Dharohar Kahaniyaan : Vishwambharnath Sharma ‘Kaushik’
(1)
Author:
Vishwambharnath Sharma 'Kaushik'Publisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
250
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एक मध्यवर्गीय संयुक्त परिवार के परम्परागत मूल्यों और नैसर्गिक वात्सल्य के द्वन्द्व की मनोवैज्ञानिक कहानी ‘ताई’ हो, क्षय-रोग से ग्रस्त, पत्नी के प्रति पति की उदासीनता और प्रेम की सच्ची संवेदना के द्वन्द्व की कहानी ‘वह प्रतिमा’ हो या एक ग्रामीण पात्र के नीम के वृक्ष के प्रति प्रेम की अद्भुत कहानी ‘अशिक्षित का हृदय’ हो; मध्यवर्गीय पारिवारिक परिवेश में मानवीय संवेदना का मनोवैज्ञानिक अंकन विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ को एक लोकप्रिय और उल्लेखनीय कहानीकार के रूप में प्रतिष्ठित करता है। —गोपाल राय
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एक मध्यवर्गीय संयुक्त परिवार के परम्परागत मूल्यों और नैसर्गिक वात्सल्य के द्वन्द्व की मनोवैज्ञानिक कहानी ‘ताई’ हो, क्षय-रोग से ग्रस्त, पत्नी के प्रति पति की उदासीनता और प्रेम की सच्ची संवेदना के द्वन्द्व की कहानी ‘वह प्रतिमा’ हो या एक ग्रामीण पात्र के नीम के वृक्ष के प्रति प्रेम की अद्भुत कहानी ‘अशिक्षित का हृदय’ हो; मध्यवर्गीय पारिवारिक परिवेश में मानवीय संवेदना का मनोवैज्ञानिक अंकन विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ को एक लोकप्रिय और उल्लेखनीय कहानीकार के रूप में प्रतिष्ठित करता है।
—गोपाल राय
Book Details
-
ISBN9788198959447
-
Pages176
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Bama
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- Description: दो जून की रोटी के लिए जिन्हें रोज़ जूझना पड़ता है; उनके लिए अपने भीतर की ताक़त ही सब कुछ है। तमिल भाषा की दलित स्त्री कथाकारों की ये कहानियाँ उन लोगों की ताक़त को स्वर देने की कोशिश करती हैं, उसे और मज़बूत करने की भी। भूख और ग़रीबी के अलावा जातिगत भेदभाव, श्रम का शोषण और प्रकृति के दोहन से उपजी समस्याएँ भी हैं जिनकी सबसे ज़्यादा मार इन्हीं लोगों पर पड़ती है। लेकिन जैसाकि इस संकलन में शामिल उमा देवी की कहानी ‘कमला’ रेखांकित करती है, संघर्ष और बदलाव की शुरुआत भी यही लोग करते हैं। ‘भुखमारू’ संग्रह में शामिल प्रत्येक कहानी एक अलग परिवेश और जीवन के एक अलग पहलू को पाठक के सामने लाती है। बिना किसी फ़ॉर्मूले का अनुकरण किए इन कहानियों में हमें बेहद सजीव पात्र और बहुत नज़दीक से देखे गए विवरण मिलते हैं। इनका प्राकृतिक और सामाजिक परिवेश कथा-पात्रों को भी एक भिन्न आयाम देता है जिससे वे ज़्यादा मौलिक और वास्तविक दिखने लगते हैं। विसंगतियों, उत्पीड़न और अन्याय पर टिके मनुष्य समाज के बरक्स पशु-पक्षियों और जंगल की मौजूदगी इन कहानियों को और विशिष्ट बनाती है। इन कहानियों का चयन और संकलन तमिल भाषा की सुप्रसिद्ध कथाकार बामा ने किया है जिनकी रचनाओं ने देश से बाहर भी अपनी पहचान बनाई है।
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