Pratinidhi Kavitayein : Om Prakash Valmiki
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ओमप्रकाश वाल्मीकि ने कविता, कहानी और आत्मकथा के साथ आलोचना भी लिखी है। लेकिन मूल रूप से वे कवि ही हैं। उनके रचनाकार व्यक्तित्व को अभिव्यक्ति सबसे पहले कविता में ही मिली।</p> <p>वे मानते थे कि दलित कविता में जो नकार है वह अतीत से चली आ रही मान्यताओं से है, वर्तमान के छद्म से है, लेकिन उसका मुख्य उद्देश्य जीवन में घृणा के स्थान पर प्रेम, समता और बन्धुता का संचार करना ही है। उनकी प्रतिनिधि कविताओं के इस संकलन में शामिल कविताएँ भी यही सिद्ध करती हैं। वे सवाल उठाते हैं, दलितों के यथार्थ को सामने रखते हैं, लेकिन प्रतिशोध की भावना से नहीं, न्याय की चेतना से प्रेरित होकर। ये कविताएँ एकदम सीधी और सरल शब्दावली में ऐसे कितने ही प्रश्न उठाती हैं जिनके सामने सवर्ण हिन्दू समाज को अपनी तमाम ताकत के बावजूद मौन रह जाना पड़ता है।
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ओमप्रकाश वाल्मीकि ने कविता, कहानी और आत्मकथा के साथ आलोचना भी लिखी है। लेकिन मूल रूप से वे कवि ही हैं। उनके रचनाकार व्यक्तित्व को अभिव्यक्ति सबसे पहले कविता में ही मिली।</p>
<p>वे मानते थे कि दलित कविता में जो नकार है वह अतीत से चली आ रही मान्यताओं से है, वर्तमान के छद्म से है, लेकिन उसका मुख्य उद्देश्य जीवन में घृणा के स्थान पर प्रेम, समता और बन्धुता का संचार करना ही है। उनकी प्रतिनिधि कविताओं के इस संकलन में शामिल कविताएँ भी यही सिद्ध करती हैं। वे सवाल उठाते हैं, दलितों के यथार्थ को सामने रखते हैं, लेकिन प्रतिशोध की भावना से नहीं, न्याय की चेतना से प्रेरित होकर। ये कविताएँ एकदम सीधी और सरल शब्दावली में ऐसे कितने ही प्रश्न उठाती हैं जिनके सामने सवर्ण हिन्दू समाज को अपनी तमाम ताकत के बावजूद मौन रह जाना पड़ता है।
Book Details
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ISBN9789360862381
-
Pages152
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Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: The book Close to my Heart is an odyssey of my life with love for nature, time spent with my family, personal relations, pains of waiting, separating, and joys of meeting. Most of the poems are vivid imagery, deeply passionate and come straight from the core of my heart. A reader can connect to any poem and experience the same feelings during their lifetime. The mood in the Close to my Heart reflects a variety of experiences of contentment, regret, delight, loneliness, separation and ecstasy in personal, professional, and emotional life. I did not follow any traditional regular poetic scheme; however the flow of the verse sounds rhythmic. Some poems are short and some are long, yet remain focused on a particular theme and topic. Usually it’s the rejection, abandonment and the solitude that turns you to Almighty. Nowhere it is mentioned in the book; however a reader can perceive my trust and subservience to the Omnipotent. Occasionally it takes many pages to express one’s thoughts but anthology Close to my Heart is a squeezed collection of my poems with myriad thoughts and scores of experiences. Any critique or analyst can spend years paraphrasing those thoughts into writing. For a reader’s convenience, anthology is divided into very succinct six sections: Realization, Nature, Prayers, Connection, Charismatic Kullu, and Close to my Heart.
Chandrikotsav
- Author Name:
Manoj Singh
- Book Type:

- Description: शाम ढल चुकी है, रात को चाँद की प्रतीक्षा है। विरह की अग्नि हर प्रेमी को अपने आगोश में ले रही है। प्रतीक्षा सदैव कष्ट दायी होती है। आँखें थक रही हैं मन आतुर है। आँसू हैं कि अनायास बहने लगे। मन की अग्नि ज्वाला बनकर आँसुओं को उष्णता प्रदान कर रही है, जिसने मन के साथ-साथ तन को भी जलाना प्रारंभ कर दिया है। उनका प्रभाव और प्रवाह बढ़ता जा रहा है। विरह की तीव्रता का प्रेम की गहराई से सीधा संबंध है। इस अवस्था में अप्रिय विचारों का आना कदाचित् उनका स्वभाव है, मगर विश्वास की अग्नि परीक्षा यहीं से शुरू होती है। बेचैनी में भी धैर्य नहीं खोना है, कदाचित् यही विरह की प्रीत है
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