Jaishankar Prasad Ki Lokpriya Kahaniyan
About the book
"जयशंकर प्रसाद की श्रेष्ठ कहानियाँ महान् कथाकार और हिंदी साहित्य जगत् में कहानी को एक संपूर्ण विधा के रूप में स्थापित करनेवाले श्री जयशंकर प्रसाद का योगदान अविस्मरणीय है। कहानी के क्षेत्र में प्रसादजी के पाँच कथा-संग्रह प्रकाशित हुए-‘छाया’, ‘प्रतिध्वनि’, ‘आकाशदीप’, ‘आँधी’ तथा ‘इंद्रजाल’। इन पाँचों कहानी संग्रहों में प्रसादजी की कुल 70 कहानियाँ प्रकाशित हईं। इन कहानियों में मानव-जीवन के प्रत्येक पहलू को प्रदर्शित किया गया है। करुणा, वात्सल्य के अतिरिक्त पारिवारिक संबंधों की गहराई तक पहुँचने का प्रयास प्रसादजी ने अपनी कहानियों में बखूबी किया है। शौर्य और वीरता की भी झलक उनकी कहानियों में स्पष्ट दिखाई पड़ती है। काव्य, नाटक, कथा-साहित्य, आलोचना, दर्शन, इतिहास सभी क्षेत्रों में उनकी प्रतिभा अद्वितीय रही। ‘कामायनी’ जैसे महाकाव्य; ‘चंद्रगुप्त’, ‘स्कंदगुप्त’, ‘अजातशत्रु’ जैसे नाटक; ‘कंकाल’, ‘तितली’ जैसे उपन्यास तथा अनेक विशिष्ट कहानियाँ उनकी रचनात्मक दृष्टि को सार्थक करती हैं। प्रस्तुत संग्रह में जयशंकर प्रसाद की चुनी हुई प्रसिद्ध कहानियाँ प्रस्तुत की गई हैं, ताकि ऐसे महान् साहित्यकार की रचनाएँ पाठकों के बीच अधिक-से-अधिक पहुँचें और वे इनका भरपूर लाभ उठाएँ।
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About the Book
"जयशंकर प्रसाद की श्रेष्ठ कहानियाँ
महान् कथाकार और हिंदी साहित्य जगत् में कहानी को एक संपूर्ण विधा के रूप में स्थापित करनेवाले श्री जयशंकर प्रसाद का योगदान अविस्मरणीय है। कहानी के क्षेत्र में प्रसादजी के पाँच कथा-संग्रह प्रकाशित हुए-‘छाया’, ‘प्रतिध्वनि’, ‘आकाशदीप’, ‘आँधी’ तथा ‘इंद्रजाल’। इन पाँचों कहानी संग्रहों में प्रसादजी की कुल 70 कहानियाँ प्रकाशित हईं। इन कहानियों में मानव-जीवन के प्रत्येक पहलू को प्रदर्शित किया गया है। करुणा, वात्सल्य के अतिरिक्त पारिवारिक संबंधों की गहराई तक पहुँचने का प्रयास प्रसादजी ने अपनी कहानियों में बखूबी किया है। शौर्य और वीरता की भी झलक उनकी कहानियों में स्पष्ट दिखाई पड़ती है।
काव्य, नाटक, कथा-साहित्य, आलोचना, दर्शन, इतिहास सभी क्षेत्रों में उनकी प्रतिभा अद्वितीय रही। ‘कामायनी’ जैसे महाकाव्य; ‘चंद्रगुप्त’, ‘स्कंदगुप्त’, ‘अजातशत्रु’ जैसे नाटक; ‘कंकाल’, ‘तितली’ जैसे उपन्यास तथा अनेक विशिष्ट कहानियाँ उनकी रचनात्मक दृष्टि को सार्थक करती हैं।
प्रस्तुत संग्रह में जयशंकर प्रसाद की चुनी हुई प्रसिद्ध कहानियाँ प्रस्तुत की गई हैं, ताकि ऐसे महान् साहित्यकार की रचनाएँ पाठकों के बीच अधिक-से-अधिक पहुँचें और वे इनका भरपूर लाभ उठाएँ।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Prabhat Prakashan
- Weight
- 200 grams
- ISBN-13
- 9789380823379
- Pages
- 160
- Reading time
- ~5 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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Jaishankar Prasad Ki Lokpriya Kahaniyan assembles the complete arc of a writer who redefined what the Hindi short story could achieve. Across five collections—Chhaya, Pratidwani, Akashdip, Aandhi, and Indrajal—Prasad crafted 70 narratives that move beyond plot into the emotional architecture of relationships: the silence between a father and son, the unspoken weight of sacrifice, the fractures within joint families. His prose does not announce sentiment; it earns it through restraint and psychological precision. Where early 20th-century Hindi fiction often moralized, Prasad observed—capturing the inner lives of women, the clash between duty and desire, the loneliness within kinship. This collection is not a greatest-hits parade but a complete record of a mind that gave Hindi fiction its psychological vocabulary, its capacity for ambiguity, and its claim to serious literary attention.
जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ पढ़ना कैसा अनुभव होता है?
प्रसाद की कहानियाँ मन को ठहराव और गहराई देती हैं। ये कहानियाँ भावनाओं को चीखती नहीं, बल्कि धीरे-धीरे उजागर करती हैं—जैसे परिवार में कही न गई बातें, रिश्तों का मौन दर्द, और मानवीय कमजोरियों की समझ। पाठक को विचार करने की जगह मिलती है, न कि तुरंत निष्कर्ष। यह अनुभव संवेदनशील और बौद्धिक दोनों है।
Jaishankar Prasad Ki Lokpriya Kahaniyan किस तरह के पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त हैं?
- जो पाठक मनोविज्ञान और रिश्तों की बारीकियों को समझना पसंद करते हैं
- हिंदी कथा-साहित्य के विकास और छायावाद युग को जानने की इच्छा रखने वाले
- जो तेज़ कथानक के बजाय चरित्र-चित्रण और भाषा की संयमित सुंदरता को महत्व देते हैं
- साहित्यिक परंपरा में गहरी रुचि रखने वाले गंभीर पाठक
आज के भारतीय पाठकों के लिए इन Jaishankar Prasad Ki Lokpriya Kahaniyan का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
प्रसाद ने 20वीं सदी के शुरुआती दशकों में संयुक्त परिवार, पितृसत्ता, और स्त्री-पुरुष संबंधों की जटिलताओं को उस तरह पकड़ा जो आज भी प्रासंगिक है। आधुनिक भारतीय परिवारों में आज भी वही चुप्पियाँ, वही अनकहे संघर्ष मौजूद हैं। ये कहानियाँ हमें दिखाती हैं कि भावनात्मक संरचनाएँ कालजयी होती हैं—बदलती सामाजिक परिस्थितियों में भी।
प्रसाद का इन विषयों को संभालने का तरीका क्या विशिष्ट बनाता है?
प्रसाद ने हिंदी कहानी को नैतिक उपदेश से मुक्त कर मनोवैज्ञानिक यथार्थ सामने रखा। वे पात्रों को न्याय नहीं देते, उन्हें समझते हैं—उनकी कमजोरियाँ, उनके अंतर्विरोध, उनकी मजबूरियाँ। उनकी भाषा संयमित और काव्यात्मक है, लेकिन कभी-कभी अलंकृत नहीं है। यह संतुलन—करुणा और निष्पक्षता का—उन्हें अलग खड़ा करता है।
Jaishankar Prasad Ki Lokpriya Kahaniyan पुस्तक पाठक के मन में लंबे समय तक क्या छोड़ जाती है?
यह पुस्तक पाठक को रिश्तों की जटिलता को स्वीकार करने की क्षमता देती है—यह समझ कि प्यार, कर्तव्य और त्याग में कोई सीधा उत्तर नहीं होता। यह भावनात्मक परिपक्वता और सांस्कृतिक जड़ों की गहरी पहचान को छोड़ती है। पाठक प्रसाद की मानवीय दृष्टि—उनकी करुणा, उनकी निर्णय से दूरी—को अपने भीतर महसूस करता रहता है।
