Share Market ke Success Mantra
(0)
₹
350
₹ 280 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
मैंकैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करूँ? किन कंपनियों में मुझे निवेश करना चाहिए? मुझे शेयर कब खरीदने चाहिए? कब उन्हें बेचना चाहिए? कैसे मैं महसूस कर पाऊँगा कि स्टॉक के दाम चढ़ेंगे या गिरेंगे? जीवन के जैसा ही, स्टॉक मार्केट का भी हाल है, सफलता के लिए कोई शॉर्ट-कट नहीं है। स्टॉक मार्केट से नियमित फायदा कमाने के लिए वर्षों का अनुभव और दिमाग की एक खास बनावट जरूरी होती है। देश के टॉप विश्लेषकों में शुमार सौरभ मुखर्जी ने सात निवेशकों से बात की, जो पिछले दो दशक से लंबे निवेश पर फायदा कमाने की कला में सिद्धहस्त हो चुके हैं। उन्होंने इन विशेषज्ञों की यात्रा का इतिहास खँगाला, जिसमें पता चला कि ये शौकिया निवेशक के तौर पर आगे बढ़े और आगे चलकर पेशेवर मैनेजर के रूप में विशाल रकम को सँभालने का हुनर दिखाया। सौरभ ने उनके दिमाग को पढ़ने और समझने का प्रयास किया और उस खास फिलॉसफी को भाँपा, जिसकी मदद से उन्होंने अपनी निवेश रणनीति को ताकत प्रदान की और उन्होंने अपने ज्ञान का इस्तेमाल इस पुस्तक को लिखने में किया, जो देश में निवेश की राह बताती है।
Read moreAbout the Book
मैंकैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करूँ?
किन कंपनियों में मुझे निवेश करना चाहिए?
मुझे शेयर कब खरीदने चाहिए? कब उन्हें बेचना चाहिए?
कैसे मैं महसूस कर पाऊँगा कि स्टॉक के दाम चढ़ेंगे या गिरेंगे?
जीवन के जैसा ही, स्टॉक मार्केट का भी हाल है, सफलता के लिए कोई शॉर्ट-कट नहीं है।
स्टॉक मार्केट से नियमित फायदा कमाने के लिए वर्षों का अनुभव और दिमाग की एक खास बनावट जरूरी होती है। देश के टॉप विश्लेषकों में शुमार सौरभ मुखर्जी ने सात निवेशकों से बात की, जो पिछले दो दशक से लंबे निवेश पर फायदा कमाने की कला में सिद्धहस्त हो चुके हैं। उन्होंने इन विशेषज्ञों की यात्रा का इतिहास खँगाला, जिसमें पता चला कि ये शौकिया निवेशक के तौर पर आगे बढ़े और आगे चलकर पेशेवर मैनेजर के रूप में विशाल रकम को सँभालने का हुनर दिखाया। सौरभ ने उनके दिमाग को पढ़ने और समझने का प्रयास किया और उस खास फिलॉसफी को भाँपा, जिसकी मदद से उन्होंने अपनी निवेश रणनीति को ताकत प्रदान की और उन्होंने अपने ज्ञान का इस्तेमाल इस पुस्तक को लिखने में किया, जो देश में निवेश की राह बताती है।
Book Details
-
ISBN9789352660872
-
Pages200
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Manik Raitang ki Bansuri
- Author Name:
Dr. Sunita
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Blood In The Sea: The Dark History Of Hindu Oppression In Goa
- Author Name:
Vinay Nalwa
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Man With A Mission 2047: Modi's Luminous Vision for India (Narendra Modi Vision and Accomplishments)
- Author Name:
Rahul Mehta
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Refugee Dilemma
- Author Name:
V. Suryanarayan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Samajwad Ke Jannayak Karpoori Thakur
- Author Name:
Mamta Mehrotra
- Book Type:

- Description: बिहार के राजनीतिक इतिहास में कुछ हस्तियाँ न केवल नेताओं के रूप में, बल्कि परिवर्तनकारी ताकतों के रूप में सामने आती हैं, जिन्होंने राज्य की नियति को आकार देने का कार्य किया है। जननायक कर्पूरी ठाकुर, जिन्हें अकसर 'आम राजनेता' या 'आम आदमी के नेता' के रूप में जाना जाता है, निर्विवाद रूप से ऐसे ही एक महान् व्यक्ति हैं। यह पुस्तक समाजवाद के जननायक कर्पूरी ठाकुर के जीवन, उनकी राजनीतिक यात्रा तथा बिहार और उसके बाहर के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य पर उनके द्वारा छोड़े गए अमिट प्रभाव को उजागर करने का प्रयास करती है।
Gautam Buddha ki Prerak Kahaniyan
- Author Name:
Mukesh 'Nadan'
- Book Type:

- Description: "गौतम बुद्ध तथागत नाम से भी जाने गए। गौतम बुद्ध ने अपने सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार में जाति व्यवस्था का भी घोर विरोध किया था। उन्होंने मानव-मानव की समानता पर बल दिया। उन्होंने जन्म को न मानकर बुद्धि तथा चरित्र के आधार को छोटे-बड़े होने का मापदंड माना है। उन्होंने घोषणा भी की थी कि मनुष्य जन्म से नहीं, अपितु कर्म से ब्राह्मण अथवा शूद्र होता है। गौतम बुद्ध द्वारा अनेक ऐसी बातों का प्रचार किया गया, जो आज भी मानव को एक-दूसरे से प्रेम, सद्भाव, दया और भाईचारे का संदेश देती हैं। इन्हीं संदेशों से प्रेरित गौतम बुद्ध की अनेक कथाएँ समाज-जीवन में प्रचलित हैं, जो मानव को असीम ज्ञान की ओर प्रेरित करती हैं। प्रस्तुत पुस्तक में ऐसी भी कुछ कथाओं को संगृहीत किया गया है, जो गौतम बुद्ध के जन्म से लेकर निर्वाण तक की घटनाओं का वर्णन करती हैं तथा उनके आचार-विचार से ओतप्रोत हैं। अपने शिष्यों को समय-समय पर उपदेश देते हुए उन्होंने अनेक कथाओं को उदाहरणार्थ समझाने का प्रयास किया और उन्हीं कथाओ का प्रचार-प्रसार उनके शिष्यों ने भी आगे किया। कथाएँ पूर्ण रूप से शिक्षात्मक एवं संस्कारित हैं। हमें आशा ही नहीं, अपितु पूर्ण विश्वास है कि गौतम बुद्ध की ये पठनीय कथाएँ अवश्य ही प्रत्येक वर्ग के पाठकों को ज्ञान का बोध कराने में सहायक सिद्ध होंगी और समरस समाज बनाने का मार्ग प्रशस्त करेंगी। "
Suno Maa "सुनो माँ! : Letters written by World's Famous Personalities to their Mothers" Book in Hindi | The Mother
- Author Name:
Sundeep Bhutoria
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dastambu
- Author Name:
Mirza Ghalib
- Book Type:

- Description: मिर्ज़ा असद-उल्लाह ख़ाँ ग़ालिब का नाम भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के महान कवियों में शामिल है! मिर्ज़ा ग़ालिब ने 1857 के आन्दोलन के सम्बन्ध में अपनी जो रूदाद लिखी है, उससे उनकी राजनीतिक विचारधारा और भारत में अंग्रेज़ी राज के सम्बन्ध में उनके दृष्टिकोण को समझने में काफ़ी मदद मिल सकती है! अपनी यह रूदाद उन्होंने लगभग डायरी की शक्ल में प्रस्तुत की है। और फ़ारसी भाषा में लिखी गई इस छोटी-सी पुस्तिका का नाम है—‘दस्तंबू’। फ़ारसी भाषा में 'दस्तंबू' शब्द का अर्थ है पुष्पगुच्छ, अर्थात् बुके (Bouquet)। अपनी इस छोटी-सी किताब 'दस्तंबू' में ग़ालिब ने 11 मई, 1857 से 31 जुलाई, 1857 तक की हलचलों का कवित्वमय वर्णन किया है। 'दस्तंबू' में ऐसे अनेक चित्र हैं जो अनायास ही पाठक के मर्म को छू लेते हैं। किताब के बीच-बीच में उन्होंने जो कविताई की है, उसके अतिरिक्त गद्य में भी कविता का पूरा स्वाद महसूस होता है। जगह-जगह बेबसी और अन्तर्द्वन्द्व की अनोखी अभिव्यक्तियाँ भरी हुई हैं। इस तरह 'दस्तंबू' में न केवल 1857 की हलचलों का वर्णन है, बल्कि ग़ालिब के निजी जीवन की वेदना भी भरी हुई है। ‘दस्तंबू’ के प्रकाशन को लेकर ग़ालिब ने अनेक लम्बे-लम्बे पत्र मुंशी हरगोपाल ‘तफ़्त:’ को लिखे हैं। अध्येताओं की सुविधा के लिए सारे पत्र पुस्तक के अन्त में दिए गए हैं। भारत की पहली जनक्रान्ति, उससे उत्पन्न परिस्थितियाँ और ग़ालिब की मनोवेदना को समझने के लिए ‘दस्तंबू’ एक ज़रूरी किताब है। इसे पढ़ने का मतलब है सन् 1857 को अपनी आँखों से देखना और अपने लोकप्रिय शाइर की संवेदनाओं से साक्षात्कार करना। —भूमिका से
Everest ki Beti
- Author Name:
Arunima Sinha
- Book Type:

- Description: "राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा के आगे उज्ज्वल भविष्य था। तभी एक दिन चलती ट्रेन में लुटेरों का मुकाबला करने पर लुटेरों ने उन्हें धकेलकर नीचे गिरा दिया। इस भयानक हादसे से इस चौबीस वर्षीय लड़की को अपना बायाँ पैर गँवाना पड़ा, लेकिन उसने हार नहीं मानी। एक वर्ष बाद उन्होंने पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लिया और माउंट एवरेस्ट पर पहुँचनेवाली पहली विकलांग महिला बनीं। आशा, साहस और पुनरुत्थान की अविस्मरणीय कहानी। ‘पद्मश्री’ और ‘तेनजिंग नोर्गे अवॉर्ड’ से सम्मानित अरुणिमा की कहानी हर छात्र को पढ़नी चाहिए।
Scattered Thoughts
- Author Name:
Dr. Krishna Saksena
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Rajasthan REET Grade-III Adhyapak (Teacher) Level 2 Hindi Guide (Class 6 to 8)
- Author Name:
Kunwar Kanak Singh Rao
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Handbook of Acupressure
- Author Name:
Dr. Preeti Pai +1
- Book Type:

- Description: Of late, it is being observed that people around the globe are becoming more health conscious. Whereas, on one hand, scientists are busy carrying out researches, finding the cause(S) in the sudden spurt of diseases in its dreaded form and finding drugs to combat such ailments which assume epidemic shape and a host of innovative methods being deviced in the field of Surgery, a marked shift is seen amongst the masses towards the holistic approach. More and more people trying to get focused towards fitness, adopting Yoga & Naturopathy as a way of life. Paying more attention than before on their diet regime. Trying to take recourse to available non-conventional systems of medicine. One of the causative factors, perhaps, is the exorbitant cost of medicine, growing awareness about the side effects of allopathic drugs etc...! The redeeming feature is that people have started realising the importance of Prevention rather than a Cure. Over a period of time, acupressure has emerged as a prominent therapy since it is free from any side effect, since no medication whatsoever is required. It is totally non-conventional, non-invasive & non-interventional, a home remedy, easy to learn and practice. The simple reason being that it is evolved on the principle that human body in itself possesses immense healing power, all that is required is to tap that healing force of the body and the rest is taken care by the body itself. This therapy has been found to be very very effective in handling conditions e.g. Cervical/Lumber spondylitis, knee pain, Sciatica, Slip-disc, depression, insomnia, migraine, asthma, hypertension, PMS, IBS, various female/male problems etc..... to name a few. After the publication of our book �101 Q&A acupressure & reflexology�, our students have been demanding a book sharing our experience of about 30 years in this �Art & Science�. This book is to meet the demand of upcoming and practicing therapists of acupressure as also for the people to get benefit of our experience. All possible efforts have been made to depict the location of the pressure points to be attended to through figures, suggestion for correction of the errors, if any, that might have crept in would be gratefully accepted.
Adivasi Lok-Samaj
- Author Name:
Narendra
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक लेखक के गहन आदिवासी एवं लोक समाजों से निकले अनुभवों पर आधारित है। उनके सहज एवं समान तालमेल, तारतम्य, बंदोबस्त, दैनिक जीवन और भिन्न बोलियों की सहज-सुलभ रफ्तार तथा प्रकृति से सहज साझापन अलग होकर भी हाल तक एक जैसे हुआ करते थे-दोनों प्रकृति को अविजित रखते। अपनी स्थिरता तथा सन्नाटा खो पिछले चंद दशकों में आदिवासी एवं लोक समाजों में वैसा साझापन अब समाप्त हो रहा है। गहन वनस्पति, मनुष्य, पशु, पुरखे, पहाड़, देवी, देवता, अंतरिक्ष, स्थूल एवं सूक्ष्म की समानांतर उपस्थिति, उनसे बने तारतम्य और फासले, दैनिक जीवन की एक अहस्तक्षेपित, अव्यस्त-सी लय व गति (या गतिहीनता)--ये समाज इन्हीं में रहा करते। अपने विस्तार, वीरान एवं रिश्ते लिये सबकी मिली-जुली बिरादरी होती। बस्तर के अबुझमाड़ जैसे प्राचीन एवं गहन इलाके में लोग कार्य न करते, न ही जानते, न जीविका न व्यवसाय, न रुझान रखते, फिर भी पिछले सौ वर्षों की स्मृति में भुखमरी सुनने में न आती। न अपराध, न हिंसा। गिनती पाँच तक। शब्दावली कोई तीन सौ शब्दों की। मौन की संस्कृति। संप्रेषण भरपूर। इससे अधिक कुछ नहीं चाहिए। यह पुस्तक आधुनिकता या सामाजिक विज्ञान के मुहावरे से निकल हाल तक के ऐसे समाजों और जीवन-दृष्टि को इंगित करने का प्रयास है।
Jyotipunj
- Author Name:
Narendra Modi
- Book Type:

- Description: ज्योतिपुंज—नरेंद्र मोदी संसार में उन्हीं मनुष्यों का जन्म धन्य है, जो परोपकार और सेवा के लिए अपने जीवन का कुछ भाग अथवा संपूर्ण जीवन समर्पित कर पाते हैं। विश्व इतिहास का निर्माण करने में ऐसे ही सत्पुरुषों का विशेष योगदान रहा है। संसार के सभी देशों में सेवाभावी लोग हुए हैं; लेकिन भारतवर्ष की अपनी विशेषता रही है, जिसके कारण वह अपने दीर्घकाल के इतिहास को जीवित रख पाया है। किसी ने समय दिया, किसी ने जवानी दी, किसी ने धन और वैभव छोड़ा, किसी ने कारावास की असह्य पीड़ा सही। भारतवर्ष की धरती धन्य है और धन्य हैं वे सत्पुरुष, जिन्होंने राष्ट्रोत्थान को अपना जीवन-धर्म व लक्ष्य बनाया और अनवरत राष्ट्रकार्य में लीन रहे। उन्होंने भारत के गौरवशाली अतीत को जीवंत रखा और सशक्त-समर्थ भारत के स्वप्न को साकार करने के लिए अपने जीवन को होम कर दिया। ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ को जीवन का मूलमंत्र माननेवाले ऐसे ही तपस्वी मनीषियों का पुण्य-स्मरण किया है स्वयं राष्ट्रसाधक श्री नरेंद्र मोदी ने इस पुष्पांजलि ज्योतिपुंज में।
POIROT INVESTIGATES
- Author Name:
Agatha Christie
- Rating:
- Book Type:

- Description: This book has no description
Ramvilas Sharma Rachanawali (Part-2 Bhasha Aur Vigyan)
- Author Name:
Ramvilas Sharma
- Book Type:

-
Description:
भाषा, विचार, साहित्य, दर्शन, संस्कृति, इतिहास और समाजशास्त्र समेत मानव, उसके वर्तमान और भविष्य को लक्षित आलोचना के विराट व्यक्तित्व रामविलास शर्मा का लेखन न केवल परिमाण में विपुल है, बल्कि चिन्तन की लगभग सभी सम्भव दिशाओं में मौलिक दृष्टि तथा गहन अध्ययन से प्रसूत पथ-निर्देशक अवधारणाओं का विशाल आगार है।
उनको पढ़ना हिन्दी मेधा के शिखर से गुजरना है। साहित्य-रचना के मर्म तक पहुँचने के लिए उनकी आलोचकीय जिज्ञासा रस, लय, शब्द-संयोजन आदि की पड़ताल करते हुए भाषा-विज्ञान, भाषा-इतिहास और दर्शनशास्त्र तक पहुँची। मार्क्सवादी विश्व-दृष्टि उनके चिन्तन और विवेचन की अविचल आधारभूमि रही, लेकिन उसे भी उन्होंने अपनी सीमा नहीं बनने दिया।
आलोचना-समीक्षा करते समय उन्होंने सिद्धान्तों या प्रतिमानों को विशेष महत्त्व नहीं दिया। उनके अनुसार, 'प्रतिमान आलोचना की अग्रभूमि में स्थित नहीं हैं। प्रत्येक रचना अपना प्रतिमान गढ़ती है; आलोचक उसका अन्वेषण करते हुए रचनाकार की विश्व-दृष्टि, उसकी परिस्थिति, परिवेश और यथार्थ-चित्रण का मूल्यांकन करता है।’
यह रामविलास शर्मा रचनावली का दूसरा भाग है जिसमें उनके भाषा तथा भाषाविज्ञान सम्बन्धी लेखन को प्रस्तुत किया गया है। भाषा को लेकर भी रामविलास जी का अध्ययन व्यापक और विचारोत्तेजक रहा है जिसमें उन्होंने भावी अध्ययन तथा विचार-विमर्श के लिए कई नए प्रस्थान बिन्दु प्रस्तुत किए।
रचनावली के इस बीसवें खंड में रामविलास शर्मा के बहुचर्चित अध्ययन ‘भाषा और समाज’ को प्रस्तुत किया गया है। समाज के विकास के सन्दर्भ में भाषा का अध्ययन करते हुए उन्होंने इसमें भाषाविज्ञान और समाजविज्ञान की अनेक मान्यताओं का तर्क सहित खंडन-मंडन किया है। भाषा-सम्बन्धी अनेक व्यावहारिक समस्याएँ भी यहाँ उनके विवेचन का विषय बनी हैं।
रचनावली के इस इक्कीसवें खंड में रामविलास जी की बहुचर्चित कृति ‘भारत की भाषा-समस्या’ को प्रस्तुत किया जा रहा है। इस पुस्तक में भाषा-समस्या के विभिन्न पक्षों पर विस्तार से विचार करते हुए वे अन्य बिन्दुओं के साथ यह भी स्पष्ट करते हैं कि हिन्दी और उर्दू के मध्य एक बुनियादी एकता है और सभी जनपदीय बोलियाँ परस्पर सम्बद्ध हैं।
रचनावली के इस बाईसवें खंड में उनकी दो महत्त्वपूर्ण पुस्तकें ‘आर्य और द्रविड़ भाषा-परिवारों का सम्बन्ध’ तथा तीन जिल्दों में प्रकाशित ‘भारत के भाषा परिवार और हिन्दी’ का पहला खंड शामिल किया गया है। भाषा-सम्बन्धी उनके सुदीर्घ चिन्तन में इन पुस्तकों की विशेष महत्ता रही है।
रचनावली के इस तेईसवें खंड में ‘भारत के प्राचीन भाषा-परिवार और हिन्दी’ का दूसरा खंड प्रस्तुत किया जा रहा है। इस पुस्तक में उन्होंने इण्डो-यूरोपियन भाषा-परिवार की भारतीय पृष्ठभूमि का विस्तृत विश्लेषण किया है। वे बताते हैं कि हिन्दी का विकास एक ‘वृहत्तर विकास-प्रक्रिया का अंग है’ और इसे समझने के लिए केवल संस्कृत की पृष्ठभूमि पर्याप्त नहीं है।
रचनावली के इस चौबीसवें खंड में ‘भारत के प्राचीन भाषा-परिवार और हिन्दी’ शीर्षक उनके विशद अध्ययन का तीसरा खंड प्रस्तुत है। इस पुस्तक में नाग, द्रविड़ और कोल भाषा-परिवारों व हिन्दी प्रदेश की विशेषताओं का विवेचन किया गया है। भारतीय व्याकरण परम्परा तथा भाषाविज्ञान और भौतिकवाद विषयक चिन्तन भी इस खंड का हिस्सा है।
Diabetes Quiz Book
- Author Name:
Ashok Jhingan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sagar Pradushan
- Author Name:
Shyam Sunder Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
1965 Bharat-Pak Yuddha Ki Veergathayen
- Author Name:
Rachna Bisht Rawat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Barhavi Sadi Ki Kannad Kavayitriyan Aur Stree-Vimarsh
- Author Name:
Kashinath Ambalge
- Book Type:

- Description: सम्पूर्ण भारतीय साहित्य में, विशेषकर बारहवीं शताब्दी के दौर में, स्त्री-विमर्श की अनुगूँज केवल कन्नड़ साहित्य में उपलब्ध होती है। जाति-प्रथा का निषेध, वर्ण और वर्ग की विषमता का प्रतिरोध बारहवीं शताब्दी में केवल कन्नड़ भाषा-साहित्य में प्राप्त होता है। 5वीं शताब्दी में तमिल भाषा-साहित्य में निम्न वर्ग और दलित वर्ग के रचनाकारों को महत्त्व प्राप्त होता है, नायनार और आलवार सम्प्रदाय में मनुष्य की वेदना और अस्मिता को सामाजिक स्वीकृति मिलती है पर स्त्री-समुदाय को, वह भी लगभग पैंतीस महिला रचनाकारों को, सामाजिक, आध्यात्मिक और वर्ग चेतना के स्तर पर स्वीकृति केवल कन्नड़ भाषा-साहित्य में बारहवीं शताब्दी में उपलब्ध होती है। अपभ्रंश और प्राकृत भाषा-साहित्य में चेरी गाथाओं के बाद सम्पूर्ण भारतीय स्तर पर स्त्री-विमर्श का यह श्रेय कन्नड़ की अक्कमहादेवी और अन्यान्य शिवशरणियों को जाता है। मुक्तायक्का और अल्लमप्रभु ने भी कला, साहित्य, संस्कृति और दर्शन के स्तर पर अप्रतिम योगदान दिया है। राहुल सांकृत्यायन, भगवतीशरण उपाध्याय, रामविलास शर्मा और डी.डी. कोसम्बी की परम्परा में डॉ. काशीनाथ अंबलगे ने एक प्रतिबद्ध समीक्षक और तत्त्ववेत्ता के रूप में इस अभूतपूर्व कृति की रचना की है। विश्वास है, इसका आकलन सुधी पाठक और समर्थ आलोचक सम्यक् रूप से करेंगे। —रोहिताश्व
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book