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Samarshankh

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About the book

महाभारत युद्ध समाप्‍त हुए पाँच सौ वर्ष बीत चुके थे। धरती पर अन्‍याय, अशांति और अधर्म का वातावरण व्‍याप्‍त हो चुका था। सम्‍पूर्ण आर्यावर्त मनुष्‍यों के अधिकार में था। तक्षक नाग के वंशज आश्रयहीन हो चुके थे। पक्षीराज जटायु के वंशज गरुड़, कलियुग के प्रारम्‍भ में अत्‍यधिक शक्‍तिशाली हो गए और उन्‍होंने धरती पर बचे-खुचे नागों का संहार करना प्रारम्‍भ किर दिया। मनुष्‍यों और गरुड़ों के पास एक अपराजेय महायोद्धा था, जिसके नाम से असुर और नाग थर-थर कांपते थे। नागों को भी एक महावीर योद्धा की तलाश थी और एक दिन अचानक ऐसा एक योद्धा प्रकट हो जाता है। सम्‍पूर्ण भारतवर्ष उसे ‘नागपुत्र’ कहकर बुलाने लगता है। उस नागपुत्र के परिचय से समस्‍त गरुड़ जाति कांप उठती है। समरशंख फूँक दिया जाता है और एक भयानक और भीषण महायुद्ध का प्रारम्‍भ हो जाता है।

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महाभारत युद्ध समाप्‍त हुए पाँच सौ वर्ष बीत चुके थे। धरती पर अन्‍याय, अशांति और अधर्म का वातावरण व्‍याप्‍त हो चुका था। सम्‍पूर्ण आर्यावर्त मनुष्‍यों के अधिकार में था। तक्षक नाग के वंशज आश्रयहीन हो चुके थे। पक्षीराज जटायु के वंशज गरुड़, कलियुग के प्रारम्‍भ में अत्‍यधिक शक्‍तिशाली हो गए और उन्‍होंने धरती पर बचे-खुचे नागों का संहार करना प्रारम्‍भ किर दिया। मनुष्‍यों और गरुड़ों के पास एक अपराजेय महायोद्धा था, जिसके नाम से असुर और नाग थर-थर कांपते थे। नागों को भी एक महावीर योद्धा की तलाश थी और एक दिन अचानक ऐसा एक योद्धा प्रकट हो जाता है। सम्‍पूर्ण भारतवर्ष उसे ‘नागपुत्र’ कहकर बुलाने लगता है। उस नागपुत्र के परिचय से समस्‍त गरुड़ जाति कांप उठती है। समरशंख फूँक दिया जाता है और एक भयानक और भीषण महायुद्ध का प्रारम्‍भ हो जाता है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from FlyDreams Publications
Format
Paperback
Publisher
FlyDreams Publications
Weight
400 grams
ISBN-13
9789392723148
Pages
473
Reading time
~16 hrs
Age
11-18
Country of origin
India
Dimensions
12.9 × 19.8 cm
Language
Hindi

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