Boon Bhar Ujala
Author:
Mithilesh WamankarPublisher:
Shivna PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Other0 Ratings
Price: ₹ 180
₹
225
Available
This book has no description
ISBN: 9788196089092
Pages: 120
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Unesco
- Author Name:
Mahesh Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hindi Bhasha Aur Sahitya ka VastunishthA Itihas
- Author Name:
Hemant Kukreti +1
- Book Type:

- Description: भा और साहित्य के सवाल विषयनिष्ठ होते हैं। उनके किसी पक्ष पर सर्वसम्मत निष्कर्ष देना अत्यंत कठिन है। रचनाकारों के इतिवृत्त से जुडे़ जन्म एवं पुण्य तिथि, जन्म स्थान इत्यादि स्थूल तथ्य हों या उनके कृतित्व से जुडे़ गंभीर प्रश्न हों—उनके सीधे-सपष्ट और प्रत्यक्ष उत्तर भी कई बार विद्वानों, साहित्य-अध्येताओं और पाठकों को संतुष्ट नहीं कर पाते हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि साहित्य जैसी कलाओं में व्यक्तिगत अभिरुचियों की गुंजाइश सबसे ज्यादा होती है। इन सब जोखिमों के बाद भी हम हिंदी साहित्य के वस्तुनिष्ठ इतिहास के साथ साहित्य-मर्मज्ञों और हिंदी विषय लेकर आजीविका अर्जित करने की इच्छा रखनेवाले विपुल युवा समाज के सम्मुख उपस्थित हैं। प्रस्तुत पुस्तक में वस्तुनिष्ठ विवेचन होते हुए भी प्रत्येक युग का साहित्य परिवेश, प्रमुख रचनाकारों का योगदान, युगीन साहित्यिक विशेषताएँ, आलोचकों, साहित्येतिहासकारों एवं रचनाकारों के चर्चित मत, परिभाषाओं और हिंदी साहित्य की अंतर्वर्ती ऐतिहासिक निरंतरता विश्लेषित कर प्रश्नोत्तर शैली में प्रस्तुत किया गया है। इससे विषय को समझने में सुगमता रहती है। विद्यार्थी-शोधार्थी ही नहीं, हर आयुवर्ग के पाठकों के लिए एक उपयोगी पुस्तक।
Nirala Rachanawali : Vols. 1-8
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

-
Description:
निराला “आरम्भ से ही विद्रोही कवि के रूप में हिन्दी में दिखाई पड़े। गतानुगतिकता के प्रति तीव्र विद्रोह उनकी कविताओं में आदि से अन्त तक बना रहा। व्यक्तित्व की जैसी निर्बाध अभिव्यक्ति इनकी रचनाओं में हुई है, वैसी अन्य छायावादी कवियों में नहीं हुई।...सर्वत्र व्यक्तित्व की अत्यन्त पुरुष अभिव्यक्ति ही निराला की कविताओं का प्रधान आकर्षण है। फिर भी विरोधाभास यह है कि निराला में अपने व्यक्तित्व को सबसे अलग करके अभिव्यक्त करने की चेतना सबसे कम है।...यह ध्यान देने की बात है कि निराला जी के आरम्भिक प्रयोग छन्द के बन्धन से मुक्ति पाने का प्रयास है। छन्द के बन्धनों के प्रति विद्रोह करके उन्होंने उस मध्ययुगीन मनोवृत्ति पर ही पहला आघात किया था जो छन्द और कविता को प्राय: समानार्थक समझने लगी थी।...परन्तु निराला जी ने जब छन्दों के प्रति विद्रोह किया तो उनका उद्देश्य छन्द की अनुपयोगिता बताना नहीं था। वे केवल कविता में भावों की—व्यक्तिगत अनुभूति के भावों की—स्वछन्द अभिव्यक्ति को महत्त्व देना चाहते थे। जिसे वे मुक्तछन्द कहते थे, उसमें भी एक प्रकार की झंकार और एक प्रकार का ताल विद्यमान है। परिमल की जिन रचनाओं में वस्तु-व्यंजना की ओर कवि का ध्यान है, उनमें उनका व्यक्तित्व स्पष्ट नहीं हुआ किन्तु ‘तुम और मैं’, ‘जूही की कली’ जैसी कविताओं में उनकी कल्पना उनके आवेगों के साथ होड़ करती है। यही कारण है कि ये कविताएँ बहुत लोकप्रिय हुई हैं। बड़े कथात्मक प्रयोगों में निराला जी को अधिक सफलता मिली। वे पन्त की तरह अत्यधिक वैयक्तिकतावादी कवि नहीं हैं। बड़े आख्यानों—जैसे काव्य-विषय में उन्हें वस्तु-व्यंजना का भी अवसर मिला है और कल्पना के पंख पसारने का भी मौक़ा मिल जाता है। इसीलिए उनमें निराला अधिक सफल हुए हैं। ‘तुलसीदास’, ‘राम की शक्तिपूजा’ और ‘सरोज-स्मृति’ जैसी कविताएँ उनकी सर्वोत्तम कृतियाँ हैं। इनमें भाषा का
अद्भुत प्रवाह पाठक को निरन्तर व्यस्त बनाए रहता है। कल्पना यहाँ आवेगों के सामने फीकी लगती है।”—हजारी प्रसाद द्विवेदी
‘परिमल’, ‘गीतिका’, ‘अनामिका’ और ‘तुलसीदास’ नामक काव्यकृतियों को सँजोए हुए रचनावली का यह खंड महाकवि की पूर्ववर्ती काव्य-साधना का सजीव साक्ष्य प्रस्तुत करता है। विचार-समृद्ध भावोद्रेक और सहज उदात्त स्वर निराला-काव्य की विशिष्ट पहचान है और अपनी काव्य-साधना के माध्यम से उन्होंने वस्तुओं एवं घटनाओं के भीतर पैठकर असाधारण रूप से भावात्मक सत्य का सन्धान किया है।
Rajneeti Aur Naitikta
- Author Name:
Ashutosh Partheshwar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Partitioned Freedom
- Author Name:
Ram Madhav
- Book Type:

- Description: At the stroke of the midnight on 14-15 August 1947, India secured independence. That moment also witnessed the tragic partition of India and birth of Pakistan. Nobody wanted it. Yet it couldn't be averted. Four decades earlier, in 1905, Bengal was partitioned by the British. A massive movement, called Vande Mataram Movement, was launched against it by the Indian National Congress. British were forced to annul partition of Bengal in 1911. A country that defeated the British designs to partition one province failed when the whole country was being partitioned four decades later. Why? What missteps had led to the disaster? Who were responsible? 'Partitioned Freedom' explores answers to these questions.
Bruce Lee: A Complete Biography
- Author Name:
Abhishek Kumar
- Book Type:

- Description: Bruce Lee, son of Cantonese opera star Lee Hoi-Chuen, was one of the biggest names in Hollywood of his time. He is credited with introducing the East to the silver screens of the West. His greatest passion in life was Kung Fu—an ancient Chinese martial art unknown in the West until 1965, the year he made his first television appearance. A Kung Fu master, an actor, and a philosopher, Bruce Lee embodied the idea of a complete human one with a strong body and a critical mind. He studied a system of Chinese Kung Fu for nine years called Wing Chun. Apart from this, he was an ardent reader of Confucius. He tried to incorporate Confucian philosophy and teachings into his life. He taught Americans about Chinese philosophy and culture for six years. He detested mediocrity and always pushed his limits, both physically and mentally. He inspired generations of youngsters worldwide through his work and continues to do so even today. On July 20, 1973, the world lost this most influential martial artist of all time.
Health Quiz Book
- Author Name:
Anil Aggrawal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bible Ki Kahaniyan
- Author Name:
John Wilson
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक में ईसामसीह के जन्म तथा उनसे संबंधित कथाएँ संकलित हैं। कथाओं को सरल भाषा तथा चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, ताकि पाठकों को कथाएँ सरल एवं रोचक लगें।
Audio-Visual Aids to Educational Technology
- Author Name:
Prof. Harmesh Lal, Dr. Shailendra Bhushan, Dr. Meenu Kumar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ikkisvin Sadi : Aupniveshik Mansikta Aur Bhasha
- Author Name:
Harsh Bala Sharam
- Book Type:

- Description: भारत एक महत्त्वपूर्ण शक्ति है—लोकतंत्रात्मक सत्ता के माध्यम से प्रजा की ताकत को स्वीकार भी करता है पर 'भाषा' के खत्म होते जाने के खतरे से बाखबर होते हुए भी बेखबर रह रहा है। क्या यह कोई राजनीतिक षडयंत्र है अथवा अज्ञानता कि भारत की महत्त्वपूर्ण भाषा हिंदी ही नहीं, अन्य भारतीय भाषाएँ भी अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं। पूरे विश्व में केंद्रीय सत्ता का केंद्र बना प्रथम दुनिया का सिरमौर अपनी भाषा में प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक देता है, पर भारत जैसे देश के विद्यार्थी को प्राथमिक शिक्षा भी अपनी भाषा में प्राप्त करने का हक नहीं। मजे की बात तो यह कि जाने अनजाने कोई यह हक लेना भी नहीं चाहता! रिक्शेवाले से लेकर उच्चतम स्तर पर रहनेवाला अंग्रेजी में पगी शिक्षा का आनन्द लेना चाहता है! यह स्थिति औपनिवेशिक मानसिकता की दासता की है जहाँ अपना सब कुछ त्यागकर उस बाजारवादिता के 'स्टैच्यू' में फिट होने की होड़ ही महत्त्वपूर्ण रह गई है। अंग्रेजी को भी भारतीय भाषा मानने की कवायद शुरू हो गई है!
CTET Central Teacher Eligibility Test Paper -1 (Class I-V) 15 Practice Sets & Latest Solved Papers (Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mahatma Gandhi ki Jharkhand Yatra
- Author Name:
Shri Anuj Kumar Sinha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Fun With Colouring Children Drawing and Colouring Book for Kids Age 1 - 6 Years
- Author Name:
Venkatesh Prasad
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ramdhari Singh Diwakar Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Ramdhari Singh Diwakar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Smritiyon Ka Sakshya
- Author Name:
Hridyesh
- Book Type:

- Description: memories
Shesh Kitna Tamas "शेष कितना तमस" Book in Hindi | Dr. Virendra Prasad
- Author Name:
Dr. Virendra Prasad
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Aavedan-Praroop
- Author Name:
Shivnarayan Chaturvedi
- Book Type:

- Description: सरकारी कार्यालयों के कार्य-व्यवहार का एक आवश्यक पहलू है फ़ाइलों पर की जानेवाली टिप्पणियाँ, विभागीय पत्राचार और विषयानुरूप मसौदे। परम्परागत रूप से इन्हें अंग्रेज़ी में किया जाता है, परन्तु अब कुछ वर्षों से इन्हें हिन्दी में भी किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से विभिन्न पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं, लेकिन डॉ. शिवनारायण चतुर्वेदी की यह पुस्तक ऐसी तमाम पुस्तकों से अलग हटकर लिखी गई है। सरकारी फ़ाइलों से जुड़े टिप्पण-आवेदन-प्रारूप के महत्त्व को स्वीकारते हुए भी डॉ. चतुर्वेदी का मानना है कि उक्त विषय सरकारी कार्यविधि का केवल एक पक्ष है। दूसरा पक्ष है—छुट्टी, स्थानान्तरण, स्थायीकरण, पदोन्नति, वरिष्ठता-वेतन, अग्रिम वेतन, आवास आदि से जुड़े आवेदन-प्रारूप। यह पुस्तक ऐसे प्रारूपों के कई-कई नमूने प्रस्तुत करती है। इसके अलावा पुस्तक के तीसरे खंड में विभिन्न सरकारी अधिकारियों से पत्र-व्यवहार के प्रारूप दिए गए हैं। सम्पादकों के नाम पत्र, विभिन्न अवसरों से सम्बद्ध निमंत्रण-पत्र आदि भी इसी खंड में शामिल हैं। पुस्तक के तीन-तीन परिशिष्टों में भी कुछ उपयोगी जानकारियाँ निहित हैं। इसी प्रकार प्रस्तुत पुस्तक आवेदन-पत्रों के प्रायः सभी आवश्यक हिन्दी रूपों को समाहित किए हुए है, जिनकी ज़रूरत एक कर्मचारी को अपने जीवन में पड़ती है। कहने की आवश्यकता नहीं कि डॉ. चतुर्वेदी की यह पुस्तक उन तमाम सरकारी कर्मचारियों के दैनंदिन उपयोग से जुड़ी हुई है, जो विभागीय और विभागेतर पत्राचार हिन्दी में करना चाहते हैं। यही नहीं, जैसा कि लेखक ने कहा है, यह पुस्तक हिन्दी-शिक्षण-योजना के अन्तर्गत ‘प्रवीण’ और ‘प्राज्ञ’ परीक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी होगी, क्योंकि पिछले अनेक वर्षों में इन परीक्षाओं में प्रारम्भिक आलेखन के अन्तर्गत आवेदन-पत्रों से सम्बन्धित जितने भी प्रश्न आए हैं, उन्हें भी इसमें शामिल कर लिया गया है।
Rapid General Knowledge-2026 with Current Affairs | UPSC, State PSC, SSC, Bank, Railways RRB, Defence NDA/CDS, CUET , Teaching, State Govt & other Useful For All Competitive Exams
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Rudra Rachanavali : Vols. 1-4
- Author Name:
Shivprasad Mishra 'Rudra'
- Book Type:

- Description: शिवप्रसाद मिश्र ‘रुद्र' काशिकेय काशी के साहित्यकारों की गौरवशाली परम्परा के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। बहुआयामी व्यक्तित्व से सम्पन्न रुद्र जी उत्कृष्ट कवि, प्रखर कथाकार, सिद्धहस्त नाटककार, कुशल मंच अभिनेता, अध्येता, काशिका के उन्नायक यशस्वी पत्रकार एवं विशिष्ट सम्पादक के समवेत रूप थे। रुद्र साहित्य पर ग़ौर करें तो पाते हैं कि उनकी काव्य-साधना एक दस्तावेज़ है। हिन्दी साहित्य में विशुद्ध हिन्दी ग़ज़ल-लेखन की एक मुकम्मल परम्परा रुद्र की ‘ग़ज़लिका' से ही प्रारम्भ होती है। इसमें हिन्दी की भावभूमि पर उर्दू का तर्ज़ेबयाँ मिलता है। लघु कलेवर में रचित ‘तुलसीदास' खंडकाव्य हो या गीत एवं विविध बोलियों में अनेक प्रकार की कविताएँ सभी अपने समय की जटिलताओं से टकराते एक भिन्न प्रकार के आस्वाद से परिचय कराते हैं। एक गद्यकार के रूप में रुद्र जी अपनी उत्कृष्ट भाव-व्यंजना, विलक्षण शैली एवं मौलिक सर्जनात्मकता के कारण हिन्दी के प्रमुख गद्यकारों में अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। इनके गद्य में काव्यात्मक कल्पना-चारुता के साथ ही एक गत्यात्मक शिल्प-सौन्दर्य उपस्थित है जो उसकी उत्कृष्टता को द्योतित करता है। ग़ौरतलब है कि रुद्र जी सर्वप्रथम कवि रहे हैं, इसलिए उनका कवि-हृदय उनके समूचे साहित्य में प्रतिबिम्बित है। गद्य के सभी रूपों—उपन्यास, कहानी, नाटक, व्यंग्यालेख, निबन्ध, संस्मरण, रेखाचित्र एवं समीक्षा को उन्होंने सफलता के साथ पुष्पित एवं पल्लवित किया है। इन सभी में उनका प्रत्युत्पन्नमतित्व, लोकसम्पृक्ति एवं स्थानीय रंगत विद्यमान है। ‘रुद्र रचनावली' को विधाओं के आधार पर चार खंडों में विभाजित किया गया है; जैसे—काव्य-साहित्य, गद्य-साहित्य, कथा-साहित्य एवं सम्पादित साहित्य। ‘रचनावली’ का यह पहला खंड काव्य-साहित्य पर केन्द्रित है। इसके अन्तर्गत ब्रजभाषा, खड़ी बोली, मिश्रित बोली, काशिका (बनारसी बोली) की कविताएँ हैं। इस खंड में रुद्र जी की प्रकाशित कविताओं के साथ कुछ अप्रकाशित कविताओं को भी सम्मिलित किया गया है। गीतों के अन्तर्गत उनके अप्रकाशित गीतों को रखा गया है। साथ ही, इस खंड में उनके चर्चित लघु खंडकाव्य ‘तुलसी', ग़ज़लों का संग्रह ‘ग़ज़लिका' एवं 'गीत गोविन्द' के काव्यानुवाद को क्रमवार रखा गया है। यह ‘रचनावली' कई दृष्टियों से विशिष्ट है। पहला यह कि रुद्र जी के साहित्य का समग्रता में मूल्यांकन हो सके और दूसरा यह कि जिस ‘रुद्र’ को साहित्य-जगत में एकमात्र कृति 'बहती गंगा’ में समेटकर रख दिया गया है, इस मिथ को तोड़ा जा सके और जाना जा सके कि रुद्र जी ने हिन्दी साहित्य को अपनी लेखनी द्वारा अल्प समय में ही बहुत कुछ दिया है।
Sampoorna Samadhan Socio-Economic Development A Visionary Reflection On Solutions To The Nation's Major Problems Book in Hindi
- Author Name:
Rajendra Goenka
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book