Azad Hind Fauj And Subhas Chandra Bose
(0)
₹
350
₹ 280 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789355629081
-
Pages208
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Badalate Rishte
- Author Name:
Krishna Gopal Rastogi
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Spoken English Digest
- Author Name:
Rashmeet Kaur
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Madhya Pradesh Uchch Madhyamik Shikshak Patrata Pariksha Jeev Vigyan Practice MCQs (MPTET Higher Secondary Teacher Biology Practice Sets in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Malyalam Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
S. Tankmani Amma
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
BHARAT KE MAHAN VAIGYANIK
- Author Name:
SHEKHAR
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Police Vyavastha Par Vyangya
- Author Name:
Giriraj Sharan
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
AAO SEEKHEN PAHADE
- Author Name:
SHALINI
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Shukrana Guruji "शुकराना गुरूजी" | Guru Ji Ke Anmol Vachan, Guru Ji Chattarpur: Life & Biography Book in Hindi
- Author Name:
Renu Saini
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Drishya Aur Dhwaniyan : Khand���2-Har
- Author Name:
Sitanshu Yashashchandra
- Book Type:

- Description:
गुजराती आदि भारतीय भाषाएँ एक विस्तृत सेमिओटिक नेटवर्क अर्थात् संकेतन-अनुबन्ध-व्यवस्था का अन्य-समतुल्य हिस्सा हैं। मूल बात ये है कि विशेष को मिटाए बिना सामान्य अथवा साधारण की रचना करने की, और तुल्य-मूल्य संकेतकों से बुनी हुई एक संकेतन-व्यवस्था रचने की जो भारतीय क्षमता है, उसका जतन होता रहे। राष्ट्रीय या अन्तरराष्ट्रीय राज्यसत्ता, उपभोक्तावाद को बढ़ावा देनेवाली, सम्मोहक वाग्मिता के छल पर टिकी हुई धनसत्ता एवं आत्ममुग्ध, असहिष्णु विविध विचारसरणियाँ/आइडियोलॉजीज़ की तंत्रात्मक सत्ता, आदि परिबलों से शासित होने से भारतीय क्षमता को बचाते हुए, उस का संवर्धन होता रहे। गुजराती में से मेरे लेखों के हिन्दी अनुवाद करने का काम सरल तो था नहीं। गुजराती साहित्य की अपनी निरीक्षण परम्परा तथा सृजनात्मक लेखन की धारा बड़ी लम्बी है और उसी में से मेरी साहित्य तत्त्व-मीमांसा एवं कृतिनिष्ठ तथा तुलनात्मक आलोचना की परिभाषा निपजी है। उसी में मेरी सोच प्रतिष्ठित (एम्बेडेड) है। भारतीय साहित्य के गुजराती विवर्तों को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में जाने बिना मेरे लेखन का सही अनुवाद करना सम्भव नहीं है, मैं जानता हूँ। इसीलिए इन लेखों का हिन्दी अनुवाद टिकाऊ स्नेह और बड़े कौशल्य से जिन्होंने किया है, उन अनुवादक सहृदयों का मैं गहरा ऋणी हूँ। ये पुस्तक पढ़नेवाले हिन्दीभाषी सहृदय पाठकों का सविनय धन्यवाद, जिनकी दृष्टि का जल मिलने से ही तो यह पन्ने पल्लवित होंगे।
—सितांशु यशश्चन्द्र (प्रस्तावना से)
''हमारी परम्परा में गद्य को कवियों का निकष माना गया है। रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत हम इधर सक्रिय भारतीय कवियों के गद्य के अनुवाद की एक सीरीज़ प्रस्तुत कर रहे हैं। इस सीरीज़ में बाङ्ला के मूर्धन्य कवि शंख घोष के गद्य का संचयन दो खण्डों में प्रकाशित हो चुका है। अब गुजराती कवि सितांशु यशश्चन्द्र के गद्य का हिन्दी अनुवाद दो जि़ल्दों में पेश है। पाठक पाएँगे कि सितांशु के कवि-चिन्तन का वितान गद्य में कितना व्यापक है—उसमें परम्परा, आधुनिकता, साहित्य के कई पक्षों से लेकर कुछ स्थानीयताओं पर कुशाग्रता और ताज़ेपन से सोचा गया है। हमें भरोसा है कि यह गद्य हिन्दी की अपनी आलोचना में कुछ नया जोड़ेगा।" —अशोक वाजपेयी
Sources of Our Cultural Heritage
- Author Name:
Suresh Soni
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Hindu Dharma Mein Vaigyanik Manyatayen
- Author Name:
K.V. Singh
- Book Type:

- Description:
"भारतीय जनमानस में वैदिक धर्म का जो वर्तमान स्वरूप आजकल में देखने को मिलता है, उसे आज का तर्कशील और वैज्ञानिक दृष्टि रखनेवाला मानव अंधविश्वास, आस्था व रूढि़वाद की संज्ञा देता है। प्रायः देखा जाता है कि पढ़े-लिखे लोग, जो अपने आपको बुद्धिजीवी मानते हैं, अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों, मान्यताओं के वर्तमान स्वरूप की या तो उपेक्षा करते हैं या उन्हें अपने व्यंग्य और मनोरंजन का विषय बनाते हैं। ऐसे अनेक लोगों का तो यह भी मानना है कि हमारी धार्मिक मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार ही नहीं है। परंतु यह उनके अज्ञान का परिचायक है। वास्तव में हमारे धर्म का एक सुदृढ़ वैज्ञानिक आधार है। जरूरत बस, उसके मूल और मर्म को समझने की है। प्रस्तुत पुस्तक में सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति से जुड़ी मान्यताओं, परंपराओं, रीति-रिवाजों एवं धर्म-कर्म के पीछे जो गहरा विज्ञान है, उसे बड़े ही सरल शब्दों में समझाने का प्रयास किया गया है। इसके अध्ययन से जन सामान्य का अंध-विश्वास दूर हो और वे तथा भावी पीढि़याँ अपनी मान्यताओं एवं धरोहर पर गर्व कर सकें, तो इस पुस्तक का लेखन-प्रकाशन सार्थक होगा। "
Balkrishna Bhatta Aur Aadhunik Hindi Aalochana Ka Aarambh
- Author Name:
Abhishek Roushan
- Book Type:

- Description:
Critic
Balkrishna Bhatta Aur Aadhunik Hindi Aalochana Ka Aarambh
Abhishek Roushan
18% off₹ 390
₹ 319.8
Available
Thomas Hardy ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Thomas Hardy
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Vasudhaiva Kutumbakam "वसुधैव कुटुंबकम्" Book In Hindi
- Author Name:
Dr. Anil Agarwal
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Vasudhaiva Kutumbakam "वसुधैव कुटुंबकम्" Book In Hindi
Dr. Anil Agarwal
20% off₹ 500
₹ 400
Available
Tanaav Chhodo Safalta Paao
- Author Name:
Jayanti Jain
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
DR. KALAM: The Untold Story of 20 Years Spent With Dr Kalam Hindi Translation
- Author Name:
R.K. Prasad
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
A Remarkable Political Movement
- Author Name:
V. Shanmuganathan
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Computer-Internet Quiz Book
- Author Name:
Vinoy Bhushan
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Karyalaya Karyabodh: Manual on Office Procedure, Business Letters Notes and Instructions)
- Author Name:
Hari Babu Kansal
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Marxvad
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

- Description:
यशपाल की मान्यता थी कि भारतीय जनता की असली आज़ादी अंग्रेज़ी राज से मुक्ति तक सीमित नहीं है, असली आज़ादी सामन्ती मूल्यों, तत्त्वों और प्रवृत्तियों की समाप्ति तथा उभरते हुए पूँजीवाद के ख़ात्मे पर ही सम्भव है और इसके लिए उन्हें एक ऐसी विचारधारा की ज़रूरत महसूस होती थी जो इतिहास की संरचना को वैज्ञानिक ढंग से समझाने के साथ-साथ जनसाधारण को समग्र रूपान्तरण के लिए प्रेरित भी कर सके। मार्क्सवाद उनकी दृष्टि में ऐसी ही सम्पूर्ण विचारधारा थी और यह पुस्तक मार्क्सवाद की भारत के धुर आम आदमी को समझ में आने लायक़ उनकी व्याख्या है। इसमें समाजवादी विचारों की आवश्यकता और विकास-क्रम को सहज और सुबोध भाषा में इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि साधारण शिक्षित जन भी उन विचारों को समझकर आत्मसात् कर सकें। यह पुस्तक उन लोगों के लिए उपयोगी है जो मार्क्सवाद को समझे बिना ही समाजवादी सपनों में खोए रहते हैं और उन लोगों के लिए एक चुनौती जो इसी तरह बिना उसे समझे, मार्क्सवाद का विरोध करते रहते हैं। मार्क्सवाद सम्बन्धी यशपाल के चिन्तन का निःसन्देह एक ऐतिहासिक सन्दर्भ भी है, लेकिन यह पुस्तक आज भी उतनी ही सार्थक और प्रासंगिक है जितनी अपने प्रकाशन के समय थी। मार्क्सवाद सम्बन्धी उनकी जानकारी और भारतीय समाज के जटिल यथार्थ की उनकी विश्वसनीय समझदारी के लिहाज़ से यह पुस्तक अप्रतिम है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book