Across Borders Within Hearts
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Author:
Benoy Ranjan SamantaPublisher:
The Antonym CollectionsLanguage:
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Travelogues₹
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This book is a reflective journey through years of meeting people from different walks of life, encountering diverse cultures, and traveling across places that quietly and profoundly shape the author’s worldview. Each experience—whether a fleeting conversation, a shared meal, or a moment of solitude in an unfamiliar land—adds a new layer of understanding about identity, belonging, and the common threads of humanity. With warmth and curiosity, the narrative weaves personal growth with vivid cultural impressions, showing how travel is less about distance and more about transformation, leaving the reader with a gentle invitation to see the world—and themselves—with fresh eyes.
Read moreAbout the Book
This book is a reflective journey through years of meeting people from different walks of life, encountering diverse cultures, and traveling across places that quietly and profoundly shape the author’s worldview. Each experience—whether a fleeting conversation, a shared meal, or a moment of solitude in an unfamiliar land—adds a new layer of understanding about identity, belonging, and the common threads of humanity. With warmth and curiosity, the narrative weaves personal growth with vivid cultural impressions, showing how travel is less about distance and more about transformation, leaving the reader with a gentle invitation to see the world—and themselves—with fresh eyes.
Book Details
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ISBN9789349203471
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Pages266
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Avg Reading Time9 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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यह भारत की एक 'डीप जर्नी' है। इस जर्नी में वह भारत दिखायी पड़ता है, जिसे हम देखकर भी अनदेखा करते रहते हैं। इसे सामान्य अनुकूलित नज़र से देखा ही नहीं सकता, लेकिन जब एक आम औरत देखती है जो इसकी गोपन जगहें और अँधेरी गलियाँ अपने तमाम राज खोलने लगती हैं। इसमें हास्य, व्यंग्य, कहानी और किरदार सब कुछ है, लेकिन इसकी ताकत ड्रोज़मर्रा की ठेठ हिन्दुस्तानी सचाइयों को पकड़ने में है। इसमें प्रेम है, लेकिन नया प्रेम, जो नौकरी, बॉस और करियर की चिंताओं के बीच पलता है। इसमें राजनीति, पूँजी और मिडिया का गंदा गठजोड़ है, लेकिन इसे इतनी खूबसूरती से कहा गया है कि पाठक की जिज्ञासा लगातार बनी रहती है. यहाँ भारत की विनोद प्रियता अपने चरम पर है... व्यंग्य, कौतुक और रोमांच से भरपूर एक मजेदार कहानी। इसे पढ़ना यादगार अनुभव होगा। निश्चय ही आप कभी मुस्कराएँगे तो कभी ठाकर हँस पड़ेंगे. रवि सुब्रमण्यम, बेस्टसेलर लेखक हिंदुस्तानी रोज़मर्रा जीवन पर हास्य-व्यंग्यपूर्ण अनोखी नज़र - द हिन्दू यह किताब पाठकों के लिए अदेखे भारत को देखने का अवसर है। डेक्कन क्रॉनिकल
Parton Ke Beech
- Author Name:
Govind Mishra
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Awating description for this book
Mahatirth Ke Antim Yatri (Lhasa—Kaliashnath—Mansarovar)
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Bimal Mitra
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सन् 1956 में तिब्बत का दरवाज़ा विदेशियों के लिए लगभग बन्द हो चुका था और राजनैतिक कारणों से भारत के साथ तिब्बत का सम्पर्क भी लगभग टूट चुका था। उन्हीं दिनों, बिना किसी तैयारी के, बिमल दे घर से भागे और नेपाली तीर्थयात्रियों के एक दल में सम्मिलित हो ल्हासा तक जा पहुँचे। उस समय उनकी उम्र मात्र पन्द्रह वर्ष थी। यात्रियों में वह नवीन मौनी बाबा। ल्हासा में उन्होंने तीर्थयात्रियों का दल छोड़ा, और वहाँ से अकेले ही कैलास खंड की ओर कूच कर गए। 'महातीर्थ के अन्तिम यात्री' में उसी रोमांचक यात्रा-अनुभाव का वर्णन है। बिमल दे ने स्वयं इसे ‘एक भिखमंगे की डायरी’ कहा है। किन्तु इस पुस्तक में मिलेगा तिब्बत का दैनंदिन जीवन तथा महातीर्थ का पूर्ण विवरण।
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