The Awakening
Author:
Kate ChopinPublisher:
Unbound ScriptLanguage:
EnglishCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 248.17
₹
299
Available
The Awakening is a novel by Kate Chopin, first published in 1899. The plot centers on Edna Pontellier and her struggle between her increasingly unorthodox views on femininity and motherhood with the prevailing social attitudes. It is one of the earlier American novels that focuses on women’s issues without condescension. It is also widely seen as a landmark work of early feminism. The novel’s blend of realistic narrative, incisive social commentary, and psychological complexity makes The Awaken a precursor of American modernist literature.
ISBN: 9788195405329
Pages: 240
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 0-11
Country of Origin: India
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कवि अब वृद्ध थे। उन्हें जीवन के अन्तिम दिनों में रानू से क्या मिला? वह क्या सिर्फ़ ‘आँसुओं में दु:ख की शोभा’ बनी रह गई?
सुनील गंगोपाध्याय की क़लम से एक अभिनव और अतुलनीय उपन्यास।
Beetiaap Beetiaap
- Author Name:
Vipin Kumar Agarwal
- Book Type:

- Description: ‘बीतीआप बीतीआप’ एक नए ढंग का उपन्यास है। भाषा और शैली के नवोन्मेषी प्रयोग के माध्यम से यह एक रचनाशील व्यक्ति की कहानी बताता है। इलाहाबाद की साहित्यिक पृष्ठभूमि में नायक की सफल कवि बनने की आकांक्षा उसे प्रेम और जीवन की विचित्र परिस्थितियों में ले जाती है, जहाँ वह निराला के सार्वभौमिक भाव का साक्षात्कार करता है। लेकिन इस बीच वह अपने परिवेश, अपने जीवन और उससे जुड़े लोगों की कहानियाँ भी बताता चलता है। विपिन कुमार अग्रवाल की विशेषता है कि दैनिक जीवन की साधारण घटनाओं को भी वे अपने भाषा-चातुर्य तथा कल्पना द्वारा विशेष अर्थ से भर देते हैं। भाषिक प्रयोग, परिस्थिति वर्णन और व्यक्तियों के चित्र खींचने की शैली इस उपन्यास को प्रयोगधर्मिता के एक भिन्न स्तर पर ले जाती है।
Ek Kasbe Ke Notes
- Author Name:
Neelesh Raghuwanshi
- Book Type:

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Description:
नीलेश रघुवंशी की एक उपलब्धि यह है कि उसने एक ऐसे कथानक को, जिसमें भावनिकता के भयावह अवसर थे, एक निर्मम ढंग से यथार्थवादी रखा है जिसमें हास-परिहास के लिए भी गुंजाइश है। परिवार में माँ है लेकिन वह हमेशा ममतामयी और पतिपरायणा नहीं है, उसमें छिपी विद्रोहिणी कभी भी जागृत हो सकती है। इकलौता बेटा मुँहफट और दुर्विनीत है। अलग-अलग उम्रों, स्वभावों और नियतियों वाली बेटियाँ हैं लेकिन उनमें एक बराबरी का बहनापा है। उनके अपने-अपने कुँवारे और ब्याहता सपने हैं। उनकी जद्दोजहद, छोटी-बड़ी दुखान्तिकाएँ और जीवन-परिवर्तक उपलब्धियाँ भी हैं। क्या भारत सरीखे जटिल समाज में ‘फेमिनिस्ट’ सरीखे सीमित और भ्रामक शब्द की जगह ‘एक क़स्बे के नोट्स’ को हम ‘मातृवादी’ या ‘बेटीवादी’ या ‘बहनापावादी’ कह सकते हैं? और यदि पिता को लेकर इतनी समझदारी और स्नेह है तो ‘पितावादी’ भी क्यों नहीं?
शायद यह हिन्दी का पहला उपन्यास है जिसमें किसी लेखिका ने एक निम्न-मध्यवर्गीय क़स्बाई पारिवारिक जीवन को इतनी अन्तरंगता और असलियत से जीवन्त किया हो। प्रतिभा के लिए सृजन में तो कुछ भी असम्भव नहीं, किन्तु किसी पुरुष के लिए ऐसे घर-परिवार का इतना अन्दरूनी अनुभव मुश्किल ही था।
सच तो यह लगता है कि लेखिका ने इस एक क़स्बे के बहाने लगभग सभी उत्तर भारतीय क़स्बों को चेहरा दे दिया है। हम सब यदि (अब) छोटे शहरों में नहीं भी रहते हैं तो कभी-न-कभी उनमें हमारी बूद-ओ-बाश थी, वहाँ से गुज़रते, लौटते रहते हैं, हमारे कितनी ही दोस्तियाँ और रिश्ते, और सबसे ऊपर, स्मृतियाँ, अब भी वहीं बसी हुई हैं। हिन्दी लेखन से एक झटके से क़स्बा काट दो, वह हलाल हो जाएगा। नीलेश रघुवंशी ने बेशक अपने क़स्बे को सजीव पात्रों से आबाद किया है लेकिन उसमें हरकत और जान तभी आती है जब सारे क़स्बाई दृश्य, ध्वनियाँ, रंग, गंध, स्पर्श और वे मौसम और धूल-धूसर जो सिर्फ़ क़स्बों में नसीब होते हैं, उस अलबम को मूक सीपियाँ से परदे के वाचाल रंगीन में बदल देते हैं। टेलीविज़न पर अपने लम्बे अनुभव के कारण लेखिका अपना शिल्प नियंत्रित रखना जानती है, और पठनीयता के स्तर पर पिछले कुछ वर्षों में ऐसे उपन्यासों का दुर्भिक्ष-सा रहा है।
—विष्णु खरे
My Senior Girlfriend
- Author Name:
Yash Sharma
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- Book Type:

- Description: Yash Sharma is author of the book fl.A.M.E.S. His book talks about romance and issues is that are relatable to the youth of this generation. It told the story of a girl who attempts to move on from her lover who had left her. His book get a decent response from young readers and the one of the biggest newspaper groups of Rajasthan with millions of readers reviewed favourably, giving it 5 out of 5 stars. Ash is a 21-year year-old from a small town in Rajasthan, rajgarh.He is pursuing his B.Tech. In Civil Engineering from Alwar district. He started writing at the early age of 13. His hobbies include reviewing books and movies, and writing scripts, screenplay and music. He has written more than a thousand quotes and poems. He is a bookworm and has quite an interest in politics and Hollywood. He is also a storyteller and an actor too. His passion for to be an actor lead him to theatre at a very young age. He has also wrote numerous plays for his school and college festivals.
Dhol
- Author Name:
M. Veerappa Moily
- Book Type:

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Description:
‘ढोल’ (तेम्बरे) कन्नड़ साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण उपन्यास है जो कर्नाटक के तटीय इलाके में रहनेवाले सीमान्त समुदाय ‘पम्बद’ के जीवन की जटिल सांस्कृतिक प्रक्रिया—‘भूताराधना’ या नायकत्व की आराधना की गहरी छानबीन करता है। यह जटिल संस्कृति पम्बद की वंशगत वृत्ति के रूप में प्रचलित है। इस आराधना में, एक कठिन क्रिया के अन्तर्गत व्यक्तित्व का विखंडन होता है तथा सम्बन्धित व्यक्ति रूप बदलता है।
उपन्यास में कथाकार ने इस अद्भुत और पारम्परिक वृत्ति को दो पम्बद भाइयों के माध्यम से दिखाने का प्रयास किया है : एक इस परम्परा के खिलाफ विद्रोह करता है और आधुनिक शिक्षा प्राप्त करता है। दूसरा भूताराधना की इस पद्धति को सच्चे उत्साह के साथ पुनर्स्थापित करने में लग जाता है। उनकी एक बहन है, जो पहले भाई की तरह परम्परा के खिलाफ जाकर कानून की पढ़ाई करती है तथा अपनी जिन्दगी को स्त्री के अधिकारों के लिए समर्पित कर देती है।
कथाकार ने परम्परा और आधुनिकता के द्वन्द्व से भरी इस कथा को रोचकता के साथ वृत्तान्त शैली में प्रस्तुत किया है।
कथाकार की सामुदायिक जिन्दगी में गहरी दिलचस्पी है। उसने पम्बद की जिन्दगी की इस सांस्कृतिक गतिशीलता को करीब से देखा है। राजनीतिक अनुभव और उनके न्याय के ज्ञान ने उनके अनुभव क्षेत्र का विस्तार किया है। दलित और स्त्री चेतना के प्रति भी इस उपन्यास में गहरी प्रतिबद्धता दिखलाई पड़ती है। कहना न होगा कि ये सारी बातें मिलकर इस उपन्यास को महत्त्वपूर्ण बनाती हैं तथा उसे एक वैश्विक धरातल पर नए सामाजिक यथार्थ के साथ उपस्थित करती हैं।
—डॉ. बी.ए. विवेक राय
पूर्व कुलपति, कन्नड़ विश्वविद्यालय, हम्पी (कर्नाटक)
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