Esop Ki Kahaniyan
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ईसप की कहानियाँ' (Aesop's Fables) एक प्रसिद्ध कालजयी बाल साहित्य पुस्तक है, जो प्राचीन ग्रीक कथाकार ईसप द्वारा रचित नैतिक कहानियों का संग्रह है। यह किताब हिंदी में, विशेषकर प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित (लेखिका: प्रान्तिका), बच्चों को नीति-शिक्षा, बुद्धिमत्ता और मानवीय मूल्यों को सिखाने के लिए बहुत लोकप्रिय है किताब की मुख्य विशेषताएं:नैतिक शिक्षा (Moral Lessons): हर कहानी के अंत में एक गहरा संदेश होता है।प्रसिद्ध कहानियां: इसमें 'लालची कुत्ता', 'कछुआ और खरगोश', 'अंगूर खट्टे हैं' जैसी कई प्रसिद्ध कहानियां हैं।सरल भाषा: यह हिंदी संस्करण बच्चों के समझने के लिए सरल भाषा में लिखा गया है।प्रकाशन: यह प्रान्तिका द्वारा संकलित और प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है। Esop Ki Kahaniyan एक कालजयी कृति है, जो समाज की गहराइयों में उतरकर उसकी सच्चाइयों को उजागर करती है। Prantika की लेखनी पाठक को न केवल उस समय के सामाजिक ढांचे से परिचित कराती है, बल्कि मानवीय भावनाओं की जटिलताओं को भी उजागर करती है। इस उपन्यास में लेखक ने गरीबी, अन्याय और नैतिक द्वंद्वों को एक ऐसी संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया है जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक प्रतीत होती है। Esop Ki Kahaniyan केवल एक कहानी नहीं, बल्कि समाज का आईना है जो सोचने पर मजबूर करता है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो साहित्य के माध्यम से जीवन और समाज को समझना चाहते हैं। Esop Ki Kahaniyan एक अनुभव है जिसे पढ़ना नहीं, महसूस करना होता है।
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ईसप की कहानियाँ' (Aesop's Fables) एक प्रसिद्ध कालजयी बाल साहित्य पुस्तक है, जो प्राचीन ग्रीक कथाकार ईसप द्वारा रचित नैतिक कहानियों का संग्रह है।
यह किताब हिंदी में, विशेषकर प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित (लेखिका: प्रान्तिका), बच्चों को नीति-शिक्षा, बुद्धिमत्ता और मानवीय मूल्यों को सिखाने के लिए बहुत लोकप्रिय है
किताब की मुख्य विशेषताएं:नैतिक शिक्षा (Moral Lessons): हर कहानी के अंत में एक गहरा संदेश होता है।प्रसिद्ध कहानियां: इसमें 'लालची कुत्ता', 'कछुआ और खरगोश', 'अंगूर खट्टे हैं' जैसी कई प्रसिद्ध कहानियां हैं।सरल भाषा: यह हिंदी संस्करण बच्चों के समझने के लिए सरल भाषा में लिखा गया है।प्रकाशन: यह प्रान्तिका द्वारा संकलित और प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है।
Esop Ki Kahaniyan एक कालजयी कृति है, जो समाज की गहराइयों में उतरकर उसकी सच्चाइयों को उजागर करती है।
Prantika की लेखनी पाठक को न केवल उस समय के सामाजिक ढांचे से परिचित कराती है, बल्कि मानवीय भावनाओं की जटिलताओं को भी उजागर करती है।
इस उपन्यास में लेखक ने गरीबी, अन्याय और नैतिक द्वंद्वों को एक ऐसी संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया है जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक प्रतीत होती है।
Esop Ki Kahaniyan केवल एक कहानी नहीं, बल्कि समाज का आईना है जो सोचने पर मजबूर करता है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो साहित्य के माध्यम से जीवन और समाज को समझना चाहते हैं।
Esop Ki Kahaniyan एक अनुभव है जिसे पढ़ना नहीं, महसूस करना होता है।
Book Details
-
ISBN9789380823652
-
Pages96
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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प्रभु जोशी, कदाचित् हिन्दी के ऐसे कथाकार-चित्रकार हैं, जिन्होंने अपनी रचनात्मक मौलिकता के बलबूते पर, कला बिरादरी में भी राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर, कई सम्मान अर्जित कर, एक निश्चित पहचान बनाई है। प्रस्तुत संग्रह में प्रभु जोशी की वे कहानियाँ हैं, जो सन् 1973 से 77 के बीच लिखीं-छपीं और जिन्होंने आज से कोई पैंतीस वर्ष पूर्व अपने गहरे आत्म-सजग, चित्रात्मक और लगभग एक सिस्मोग्राफ़ की तरह 'संवेदनशील भाषिक मुहावरे’ के चलते, 'धर्मयुग’, 'सारिका’, 'साप्ताहिक हिन्दुस्तान’ के विशाल पाठक-समुदाय के बीच, एक विशिष्ट सम्मानजनक जगह बनाई थी। और कहने की ज़रूरत नहीं कि ये कहानियाँ, समय के इतने लम्बे अन्तराल के बाद, आज भी, अपने पढ़े जाने के दौरान, बार-बार यह बताती हैं कि 'विचार’ और 'संवेदना’ को, कैसी अपूर्व दक्षता के साथ, एक अविभाज्य कलात्मक-यौगिक की तरह रखा जा सकता है। हालाँकि, ये कहानियाँ मूल रूप से सम्बन्धों की ही कहानियाँ हैं, लेकिन इनमें सर्वत्र व्याप्त, वे तमाम दारुण दु:ख, हमारे ‘समय’ और ‘समाज’ के भीतर घटते उस यथार्थ को उसकी समूची ‘क्रूरता और करुणा’ के साथ प्रकट करते हैं, जो इस दोगली अर्थव्यवस्था का गिरेबान पकड़कर पूछते हैं कि 'कल के विरुद्ध बिना किसी कल के’ खड़े आदमी को, कौन इस अन्ध-नियति की तरफ़ लगातार ढकेलता चला आ रहा है? बेशक, इन कहानियों में पात्र किसी ख़ास ‘विचारधारा’ के शौर्य से तमतमाए हुए नहीं हैं, लेकिन वे लड़ रहे हैं। और उनकी लड़ाई का प्राथमिक कारण, वह ‘सामाजिक कोप’ है, जो उनके वर्ग की नियति को बदलने के इरादे से, उनके स्वभाव की अनिवार्यता बन गया है। इसलिए निपट ‘देशज शब्द और मुहावरे’ कथा के भीतर की ‘हलातोल’ में, जीवन की कचड़घांद के त्रास को, पूरी पारदर्शिता के साथ रखते हैं। इन कहानियों की भाषा, निश्चय ही, यों तो किसी दु:साध्य कलात्मक अभियान की ओर ले जाने की ज़िद प्रकट नहीं करती है, लेकिन उस 'अर्ध-विस्मृत गद्य के वैभव’ का अत्यन्त प्रीतिकर ढंग से पुन:स्मरण कराती है, जो पाठकीय विश्वसनीयता का अक्षुण्ण आधार रचने के काम में बहुधा एक कारगर भूमिका अदा करता है। हो सकता है, कि कहानियों में व्याप्त ‘आत्मकथात्मक तत्त्व’, कहानी के परम्परागत ढाँचे की इरादतन की गई अवहेलना में, शिल्प की रूढ़-रेखाओं को लाँघकर, वहाँ ऐसे वर्ज्य इलाक़ों में लिए जाते हों, जहाँ कला नहीं, जीवन ही जीवन अपने हलाहल के साथ हो, लेकिन जब अभिव्यक्ति की सच्चाई ही रचना का अन्तिम प्रतिपाद्य बन जाए तो ऐसी अराजकताएँ, निस्सन्देह सर्वथा सहज, नैसर्गिक और एक अनिवार्य से 'विचलन’ का स्वरूप अर्जित कर लेती हैं। और कहना न होगा कि यह 'विचलन’ यहाँ प्रभु जोशी की इन कहानियों में, 'हतप्रभ’ करने की सीमा तक उपस्थित है और पूरी तरह स्वीकार्य भी। हाँ, हमें हतप्रभ तो यह भी करता है कि ऐसे कथा-समर्थ रचनाकार ने कथा-लेखन से स्वयं को इतने लम्बे समय तक क्यों दूर किए रखा?
Khulti Girhein
- Author Name:
Dilip Pandey
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खुलती गिरहें' उपन्यास में पाँच अलग-अलग स्त्री किरदार हैं जो अपनी धुन में दुनिया के सामने अपने होने के अहसास को मज़बूत कराती हुई दिखाई देती हैं। उनकी ज़िन्दगी की उधेड़बुन, उनकी जद्दोजहद, उनके अस्तित्व का संकरे पिंजरों की कैद से छूटकर बाहर निकलना और अपना आसमान तथा अपनी दिशा तय करना—सब कुछ उपन्यास में बहुत बारीकी से अभरता है। हर जीवन-प्रसंग एक औरत में बहुत कुछ तोड़ता भी है, जोड़ता भी है। मुश्किलों से भरे जीवन में जब भी लगता है कि हिम्मत जवाब दे रही है तो कभी अवनि, कभी धरा, कभी गोमती, कभी वसुधा, कभी देवयानी का किरदार हमारे सामने आ जाता है और जीने की इच्छा फिर से जाग जाती है। दरअसल, यह किताब एक उम्मीद है, दोस्ती से भरा एक हाथ है और हज़ारों अनकही कहानियों का सामने आना है।
Prapti
- Author Name:
Paramita Satpathy +1
- Book Type:

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ಪ್ರಾಪ್ತಿ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾದೆಮಿ ಪ್ರಶಸ್ತಿ ವಿಜೇತ ಒಡಿಯಾ ಕಥೆಗಳ ಸಂಗ್ರಹ. ಇದು ಮಾನವ ವಿಧಿಯ, ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಮಹಿಳೆಯರ ಅದೃಷ್ಟದ ಘಟನೆಗಳನ್ನು ವ್ಯವಹರಿಸುತ್ತದೆ. ಈ ಸಂಗ್ರಹದಲ್ಲಿನ ಕಥೆಗಳು ಬಾಹ್ಯ ವಾಸ್ತವಗಳನ್ನು ಅಧೀನಗೊಳಿಸುವ ಮೂಲಕ ಜೀವನದ ಆಳವಾದ ಸತ್ಯಗಳನ್ನು ಪರೀಕ್ಷಿಸುವ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಾಗಿವೆ. ಅನೇಕ ವಿಷಯಗಳು, ಅದ್ಭುತ ಕಲ್ಪನೆ, ಅಭಿವ್ಯಕ್ತಿಯಲ್ಲಿ ಸ್ಪಷ್ಟತೆ. ಭಾಷೆಯ ಚಾಣಾಕ್ಷ ಬಳಕೆ ಮತ್ತು ಕಾವ್ಯಾತ್ಮಕ ನಿರೂಪಣೆಯಂತಹ ಅಂಶಗಳು ಕೆಲಸವನ್ನು ವೇಗಗೊಳಿಸಲು ಸಹಾಯ ಮಾಡುತ್ತವೆ.
Sampurna Balrachanayen
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
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निराला जी ने सन् 1942 के बाद गद्य लिखना बन्द कर दिया था। ऐसे में उनका बाल-साहित्य भी पहले का ही है। वह समय साम्राज्यवाद की औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध इस महादेश के विशाल स्वाधीनता आन्दोलन का भी था। ऐसे समय में अतीत के गौरव की, महापुरुषों के जीवन की गाथाएँ प्रकाश में लाई जा रही थीं, क्योंकि औपनिवेशिक सत्ता बार-बार भारत को यही अहसास दिला रही थी कि यहाँ गर्व करने योग्य कुछ भी नहीं है। निराला अपने साहित्य में पौराणिक रूपकों को नया अर्थ दे रहे थे, प्रतीक रूप में देवी का इस्तेमाल कर रहे थे, साथ ही, पुरानी आस्थाओं और विश्वासों पर प्रहार भी कर रहे थे क्योंकि वह जनसाधारण को रूढ़ियों से मुक्त करना चाहते थे। उस दौर के लगभग सभी रचनाकारों के द्वारा बच्चों के लिए महत्त्वपूर्ण लेखन इसलिए भी सम्भव हुआ क्योंकि इन रचनाकारों ने देश के भविष्य के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी का गहरा अहसास किया था।
निराला ‘भक्त ध्रुव', ‘भक्त प्रह्लाद' और ‘भीष्म' के पौराणिक आख्यानों का पुनर्सृजन इसीलिए करते हैं, क्योंकि इन चरित्रों से सत्य और दृढ़प्रतिज्ञ रहने की प्रेरणा मिलती है। निराला महसूस कर रहे थे कि अतीत के गौरवशाली बच्चों की जीवनी इस समय के बच्चों के लिए बेहद उपयोगी होगी, क्योंकि इनसे वे सहज ही अन्याय और अत्याचारों के प्रतिरोध की प्रेरणा ग्रहण कर सकेंगे।
इस ग्रन्थ में पौराणिक कथाओं के अलावा, पाठक बच्चों के लिए लिखी उनकी किताब ‘सीख भरी कहानियाँ’ की उन कहानियों को भी पढ़ पाएँगे, जिनके बारे में निराला का यह मानना था कि, “मैं कितना बड़ा साहित्यकार क्यों न माना जाऊँ पर मेरी लेखनी तभी सार्थक होगी जब इस देश में बाल-गोपाल मेरी कोई कृति पढ़कर आनन्द-विभोर होंगे। इन कथाओं को सुनने का केवल ढंग मेरा है, बाक़ी सब कुछ हमारे पूर्वजों का है। नन्हे-मुन्ने इन कहानियों में जितना अधिक रस पाएँगे, उतनी ही मेरी कहानीगोई की सफलता होगी।”
Rajdhani Kab Aayegi
- Author Name:
Martin John
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सामाजिक ताने-बाने में तेज़ी से हो रहे परिवर्तन, भगवान बनते जा रहे बाज़ार का दबाव, लगातार ज़्यादा ही मसरूफ होते जा रहे इन्सान की निरंतर भोथरी होती जा रहीं संवेदनाओं, हवस और रुतबे की अकड़ में अमानवीय होते जा रहे लोगों के अवैध नैक्सस जैसे मसलों को लेकर मार्टिन जॉन की चिंताएँ उनकी इस संग्रह की कहानियों में अलहदा ढंग से अभिव्यक्त हुई हैं। रेलकर्मी होने का उनका अनुभव और निजी जीवन-रुचियों के आत्मिक संस्पर्श इन चिंताओं को और ज़्यादा विश्वसनीय, ऐंद्रिक लगाव से भरपूर, जीवंत, चाक्षुष और विशिष्ट बनाकर परोसने में काफी मददगार साबित होते हैं। रेल-जीवन और रेलवे क्वार्टर हिंदी में कुछ ही कहानीकारों की रचनाओं में विश्वसनीय ढंग से आए हैं। इस रूप में रामदेव सिंह के बाद मार्टिन जॉन ही फिलहाल याद आ रहे हैं। 'राजधानी कब आएगी' की इंक्वायरी काउंटर पर काम कर रही तरुलता, उसके सीनियर सी.बी.एस. अंकल, मनचले पसेंजरों की बेहूदगी और रेलवे महकमे में व्याप्त अफसर-नेता नैक्सस आदि के चित्रण इतने विश्वसनीय और प्रभावशाली बन पड़े हैं कि यह कहानी लंबे समय तक पाठकों के जेहन में टिकी रहेगी। कहानीकार मार्टिन जॉन की कलम का कमाल है कि बाग-बागवानी और पक्षी-प्रेम यहाँ पर्यावरण चिंता मात्र न रहकर सामाजिक ताने-बाने के अंग बनकर सामने आते हैं। कोविड के दौर में गुलाब के फूल मात्र ही मज़हबी नफरतों के शिकार नहीं होते (रौंदे हुए फूल) मानवीय विश्वास भी दरकता है। 15 अगस्त के दिन शांतिदूत कबूतर के खून बहाने वाले और गांधी-नेहरू की तस्वीर पर पत्थर फेंकने वाले लोग हमारे समाज में किस तरह पैठ बना चुके हैं; बिना लाउड हुए लेखक बता देता है। —गौरीनाथ
Vairagya
- Author Name:
Geetanjali Shree
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नई व पुरानी कहानियों का यह संकलन गीतांजलि श्री की लगभग एक दशक की साहित्यिक यात्रा का परिचय देता है। इसमें वैविध्य है विषय का, अन्दाज़ का। प्रयोग है शिल्प का, भाषा का। और हमेशा ही एक सृजनात्मक साहस है कि यथातथ्यता—‘लिटरैलिटी’—को लाँघते हुए पथ, दृश्य, अनुभव, ज़मीन तलाशें। अलग-अलग बिन्दुओं की टोह लेने की लालसा में नतीजा फटाफट समझाने की कोई हड़बड़ी नहीं। कहीं हमारी जटिल आधुनिकता के आयाम हैं, कहीं मानव-सम्बन्धों की अनुभूतियाँ। कहानियाँ हमारे शाश्वत मुद्दों पर भी हैं—मृत्युबोध, जीवन की आस, आत्मीयता की चाह-पर ताज़ी संवेदना से भरपूर। कभी ‘नज़र’ में हास्य है, कभी फ़लसफ़ाना दुःख। भाषा की ध्वनियाँ ऐसी हैं कि शायद बहुतों को यहाँ कविता का रस भी मिलेगा। साहित्य-प्रेमियों के लिए एक सार्थक प्रयास।
Adoration of the Ancients
- Author Name:
Ravichnadra P. Chittampalli +1
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Adorations of the Ancients offers a complete English translation of all 19 stories from Vaddaradhane in a single volume. These stories represent the earliest prose in 10th-century Halagannada. Initially, they seem to be highly religious, emphasising ethics and morality aligned with the Jain tradition. However, as creative works, they function on multiple levels: realistic, mythical, fantastic, quasi-historical, worldly, monarchical, economic, and socio-cultural. The characters are consistently portrayed within various economic classes and, interestingly, rarely within caste groups. Women characters are depicted as strong and decisive. This translation is based on R.L. Anantharamaiah’s edition of Shivakotyacharya’s Vaddaradhane. It aims to balance the limitations and scope of equivalents and approximations, making the reading experience enjoyable while maintaining scholarly interest.
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