Meri Ayodhya, Mera Raghuvansh
(0)
₹
500
₹ 400 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
हम दोनों भ्राता जब तक अपनी कुटी तक पहुँचते, तब तक अनर्थ घटित हो चुका था। हमारी कुटी रिक्त थी। भूमि पर धूलिकणों के मध्य अन्न एवं पात्र औंधे पड़े थे। 'सीते!' मैंने पुकारा, परंतु प्रत्युत्तर नहीं मिला। 'सीते!' मैंने पुन: पुकारा; पुन: प्रत्युत्तर में मुझे मौन ही प्राह्रश्वत हुआ। तत्पश्चात मैं भयभीत कुटी के प्रांगण में आया, जहाँ विशाल वटवृक्ष अवस्थित था। 'सीते! वृक्ष की आड़ में छिपकर मेरे साथ क्रीड़ा न करो। यह हास का समय नहीं है!' फिर भी मुझे कोई उत्तर नहीं मिला। अब मैं उसके पदचिन्हो को देखते हुए आगे बढऩे लगा। रथ के पहियों का चिह्नï मिलने के पश्चात् कोई अन्य चिह्नï नहीं मिला। मेरे धैर्य का सेतु टूट गया। 'देवताओ, गंधर्वो! क्या आपने भी नहीं देखा?' मैंने आकाश की ओर मुख करके भीषण गर्जना की। स्तब्ध पवनदेव ने अपना वेग मद्धिम कर दिया। उस तनावपूर्व घड़ी में देवताओं ने प्रश्नसूचक दृष्टि से गुरु बृहस्पति की ओर देखा। उन्होंने मंद-मंद मुसकराते हुए कहा, 'प्रभु लीला कर रहे हैं। आह! मेरा हृदय असंख्य शरों से बिंधा हुआ था। मैं लीला नहीं कर रहा था, वरन राम रूपी मानव काया में असहनीय वेदना का अनुभव कर रहा था। मैंने पुन: लक्ष्मण से कहा, अवश्य देखा होगा, इन वृक्षों ने, इन लताओं ने, इन पक्षियों ने, इन मृगों ने...। यह कहते हुए मैंने कदंब, अर्जुन, ककुभ, तिलक, अशोक, ताल, जामुन, कनेर, कटहल, अनार आदि अनेक वृक्षों से पूछा, क्या तुमने मेरी भार्या सीता को कहीं देखा है? परंतु वे सभी मौन रहे। —इसी पुस्तक से
Read moreAbout the Book
हम दोनों भ्राता जब तक अपनी कुटी तक पहुँचते, तब तक अनर्थ घटित हो चुका था। हमारी कुटी रिक्त थी। भूमि पर धूलिकणों के मध्य अन्न एवं पात्र औंधे पड़े थे।
'सीते!' मैंने पुकारा, परंतु प्रत्युत्तर नहीं मिला।
'सीते!' मैंने पुन: पुकारा; पुन: प्रत्युत्तर में मुझे मौन ही प्राह्रश्वत हुआ।
तत्पश्चात मैं भयभीत कुटी के प्रांगण में आया, जहाँ विशाल वटवृक्ष अवस्थित था।
'सीते! वृक्ष की आड़ में छिपकर मेरे साथ क्रीड़ा न करो। यह हास का समय नहीं है!' फिर भी मुझे कोई उत्तर नहीं मिला।
अब मैं उसके पदचिन्हो को देखते हुए आगे बढऩे लगा। रथ के पहियों का चिह्नï मिलने के पश्चात् कोई अन्य चिह्नï नहीं मिला। मेरे धैर्य का सेतु टूट गया।
'देवताओ, गंधर्वो! क्या आपने भी नहीं देखा?' मैंने आकाश की ओर मुख करके भीषण गर्जना की। स्तब्ध पवनदेव ने अपना वेग मद्धिम कर दिया।
उस तनावपूर्व घड़ी में देवताओं ने प्रश्नसूचक दृष्टि से गुरु बृहस्पति की ओर देखा। उन्होंने मंद-मंद मुसकराते हुए कहा, 'प्रभु लीला कर रहे हैं।
आह! मेरा हृदय असंख्य शरों से बिंधा हुआ था। मैं लीला नहीं कर रहा था, वरन राम रूपी मानव काया में असहनीय वेदना का अनुभव कर रहा था।
मैंने पुन: लक्ष्मण से कहा, अवश्य देखा होगा, इन वृक्षों ने, इन लताओं ने, इन पक्षियों ने, इन मृगों ने...। यह कहते हुए मैंने कदंब, अर्जुन, ककुभ, तिलक, अशोक, ताल, जामुन, कनेर, कटहल, अनार आदि अनेक वृक्षों से पूछा, क्या तुमने मेरी भार्या सीता को कहीं देखा है?
परंतु वे सभी मौन रहे।
—इसी पुस्तक से
Book Details
-
ISBN9789355214430
-
Pages328
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
The Retribution and Other Stories
- Author Name:
Tusar Kanti De
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bindas Baboo Ki Diary
- Author Name:
Sudhish Pachauri
- Book Type:

- Description: यहाँ ‘बिंदास बाबू की डायरी’, क्रमिक देने के दो-तीन मन्तव्य हैं। एक तो यही कि वे डेढ़-दो महीने, जब भारतीय जनता ने अपने वोट से सत्ता में रहकर इतराई हिन्दुत्ववादी-अवसरवादी ब्रिगेड को सत्ता से वंचित कर डाला, उस दौर की दैनिक बड़ी घटनाओं की ख़बर लेते हुए, उनका एक प्रकार का रोज़नामचा-सा तैयार करना स्वयं इस लेखक के लिए एक ख़ास अनुभव रहा है। इस अनुभव को बाँटना ज़रूरी लगा। वे लोग जो रेडियो माध्यम को गम्भीरता से लेते हैं, उसमें कुछ करना चाहते हैं, शायद वे इस तरह की दैनिक तुरन्ता कटाक्ष-वार्ताओं के लेखन के नमूने देख सकें। इस प्रक्रिया में काम करनेवाले अनुभवों को पहचान सकें और इस अनमोल रेडियो विद्या को थोड़ा और समृद्ध बना सकें। दूसरा मन्तव्य यह समझना-समझाना रहा कि इस तरह दैनिक क़िस्म का, क्षणिक-सा, बेहद टाइट समय के भीतर जो चलित वृत्तान्त बनता है, वह किन दबावों, तनावों, भाषायी क्षमता और प्रत्युत्पन्नमति की, इंप्रोवाइजेशन की ज़रूरतों की दरकार रखता है? और फिर यह जताना-बताना भी ज़रूरी है कि बीबीसी रेडियो सेवा एक बेहद पॉपुलर, प्रयोगधर्मी सेवा भी है, जो अपने को अग्रणी रखने के लिए चुनौती-भरे प्रयोग कर सकता है। आल इंडिया रेडियो यानी आकाशवाणी वार्ताकार को क्या इतनी छूट दे सकता है? एफ़एम चैनलों पर प्रस्तुतियों में कुछ चैनल टपोरी भाषा का उपयोग करते हैं, उसमें सेक्सी व्यंजनाएँ या लंपट व्यंजनाएँ ज़्यादा होती हैं। वे कमज़ोर पर हँसते हैं। ताक़तवर पर नहीं हँसते। वे बॉलीवुड से मज़ाक़ कर लेते हैं ताकि ‘प्रमोट’ कर सकें। लेकिन वे सत्तावादी राजनीतिक विमर्श का मज़ाक़ सीधे-सीधे नहीं उड़ा सकते। बीबीसी यह कर सकता है। यह देख तोष होता है कि रेडियो प्रसारण में उससे बहुत कुछ सीखा जा सकता है। सत्तावादी राजनीतिक विमर्श पर केन्द्रित ये व्यंग्य-वार्ताएँ पाठकों के लिए इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं कि कुछ नया जानने-समझने को नए द्वार खोलती हैं।
Bihar STET Secondary Teacher Eligibility Test | Higher Secondary Class (PGT) Paper-II (Class 11 & 12) Hindi 15 Practice Sets Book in Hindi
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharat Ki Pragati Mein Incois Ke Rajat Varsh "भारत की प्रगति में इंकॉइस के रजत वर्ष" Book in Hindi
- Author Name:
Dr. D.D. Ozha +1
- Book Type:

- Description: मानव समाज सदा से ही सागर से प्रभावित होता रहा है और अनादिकाल से ही महासागरों का कई तरीकों से उपयोग करता रहा है । महासागर हमारे लिए कुबेर हैं क्योंकि ये अनेक संसाधनों, जैसे खनिज (धातुएँ, तेल, प्राकृतिक गैस, रसायन, नमक आदि), भोजन (मछली, झींगुर, लॉबस्टर आदि), ऊर्जा (तरंग, जलधाराएँ, ज्वार-भाटा आदि) तथा औषधियों के अनंत भंडार हैं । इंकॉइस ने समुद्री विज्ञान में अनुसंधान परिणाम / ज्ञान के अनुवादकीय अनुप्रयोग पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे मछुआरों, नाविकों, बंदरगाह व पोताश्रय, भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और सामुद्रिक उद्योग के उपयोग के लिए सरल उत्पाद तैयार किए जा सकें । इस जनोपयोगी पुस्तक में समुद्र का महत्त्व, इंकॉइस का परिचयात्मक विवेचन इसके उद्देश्य, अनेकानेक क्षेत्रों में प्रदान की जा रही जनोपयोगी सेवाएँ, महासागर मॉडलिंग और अनुसंधान, महासागरीय प्रेक्षण, इंकॉइस का अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य, इंकॉइस प्रौद्योगिकी का प्रचार-प्रसार आदि महत्त्वपूर्ण विषयों पर जनोपयोगी तकनीकी जानकारी प्रदान करने का सुप्रयास किया गया है, जिससे सुधी पाठकगण लाभान्वित हो सकें।
Journey of Circus: 10 Steps To Personal Mastery
- Author Name:
Nishesh Garg
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Refugee Dilemma
- Author Name:
V. Suryanarayan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharat Mujhmein Basta Hai
- Author Name:
Aradhana Jha Shrivastava
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
LOKKATHAYEN BIHAR KI
- Author Name:
SAKSHAM
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Emergency ka Kahar aur Censor ka Zahar
- Author Name:
Balbir Dutt
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kahaniyon Ki Lata "कहानियों की लता" Book in Hindi
- Author Name:
Lata Kadambari
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sugam Hindi
- Author Name:
Ramvachan Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Stree-Adhikaron Ka Auchitya-Sadhan
- Author Name:
Meri Volsatanakrafta
- Book Type:

-
Description:
मेरी की यह सर्वप्रमुख कृति 1792 में प्रकाशित हुई। प्रकाशित होने के साथ ही इसकी ख्याति इंग्लैंड के बाहर पूरे यूरोप में और अमेरिका तक में फैल गई। मेरी ने इस कृति में प्रबोधनकाल की तर्कणा और बुर्जुआ क्रान्ति के ‘स्वतंत्रता-समानता-भ्रातृत्व’ के सिद्धान्तों को स्त्री-समुदाय के ऊपर भी समान रूप से लागू करते हुए स्पष्ट शब्दों में यह स्थापना दी कि कोई भी समतावादी सामाजिक दर्शन तब तक वास्तविक अर्थों में समतावादी नहीं हो सकता, जब तक कि वह स्त्रियों को समान अधिकार और अवसर देने की तथा उनकी हिफ़ाज़त करने की हिमायत नहीं करता। इस स्मारकीय कृति में मेरी वोल्सटनक्राफ़्ट ने ‘शिक्षा की कपटपूर्ण और कृत्रिम प्रणाली’ की निर्भीक-विध्वंसक आलोचना प्रस्तुत करते हुए यह तर्क दिया है कि यह मध्यवर्ग की स्त्रियों को ‘नारीत्व’ (फ़ेमिनिनिटी) के मिथ्याभासी दमघोंटू आदर्शों के दायरे में जीने के लिए तैयार करती है। शैशवावस्था से ही उन्हें यह शिक्षा दी जाती है कि ‘सौन्दर्य स्त्रियों का राजदंड होता है, कि दिमाग़ शरीर के हिसाब से अपने को ढालता है (यानी शारीरिक भिन्नता के चलते स्त्रियों का दिमाग़ भी अ़लग क़िस्म का होता है), और अपने स्वर्णजड़ित पिंजरे में चक्कर काटते हुए वे अपनी जेल को पसन्द करना सीख जाती हैं।’
मेरी वोल्सटनक्राफ़्ट ने अपने समाज के उग्र पुरुष-वर्चस्ववादी, रूढ़िवादी परिवेश में स्त्रियों को ‘तर्कपरक प्राणी’ के रूप में सम्बोधित करने का साहस किया और ऐसे व्यापकतर मानवीय आदर्शों का आकांक्षी बनने के लिए उनका आह्वान किया जिनमें अनुभूति के साथ तर्कणा और स्वतंत्रता के अधिकार का संश्लेषण हो।
Footprints of Childhood in the Dust | Chandrakant Sheth
- Author Name:
Chandrakant Sheth
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mahathag Natwarlal "महाठग नटवरलाल" | Sensational Story of Vicious Who Sold The Taj Mahal Three Times | Book in Hindi
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Financial Freedom Thru Miracle Of S.I.P.
- Author Name:
Mahesh Chandra Kaushik
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Uttari Bharat Ki Sant Parampara
- Author Name:
Parshuram Chaturvedi
- Book Type:

-
Description:
‘उत्तरी भारत की सन्त-परम्परा’ कृति आचार्य परशुराम चतुर्वेदी की साहित्यिक साधना की वह अनन्यतम प्रस्तुति है, जिसके समानान्तर आज कई दशक बाद भी हिन्दी साहित्य के अन्तर्गत वैसी कोई दूसरी रचना सामने नहीं आ सकी है। सन्त साहित्य के उद्भव से जुड़े अनेक प्रक्षिप्त मतों का खंडन करते हुए उसके मूल प्रामाणिक प्रेरणास्रोतों को प्रकाश में लाकर चतुर्वेदी जी ने उसकी अखंडता का जो अपूर्व परिचय प्रस्तुत किया है, वह हमारी साहित्यिक मान्यताओं से जुड़ी शोध-परम्परा का सर्वमान्य ऐतिहासिक साक्ष्य है।
परवर्ती काल में यह सन्त साहित्य उत्तर भारत के बीच पर्याप्त रूप से समृद्ध हुआ, किन्तु इसके प्रेरणासूत्र समग्र भारतीयता से सम्बद्ध है। महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, ओड़िसा, बंगाल, आसाम, पंजाब आदि राज्यों में फैले हुए इसके प्रारम्भिक तथा परवर्ती सूत्र इस तथ्य के प्रमाण हैं कि यह जन-आन्दोलन के रूप में समग्र भारतीय लोकजीवन से जुड़ा रहा है। सन्त नामदेव, ज्ञानदेव, नानक, विद्यापति, कबीरदास, दादू आदि सन्तों ने अपनी सन्तवाणी से समग्र भारत की एकता, अखंडता को जोड़ते हुए हमें अन्धविश्वासों एवं रूढ़ मान्यताओं से मुक्त किया है। आचार्य परशुराम चतुर्वेदी की यह कृति इन तथ्यों की प्रस्तुति का सबसे प्रामाणिक और सबसे सशक्त दस्तावे़ज़ है।
आचार्य चतुर्वेदी की इस ऐतिहासिक धरोहर को पुन: समक्ष रखते हुए हम गर्व का अनुभव करते हैं और आशा करते हैं कि पाठक समाज इसे पूर्ववत् निष्ठा के साथ स्वीकार करेगा।
Pakshiyon Ki Ashcharyajanak Baaten
- Author Name:
Lalit Narain Upadhyaya
- Book Type:

- Description: This book does not have any description.
Bharat Ke Sankatgrast Vanya Prani
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

- Description: हम इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकते कि किसी दिन इस धरती पर केवल मानव जाति का अस्तित्व होगा। पशु–पक्षियों व अन्य जीवधारियों की असंख्य प्रजातियों और वनस्पतियों की अगणित क़िस्मों के अभाव में क्या इस सृष्टि में जीवन को बचाए रखना सम्भव होगा। सच्चाई तो यह है कि सृष्टि एक अखंड इकाई है। चराचर की पारस्परिक निर्भरता ही जीवन का मूल मंत्र है। यदि किसी कारण से जीवन–चक्र खंडित होता है तो इसके भीषण परिणाम हो सकते हैं। ‘भारत के संकटग्रस्त वन्य प्राणी’ में प्रसिद्ध लेखक गुणाकर मुळे ने ऐसे प्राणियों की चर्चा की है जो विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्होंने अनेक ऐसे प्राणियों का ज़िक्र किया है जिन्हें अब इस धरती पर कभी नहीं देखा जा सकता। विगत दशकों में 36 प्रजातियों के स्तनपायी प्राणी और 94 नस्लों के पक्षी प्रकृति के अंधाधुंध शोषण के कारण नष्ट हो चुके हैं। लेखक की चिन्ता यह है कि यदि इसी प्रकार हिंसा, लालच और अतिक्रमण का दौर चलता रहा तो इस ख़ूबसूरत दुनिया का क्या होगा! यह असन्तुलन विनाशकारी होगा। लेखक के अनुसार, ‘हमारे देश में प्राचीन काल से वन्य प्राणियों के संरक्षण की भावना रही है। हमारी सभ्यता और संस्कृति में वन्य प्राणियों के प्रति प्रेम-भाव रहा है। इसलिए हमारे समाज में वन्य जीवों को पूज्य माना जाता है। वन्य जीवों तथा पक्षियों को मुद्राओं और भवनों पर भी चित्रित किया जाता रहा है।’ हमें आज इस भाव को नए सन्दर्भों में विकसित करना होगा। वन्य प्राणी संरक्षण के लिए बनाए गए अधिनियमों से अधिक आवश्यकता व्यापक नागरिक चेतना की है। गुणाकर मुळे ने सहज, सरल भाषा में इस आवश्यकता को रेखांकित किया है। अनेक चित्रों से सुसज्जित यह पुस्तक पर्यावरण के प्रति जागरूकता निर्माण के लिए बहुत ही उपयोगी है। हर आयु के पाठकों के लिए एक पठनीय पुस्तक।
Surili Bansuri
- Author Name:
Arzoo Lakhnavi
- Book Type:

- Description: आरज़ू लखनवी की ये किताब 'सुरीली बाँसुरी', शायरी में उस भाषाई प्रयोग को दोबारा अमल में लाने की सूरत है, जिसमें अरबी, फ़ारसी, तुर्की वग़ैरा बाहरी भाषाओं का एक भी लफ़्ज़ न हो। आरज़ू लखनवी ने इस किताब को आम ज़बान में नहीं बल्कि ज़बान से चुने गए उन लफ़्ज़ों में लिखा है, जिसका नाम ख़ालिस (शुद्ध) उर्दू है। ये नायाब किताब इस बात को साबित करती है कि उर्दू में ग़ज़ल कहने के लिए लुग़त के अलफ़ाज़ और भारी-भरकम बन्दिशों की ज़रुरत नहीं।
Inspiration
- Author Name:
Rajesh Aggarwal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book