Chandreshwar Karn Rachnawali Vol-I-5
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लगभग 3000 पृष्ठों में संकलित प्रसिद्ध आलोचक चंद्रेश्वर कर्ण की रचनावली के पाँचों खंडो के मुख्य आकर्षण हैं : - हिंदी कहानी की भूमिका/आंचलिक हिंदी कहानी/कुछ और कहानी आलोचना/परिशिष्ट/गोदान : संवेदना और शिल्प/उपन्यासकार अश्क/कुछ और उपन्यास आलोचना/प्रेमचन्द/निराला/रामवृक्ष बेनीपुरी/ नागार्जुन/फणीश्वरनाथ रेणु/राजकमल चौधरी/सिद्धांत, विचार और विश्लेषण/हिन्दी की साहित्यिक विधाएँ/काव्यालोचना/नाट्यालोचना/लोक : जीवन, कला और संस्कृति/साक्षात्कार/कहानी/लघुकथा/महाभारत की कहानियाँ/झारखण्ड की लोककथाएँ/कविताएँ/संस्मरण, आत्मकथ्य, डायरी/पत्र
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लगभग 3000 पृष्ठों में संकलित प्रसिद्ध आलोचक चंद्रेश्वर कर्ण की रचनावली के पाँचों खंडो के मुख्य आकर्षण हैं : - हिंदी कहानी की भूमिका/आंचलिक हिंदी कहानी/कुछ और कहानी आलोचना/परिशिष्ट/गोदान : संवेदना और शिल्प/उपन्यासकार अश्क/कुछ और उपन्यास आलोचना/प्रेमचन्द/निराला/रामवृक्ष बेनीपुरी/ नागार्जुन/फणीश्वरनाथ रेणु/राजकमल चौधरी/सिद्धांत, विचार और विश्लेषण/हिन्दी की साहित्यिक विधाएँ/काव्यालोचना/नाट्यालोचना/लोक : जीवन, कला और संस्कृति/साक्षात्कार/कहानी/लघुकथा/महाभारत की कहानियाँ/झारखण्ड की लोककथाएँ/कविताएँ/संस्मरण, आत्मकथ्य, डायरी/पत्र
Book Details
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ISBN9789380044958
-
Pages368
-
Avg Reading Time12 hrs
-
Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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