Koyale Ki Lakeeren
(0)
Author:
Sushma RajneeshPublisher:
FlyDreams PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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"कोयले की लकीरें" सुषमा रजनीश द्वारा रचित ऐसी ही संवेदनशील कहानियों का संग्रह है, जो जीवन की साधारण प्रतीत होने वाली घटनाओं में छिपी असाधारण सच्चाइयों को उजागर करता है। इन कहानियों में रिश्तों की नाज़ुक डोर है, स्त्री-अनुभवों की गहराई है और समाज के भीतर पलते मौन संघर्षों की सजीव अभिव्यक्ति भी। लेखिका की दृष्टि करुण है, पर दुर्बल नहीं; भावनात्मक है, पर यथार्थ से विमुख नहीं। उनकी भाषा सहज होते हुए भी गहरी चोट करती है और पाठक से सीधे संवाद स्थापित करती है- धीमे स्वर में, पर दृढ़ प्रभाव के साथ। यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो साहित्य में चमक-दमक नहीं, बल्कि सच की तलाश करते हैं; जो कहानियों में मनोरंजन के साथ आत्मचिंतन की संभावना खोजते हैं। यह एक ऐसा संकलन है, जो पढ़े जाने के बाद भी पाठक के भीतर लंबे समय तक चलता रहता है।
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"कोयले की लकीरें" सुषमा रजनीश द्वारा रचित ऐसी ही संवेदनशील कहानियों का संग्रह है, जो जीवन की साधारण प्रतीत होने वाली घटनाओं में छिपी असाधारण सच्चाइयों को उजागर करता है। इन कहानियों में रिश्तों की नाज़ुक डोर है, स्त्री-अनुभवों की गहराई है और समाज के भीतर पलते मौन संघर्षों की सजीव अभिव्यक्ति भी।
लेखिका की दृष्टि करुण है, पर दुर्बल नहीं; भावनात्मक है, पर यथार्थ से विमुख नहीं। उनकी भाषा सहज होते हुए भी गहरी चोट करती है और पाठक से सीधे संवाद स्थापित करती है- धीमे स्वर में, पर दृढ़ प्रभाव के साथ।
यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो साहित्य में चमक-दमक नहीं, बल्कि सच की तलाश करते हैं; जो कहानियों में मनोरंजन के साथ आत्मचिंतन की संभावना खोजते हैं। यह एक ऐसा संकलन है, जो पढ़े जाने के बाद भी पाठक के भीतर लंबे समय तक चलता रहता है।
Book Details
-
ISBN9789347999000
-
Pages70
-
Avg Reading Time2 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIN
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स्वतंत्रता ने जिन सपनों को जगाया था, उन्हें आपसी सम्बन्धों में तिलमिल कर टूटते देखना, महसूस करना और लिखना हिन्दी कहानी को नया स्वरूप दे रहा था। सम्बन्धों, मानसिकताओं और भाषा में उतरती द्वन्द्वात्मकता में अकेला, अनसमझा व्यक्ति मोहभंग की त्रासदी का साक्षात् प्रतीक है।
हालाँकि ‘नई कहानी’ का प्रारम्भ ‘प्रतीक’ (सम्पादक अज्ञेय) के अगस्त, 1951 के अंक में प्रकाशित राजेन्द्र यादव की कहानी ‘खेल-खिलौने’ से माना जाता है, मगर ‘जहाँ लक्ष्मी क़ैद है’ ‘नई कहानी’ आन्दोलन का अनिवार्य कथा-संग्रह है।
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