Maaran Mantra
About the book
समय के चालाक और कुटिल हेर-फेर के बाद बनारस के घोर-घनघोर जीवन को एक ऐसे किस्सागो की जरूरत थी, जो वक्त के साथ उतनी ही बेहयाई और बेरहमी से पेश आने की कुव्वत रखता हो। विमल चन्द्र पाण्डेय इस जरूरत को पूरा करते हैं। उनकी कहानी ‘जिन्दादिल’ का सिर्फ एक वाक्य ही काफी है—‘उनके घरों में पैसे की कमी थी, लेकिन उनके भीतर जीवन की कमी नहीं थी।’ इस छोटी-सी बनारसी अन्दाज की कहानी में ऊँचे तबके के ब्रांडेड जूतों के साथ निचले तबके के डुप्लीकेट जूतों की सीधी टक्कर है। विमल की कहानियों के पाँव अपने ठेठ लोकेल पर टिके हैं, लेकिन आँखें चारों तरफ देखती हैं। इन कहानियों में गजब का आमादापन है, बेधड़क लड़कपन है लेकिन इनके पात्र लम्पट नहीं हैं। अपनी सारी कमजोरियों और बदमाशियों के बावजूद उनके पास एक तेज और सनसनाती वर्ग चेतना है, धधकती हुई भावनाएँ हैं और सुलगती हुई गहराइयाँ भी जो ‘मारण मंत्र’ जैसी कहानी को सम्भव बनाती हैं। उसकी मार्मिकता जितनी विध्वंसक है उतनी ही आत्मघाती भी। प्रेम, रहस्य, वीभत्स तांत्रिक साधना और कामुकता के इस घातक मिश्रण को जाति और वर्ग भेद के कॉम्पलेक्स और ज्यादा जहरीला बना देते हैं। इन कहानियों में फटीचरों, मुफलिसों और गाँजा-चरस या शराब पीने वाले नशेड़ियों का हुजूम जिस धरातल पर खड़ा है, उस धरातल के तापमान को पहचानने की जरूरत है। ये बिखरे और बिफरे हुए लोग जिस स्थायित्व और सम्मान के हकदार हैं वह उन्हें नहीं मिला तो हमारी पूरी सामाजिक संरचनाएँ तार-तार हो सकती हैं। —मनोज रूपड़ा
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About the Book
समय के चालाक और कुटिल हेर-फेर के बाद बनारस के घोर-घनघोर जीवन को एक ऐसे किस्सागो की जरूरत थी, जो वक्त के साथ उतनी ही बेहयाई और बेरहमी से पेश आने की कुव्वत रखता हो। विमल चन्द्र पाण्डेय इस जरूरत को पूरा करते हैं। उनकी कहानी ‘जिन्दादिल’ का सिर्फ एक वाक्य ही काफी है—‘उनके घरों में पैसे की कमी थी, लेकिन उनके भीतर जीवन की कमी नहीं थी।’ इस छोटी-सी बनारसी अन्दाज की कहानी में ऊँचे तबके के ब्रांडेड जूतों के साथ निचले तबके के डुप्लीकेट जूतों की सीधी टक्कर है। विमल की कहानियों के पाँव अपने ठेठ लोकेल पर टिके हैं, लेकिन आँखें चारों तरफ देखती हैं। इन कहानियों में गजब का आमादापन है, बेधड़क लड़कपन है लेकिन इनके पात्र लम्पट नहीं हैं। अपनी सारी कमजोरियों और बदमाशियों के बावजूद उनके पास एक तेज और सनसनाती वर्ग चेतना है, धधकती हुई भावनाएँ हैं और सुलगती हुई गहराइयाँ भी जो ‘मारण मंत्र’ जैसी कहानी को सम्भव बनाती हैं। उसकी मार्मिकता जितनी विध्वंसक है उतनी ही आत्मघाती भी। प्रेम, रहस्य, वीभत्स तांत्रिक साधना और कामुकता के इस घातक मिश्रण को जाति और वर्ग भेद के कॉम्पलेक्स और ज्यादा जहरीला बना देते हैं। इन कहानियों में फटीचरों, मुफलिसों और गाँजा-चरस या शराब पीने वाले नशेड़ियों का हुजूम जिस धरातल पर खड़ा है, उस धरातल के तापमान को पहचानने की जरूरत है। ये बिखरे और बिफरे हुए लोग जिस स्थायित्व और सम्मान के हकदार हैं वह उन्हें नहीं मिला तो हमारी पूरी सामाजिक संरचनाएँ तार-तार हो सकती हैं। —मनोज रूपड़ा
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2023
- Weight
- 150 grams
- ISBN-13
- 9789393603968
- Pages
- 144
- Reading time
- ~5 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 13 × 20 cm
- Language
- Hindi
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