Koyale Ki Lakeeren
Author:
Sushma RajneeshPublisher:
FlyDreams PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 119.2
₹
149
Available
"कोयले की लकीरें" सुषमा रजनीश द्वारा रचित ऐसी ही संवेदनशील कहानियों का संग्रह है, जो जीवन की साधारण प्रतीत होने वाली घटनाओं में छिपी असाधारण सच्चाइयों को उजागर करता है। इन कहानियों में रिश्तों की नाज़ुक डोर है, स्त्री-अनुभवों की गहराई है और समाज के भीतर पलते मौन संघर्षों की सजीव अभिव्यक्ति भी।
लेखिका की दृष्टि करुण है, पर दुर्बल नहीं; भावनात्मक है, पर यथार्थ से विमुख नहीं। उनकी भाषा सहज होते हुए भी गहरी चोट करती है और पाठक से सीधे संवाद स्थापित करती है- धीमे स्वर में, पर दृढ़ प्रभाव के साथ।
यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो साहित्य में चमक-दमक नहीं, बल्कि सच की तलाश करते हैं; जो कहानियों में मनोरंजन के साथ आत्मचिंतन की संभावना खोजते हैं। यह एक ऐसा संकलन है, जो पढ़े जाने के बाद भी पाठक के भीतर लंबे समय तक चलता रहता है।
ISBN: 9789347999000
Pages: 70
Avg Reading Time: 2 hrs
Age: 18+
Country of Origin: IN
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पाँचवें दशक में हिन्दी के जिन कथाकारों ने पाठकों और समीक्षकों का ध्यान सबसे ज़्यादा आकर्षित किया उनमें उषा प्रियम्वदा का नाम अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। पिछले कई दशकों से ये निरन्तर सृजनरत हैं और इस अवधि में इन्होंने जो कुछ लिखा है वह परिमाण में कम होते हुए भी विशिष्ट है, जिसका प्रमाण है ‘कितना बड़ा झूठ’ की ये कहानियाँ।
प्रस्तुत संग्रह की अधिकांश कहानियाँ अमेरिकी अथवा यूरोपीय परिवेश में लिखी गई हैं। और जिन कहानियों का परिवेश भारतीय है उनमें भी प्रमुख पात्र, जो प्रायः नारी है, का सम्बन्ध किसी-न-किसी रूप में यूरोप अथवा अमेरिका से रहता है। इस एक तथ्य के कारण ही इन कहानियों को, बहुचर्चित मुहावरे की भाषा में, भोगे हुए यथार्थ की संज्ञा भी दी जा सकती है और इसी तथ्य के कारण इन कहानियों में आधुनिकता का स्वर भी अधिक प्रबल है।
डॉ. इन्द्रनाथ मदान के शब्दों में : ‘उषा प्रियम्वदा की कहानी-कला से रूढ़ियों, मृत परम्पराओं, जड़ मान्यताओं पर मीठी-मीठी चोटों की ध्वनि निकलती है, घिरे हुए जीवन की उबासी एवं उदासी उभरती है, आत्मीयता और करुणा के स्वर फूटते हैं। सूक्ष्म व्यंग्य कहानीकार के बौद्धिक विकास और कलात्मक संयम का परिचय देता है, जो तटस्थ दृष्टि और गहन चिन्तन का परिणाम है।’
अपने पहले संग्रह ‘ज़िन्दगी और गुलाब’ के फूल से लेकर अब तक विषय-वस्तु और शिल्प की दृष्टि से लेखिका ने विकास की जो मंज़िलें तय की हैं, उनका जीवन्त परिचय पाठकों को ‘कितना बड़ा झूठ’ की कहानियों से मिलेगा।
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