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ये किताब उर्दू के युवा शायर अमरदीप सिंह अमर का पहला ग़ज़ल-संग्रह है जिसमें उनकी ताज़ा ग़ज़लें और नज़्में शामिल की गई हैं। "उर्दू के नौजवान शायर अमरदीप सिंह का जन्म 12 अक्तूबर, 1983 को पटियाला (पंजाब) में हुआ। शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने 2004 में ग्रेजुएशन और फिर सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। फ़िलहाल वो आर्किटेक्चर और भवन-निर्माण का अपना घरेलू व्यवसाय सँभाल रहे हैं। घर के अदबी माहौल में पलते हुए अमरदीप कम-उम्र में ही पंजाबी भाषा में कविताएँ और नज़्में लिखने लगे। बाद में उर्दू शायरी से प्रभावित हो कर उर्दू ज़बान को अपनी अभिव्यक्ति का ज़रिया बनाया। उन्होंने 2005 में बा-क़ायदा उर्दू ज़बान और इल्म-ए-अरूज़ में दक्षता हासिल की। उसके बाद से उनके सुख़न का सफ़र मुसलसल जारी है। इन दिनों पटियाला में रहते हैं और देश के विभिन्न मुशायरों में शिरकत करते नज़र आते हैं।"
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ये किताब उर्दू के युवा शायर अमरदीप सिंह अमर का पहला ग़ज़ल-संग्रह है जिसमें उनकी ताज़ा ग़ज़लें और नज़्में शामिल की गई हैं। "उर्दू के नौजवान शायर अमरदीप सिंह का जन्म 12 अक्तूबर, 1983 को पटियाला (पंजाब) में हुआ। शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने 2004 में ग्रेजुएशन और फिर सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। फ़िलहाल वो आर्किटेक्चर और भवन-निर्माण का अपना घरेलू व्यवसाय सँभाल रहे हैं। घर के अदबी माहौल में पलते हुए अमरदीप कम-उम्र में ही पंजाबी भाषा में कविताएँ और नज़्में लिखने लगे। बाद में उर्दू शायरी से प्रभावित हो कर उर्दू ज़बान को अपनी अभिव्यक्ति का ज़रिया बनाया। उन्होंने 2005 में बा-क़ायदा उर्दू ज़बान और इल्म-ए-अरूज़ में दक्षता हासिल की। उसके बाद से उनके सुख़न का सफ़र मुसलसल जारी है। इन दिनों पटियाला में रहते हैं और देश के विभिन्न मुशायरों में शिरकत करते नज़र आते हैं।"
Book Details
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ISBN9789394494978
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Pages161
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Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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हिन्दी के पायेदार कवि-शायर कुमार नयन की कविताएँ अपने समय के जनमूल्यों से जुड़ती हुई करुणा, न्याय, प्रेम और प्रतिरोध की धारा रचती हैं। कवि की मानें तो ‘यह आग का समय है और उसके पास सिर्फ़ प्रेम है’, जिसके सहारे रोज़ बदलती दुनिया में उसे विश्वास है कि ‘प्यार करने को बहुत कुछ है इस पृथ्वी पर।’ कुमार नयन की कविताओं का एक-एक शब्द अपने ख़िलाफ़ समय से इस उद्घोष के साथ संघर्षरत है कि ‘तुम्हारी दुनिया बर्बर है, तुम्हारे क़ानून थोथे हैं।’ ये शब्द अपनी नवागत पीढ़ी से करुण भाव में क्षमा-याचना करते हैं, ‘क्षमा करो मेरे वत्स, तुम्हें बचपन का स्वाद नहीं चखा सका।’
लोकतंत्र के तीनों स्तम्भ विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका को पूँजी साम्राज्यशाही की चाकरी में दंडवत् देख कवि-मन आहत हो चौथे स्तम्भ मीडिया की ओर भरोसे से देखता है, लेकिन वहाँ से भी उसका मोहभंग हो जाता है, जब वह देखता है कि 'अन्य कामों के अतिरिक्त/एक और काम होता है अख़बार का/आदमी को आदमी नहीं रहने देना।' वस्तुत: मनुष्य को मनुष्य की गरिमा में प्रतिष्ठित देखने की सदिच्छा ही इन कविताओं के मूल में है, जिसके लिए मनुष्य विरोधी सत्ता-व्यवस्था के प्रतिरोध में कवि मुसलसल अड़ा दिखता है।
कुमार नयन की कविताएँ स्त्री के प्रेम, संघर्ष और निर्माण के प्रति अपनी सम्पूर्ण त्वरा के साथ एक अनोखी दास्तान रचती हैं। स्त्री के विविध रूपों के चित्रण में कवि की संवेदनक्षम दृष्टि उसे सृष्टि के नवनिर्माण की धातृ के रूप में प्रतिष्ठित करती जान पड़ती है। कविताओं में एक प्रकार का ख़ौफ़, आतंक, भय और संशय का स्वर प्रभावी दीख पड़ता है, जबकि कुमार नयन प्रेम और विश्वास के कवि हैं। पाठक इस द्वैत को समझ पाएँ तो उन्हें इन कविताओं का आत्मिक आस्वाद प्राप्त होगा!
—शिव नारायण सम्पादक, 'नई धारा'।
Sirhane ke pal
- Author Name:
Sulabha Kore
- Book Type:

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मराठी भाषी हिंदी कवयित्री सुलभा कोरे का ताज़ा काव्य-संग्रह 'सिरहाने के पल' प्रकृति और जीवन, जीवन और देश, देश और सरोकार के अंतरसंबंधों की सचेत टोह लेती कविताओं का विलक्षण संकलन है। सुलभा कोरे कविता इसलिए लिखती हैं ताकि 'धरती साँस ले सके', पेड़ सपने देख सकें और चिडिय़ा दाना चुग सके। सदियों से जिनके मुँह पर पाबंदियाँ लगी हुई हैं, उन पाबंदियों को चुनौती देती सुलभा की कविताएँ उन्हें बोलने का आह्वान करती हैं। आह्वान करती हैं ताकि वह अपना आसमां $खुद तोल सकें। 'सिरहाने के पल' की कविताएँ इस्तकबाल करती हैं 'अंतिम छोर पर खड़ी औरतों' का, उनकी उड़ान का, उनकी जिम्मेदारियों का और 'गहरी खाई में उतरने' के उनके अदम्य साहस का। 'सिरहाने के पल' की कविताएँ सारे जलते-सुलगते सवालों से बहसतलब होती हैं। भूले-बिसरे यादों को ताज़ा करने का काव्य-आग्रह आपको कविता के पास ले जाएगा। 'अतीत के बवंडर में गुम हो गए पलों' की शिनाख्त करती सुलभा कोरे की कविता राजनीतिक छल-छद्म से भी दो-दो हाथ करती है। कविता अपने पाठकों से सावधान रहने की गुजारिश करती हुई याद दिलाती है कि इस देश में 'सब कुछ बेचा जाएगा', देशभक्ति भी बेची जाएगी और देशद्रोह भी, इमानदारी भी और बेईमानी भी। छोटी-छोटी किंतु निहायत ज़रूरी बातों, विचारों, घटनाओं और मुद्दों का काव्य रूपांतरण कविता को गरिमामयी बनाता है। —कमलानंद झा
Mera Kaha Hua
- Author Name:
Shariq Kaifi
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This book (Mera Kaha Hua: Shariq Kaifi) is a collection of his poetrys from 1978 to 2025, comprising both his ghazals and nazms. Journeying through these poetrys, one can experience and understand every aspect of life and every relationship in its depth. Shariq Kaifi is among the most prominent contemporary poets of the Indian subcontinent. He was born on June 01, 1961, in Bareilly, Uttar Pradesh, India. Shariq Kaifi has an equal command over both ghazals and nazms. His poetry is not just poetry—it strikes deeply at the complexities of life, human relationships, and social attitudes.
Anjur Bhari Ijot
- Author Name:
Romisha
- Book Type:

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आँजुर भरि इजोत रोमिशाक प्रेम सम्बन्धी कविता स्त्री आ मनुष्यक सामूहिक जीवन मे अस्तित्वक अही अविचल यथार्थक वास्तविक मूल्य तकैत अछि। प्रपंच सँ संचालित सामाजिक व्यवस्थाक प्रवंचित मनुष्यक समस्त अभिलाषा केँ हुनकर काव्य-नायिका अपन जाग्रत चेतना सँ देखै छथि, आ जीवन मे किछु महत्त्वपूर्ण करबा लेल व्याकुल रहै छथि। अपन उद्यम मे यत्र-तत्र-सर्वत्र समाजक बहुमुखी आघात सहैतो कखनहुँ हताश नइँ होइ छथि। हुनकर स्त्री, पशु मनोवृत्तिक हिंस्र, खूँखार, वेधक दृष्टि-घात अहर्निश सहिकए क्रमश: पकठोस आ सावधान समझ बना लै छथि। एहेन स्त्री परिवार केँ सुगठित करबा लेल एक-एक साँस लगबै छथि। समस्त कर्तव्यक पूर्ति करैत हुनका एतबा कचोट अवश्य होइ छनि जे समाज आ कि परिवार हुनकहु मादे सोचथि। कवयित्रीक ई अपेक्षा एक टा महत्त्वपूर्ण पक्ष केँ उद्घाटित करैत समाज केँ ई संकेत दैत अछि जे पारिवारिकताक रक्षा मे आ परिवारक गठन मे जीवन झोंकि देनिहारि स्त्रीक पहचान आ हुनकर मनोबलक संज्ञान लेब अनिवार्य अछि। सूर्य, चन्द्रमा, फूल, पवन, प्रकाश, प्रेम, मनुष्यता, नैतिकता, विवेकशीलता, कृतज्ञता आदिक प्रति मोहाविष्ट हएब; प्राकृतिक अवदान सँ आह्लादक रूपक गढ़ब, कविता मे मोहक आ बहुरंगी व्यंजना उपस्थित करब...तय करैत अछि, जे रोमिशा केँ मानवीय परिवेश लेल बड़ बेसी अनुराग छनि। इएह अनुराग हुनका जनसरोकारक दायित्व सँ बन्हने रखतनि, आ हुनकर रचनात्मकता केँ उत्कर्ष देतनि। —देवशंकर नवीन
Yaadon Ke Kuch Khaali Packet
- Author Name:
Suhail Azad
- Book Type:

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