Gandhi Darshan Ke 5 Sootra
(0)
Author:
Renu Kumari KushwahaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
350
₹ 280 (20% off)
Available
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"महात्मा गांधी के पाँच सूत्र—डॉ. रेणु कुमारी कुशवाह आज आम समाज गरीबी व बेरोजगारी की परेशानी से त्रस्त है। धन का असमान वितरण तथा मानवाधिकारों का उल्लंघन नित नई समस्या पैदा करता जा रहा है। आतंकवाद की समस्या से न केवल भारत बल्कि पूरा विश्व ही प्रभावित हो रहा है। ऐसी अनेक समस्याओं का समाधान ‘गांधी दर्शन’ में ढूँढ़ा जा सकता है। इस धरा पर अमन-चैन कायम हो—पूरी दुनिया एक ऐसे विकल्प की तलाश में है। अत: गांधीवाद इसका उत्तर और एक विकल्प देता है। गांधी दर्शन के सिद्धांत और सूत्र इस युग की सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना करने में पूर्ण सक्षम हैं। आज दुनिया भर की आवाजें गांधी की बातों को दोहरा रही हैं, जो उन्होंने औद्योगिकीकरण, मशीनीकरण, आर्थिक विकास, स्त्रा् सशक्तीकरण, पर्यावरण सुरक्षा, सामाजिक न्याय आदि के बारे में कही थीं। गांधी के ये पाँच सूत्र आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उस काल में थे। शाश्वत गांधी दर्शन के मूल सूत्रों का दिग्दर्शन कराती महत्त्वपूर्ण पुस्तक। इस पुस्तक में एक सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता डॉ. रेणु कुमारी द्वारा विश्व के महानतम राजनीतिक कार्यकर्ता महात्मा गांधी के मूल दर्शन को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सरल एवं सूक्ष्म रूप से प्रस्तुत किया गया है। —डॉ. अनिल दत्त मिश्रा लेखक एवं गांधीवादी विचारक भूमंडलीकरण, उदारीकरण व निजीकरण के दौर में डॉ. रेणु कुमारी की महात्मा गांधी की प्रासंगिकता पर पुस्तक उचित समय पर लिखा गया अद्वितीय साहित्यिक योगदान है। —प्रो. आर.पी. द्विवेदी, अध्यक्ष गांधी भवन, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ,बनारस आधुनिकता के युग में गांधी को पुन: स्थापित करने का डॉ. रेणु कुमारी द्वारा एक सार्थक प्रयास हुआ है। आनेवाले समय में हिंदी में लिखित यह पुस्तक मील का पत्थर साबित होगी। —डॉ. प्रवीण कुमार एसोसिएट प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय
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"महात्मा गांधी के पाँच सूत्र—डॉ. रेणु कुमारी कुशवाह
आज आम समाज गरीबी व बेरोजगारी की परेशानी से त्रस्त है। धन का असमान वितरण तथा मानवाधिकारों का उल्लंघन नित नई समस्या पैदा करता जा रहा है। आतंकवाद की समस्या से न केवल भारत बल्कि पूरा विश्व ही प्रभावित हो रहा है। ऐसी अनेक समस्याओं का समाधान ‘गांधी दर्शन’ में ढूँढ़ा जा सकता है।
इस धरा पर अमन-चैन कायम हो—पूरी दुनिया एक ऐसे विकल्प की तलाश में है। अत: गांधीवाद इसका उत्तर और एक विकल्प देता है।
गांधी दर्शन के सिद्धांत और सूत्र इस युग की सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना करने में पूर्ण सक्षम हैं। आज दुनिया भर की आवाजें गांधी की बातों को दोहरा रही हैं, जो उन्होंने औद्योगिकीकरण, मशीनीकरण, आर्थिक विकास, स्त्रा् सशक्तीकरण, पर्यावरण सुरक्षा, सामाजिक न्याय आदि के बारे में कही थीं। गांधी के ये पाँच सूत्र आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उस काल में थे।
शाश्वत गांधी दर्शन के मूल सूत्रों का दिग्दर्शन कराती महत्त्वपूर्ण पुस्तक।
इस पुस्तक में एक सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता डॉ. रेणु कुमारी द्वारा विश्व के महानतम राजनीतिक कार्यकर्ता महात्मा गांधी के मूल दर्शन को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सरल एवं सूक्ष्म रूप से प्रस्तुत किया गया है।
—डॉ. अनिल दत्त मिश्रा
लेखक एवं गांधीवादी विचारक
भूमंडलीकरण, उदारीकरण व निजीकरण के दौर में डॉ. रेणु कुमारी की महात्मा गांधी की प्रासंगिकता पर पुस्तक उचित समय पर लिखा गया अद्वितीय साहित्यिक योगदान है।
—प्रो. आर.पी. द्विवेदी,
अध्यक्ष गांधी भवन,
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ,बनारस
आधुनिकता के युग में गांधी को पुन: स्थापित करने का डॉ. रेणु कुमारी द्वारा एक सार्थक प्रयास हुआ है। आनेवाले समय में हिंदी में लिखित यह पुस्तक मील का पत्थर साबित होगी।
—डॉ. प्रवीण कुमार
एसोसिएट प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय
Book Details
-
ISBN9789350480465
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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मेजर (डॉ.) परशुराम गुप्त जन्म : 30 अगस्त, 1953 को रायबरेली जिले के सलोन नगर में। शिक्षा एवं दायित्व : स्नातकोत्तर (इलाहाबाद विश्वविद्यालय), पी-एच.डी. (गोरखपुर विश्व विद्यालय), पूर्व प्राचार्य : गो. महंत अवेद्यनाथ महाविद्यालय, चौक, महाराज-गंज (उ.प्र.), पूर्व विभागाध्यक्ष एवं एसोशिएट प्रोफेसर, रक्षा अध्ययन विभाग, जवाहरलाल नेहरू स्मारक पो. ग्रे. कालेज, महाराजगंज (उत्तर प्रदेश)। प्रकाशन : राष्ट्रीय महत्त्व की बीस पुस्तकें प्रकाशित और अनेक का लेखन अनवरत जारी। सम्मान : दो बार रक्षा मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित, शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु दैनिक जागरण और भोजपुरी परिवार मस्कट, ओमान द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान हेतु सम्मानित, महानिदेशक, राष्ट्रीय कैडेट कोर द्वारा सम्मानित, भारत के मान. राष्ट्रपति (भारत सरकार) द्वारा राष्ट्रीय कैडेट कोर में प्रशंसनीय सेवा हेतु इसी कोर में ‘मेजर’ के अवैतनिक रैंक से सम्मानित, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ, द्वारा ‘कबीर सम्मान’ से सम्मानित, उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर साहित्य के क्षेत्र में विशेष योगदान हेतु जिलाधिकारी द्वारा सम्मानित।
Surgical Strike
- Author Name:
Ish Kumar Gangania
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"माना जाता है कि कथा-साहित्य का उदय संभवत: कहानी-लेखन से संभव हो सका है। यह भी माना जाता है कि उपन्यास का उदय लंबी कहानियों के लेखन के प्रादुर्भाव के साथ-साथ हुआ है, किंतु कहानी और उपन्यास के बीच जो खास अंतर है, उसे समझने के लिए ज्यादा उलझन का सामना नहीं करना पड़ता। दरअसल कहानी जीवन तथा समाज के किसी विशेष भाग को विश्लेषित करती है, जबकि अर्नेस्ट ए. बेकर ने उपन्यास की परिभाषा देते हुए उसे गद्यबद्ध कथानक के माध्यम द्वारा जीवन तथा समाज की व्याख्या का सर्वोत्तम साधन बताया है। उपन्यास लिखने के पीछे समाज में कुछ ऐसी अप्रिय व हिंसक घटनाओं का बढ़ जाना है, जो लोकतंत्र को सीधे चुनौती देती नजर आती हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की गतिविधियाँ इनके निराकरण की अपेक्षा एक प्रकार से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इनका समर्थन करती नजर आती हैं। उपन्यास 'सर्जिकल स्ट्राइक' लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन में एक जज्बाती जंग है। उपन्यास में पुलवामा के आतंकी हमले की पृष्ठभूमि मौजूद है, यह हकीकत है। उपन्यास का घटनाक्रम फरवरी से मई के पूर्वार्ध 2019 तक सिमटा है। बेहद रोमांचक एवं कथारस से भरपूर एक उपन्यास।"
Bhajpa Hinduttva Aur Musalman
- Author Name:
Vedpratap Vaidik
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‘भाजपा, हिन्दुत्व और मुसलमान’ अपने ढंग की अनूठी कृति है। इस विषय का यह पहला मौलिक और विचारोत्तेजक ग्रन्थ है। उक्त तीनों मुद्दों और उनके आपसी सम्बन्धों पर जितनी गहराई और जितने कोणों से विद्वान लेखक ने विचार किया है, अब तक किसी भी ग्रन्थ में नहीं किया गया है। भाजपा का असली संकट क्या है, उसका समाधान क्या है, उसका भविष्य कैसा है, वह कहीं कांग्रेस की कार्बन-कॉपी तो नहीं बन गई है, संघ और भाजपा के बीच अन्तर्द्वन्द्व के मुद्दे कौन-कौन से हैं, आदि अनेक प्रश्नों पर डॉ. वेदप्रताप वैदिक ने गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
सावरकर का हिन्दुत्व अब कितना प्रासंगिक रह गया है? उसमें से क्या घटाया और क्या जोड़ा जाए, इस जटिल और विवादास्पद विषय पर डॉ. वैदिक ने जो मौलिक विचार प्रस्तुत किए हैं, वे भाजपा ही नहीं, 21वीं सदी के भारत के लिए भी ध्यातव्य हैं। हिन्दुत्व और इस्लाम के नाम पर चले अभियानों पर लेखक के जिन बेबाक निबन्धों ने देश की तत्कालीन राजनीति पर सीधा असर डाला था, वे भी इस ग्रन्थ में संकलित किए गए हैं। इस ग्रन्थ में कुछ निबन्ध ऐसे भी हैं, जिनके बारे में आपको लगेगा कि वे अपने आप में एक-एक ग्रन्थ के बराबर हैं। मुस्लिम राजनीति और मुसलमानों के प्रति भाजपा के रवैए पर भी लेखक ने अपनी दो-टूक राय ज़ाहिर की है। मुसलमान भारतीय इतिहास को कैसे देखें और शेष भारत मुसलमानों को कैसे देखे, आदि अत्यन्त पेचीदा और नाजुक मुद्दों पर भी लेखक ने अपने निर्भीक विचार प्रस्तुत किए हैं। डॉ. वैदिक के ये निबन्ध राजनेताओं, विद्वानों, पत्रकारों और प्रबुद्ध पाठकों के लिए दिशा-बोधक और उपयोगी हैं।
History Hunters: Chandragupta Maurya And Yunani Aakarman
- Author Name:
Shruti Garodia +1
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अगर आप आज से 2350 साल पहले के बिल्कुल नये संसार में पहुँच जाएँ तो क्या करेंगे? गोवा के एक सुंदर झरने के पास पिकनिक के लिये गए चार दोस्त- ज़ोया, नूर, अंश, रोहन और उनका बहुत प्यारा हाथी एल्फू । ये सब अचानक फँस गये दो हज़ार साल पीछे- रक्तरंजित युद्ध भूमि में, जहाँ मकदूनिया का सिकन्दर भारत की ओर कूच कर रहा है। एक नौजवान उन्हें बचाकर अपने गुरुकुल तक्षशिला ले जाता है। चारों दोस्तों के सामने कोई चारा नहीं है, सिवाए इसके कि रास्ते की मुश्किलों का सामना करते चलें । जहाँ गुस्सैल सैनिक हैं, खतरनाक साँप हैं और भैंसों की फूली हुई खाल नदी में तैर रही है। अनगिन अप्रत्याशित घटनाओं और ख़तरों से कैसे बचकर निकले ये किशोर साथी? क्या वे उस पुराने समय में हमेशा के लिये खो गये? क्या वो तेज़ी से घूमती घड़ी की सुईयों को हराकर अपने समय में लौट पाए? 'हिस्ट्री हंटर्स' के साथ देखिए । कैसे वे इस पहली सनसनीखेज़ और डरावनी यात्रा में हैं। वे भविष्य के सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और किंगमेकर चाणक्य के युग में हैं। और अंत में- फैक्ट ट्रैकर मौर्यकाल से जुड़ी ज़रूरी जानकारियाँ!
History Hunters: Chandragupta Maurya And Yunani Aakarman
Shruti Garodia
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