Shivkamini Mahadevi Ahilyabai "शिवकामिनी महादेवी अहिल्याबाई" Book in Hindi
(0)
₹
200
₹ 160 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789355215307
-
Pages128
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Vedik Vichar
- Author Name:
Chitranjan Savant
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Anuvrat Anushasta Acharya Mahapragya: Global Reflections And Tributes
- Author Name:
Dr. S.L. Gandhi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Shadi Bandar Mama Ki (Poems for Children)
- Author Name:
Nishant Jain
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kamyabi Unlimited
- Author Name:
Brian Tracy
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Madhya Pradesh Uchch Madhyamik Shikshak Patrata Pariksha Bhag-(A) Anivaraya Prashan Patra (MPTET Higher Secondary Teacher Part A Guidebook in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Yugandhara Ahilyabai Holkar Historical Novel Focusing On The Inspiring Life of Devi Ahilya Bai Holkar
- Author Name:
Mamta Chandrasekhar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Patrakarita Ke Yug Nirmata
- Author Name:
Arjun Tiwari +2
- Book Type:

- Description: वाजपेयीजी ने हिंदी पत्रकारिता कला के निखार के लिए इसके विभिन्न पक्षों पर भरपूर लेखन किया। कलकत्ता से प्रकाशित ‘हिंदी बंगवासी’ (1905) से पत्रकारिता प्रारंभ करने वाले वाजपेयीजी ने मासिक पत्र ‘नृसिंह’ (1907) का संपादन किया। ‘भारतमित्र’ के प्रधान संपादक बनने के पूर्व वाजपेयीजी ने कुछ समय तक ‘सनातन धर्म’ पत्रिका का भी संपादन किया। 1920 में उन्होंने ‘स्वतंत्र’ साप्ताहिक का प्रकाशन किया। हिंदी पत्रकारिता को उच्चता और समृद्धि देने वाले तीन मराठी भाषी यशस्वी संपादकों में माधवराव सप्रे, बाबूराव विष्णु पराड़कर एवं लक्ष्मण नारायण गर्दे का नाम इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है, जिन्होंने राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रति अगाध श्रद्धा और लगन का परिचय अपने श्रेष्ठ संपादकीय कौशल एवं पत्रकारी लेखन से दिया। गर्देजी आजीवन आर्थिक कठिनाइयों से जूझते रहे, किंतु उन्होंने कभी समझौते नहीं किए। अपनी ‘कलम’ की स्वतंत्रता की रक्षा पूरी धर्म-निष्ठा से की। श्रेष्ठ व्यंग्यकार और स्वनामधन्य संपादक अशोकजी ने अपनी लेखन और संपादन क्षमता, पत्रकारिता के प्रति अटूट समर्पण और निष्ठा की बदौलत ‘स्वतंत्र भारत’ को लोकप्रिय एवं प्रतिष्ठित अखबार बना दिया था। अशोकजी की ही अनुशंसा पर दैनिक ‘स्वतंत्र भारत’ के दूसरे संपादक योगींद्रपति त्रिपाठी ने अपनी अप्रतिम कर्मनिष्ठा से इसे उत्तर प्रदेश का विश्वसनीय और लोकप्रिय अखबार बनाया। त्रिपाठीजी लगातार 18 बरसों तक इसके संपादक रहे। त्रिपाठीजी विद्वत्ता और सादगी की प्रतिमूर्ति थे। वे उच्चकोटि के सुलझे हुए पत्रकार थे।
Lanchhan
- Author Name:
Swadesh Parmar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
JANIYE BIHAR KA BHOOGOL
- Author Name:
Subodh Kumar Nandan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
NAMO 7 RACECOURSE MEIN PRATHAM VARSH
- Author Name:
Praveen Gugnani
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Prophet (Hindi Translation of The Prophet)
- Author Name:
Kahlil Gibran
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dictionary of Synonyms & Antonyms
- Author Name:
Anil Kumar Mishra
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharat-China Rishte : Dragon Ne Hathi Ko Kyon Dasa
- Author Name:
Ranjeet Kumar
- Book Type:

- Description: न केवल भारत, बल्कि संपूर्ण विश्व में चीन रहस्यों के आवरण में ढका एक प्राचीन देश माना जाता रहा है। इसलिए चीन को समझने और चीन के प्रति अपना तटस्थ नजरिया बनाने के लिए जरूरी है कि प्राचीन चीन से लेकर आज के चीन की मानसिकता को हम समझें । जैसे-जैसे चीन की पश्चिमी देशों से होड़ बढ़ रही है और भारत का पश्चिमी झुकाव बढ़ता जा रहा है, उस माहौल में चीन यह देखता है कि भारत चीन के खिलाफ खड़ा हो चुका है। चीन को लेकर भारत और भारतीयों की सोच में एक बहुत बड़ी रिक्तता है। चीन के समक्ष आज भारत खड़ा है, लेकिन चीन की तरह भारत भी एक सभ्यतागत देश रहा है, इसलिए भारत विश्वगुरु बनने की चीनी महत्त्वाकांक्षा में आड़े आ रहा है, लेकिन कोई नहीं कहता कि भारत और चीन के बीच सभ्यताओं का टकराव है। भारत और चीन के बीच टकराव मुख्य तौर पर विश्व पर प्रभुत्व स्थापित करने की चीनी महत्त्वाकांक्षाओं के कारण है, जिसे समझाने का प्रयास आज के दौर के ताजा प्रकरणों के संदर्भ में रंजीत कुमार ने प्रस्तुत पुस्तक में किया है।
DURACHAR SE BACHCHON KA BACHAV
- Author Name:
Mahesh Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vivekanand Aur Rashtravad
- Author Name:
Major (Dr.) Parshuram Gupt
- Book Type:

- Description: "स्वामी विवेकानंद के जन्म को डेढ़ सदी बीत चुकी है। लेकिन आज भी उनके संदेश युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं। संपूर्ण राष्ट्र के भविष्य की दिशा तय करने में भी उनके विचार निर्णायक भूमिका का निर्वहण करने की क्षमता रखते हैं। आज वेदांत-दर्शन को विज्ञान की मान्यता मिलने लगी है, जिससे स्वामीजी के विचार और भी प्रासंगिक हो गए हैं। स्वामीजी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा था कि निराशा, कमजोरी, भय, आलस्य तथा ईर्ष्या युवाओं के सबसे बड़े शत्रु हैं। उन्होंने युवाओं को जीवन में लक्ष्य निर्धारण करने के लिए स्पष्ट संदेश दिया और कहा कि तुम सदैव सत्य का पालन करो, विजय तुम्हारी होगी। आनेवाली शताब्दियाँ तुम्हारी बाट जोह रही हैं। उन्होंने कहा था कि हमें कुछ ऐसे युवा चाहिए, जो देश की खातिर अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार हों। ऐसे युवाओं के माध्यम से वे देश ही नहीं, विश्व को भी संस्कारित करना चाह रहे थे। स्वामीजी प्रखर राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे। उनका मानना था कि राष्ट्र के प्रति गौरवबोध से ही राष्ट्र का कल्याण होगा। हिंदू संस्कृति, समाजसेवा, चरित्र-निर्माण, देशभक्ति, शिक्षा, व्यक्तित्व तथा नेतृत्व इत्यादि के विषय में स्वामीजी के विचार आज अधिक प्रासंगिक हैं। स्वामीजी के संपूर्ण मानवता और राष्ट्र को समर्पित प्रेरणाप्रद जीवन का अनुपम वर्णन है—राष्ट्ररक्षा, राष्ट्रगौरव एवं राष्ट्राभिमान का पाठ पढ़ानेवाली, राष्ट्रवाद का अलख जगानेवाली इस अत्यंत जानकारीपरक पुस्तक में। "
The India Way: Parivartansheel Vishwa Mein Bharat Ki Ranneeti (Hindi Version of The India Way)
- Author Name:
S. Jaishankar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Think Like A Yogi | Ancient Indian Secrets for Long, Happy & Purposeful Life
- Author Name:
Rohit Mehra, IRS
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kiya Ankiya
- Author Name:
Purushottam Agarwal
- Book Type:

- Description: पुरुषोत्तम अग्रवाल हमारे समय की एक महत्त्वपूर्ण बौद्धिक और सर्जनात्मक उपस्थिति हैं। उनका लेखन रूप और अन्तर्वस्तु की दृष्टि से विविध और विशाल है। उनकी कई स्वतंत्र छवियाँ हैं, लेकिन कोई एक छवि नहीं है। चिन्तक, आलोचक, कवि, कथाकार, विमर्शकार, कार्यकर्ता, पत्रकार, व्यंग्यकार, प्राध्यापक, फ़िल्म-विशेषज्ञ, धर्मशास्त्री से मिलकर उनकी छवि बनती है। उनकी समग्र छवि की परख और पहचान के लिए उनके सम्पूर्ण लेखन का परिचय प्राप्त करना जितना ज़रूरी है, उतना ही कठिन भी। उनका समग्र पाठ श्रमसाध्य है, इसलिए उनकी रचनाओं का एक प्रतिनिधि चयन और प्रकाशन विलम्बित माँग थी जिसे इस संचयन के प्रकाशन से पूरा करने का प्रयास किया गया है। नवीन और प्राचीन वैश्विक वैचारिक निरूपणों और साहित्यिक सिद्धान्तों की स्पष्ट समझदारी और उनसे संवाद की प्रवृत्ति पुरुषोत्तम अग्रवाल की शक्ति है, जो उनके लेखन को निरन्तर आकर्षक और विचारोत्तेजक बनाए रखती है। इसी से उनमें बौद्धिक साहस उत्पन्न होता है, इस साहस का एक प्रमाण है अस्मितावाद की शक्ति और सीमाओं का तटस्थ व साहसपूर्ण मूल्यांकन। इसी साहस का एक और प्रमाण है—धर्म, अध्यात्म और साम्प्रदायिकता पर उनका रुख़। वे धर्म को सत्ता-तंत्र मानते हैं लेकिन आध्यात्मिकता को सहज मानवीय प्रवृत्ति के रूप में देखते हैं। कबीर, कार्ल मार्क्स, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के धर्म और अध्यात्म सम्बन्धी विचारों के आधार पर अपनी अवधारणा को तैयार करते हैं। उनकी दृढ़ मान्यता है कि धर्म का फलतः साम्प्रदायिकता का, उन्मूलन तभी सम्भव है जब आध्यात्मिकता को मानव सुलभ मानकर धर्म से उसे स्वायत्त किया जाए। पुरुषोत्तम अग्रवाल के लेखन का एक बड़ा हिस्सा भक्तिकाल पर है। ख़ास तौर पर कबीर पर। जाति, धर्म, औपनिवेशिक आधुनिकता, अस्मितावाद इत्यादि वैचारिक निरूपणों से आच्छादित कबीर के कवि रूप को सामने लाकर उन्होंने उनकी प्रासंगिकता को पुनः अनुभूत बनाया है। बौद्धिक बेचैनी, साहित्यिक अभिरुचि, सांस्कृतिक अन्तर्दृष्टि और आलोचकीय विवेक के साथ समकालीन जीवन के विविध पक्षों और प्रश्नों पर विचार करनेवाले बुद्धिजीवी विरल हैं। पुरुषोत्तम अग्रवाल की पत्रकारिता इस दृष्टि से आश्वस्तिदायक है। उनका कथा साहित्य विविध संकटों से आच्छन्न बौद्धिक-जीवन के संघर्ष और जिजीविषा को सामने लाता है। उनके साहित्य में फासीवाद के देशी संस्करण के दबाव में अभिव्यक्ति के संकट और कला-बुद्धि-विरोधी दमघोंटू वातावरण की भयावहता का एहसास मुक्तिबोध की याद दिलाता है।
Exclusive Combo set - 1
- Author Name:
Bhalchandra Nemade
- Book Type:

-
Description:
ble style="height: 163px; width: 418px;" width="334">
Bidhar Hool Jareela Jhool
Raj Kapoor (Hindi Translation of Raj Kapoor : the Master at Work)
- Author Name:
Rahul Rawail
- Book Type:

- Description: This book has no description
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book