उत्सुकतावश वहाँ जाने की इच्छा हुई थी।
लद्दाख़ वो क्षेत्र है जो आज भी दुर्गम है। आम भारतीय पर्यटक की कल्पना और चाहत से बाहर। मगर इस क्षेत्र में सदियों से विदेशी आ रहे हैं। ख़ासकर यह जानकर अचम्भा होता है कि यूरोप के कई विद्वान यहाँ तब से आ रहे हैं, जब यहाँ कोई भी साधन नहीं था। हज़ारों साल से यह पश्चिम एशिया से लेकर मध्य एशिया और आगे यारकंड व तिब्बत के बीच व्यापार का एक प्रमुख मार्ग रहा है। बौद्ध भिक्षु ईसा पूर्व इस क्षेत्र में आने लगे थे। और यही नहीं, इस क्षेत्र को उन्होंने बुद्धमय कर दिया था। सोचिए, एक ऐसा प्रदेश जो आज भी दूर दिखाई देता है वहाँ शताब्दियों से बौद्धधर्म विराजमान है। इन सब धार्मिक व बौद्धिकजनों के साथ-साथ व्यापारियों और सेनाओं का काफ़िला, कश्मीर से होता हुआ ही आता-जाता रहा। कश्मीर और लद्दाख़, हिमालय की दो विशिष्ट घाटियाँ हैं। दो पारम्परिक व समृद्ध सभ्यताएँ। प्राचीन संस्कृति और प्राकृतिक सौन्दर्य के दो अति महत्त्वपूर्ण केन्द्र, इतने नज़दीक!!! इसे प्रकृति और मानवीय इतिहास का संयोग ही कहेंगे।
संक्षेप में कहूँ तो यह यात्रा प्रकृति के बीच क़दमताल करने जैसी थी। मुश्किलों से सामना हुआ, तो क्या!! प्रकृति भी तो अपने नग्न रूप में उपस्थित हुई। मूल रंग में। पूरे वैभव के साथ। विराट। मुश्किल इस बात की हुई है कि सौन्दर्य को देखते ही मन-मस्तिष्क स्थिर हो गया। उठ रहे विचारों का अहसास तो हुआ मगर व्यक्त कर पाना मुमकिन न हो सका। विस्तार इतना कि वर्णन सम्भव नहीं। असल में आँखें ही देख सकती हैं, कैमरे व्यर्थ हो जाते हैं।
Deh Hi Desh : Croatia Prawas Diary
- Author Name:
Garima Shrivastava
- Book Type:

- Description:
इस डायरी में पाठक ज्यों-ज्यों आगे बढ़ता है, लगता है कोई तेज़ नश्तर उसके सीने पर रख दिया गया है और पृष्ठ-दर-पृष्ठ उसे भीतर उतारा जा रहा है। हिन्दी में ऐसे लेखन और ऐसी यात्राओं का जितना स्वागत किया जाए, कम है। — नित्यानंद तिवारी (आलोचक) यह सिर्फ़ डायरी नहीं यात्रा भी है, बाहर से भीतर और देह से देश की, जो बताती है कि देह पर ही सारी लड़ाइयाँ लड़ी जाती हैं और सरहदें तय होती हैं। — अभय कुमार दुबे(राजनीतिक विश्लेषक) ऐसे लोग जो भीड़ की हिंसा के समर्थन में होते हैं, उन्हें यह डायरीनुमा किताब दी जाए तो वे क्या करेंगे, अपनी चुप्पी पर झुंझलाते हुए इसे जला देंगे? मेरे ख़याल से उन्हें जलाने के लिए ही सही यह डायरी पढ़ — रवीश कुमार (पत्रकार)
Prithvi Gandhmayi Tum
- Author Name:
Anurag Chaturvedi
- Book Type:

- Description:
’पृथ्वी गंधमयी तुम’ एक अलग तरह का यात्रा-वृत्त है जिसमें लेखक ने सिर्फ़ यायावर की आँख से नहीं, समाजशास्त्री और वैश्विक अर्थतंत्र के जानकार की तरह भी चीजों को देखा है। इसमें शामिल पन्द्रह यात्राएँ उस समय की हैं जब दुनिया का रूप-रंग और ढाँचा बदलाव से गुज़र रहा था। साम्यवाद और पूँजीवाद की बहस से निकल कर दुनिया एक नए ढंग की अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ रही थी। अमेरिका और चीन, दो बड़ी ताक़तों के रूप में चर्चित हो रहे थे। उदारवाद, निजीकरण और वैश्वीकरण की प्रक्रिया को लेखक ने कई देशों में जाकर समझा और इस यात्रा-वृत्तान्त में दर्ज किया है। चीन और अमेरिका के साथ जापान, हांगकांग, कैरेबियन देशों, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के भारतीय समाज की अन्दरूनी जानकारी भी इस किताब में है और यूरोप के वर्तमान के साथ-साथ उसके अतीत से साक्षात्कार भी। निस्सन्देह एक बेहद पठनीय और सग्रहणीय किताब!
Ek Din Nepal Mein
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description:
नेपाल और भारत के संबंधों का इतिहास अत्यंत पुराना है। भारत और नेपाल के बीच हर क्षेत्र में परस्पर सहयोग और संबंध इतने बहुआयामी और व्यापक हैं कि उन्हें किसी सीमा में नहीं बाँधा जा सकता है। नेपाल हमारा निकटतम पड़ोसी है। दुनिया के नक्शे में भारत और नेपाल भले ही अलग-अलग देश हों, किंतु भौगोलिक स्वरूप की समानता के साथ-साथ रहन-सहन, खान-पान, रीति-रिवाज, तीज त्योहार तथा दर्शन-चिंतन से लेकर मठ-मंदिर और तीर्थ-पर्व सब एक जैसे ही हैं। एक ओर धर्म और संप्रदाय को लेकर दोनों राष्ट्रों की उदारता एक जैसी है, वहीं दोनों ही देशों के सर्वमान्य आराध्य देव शिव हैं। पूरी दुनिया में भारत व नेपाल ही ऐसे देश हैं, जिनके बीच आवाजाही में कोई भी रोक-टोक नहीं है। दोनों देशों के मध्य अनादिकाल से रोटी-बेटी का रिश्ता निर्बाध रूप से जारी है। दूसरे शब्दों में कहें तो भारत-नेपाल दो तन, एक मन हैं।
Sudhiyan Us Chandan Ke Van Ki
- Author Name:
Vishnukant Shastri
- Book Type:

- Description:
मैं इस दृष्टि से भाग्यवान् हूँ कि मुझे विविध क्षेत्रों के सत्पुरुषों का स्नेह-सौहार्द मिलता रहा है। जिन विशिष्ट व्यक्तियों के संपर्क से या स्थानों के भ्रमण से जीवन समृद्ध हुआ है, उनकी याद बार-बार आती ही है। हर बार लगता है कि उस याद ने अपनी सुगन्ध से जीवन को पुन: सुरभित कर दिया। वस्तुत: घटनाएँ जब घटती हैं तब उनका प्रभाव किन-किन स्तरों पर कितनी गहराई से पड़ रहा है, इसका सम्यक बोध नहीं हो पाता। उन प्रीतिकर स्मृतियों का रोमन्थन ही स्पष्ट करता है कि उन व्यक्तियों या घटनाओं ने जीवन को कितनी प्रेरणा और स्पूâर्ति प्रदान की थी। उनके प्रति कृतज्ञता-बोध ही मुझे उनकी स्मृतियों को लिपिबद्ध करने को उत्साहित करता रहा है। इस तरह ये संस्मरण लिखे जाते रहे।
Shahargoi
- Author Name:
Geetashree
- Book Type:

- Description:
Book
Europ Mein Antaryatrayen
- Author Name:
Karan Singh Chauhan
- Book Type:

- Description:
हम जो हैं वह हमारे ध्यान में नहीं रहता। हमें जैसा होना चाहिए इसी पर सब टिक गया है। जीवन जो है वह नहीं, उसे जैसा होना चाहिए। यानी 'कैसा होना चाहिए' में हमारी एकमात्र दिलचस्पी रह गई है। इसलिए सब कुछ वांछित और हवाई हो गया है। वास्तव कुछ नहीं रह गया। वास्तविकता से अधिक स्वप्न, भविष्य, जीवनेतर महत्त्वपूर्ण हो गया है। वह एक तरफ शरीर से अधिक आत्मा के सरोकारों, इहलोक से अधिक परलोक की चिन्ताओं के फलते-फूलते आध्यात्मिक भ्रष्टाचार में व्यक्त हो रहा है। दूसरी तरफ किसी भावी आदर्श समाज की स्थापना के वादों, स्वप्न के भ्रमजाल के सिद्धान्तों में। ये सब शक्ति के खेल में शामिल गतिविधियाँ हैं जो अब की वास्तविकता को झुठलाती हैं। यात्राएँ इस वास्तविकता के बीच ही होती हैं और वह जैसी भी हैं, उसका उसी रूप में साक्षात्कार करती हैं।
यात्राएँ की जा सकती हैं, उन्हें लिखना एक इतर काम है। जिस दिन मनुष्य जीवन से एकमेक हो जाएगा शायद उस दिन कुछ कहने की आवश्यकता महसूस न करे। लिखने के लिए एक तरह की 'इन्नोसेंस' चाहिए, दुनियादारी के नाम पर पसरे विचारों में आस्था चाहिए, कुछ होने की भ्रान्ति का सहारा चाहिए। लिखा तभी जा सकता है।
THE WORLD IS THE NEXT VILLAGE
- Author Name:
Solon Karthak +1
- Book Type:

- Description:
it is a collection of 25 travel tales that talk about his trips around the world.
Uttar Himalay-Charit
- Author Name:
Prabodh Kumar Sanyal
- Book Type:

- Description:
सृजनशील रचनाकार उच्चकोटि का यायावर या घुमक्कड़ भी हो, ऐसा संयोग प्राय: दुर्लभ होता है, और जब होता है तो उसकी प्रतिभा अविस्मरणीय कृतियों को जन्म देती है। प्रस्तुत पुस्तक ऐसी ही एक असामान्य और अविस्मरणीय कृति है, जिसमें बांग्ला के सुख्यात यायावर-कथाकार प्रबोध कुमार सान्याल ने अपनी उत्तर हिमालय-यात्रा का रोचक, रोमांचक और कलात्मक विवरण प्रस्तुत किया है।
इस यात्रा-कथा में उत्तरी हिमालय-मेरुदंड के उन दुर्गम अंचलों की दृश्य-छवियों को शब्दों में उतारा गया है जिनसे हमारा परिचय आज भी नहीं के बराबर है और जहाँ की धूल का स्पर्श बाहरी लोगों ने शताब्दियों के दौरान कभी-कभी ही किया है। महासिन्धु, वितस्ता, विपाशा, शतद्रु, इरावती, कृष्णगंगा, चन्द्रभागा आदि नदियों के उस अनोखे उद्गम प्रदेश में पहाड़ी दर्रों के बीच दौड़ती-उछलती धाराओं के किनारे-किनारे चलता हुआ लेखक जैसे पाठक को भी अपने साथ ले चलता है और दिखाता है बिलकुल निकट से हिमशिखरों की अमल-धवल आकृतियाँ तथा सुनाता है एकान्त वन-प्रान्तर और नीरव मरुघाटियों का मुखर-मौन संगीत। इसी क्रम में वह जब-तब अतीत की गुफाओं में भी ले चलता है या फिर भविष्य की टोह लेने लगता है। समर्थ लेखक इस प्रकार अपनी यात्रा में पाठक को सहभागी ही नहीं, सहभोक्ता बना देता है जो रचनात्मक उपलब्धि का सबसे बड़ा प्रमाण है।
Mahatirth Ke Kailasbaba
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

- Description:
तिब्बत की रहस्यमयी भैरवी माताजी के निर्देश पर कैलासबाबा की खोज में मैं गया था चौरासी महासिद्ध श्मशान और फिर पार किया पाप-परीक्षा-पत्थर। पुण्यभूमि शिवस्थल, कैलासनाथ के चरण-कमल में बैठकर चित्ताकाश में पाया था नर्मदा नाम, किन्तु हाय, गँदले मन की स्थिरता के अभाव में उस महासत्य को न जान पाया। इशारा पाने के बावजूद आध्यात्मिक ज्ञान के अभाव में मन में आए उस आकस्मिक विचार को पकड़कर नहीं रख पाया। मेरी राय में ज्ञानगंज के एक भिखारी लामा ही ज्ञानीगुरु थे, जिन्होंने मुझे देखते ही मन्तव्य दिया था कि मेरा मन ही है 'गँदला पानी'। शिवस्थल के स्थान माहात्म्य के प्रभाव में चित्ताकाश के नर्मदा नाम को मैं प्रश्रय न दे पाया। दरअसल सत्य को पकड़कर रखने की क्षमता मुझमें नहीं थी। इसके बाद देखते-देखते गुज़र गए दो साल। मैं भले ही भूल जाऊँ पर काल की पोथी में अंकित था मेरा प्राप्य। सन् 2009 में मिल गया 'दर्शन'—मिट गईं सारी इच्छाएँ। महातीर्थ के वही कैलासबाबा वर्तमान में परमपूज्य कायकल्पी बर्फ़ानी दादाजी हैं। उन्हीं की कृपा से प्रकाशित हुई है यह पुस्तक 'महातीर्थ के कैलासबाबा'।
—भूमिका से
Main Ghumakkar Vanon Ka
- Author Name:
Sherjung
- Book Type:

- Description:
शिकार की कहानियाँ वनप्राणियों के जीवन को ही नहीं, बल्कि वनों के परिवेश और उनकी भिन्न-भिन्न स्थितियों को भी प्रदर्शित करती हैं। मनुष्य और जानवर, समय और स्थान तथा अन्य सब घटनाएँ जो शिकारी को वन-जीवन के निकट ले जाती हैं और किसी भी शिकार कथा का अभिन्न अंग हैं। जानवर का पीछा करने का अपना ही आनन्द है जिसके विचार मात्र से शिकारी की आँखों के सामने जंगल के अत्यन्त सुन्दर दृश्य नाचने लगते हैं, जैसे घने वृक्षों के नीचे धरती पर पड़ी उनकी गहरी और ठंडी छाया, प्रभात के शान्तिमय वातावरण में तूफ़ानी सागर की मतवाली लहरों की भाँति चारों ओर गूँजती शेरों की ऊँची एवं गहरी गर्जनाएँ हाथियों की तुरही-की-सी आवाज़ें, शोरगुल मचाते हुए जंगली साँड, मस्त चाल से चलता हुआ भालू, चोरों की तरह बिना ध्वनि किए छिप-छिपकर चलता हुआ बघेरा, द्रुत गति से भागते हुए साम्बर, शान से गर्दन उठाकर चलते हुए चीतल, एक-दूसरे के पीछे से अस्पष्ट दिखाई देती हुई पहाड़ियों के ऊपर इधर-उधर बिखरे हुए घास के मैदान और उन पहाड़ियों के पीछे बर्फ़ से ढके पहाड़, जिनमें यह सब कुछ मानो खो-सा जाता है। शिकार की इन कहानियों में लेखक ने अपने अनुभवों का यथासम्भव सही-सही वर्णन करने का प्रयास किया है। साथ ही अपने साथियों और जंगल में घटी घटनाओं का उल्लेख करते समय, उन्होंने उनसे प्राप्त सुख व दु:ख, प्यार और सहानुभूति के अनुभवों को भी अपने विवरणों का हिस्सा बनाया है।
Gufetla dev
- Author Name:
Sagar Solanke
- Book Type:

- Description:
Marathi Travelogue
Darakte Himalaya Par Dar-Ba-Dar
- Author Name:
Ajoy Sodani
- Book Type:

- Description:
अजय सोडानी की किताब 'दरकते हिमालय पर दर-ब-दर’ इस अर्थ में अनूठी है कि यह दुर्गम हिमालय का सिर्फ़ एक यात्रा-वृत्तान्त भर नहीं है, बल्कि यह जीवन-मृत्यु के बड़े सवालों से जूझते हुए वाचिक और पौराणिक इतिहास की भी एक यात्रा है। इस पुस्तक को पढ़ते हुए बार-बार लेखक और उनकी सहधर्मिणी अपर्णा के जीवट और साहस पर आश्चर्य होता है। अव्वल तो मानसून के मौसम में कोई सामान्य पर्यटक इस दुर्गम इलाक़े की यात्रा करता नहीं, करता भी है तो उसके बचने की सम्भावना कम ही होती है। ऐसे मौसम में ख़ुद पहाड़ी लोग भी इन स्थानों को प्रायः छोड़ देते हैं। लेकिन किसी ठेठ यायावर की वह यात्रा भी क्या जिसमें जोखिम न हो। इस लिहाज़ से देखें तो यह यात्रा-वृत्तान्त दाँतों तले उँगली दबाने पर मजबूर करनेवाला है। यात्रा में संकट कम नहीं है। भूकम्प आता है, ग्लेशियर दरक उठते हैं। कई बार तो स्थानीय सहयोगी भी हताश हो जाते हैं और इसके लिए लेखक की नास्तिकता को दोष देते हैं। फिर भी यह यात्रा न केवल स्थानीय जन-जीवन के कई दुर्लभ चित्र सामने लाती है, बल्कि हज़ारों फीट ऊँचाई पर खिलनेवाले ब्रह्मकमल, नीलकमल और फेनकमल जैसे दुर्लभ फूलों के भी साक्षात् दर्शन करा देती है। लेखक बार-बार पौराणिक इतिहास में जाता है और पांडवों के स्वर्गारोहण के मार्ग के चिह्न खोजता फिरता है। श्रुति-इतिहास से मेल बिठाते हुए पांडवों का ही नहीं, कौरवों का भी इतिहास जोड़ता चलता है। इस बारे में लेखक का अपना अलग ही दृष्टिकोण है। वह ‘महाभारत’ को इतिहास नहीं मानता, लेकिन यह भी नहीं मान पाता कि उसमें सब कुछ कपोल कल्पना है। इस अर्थ में देखें तो यह किताब इतिहास का भी यात्रा-वृत्तान्त है। आश्चर्य नहीं कि रवानी और मौज सिर्फ़ लेखक के योजना-निर्माण में ही नहीं, बल्कि इस वृत्तान्त की भाषा में भी है जिसे पढ़ने का सुख किसी औपन्यासिक रोमांच से भर देता है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book