Us Se Muhabbat By Varun Anand
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उस से मुहब्बत' इस उन्वान से ही ज़ाहिर है कि वरुण आनंद की शायरी का ये मजमूआ, मुहब्बत की ग़ज़लों, नज़्मों और मसनवियों से सजा है । मुहब्बत की शायरी की इस किताब में महबूब से इजहार है, शिकायतें हैं और जुदाई के लम्हें दर्ज हैं। यहाँ मुहब्बत का हर रंग देखने को मिलेगा तो कहीं कहीं तंज़ का रंग इसे और दिलकश बनाता है । वरुण आनंद की शायरी आधुनिकता और परम्परा का अद्वितीय संगम है । एक ओर जहाँ आज की बातों को उनकी ग़ज़लों में जगह मिली है वहीं बड़ी बहर की पारम्परिक ग़ज़लें, नज़्में और मसनवियाँ इसे परम्परा का गाढ़ा रंग देती हैं ।
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उस से मुहब्बत' इस उन्वान से ही ज़ाहिर है कि वरुण आनंद की शायरी का ये मजमूआ, मुहब्बत की ग़ज़लों, नज़्मों और मसनवियों से सजा है । मुहब्बत की शायरी की इस किताब में महबूब से इजहार है, शिकायतें हैं और जुदाई के लम्हें दर्ज हैं। यहाँ मुहब्बत का हर रंग देखने को मिलेगा तो कहीं कहीं तंज़ का रंग इसे और दिलकश बनाता है । वरुण आनंद की शायरी आधुनिकता और परम्परा का अद्वितीय संगम है । एक ओर जहाँ आज की बातों को उनकी ग़ज़लों में जगह मिली है वहीं बड़ी बहर की पारम्परिक ग़ज़लें, नज़्में और मसनवियाँ इसे परम्परा का गाढ़ा रंग देती हैं ।
Book Details
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ISBN9789348497284
-
Pages120
-
Avg Reading Time4 hrs
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Age11-18 yrs
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Country of OriginIndia
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‘शब्द बनकर रहती हैं ऋतुएँ’, ‘अक्षत’ और ‘ईश्वराशीष’ के बाद ‘हृदय की हथेली’ से पुष्पिता अवस्थी ने प्रणय, प्रतीक्षा, विरह, आतुरता, समर्पण और आराधना की लौकिक अनुभूतियों को लोकैषणा के सँकरे दायरे से बाहर निकालकर जैसे एक आध्यात्मिक सिहरन में बदल दिया है। ‘आँसू दुनिया के लिए आँख का पानी है/लेकिन तुम्हारे लिए दु:ख की आग है’ कहते हुए कवयित्री ने प्रबन्धन-पटु समय में प्रेम की एक सरल रेखा खींचनी चाही है। उसके यहाँ ‘प्रेम के रूपक’ नहीं हैं, प्रणय का पिघलता ताप है, आँखों की चौखट में विश्वास की अल्पना है, अन-जी आकांक्षाओं की प्यास है, प्रेम का धन-धान्य है, स्मृति के कुठले में सँजोए अन्न की तरह अतीत का वैभव है। अचरज नहीं कि कवयित्री ख़ुद यह कहती है—‘इन कविताओं की व्यंजना आकाश की तरह निस्सीम है और आकाश गंगा की तरह अछोर भी। इनके अन्दर की यात्रा मन के रंगों-रचावों की यात्रा है, रस-कलश की छलकन है। सृजन के राग का आरोहण और कृत्रिमता के तिमिर का तिरोहण है।’
प्रेम के उद्दाम आदिम संगीत से होती—प्रेम का गान करने और उसका मान रखनेवाले कवियों—कालिदास, जयदेव, विद्यापति, घनानन्द की परम्परा की ही धात्री पुष्पिता फिर एक बार पुण्य के पारावार में संतरण करना चाहती हैं, अपनी गंगा में प्रिय की यमुना को जीते हुए कृष्ण को राधा-भाव और राधा को कृष्ण-भाव में जीते हुए देखना चाहती हैं। उनकी पदावलियों में अनुरक्त और विदग्ध अनुभवों—दोनों की उमगती कसक भरी है, रचनेवाले के भीतर जैसे अकेलेपन की पिघलती मोमबत्ती। शब्दों के ताप में प्रणय की तपश्चर्या है, प्रेम को पृथ्वी की पहली और अन्तिम चाहत की तरह महसूस करने की उत्कंठा है। प्यार की पवित्र जाह्नवी को दिनोंदिन मैला कर रहे समय के बावजूद देह की आकाश गंगा में तैरकर आँखें पार उतर जाना चाहती हैं ठहरे हुए समय से मोक्ष के लिए। इन कविताओं का सलीक़ेदार अपनत्व मन पर एक ऐसी छाप छोड़ता है जैसे इन अनुभूतियों के साथ, पढ़नेवाला भी सह-यात्रा कर रहा हो।
Jayasi Soor Bihari
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Description:
यह पुस्तक सिविल सेवा, विश्वविद्यालय परीक्षा समेत समस्त प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
पुस्तक में जायसी, सूरदास और बिहारी के प्रमुख पद सरलार्थ सहित उपलब्ध कराए गए हैं।
परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक कवि की रचना पर आलोचनात्मक लेख भी पुस्तक में शामिल है।
Pahad Mein Phool
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- Description: 1945 में जापान के आधिपत्य से मुक्ति के बाद आधुनिक कोरियाई समाज देश विभाजन तथा सैनिक सत्ता द्वारा जनतांत्रिक अधिकारों के हनन से उत्पन्न संकटों से लगातार जूझता रहा है। इसलिए आज की कोरियाई कविता मूलत: प्रतिरोध की कविता है लेकिन अपनी संस्कृति और जड़ों से गहरे लगाव के चलते इसने प्रतिरोध को अपनी परम्परा के बीच अनोखे ढंग से विकसित किया है। हिन्दी में प्रकाशित समकालीन कोरियाई कविता का यह पहला ऐसा संकलन है, जिससे गुज़रते हुए पाठक न केवल एशियाई कविता के एक विशिष्ट स्वरूप से परिचित होते हैं, बल्कि एक महान राष्ट्र की जातीय, सामाजिक तथा सांस्कृतिक अस्मिता की झलक भी पाते हैं।
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