DR. HEDGEWAR CHITRAWALI
About the book
डॉ. केशवराव हेडगेवार विश्व के सबसे बड़े व विलक्षण सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव हेडगेवार का जन्म चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संवत् 1946 विक्रमी को हुआ था। घोर निर्धनता में भी किशोर केशव का मन कभी धन-संग्रह का आग्रही नहीं रहा और न उसकी तेजस्विता में कोई कमी आई। राष्ट्र के सौभाग्य से केशव का विकास एक राष्ट्रवादी, ध्येयनिष्ठ, तेजस्वी और स्वाभिमानी व्यक्ति के रूप में निरंतर होता चला गया। केशवराव ने डॉक्टरी शिक्षा तो प्राहृश्वत की, पर उसे कभी अपना पेशा नहीं बनाया। राष्ट्र-चिंतन करते हुए डॉक्टरजी निरंतर अपने मित्र-मंडल का विस्तार करते रहे। अंग्रेजी राजाज्ञा का उल्लंघन करने पर 1 मई, 1921 को डॉक्टरजी पर नागपुर में अंग्रेज सरकार ने राजद्रोह का मुकदमा चलाया। ‘स्वतंत्रता आज नहीं तो कल मिलनी है’, इसे दीर्घजीवी कैसे बनाया जाए, इसी के समाधान स्वरूप विजयादशमी के पवित्र दिन, यानी 27 सितंबर, 1925 को उन्होंने अपने घनिष्ठ एवं प्रखर राष्ट्रीय चिंतनशील मित्रों तथा राष्ट्रभक्त तरुणों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। संघ पर सरकार की वक्रदृष्टि रहती थी, अतः डॉक्टरजी ने सरकार की कुटिल नीति को समझकर 1933 ई. में नाग नदी के पार रेशम बाग में सवा दो एकड़ जमीन खरीदकर संघस्थान की स्थायी व्यवस्था कर दी। दिसंबर 1934 में वर्धा के शीत शिविर में महात्मा गांधी वहाँ आए और संघ की कार्य-पद्धति को समझा। द्रुतगति से संघ का विस्तार हो रहा था। अकोला नगर में लगे अधिकारी शिक्षण वर्ग में डॉक्टरजी को ‘श्रीगुरुजी’ के रूप में अपना उत्तराधिकारी मिल गया। संघ के अच्छे कार्यों से प्रभावित होकर 1934 में ही बाबाराव सावरकर ने ‘मुक्तेश्वर दल’, जिसकी पच्चीस स्थानों पर शाखाएँ लगती थीं, को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में विलय कर दिया। इससे संघ और मजबूत हुआ। अधिक परिश्रम तथा निरंतर भाग- दौड़ के कारण अब डॉक्टरजी अस्वस्थ रहने लगे। नागपुर के वर्ग में सभी प्रांतों से स्वयंसेवक आए थे, इस अवसर पर डॉक्टरजी एक लघु भारत के स्वरूप के दर्शन कर बडे़ प्रसन्न हुए; असह्य पीड़ा सहते हुए उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित किया। जब संघ कार्य अपनी शैशवावस्था में ही था, तभी 21 जून, 1940 को डॉक्टर हेडगेवार का स्वर्गवास हो गया। प्रस्तुत पुस्तक अखंड भारत के अनन्य सेवक, प्रखर राष्ट्रभक्त एवं समस्त हिंदू समाज को अपने गौरवशाली अतीत का स्मरण करानेवाले और नई पीढ़ी को संस्कारित करनेवाले महान् तपस्वी की चित्रावली है।
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About the Book
डॉ. केशवराव हेडगेवार
विश्व के सबसे बड़े व विलक्षण सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव हेडगेवार का जन्म चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संवत् 1946 विक्रमी को हुआ था। घोर निर्धनता में भी किशोर केशव का मन कभी धन-संग्रह का आग्रही नहीं रहा और न उसकी तेजस्विता में कोई कमी आई। राष्ट्र के सौभाग्य से केशव का विकास एक राष्ट्रवादी, ध्येयनिष्ठ, तेजस्वी और स्वाभिमानी व्यक्ति के रूप में निरंतर होता चला गया। केशवराव ने डॉक्टरी शिक्षा तो प्राहृश्वत की, पर उसे कभी अपना पेशा नहीं बनाया। राष्ट्र-चिंतन करते हुए डॉक्टरजी निरंतर अपने मित्र-मंडल का विस्तार करते रहे।
अंग्रेजी राजाज्ञा का उल्लंघन करने पर 1 मई, 1921 को डॉक्टरजी पर नागपुर में अंग्रेज सरकार ने राजद्रोह का मुकदमा चलाया। ‘स्वतंत्रता आज नहीं तो कल मिलनी है’, इसे दीर्घजीवी कैसे बनाया जाए, इसी के समाधान स्वरूप विजयादशमी के पवित्र दिन, यानी 27 सितंबर, 1925 को उन्होंने अपने घनिष्ठ एवं प्रखर राष्ट्रीय चिंतनशील मित्रों तथा राष्ट्रभक्त तरुणों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।
संघ पर सरकार की वक्रदृष्टि रहती थी, अतः डॉक्टरजी ने सरकार की कुटिल नीति को समझकर 1933 ई. में नाग नदी के पार रेशम बाग में सवा दो एकड़ जमीन खरीदकर संघस्थान की स्थायी व्यवस्था कर दी। दिसंबर 1934 में वर्धा के शीत शिविर में महात्मा गांधी वहाँ आए और संघ की कार्य-पद्धति को समझा। द्रुतगति से संघ का विस्तार हो रहा था। अकोला नगर में लगे अधिकारी शिक्षण वर्ग में डॉक्टरजी को ‘श्रीगुरुजी’ के रूप में अपना उत्तराधिकारी मिल गया। संघ के अच्छे कार्यों से प्रभावित होकर 1934 में ही बाबाराव सावरकर ने ‘मुक्तेश्वर दल’, जिसकी पच्चीस स्थानों पर शाखाएँ लगती थीं, को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में विलय कर दिया। इससे संघ और मजबूत हुआ। अधिक परिश्रम तथा निरंतर भाग- दौड़ के कारण अब डॉक्टरजी अस्वस्थ रहने लगे। नागपुर के वर्ग में सभी प्रांतों से स्वयंसेवक आए थे, इस अवसर पर डॉक्टरजी एक लघु भारत के स्वरूप के दर्शन कर बडे़ प्रसन्न हुए; असह्य पीड़ा सहते हुए उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित किया।
जब संघ कार्य अपनी शैशवावस्था में ही था, तभी 21 जून, 1940 को डॉक्टर हेडगेवार का स्वर्गवास हो गया।
प्रस्तुत पुस्तक अखंड भारत के अनन्य सेवक, प्रखर राष्ट्रभक्त एवं समस्त हिंदू समाज को अपने गौरवशाली अतीत का स्मरण करानेवाले और नई पीढ़ी को संस्कारित करनेवाले महान् तपस्वी की चित्रावली है।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Prabhat Prakashan
- Publication year
- 2019
- Weight
- 100 grams
- ISBN-13
- 9789352667673
- Pages
- 40
- Reading time
- ~1 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 10 × 10 cm
- Language
- Hindi
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