BPSC Bihar Primary School (Special) Teacher Eligibility Test Sakshamta Pariksha Class 1- 5 | 20 Practice sets (Hindi)
(0)
₹
395
₹ 316 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789354889707
-
Pages344
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Amar Bal Kahaniyan
- Author Name:
Shriramvriksha Benipuri
- Book Type:

- Description: "अमर बाल कहानियाँ “देवी बलिदान माँग रही है, जो सिर देना चाहे वह आगे बढ़े! बढ़ो!! बढ़ो!!” एक सिख बढ़ता है! यह कौन? अरे-यह तो वह आदमी है, जिसे कल तक हम छोटी जाति का होने के कारण अपने से छोटा समझ रहे थे। वह आगे बढ़ा, तंबू के भीतर गया। तलवार का ‘छप’ सा शब्द हुआ, फिर खून की धारा तंबू के भीतर से निकलकर बाहर की जमीन को सींचने लगी। “हाँ-हाँ, देवी बलिदान माँग रही है, दूसरा कौन है,—वह आगे बढ़े—बढ़ो! बढ़ो!!” एक दूसरा बढ़ा, उसी की तरह का मामूली आदमी। फिर तंबू में ‘छप-छप’ शब्द, फिर खून की लाल धारा। फिर गुरु की ललकार—तीसरा बढ़ा, चौथा बढ़ा, पाँचवाँ बढ़ा, छठा बढ़ा, सातवाँ बढ़ा—तंबू से निकली खून की धारा मोटी होती जा रही है—सामने की जमीन लाल-लाल हो रही है। “बस अब नहीं—देवी खुश हो गई। बोलो—सत्य श्री अकाल। वाहे गुरुजी का खालसा, वाह गुरुजी की फतह!” और यह क्या, वे सातों शहीद वीर भी तंबू से बाहर खड़े मुसकरा रहे हैं। क्या ये जी उठे? हाँ, जी उठे! आओ, सभी अमृत पीओ। शहादत का अमृत पीओ, सिंह बनो, सिंह। आज से सभी सिंह कहलाएँगे! सिंह-सिंह के सामने कोई आदमी क्या खाकर टिक सकता है। —इसी संकलन से प्रसिद्ध लेखक श्रीरामवृक्ष बेनीपुरी की प्रभावशाली बाल रचनाओं का संकलन, जो बालमन को गुदगुदाए व हँसाए बिना न रहेगा। "
Utter-Oudhyogik Samaj Evem Sanskriti : Vimarsh Ke Aayam
- Author Name:
Ed. Hemant Kumar Jha
- Book Type:

- Description: Discourse
"कातिल कौन?" Quatil Kaun? Book in Hindi by Dr. Anand Ranganathan
- Author Name:
Dr. Anand Ranganathan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bahar Main Main Andar
- Author Name:
Amit Srivastava
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dr. Ambedkar and Nationalism
- Author Name:
Basant Kumar
- Book Type:

- Description: The ideas of Bharat Ratna Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar, the architect of the Constitution of India, have always been distorted by the people involved in the Left and minority alliance, and the Congress. Due to their personal interests, they always presented Babasaheb as a leader of the downtrodden and Dalits. They tried to portray him as if he nowhere contributed to the upliftment and development of the country. Today these separatists want to spread unrest in the country on the pretext of a Dalit-Muslim alliance. Realising these things, Dr. Ambedkar talked about the complete transfer of the Hindu and Muslim populations in the event of the partition of the country in 1940. He gave Constitution to the country which is still protecting the integrity and unity of the country. He opposed Article 370 in the Constitution, but it was added because of Nehru's love for particular community. As a research student of Economics, he gave the idea of the Reserve Bank of India and the Finance Commission. As the Law Minister of the country, he prepare Hindu Code Bill, to paved the way for women’s empowerment and the right of women to inherit ancestral property. This book is an attempt to bring to light the nationalist thoughts of Dr. Babasaheb Ambedkar and protray his contribution to the development of the nation.
100 Modi Mantra Hindi Translation Of 100 Modi Mantras: A Decade of India's Uprising
- Author Name:
Shankar Lalwani
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Gadya Ki Pahchan
- Author Name:
Arun Prakash
- Book Type:

- Description: अरुण प्रकाश ने स्पष्ट किया है कि हिंदी में किस तरह 'विधा' का इस्तेमाल 'फॉर्म' और 'जेनर' दोनों अर्थों के लिए होता है। उनके अनुसार उपन्यास एक रूपबंध है जिसकी कई विधाएँ हो सकती हैं। मुख्य बात है, विधाओं या रूपबंधों की सैद्धांतिक कहानी उद्ïघाटित करना, जो 'गद्य की पहचान' में बड़े विस्तार और रोचक ढंग से है। पश्चिम के साहित्यिक सिद्धांतकारों ने फॉर्म और जेनर पर बड़े-बड़े काम किए हैं। मेरे देखने में हिंदी में इधर इस ढंग का यह पहला काम है, जिसमें कुछ बुनियादी सवाल उठाए गए हैं। इस संग्रह के निबंधों में अरस्तू से लेकर बाख्तिन, रोलां बार्थ, तोदोरोव, देरिदा आदि तक के विचारों पर चर्चा है। यह जानने की चीज है कि आखिरकार कोई रूपबंध क्यों अस्तित्व में आता है, किसी युग में कुछ खास रूपबंध या विधाएँ प्रधान क्यों हो उठती हैं, जीवनी जैसा प्राचीन रूपबंध अब भी क्यों जीवित है, जबकि महाकाव्य जैसा शक्तिशाली रूपबंध मर गया, क्या इस रूपबंध की कुछ सीमाएँ और नियम हैं, मिश्रण या संकरता क्यों घटित होती है, क्या नए रूपबंध या विधाएँ पुरातन के ही कायांतर हैं, चिर-परिचित रूपबंध पाठकीय मनोविज्ञान पर कैसा प्रभाव डालते हैं, साहित्यकार किसी रूपबंध से कितना रेजिमेंटेड होता है और कितना उसे तोड़कर नई जमीन देता है—अरुण प्रकाश ने ऐसे ढेरों प्रश्नों की रोशनी में गद्य की पहचान की है। शंभुनाथ (भूमिका से)
Cultural Marxism: The War On Consciousness
- Author Name:
Dr. Niranjan B. Poojar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
ABHINAV BINDRA
- Author Name:
Gagandeep
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Speed Calculation Hindi Translation of ‘Maths Sootra' Vedic Maths Achieve Immense Success In Mathematics
- Author Name:
Gaurav Tekriwal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Fijeedvip Mein Mere 21 Varsh
- Author Name:
Totaram Sanadhya
- Book Type:

- Description: ब्रिटिशकालीन भारतीय पराधीनता का एक त्रासद अध्याय है गिरमिटिया। गिरमिटिया यानी एग्रीमेंट के तहत देश के बाहर कुलीगीरी करने के लिए जबरन भेजा जाना। भूख, बेरोजगारी, उत्पीड़न या गृह कलह के चलते घर-परिवार छोड़नेवाले स्त्री-पुरुषों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें झाँसा देकर अज्ञात देश में भेज देना। सन् 1879 से लेकर सन् 1916 तक 60553 भारतीय ‘गिरमिटिया’ बनाकर फिजीद्वीप भेजे जा चुके थे। इन अभिशप्त भारतीयों के शापमोचन के लिए जो लोग आगे आये उनमें एक नाम था पण्डित तोताराम सनाढ्य का। कौन थे ये तोतारामजी? क्या रिश्ता बनता था उनका फिजी से और गिरमिटिया भारतीयों से? परदुखकातर एक सामान्य भारतीय जिन्होंने खुद इक्कीस वर्षों तक गिरमिटिया की यातना-भरी जिन्दगी जी; मुक्ति संघर्ष का आगाज किया। यूँ तो ‘गिरमिटिया’ प्रथा पर प्रेमचन्द और प्रसाद समेत कई दिग्गजों ने लिखा है पर स्वयं का भोगा हुआ सच सिर्फ और सिर्फ तोताराम सनाढ्य का ही है। इतिहास के अध्येताओं से लेकर आम पाठकों तक के लिए जानकारियों से भरी एक रोचक और जरूरी किताब!
Commentary on the Constitution of India
- Author Name:
Dr. P.K. Agrawal +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jal Sankat Aur Jal Sangrah
- Author Name:
Mukesh Kumar
- Book Type:

- Description: पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। कहा जाने लगा है कि तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो बहुत ही सम्भव है कि वह पानी को लेकर ही हो। शहरी इलाक़ों में पानी की कमी और उसके लिए रोज़-रोज़ होनेवाले स्थानीय झगड़े शायद इसी की बानगी हैं। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में जल-स्तर न सिर्फ़ नीचे जा रहा है, पेयजल के रूप में उसका उपयोग भी ख़तरनाक होता जा रहा है। जनसंख्या के साथ-साथ जहाँ पानी की आवश्यकता बड़े पैमाने पर बढ़ी है, वहीं जल-संग्रहण की पारम्परिक पद्धतियों को भी हमने भुला दिया है, जितना जल उपलब्ध है, वह बढ़ते शहरीकरण के परिणामस्वरूप प्रदूषण का शिकार है। आँकड़े बताते हैं कि इस समय देश में रोज़ छह हज़ार से ज़्यादा लोग दूषित जल से पैदा होनेवाली बीमारियों से मर जा रहे हैं। यह पुस्तक इस विकराल संकट से निबटने के लिए एक आरम्भिक ढाँचा सुझाती है जिसका उपयोग हम जल-संरक्षण, और सामान्यत: पानी के प्रति अपना आधारभूत दृष्टिकोण बदलने में कर सकते हैं। वर्षा जल के संग्रहण की पुरानी और नई प्रविधियों, इसके साथ भू-जल स्रोतों की सम्यक् सार-सँभाल, जल-अपव्यय को रोकने की ज़रूरत तथा तरकीबें, सूखे इलाक़ों में जल-संचयन की वैज्ञानिक पद्धति, विभिन्न क़िस्म के बाँधों, कुँओं, तालाबों के निर्माण सम्बन्धी जानकारी, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, आपूर्ति और वितरण की समस्या और कृषि-उपयोग के लिहाज़ से जल-प्रबन्ध, इन तमाम विषयों पर यह पुस्तक अद्यतन और वैज्ञानिक सामग्री उपलब्ध कराती है।
Hamare Shri Guruji
- Author Name:
Sandeep Dev
- Book Type:

- Description: "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना सन् 1925 में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी, लेकिन इसे वैचारिक आधार द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘श्रीगुरुजी’ ने प्रदान किया था। संघ निर्माण के मात्र पंद्रह साल बाद ही डॉ. हेडगेवार गुजर गए, लेकिन अवसान से पहले उन्होंने श्रीगुरुजी को संघ का द्वितीय सरसंघचालक नियुक्त कर दिया था। द्वितीय विश्वयुद्ध, भारत छोड़ो आंदोलन, आजाद हिंद फौज और नेताजी का देश की आजादी में योगदान, भारत विभाजन, देश की आजादी, कश्मीर विलय, गांधी हत्या, देश का पहला आम चुनाव, चीन से भारत की हार, पाकिस्तान के साथ 1965 व 1971 की लड़ाई—भारत का इतिहास बदलने और बनाने वाली इन घटनाओं के महत्त्वपूर्ण काल में न केवल श्रीगुरुजी संघ के प्रमुख थे, बल्कि अपनी सक्रियता और विचारधारा से उन्होंने इन सबको प्रभावित भी किया था। तत्कालीन भारतवर्ष के इतिहास में समादृत एक आध्यात्मिक पुरुष ही नहीं, सामाजिक, सांस्कृतिक, जीवन-मूल्यों के प्रसारक के रूप में ख्यात ‘श्रीगुरुजी’ की प्रामाणिक जीवन-गाथा।
Kumbh : Manthan Ka Mahaparva
- Author Name:
Sanjay Chaturvedi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Towards Quality Education in India
- Author Name:
Dr. Binodanand Jha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Renu Ka Janpad
- Author Name:
Gajendra Pathak
- Book Type:

- Description: Criticism
Yashasvi Bharat (PB)
- Author Name:
Mohan Bhagwat
- Book Type:

- Description: "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक ऐसा सांस्कृतिक संगठन है, जिसके लाखों समर्पित स्वयंसेवक राष्ट्र-निर्माण में लगे हैं और भारत को परम वैभव संपन्न बनाने के लिए कृतसंकल्पित हैं। परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने सन् 1925 की विजयादशमी को इसी उद्देश्य से संघ की स्थापना की। समर्पित भाव से व्यक्ति-निर्माण के महती कार्य को लक्षित कर संघ के स्वयंसेवक देश-समाज के प्रायः सभी क्षेत्रों—सेवा, विद्या, चिकित्सा, छात्र, मजदूर, राजनीति—में ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ के मूलमंत्र को जीवन का ध्येय मानकर प्राणपण से जुटे हैं। संघ दुनिया में अपनी तरह का अकेला संगठन है। पिछले कुछ समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को निकट से जानने और गहराई से समझने की जिज्ञासा बढ़ी है। संघ के छठे और वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत के विचारों पर आधारित यह पुस्तक इस दिशा में दीपशिखा का काम करेगी। यह पुस्तक अलग-अलग अवसरों पर दिए उनके व्याख्यानों का संग्रह है। ‘हिंदुत्व का विचार’, ‘भारत की प्राचीनता’, ‘हमारी राष्ट्रीयता’, ‘समाज का आचरण’, ‘स्त्री सशक्तीकरण’, ‘विकास की अवधारणा’, ‘अहिंसा का सिद्धांत’, ‘बाबा साहेब आंबेडकर’ और ‘भारत का भवितव्य’ जैसे विषयों पर दिए गए उनके व्याख्यान संघ को समझना आसान बना देते हैं। वैसे अपने व्याख्यानों में मोहनराव भागवत बार-बार कहते हैं कि ‘संघ को समझना हो तो संघ में आइए’। यह पुस्तक पाठक के विचारों को परिष्कृत करेगी और समाज में ऐसे राष्ट्रभाव जाग्रत् करेगी, जिससे ‘यशस्वी भारत’ का लक्ष्य सिद्ध होगा।
Bhakti Tatva
- Author Name:
Kalyanmal Lodha +1
- Book Type:

Manas Madhu
- Author Name:
Ashok Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book